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भारत में बढ़ेगा क्षेत्रीय विमान निर्माण, रूस से IL-114-300 पर डील की तैयारी; SJ-100 पर भी बातचीत

 नई दिल्ली रूस अब भारत के साथ सिर्फ पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. रूस एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के सीईओ वादिम बाडेखा ने हाल ही में बताया कि पिछले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।  नई दिल्ली में चल रहे इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते औपचारिक रूप लेने वाले हैं. इस प्रदर्शनी में 120 से ज्यादा रूसी और भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिससे दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है।  सबसे ज्यादा चर्चा आईएल-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमान को लेकर हो रही है. यह विमान छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है. रूसी कंपनियां भारतीय एयरलाइंस और ऑपरेटरों को यह विमान बेचने के लिए सक्रिय हैं।  प्रस्तावित सौदों में पिनेकल एयर के लिए 50 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन से जुड़े एमओयू के तहत 35 विमान शामिल हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि रूस पक्ष भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले विमानों की बड़ी मांग देख रहा है।  आईएल-114-300: क्षेत्रीय उड़ानों का संभावित गेम चेंजर आईएल-114-300 एक टर्बोप्रॉप क्षेत्रीय यात्री विमान है जिसे रूस यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने विकसित किया है. यह विमान मुख्य रूप से छोटे शहरों और क्षेत्रीय मार्गों को जोड़ने के लिए उपयुक्त माना जाता है. भारत जैसे विशाल देश में जहां कई छोटे शहर अभी भी अच्छी हवाई कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  जनवरी में विंग्स इंडिया एविएशन एग्जीबिशन के दौरान हैदराबाद में यूएसी ने भारतीय कंपनी फ्लेमिंगो एयरोस्पेस के साथ छह आईएल-114-300 विमानों की संभावित आपूर्ति के लिए प्रारंभिक समझौता किया था. अब इन्नोप्रोम के दौरान इससे बड़े सौदे होने की संभावना जताई जा रही है।  अगर ये समझौते सफल होते हैं तो यह न सिर्फ रूसी विमानों के लिए भारतीय बाजार का दरवाजा खोलेगा बल्कि भारत की क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को भी नई दिशा देगा. भारतीय पक्ष के लिए यह आकर्षक इसलिए भी है क्योंकि कई घरेलू ऑपरेटर छोटे विमानों की तलाश में हैं जो कम यात्री क्षमता वाले मार्गों पर आर्थिक रूप से प्रैक्टिकल हों. बड़े जेट विमान इन मार्गों पर घाटे में चलते हैं, जबकि टर्बोप्रॉप विमान ईंधन की बचत और संचालन लागत कम रखने में मदद कर सकते हैं।  एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन: मेक इन इंडिया की दिशा में कदम आईएल-114-300 के अलावा रूस पक्ष एसजे-100 क्षेत्रीय जेट के भारत में स्थानीय उत्पादन पर भी गंभीरता से काम कर रहा है. यूएसी के अनुसार इस विषय पर बातचीत लगभग 80% पूरी हो चुकी है. जल्द ही समझौता होने की उम्मीद है. इससे पहले यूएसी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने एसजे-100 के संयुक्त लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।  एसजे-100 एक आधुनिक क्षेत्रीय जेट है जिसे रूस ने विकसित किया है. भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से न सिर्फ तकनीक का हस्तांतरण होगा बल्कि स्थानीय निर्माण क्षमता भी बढ़ेगी. भारतीय कंपनियां अगर इस विमान का बड़ा हिस्सा देश में ही बना पाती हैं तो लागत कम होगी, रोजगार बढ़ेगा और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी। स्थानीय उत्पादन की बातचीत इतनी आगे बढ़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सिर्फ खरीदार-विक्रेता का रिश्ता नहीं बल्कि साझा विनिर्माण साझेदारी बनेगी. रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग के बाद नागरिक विमानन में भी ऐसा मॉडल अपनाना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।  भारत-रूस सहयोग का नया अध्याय भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है. लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम और अन्य प्लेटफॉर्म दोनों देशों के रिश्ते की रीढ़ रहे हैं. अब रूस नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है. पश्चिमी देशों पर प्रतिबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच रूस नए बाजारों की तलाश में है. भारत उसकी नजर में एक बड़ा और स्थिर बाजार है।  इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी इसी रणनीति का हिस्सा लगती है. यहां सिर्फ विमान सौदों की बात नहीं हो रही बल्कि औद्योगिक सहयोग के कई अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा हो रही है. 120 से अधिक कंपनियों की भागीदारी से साफ है कि दोनों देश सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से भी रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं।  क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं. रूसी क्षेत्रीय विमान अगर प्रतिस्पर्धी कीमत और विश्वसनीय सेवा के साथ आते हैं तो वे इस लक्ष्य को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं. साथ ही स्थानीय उत्पादन से भारत की विमानन विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी।  संभावनाएं और चुनौतियां दोनों मौजूद ये प्रस्ताव आशाजनक जरूर हैं लेकिन कई चुनौतियां भी हैं. सबसे पहले प्रमाणन और नियामक मंजूरी का मुद्दा. किसी भी नए विमान को भारतीय आसमान में उड़ान भरने के लिए सख्त सुरक्षा और प्रमाणन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. दूसरी चुनौती रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता है. लंबे समय तक विमानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी होता है।  तीसरी चुनौती कॉम्पीटिशन है. भारतीय बाजार में अन्य देशों के क्षेत्रीय विमान भी मौजूद हैं या आने की कोशिश कर रहे हैं. कीमत, फ्यूल एफिसिएंसी, यात्री सुविधा और आफ्टर सेल्स सपोर्ट जैसे मुद्दे फैसला करने वाले साबित होंगे. चौथी बात फाइनेंशियल सपोर्ट की है. बड़े सौदों के लिए आसान ऋण सुविधा या लीजिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  इन चुनौतियों के बावजूद रूस पक्ष आशावादी नजर आ रहा है. पिछले छह महीनों में हुई प्रगति और इन्नोप्रोम में संभावित समझौते इस बात का संकेत देते हैं कि दोनों देश व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अगर आईएल-114-300 के बड़े ऑर्डर और एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन दोनों सफल होते हैं तो यह भारत-रूस एयरोस्पेस संबंधों का नया अध्याय साबित हो सकता है।  आगे की राह और रणनीतिक महत्व भारत के लिए यह सहयोग कई मायनों में फायदेमंद हो … Read more

