samacharsecretary.com

फिशर का नया समाधान: AIIMS भोपाल में होम्योपैथी दवा से मरीजों को मिली जबरदस्त राहत

 भोपाल  गुदा विदर (एनल फिशर) जैसी गंभीर और दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल से एक बड़ी खुशखबरी आई है। एम्स के डाक्टरों ने एक अध्ययन में यह साबित किया है कि होम्योपैथी की एक दवा से इस बीमारी का इलाज बिना किसी ऑपरेशन के संभव है। इस सफलता के बाद अब मरीजों को असहनीय दर्द और सर्जरी की पीड़ा से मुक्ति मिलने की एक नई उम्मीद जगी है। यह महत्वपूर्ण अध्ययन एम्स के आयुष (होम्योपैथी) विभाग के डॉ. आशीष कुमार दीक्षित और सर्जरी विभाग के डा. मूरत सिंह यादव की टीम ने मिलकर किया है। इस शोध में एनल फिशर से पीड़ित 34 मरीजों को शामिल किया गया। इन सभी को तीन महीने तक होम्योपैथी दवा ''पियोनिया ऑफिसिनेलिस'' दी गई और साथ ही खान-पान में जरूरी परहेज और सुधार की सलाह दी गई। तीन महीने के इलाज में आए चौकाने वाले नतीजे तीन महीने के इलाज के बाद जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। अध्ययन में शामिल मरीजों के दर्द में 99 प्रतिशत तक की आश्चर्यजनक कमी दर्ज की गई। इलाज से पहले जहां दर्द का स्तर 10 में से नौ अंक पर था, वह इलाज के बाद घटकर लगभग शून्य पर आ गया। इसके अलावा मल त्याग के दौरान होने वाला असहनीय दबाव भी पूरी तरह समाप्त हो गया। सबसे बड़ी सफलता यह रही कि 34 में से 30 मरीजों, यानी लगभग 88 प्रतिशत लोगों के घाव पूरी तरह भर गए। इस पूरे इलाज के दौरान किसी भी मरीज पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया। सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प इस सफल अध्ययन पर डॉ. आशीष कुमार दीक्षित ने बताया कि हमारे नतीजे यह प्रमाणित करते हैं कि पियोनिया ऑफिसिनैलिस दवा एनल फिशर के दर्द को जड़ से कम करने, घाव को भरने और मल त्याग को सुगम बनाने में अत्यंत प्रभावी है। यह मरीजों को एक सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प देती है। वहीं, सर्जरी विभाग के डॉ. मूरत सिंह यादव ने कहा कि एनल फिशर के कई मरीजों को अंततः सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है, जो कष्टदायक हो सकती है। यह शोध एक सुरक्षित और बिना ऑपरेशन वाले इलाज का रास्ता खोलता है।

रायपुर: एम्स और बिलासपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने किया एमओयू, मरीजों को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य लाभ

रायपुर : एम्स रायपुर और बिलासपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के बीच एमओयू, मरीजों को मिलेगा उच्चस्तरीय स्वास्थ्य लाभ रायपुर: एम्स और बिलासपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने किया एमओयू, मरीजों को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य लाभ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की प्राथमिकता है हर जिले में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर बिलासपुर के शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के बीच आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।  इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते के जरिए बिलासपुर के डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को एम्स जैसे विश्वस्तरीय संस्थान से प्रशिक्षण और नवीनतम चिकित्सा तकनीकों का अनुभव मिलेगा। इससे न केवल अस्पताल की रिसर्च और उपचार क्षमता बढ़ेगी बल्कि आम नागरिकों को भी अपने ही शहर में उच्चतम स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशन पर उन्होंने  एम्स रायपुर की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और बिलासपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में वैसी ही सुविधाओं का विकास किया जाए को लेकर योजना तैयार की। डॉ. सिंह ने कहा कि  प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की  स्पष्ट प्राथमिकता है कि प्रदेशवासियों को बड़े शहरों पर निर्भर हुए बिना ही अपने जिले में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। उन्होंने इस एमओयू को प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि सरकार लगातार जन-स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. अशोक जिंदल ने भरोसा दिलाया कि एम्स, बिलासपुर अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सों और स्टाफ को क्लीनिकल ट्रेनिंग, संकाय आदान-प्रदान, सहयोगी शोध, टेलीमेडिसिन सेवाओं और बहु-केंद्रीय अध्ययनों में हर संभव मदद देगा। इस अवसर पर एम्स रायपुर के अधिष्ठाता रिसर्च डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा, सह-अधिष्ठाता रिसर्च डॉ. एकता खंडेलवाल, अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. राकेश गुप्ता तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बिलासपुर से प्रो. डॉ. अर्चना सिंह और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार उपस्थित रहे।