हवा में मंडराया खतरा! 36 हजार फीट पर बंद करना पड़ा इंजन, अबू धाबी जा रही फ्लाइट की कोच्चि में सुरक्षित लैंडिंग

कोच्चि कोच्चि से अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 (बोइंग 737) को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा। क्रू को पता चला कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है और जब ऑयल प्रेशर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया, तो उन्होंने इंजन बंद कर दिया। प्लेन कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। प्लेन में सवार यात्रियों को पता नहीं था कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी।  सूत्रों के मुताबिक, टेक-ऑफ के करीब 50 मिनट बाद और 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय पायलट और को-पायलट ने देखा कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है। क्रू ने FORDEC असेसमेंट किया। ऑयल का लेवल लगातार गिरते देख, उन्होंने अबू धाबी जाने का प्लान छोड़कर कोच्चि वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी पर मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को बताया कि फ्लाइट कोच्चि वापस लौट रही है। प्लेन का रास्ता बदलने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर का पालन किया गया। रास्ता बदलने के पूरे समय, दोनों पायलट इंजन के पैरामीटर्स पर नज़र रखे हुए थे और किसी भी स्थिति के लिए तैयार थे।  वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में पहुंच गया, जो डेंजर रेंज में गिरावट का संकेत था। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन 1 बंद कर दिया। ज़्यादा वज़न वाले बोइंग 737 को एक इंजन पर लैंड कराना बहुत ज़्यादा काम और जोखिम वाला काम होता है। क्रू ने इसे आसानी से पूरा किया। यात्रियों को कॉकपिट में हुई घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं हुआ।  भारतीय एयरलाइंस में टेक्निकल डायवर्जन लगभग हर हफ़्ते होने वाली घटना बन गई है। यह ताज़ा घटना एयर इंडिया पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद हुई है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरबस के टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने जांच टीम की मौजूदगी में उस विमान की तीन दिनों तक जांच की। इसके बाद आगे की जांच के लिए हाइड्रोलिक पार्ट्स और हाइड्रोलिक सैंपल इकट्ठा किए गए। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA फ़्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के टेस्ट का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा।  एयर इंडिया एक्सप्रेस के इंजन-ऑयल वाली घटना से अब एक और सवाल उठता है: क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा? US फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर हर पांच साल में एक बार इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सेफ्टी निगरानी की समीक्षा करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था; अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई दिल्ली DGCA सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए इस मौके का इस्तेमाल करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक टिप्पणी का इंतज़ार है।   

घने कोहरे और खराब मौसम से हवाई सफर प्रभावित, मुंबई एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी शून्य; इंदौर में दो फ्लाइटों की इमरजेंसी लैंडिंग जैसी स्थिति