AIIMS भोपाल में नेतृत्व परिवर्तन: संदेश कुमार जैन होंगे नए डिप्टी डायरेक्टर, 4 अगस्त से संभालेंगे पद

 भोपाल  नक्सल ऑपरेशन, एटीएस और पुलिस रेडियो विंग जैसे संवेदनशील महकमों में सेवाएं दे चुके वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संदेश कुमार जैन अब AIIMS भोपाल के नए डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) होंगे। यह पहली बार है, जब किसी पुलिस अधिकारी को एम्स भोपाल में प्रशासनिक कमान सौंपी।  भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था पीएमएसएसवाई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जैन को तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वे भोपाल में पुलिस अधीक्षक (रेडियो) के रूप में पदस्थ हैं। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड, आईटी में विशेषज्ञता संदेश कुमार जैन तकनीकी रूप से भी दक्ष हैं। उन्होंने मैनिट भोपाल से बीटेक और इसके बाद इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव का यह संयोजन उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है। वे राज्य पुलिस सेवा के एक अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्हें अनुशासन और संकट प्रबंधन का लंबा अनुभव है। पीछे छूटे 100 से ज्यादा दावेदार एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर पद के लिए 100 से अधिक आवेदन आए थे। इनमें से ज्यादातर आवेदन रिटायर्ड आर्मी अफसरों सहित विभिन्न प्रशासकीय पृष्ठ भूमियों से थे। सभी आवेदकों का इंटरव्यू नई दिल्ली में हुआ, जिसमें संदेश कुमार जैन ने सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में चयन हासिल किया। क्यों खास है ये नियुक्ति AIIMS जैसे संस्थानों में डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह पद क्लीनिकल सेवाओं, संसाधन प्रबंधन, मानव संसाधन विकास और अनुसंधान परियोजनाओं के सुचारु संचालन से जुड़ा होता है। संदेश कुमार जैन जैसे अनुभवी पुलिस अधिकारी की नियुक्ति से संस्थान के प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और दक्षता के नए मानक स्थापित हो सकते हैं। पदभार अभी तक किसके पास था वर्तमान में यह जिम्मेदारी कर्नल (डॉ.) अजीत कुमार के पास थी। इससे पहले श्रमदीप सिन्हा, जो राजकोट एम्स में डिप्टी डायरेक्टर हैं, को भोपाल एम्स का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। यह नियुक्ति न सिर्फ प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बताती है कि अब तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और व्यावहारिक अनुभव को मिलाकर संस्थानों में नई सोच के साथ बदलाव लाए जा रहे हैं। AIIMS भोपाल की कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह का कार्यकाल भी 4 अगस्त को समाप्त हो रहा है। हालांकि, उनके स्थान पर कौन आएगा यह अभी तय नहीं हैं। केंद्र स्तर पर इसके लिए आवेदन मंगाए गए हैं। वहीं, नए डायरेक्टर आने तक एम्स भोपाल का प्रभार एम्स रायपुर के निदेशक को दिया जा सकता है।  

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।