इंदौर सुबह मुंबई में शुरू हुई मूसलाधार बारिश और आसमान में छाए घने काले बादलों ने हवाई यातायात की कमर तोड़ दी। विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल को आनन-फानन में लैंडिंग रोकनी पड़ी। मुंबई की तरफ बढ़ रहे दो बड़े यात्री विमानों के पायलटों को अचानक मैसेज मिला कि वे अपना रुख मध्य प्रदेश के इंदौर की तरफ मोड़ लें। इसके बाद देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अचानक हलचल बढ़ गई। 2 मिनट के भीतर 2 विमानों की लैंडिंग इंदौर एयरपोर्ट पर सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर कोच्चि से मुंबई जा रही इंडिगो की फ्लाइट (6E662) ने टचडाउन किया। अभी एयरपोर्ट स्टाफ इस फ्लाइट के यात्रियों को संभालने की रणनीति बना ही रहा था कि ठीक 2 मिनट बाद, सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर नई दिल्ली से मुंबई जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI2963) भी रनवे पर उतर गई। मुंबई के बदलते मौसम के कारण पायलटों के पास इंदौर में अनशेड्यूल्ड लैंडिंग के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। इंडिगो (6E662)     कोच्चि से मुंबई     सुबह 11:08 बजे     दोपहर 01:00 बजे एयर इंडिया (AI2963)     नई दिल्ली से मुंबई     सुबह 11:10 बजे     दोपहर 01:00 बजे टर्मिनल पर फंसे 240 से ज्यादा यात्री एक के बाद एक दो विमानों के अचानक आ जाने से इंदौर टर्मिनल पर करीब 240 से ज्यादा यात्री फंस गए। रविवार की छुट्टी होने के बावजूद इंदौर एयरपोर्ट की ग्राउंड हैंडलिंग टीम और संबंधित एयरलाइंस के स्टाफ को तुरंत मोर्चे पर लगाया गया। अचानक पहुंचे इन यात्रियों के लिए तुरंत खाने-पीने और आराम की व्यवस्था की गई ताकि वे परेशान न हों। एयरपोर्ट प्रबंधन का आधिकारिक बयान इंदौर एयरपोर्ट के पीआरओ रामस्वरूप यादव ने इस पूरी स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया: 'मुंबई और दिल्ली से वेदर क्लीयरेंस मिलने का इंतजार किया जा रहा था। इस दौरान इंदौर एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों को स्टैंडर्ड रिफ्रेशमेंट और हर जरूरी सहायता मुहैया कराई गई। मौसम साफ होने के बाद दोपहर करीब 1 बजे दोनों ही फ्लाइट्स ने इंदौर से मुंबई के लिए दोबारा उड़ान भरी।'

एमपी से प्रमुख शहरों के टिकट महंगे हुए, युद्ध का असर: एयर टिकट में 25% से ज्यादा बढ़ोतरी

इंदौर  मध्य प्रदेश से देश के प्रमुख शहरों के लिए हवाई यात्रा अब पहले से काफी महंगी हो गई है। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जिससे कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसका सीधा प्रभाव एयर टिकट पर देखने को मिल रहा है, जहां किराए 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इंदौर समेत राज्य के अन्य शहरों से मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर और जयपुर जाने वाले यात्रियों को अब अधिक खर्च करना पड़ रहा है। एयरलाइंस कंपनियों ने बढ़ती लागत को देखते हुए फ्यूल सरचार्ज भी लागू कर दिया है। इसके साथ ही समर शेड्यूल के बाद कई सीधी उड़ानों के बंद होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। अब लोगों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब भारत के आम नागरिकों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस वैश्विक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर हवाई किरायों पर पड़ रहा है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने लागत बढ़ने के चलते ‘फ्यूल सरचार्ज’ लागू कर दिया है। इसके बाद से ही मध्य प्रदेश सहित देशभर में फ्लाइट टिकट 15 से 20% तक महंगे हो गए हैं। मार्च के अंत से लागू समर शेड्यूल के बाद इंदौर से कई शहरों की सीधी फ्लाइट्स बंद हो गई हैं। जिसके कारण यात्रियों को अब कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ रही हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। बढ़े हुए किराये की वजह से कई लोग अब ट्रेन या दूसरे विकल्प चुन रहे हैं। इस महंगाई का असर समर वेकेशन प्लान पर भी पड़ा है। ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) के चेयरमैन हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे और एटीएफ सस्ता नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में किराए और बढ़ सकते हैं। इंदौर से मुंबई का किराया 2000 तक बढ़ा इंदौर से चलने वाली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के किराए में औसतन 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ रूट्स पर यह और ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर इंदौर से मुंबई का किराया 4500 रुपए से बढ़कर करीब 6500 रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता जाने वाला किराया सबसे ज्यादा बढ़ा है। जहां पहले टिकट 6500-7500 रुपए में मिल जाता था, वहीं अब 8500 से 12,000 रुपए तक पहुंच गया है। ट्रैवल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस रूट पर कम प्रतिस्पर्धा और ज्यादा मांग की वजह से किराए तेजी से बढ़े हैं। किराए में बढ़ोतरी इंदौर से उड़ान भरने वाले यात्रियों पर इस समय सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। मुंबई का किराया जहां पहले करीब 4500 रुपए था, अब बढ़कर 6500 रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता रूट पर सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है। पहले जहां टिकट 6500 से 7500 रुपए के बीच मिलता था, अब यह 8500 से 12,000 रुपए तक पहुंच चुका है। कनेक्टिविटी पर असर मार्च के अंत से लागू समर शेड्यूल के बाद कई शहरों के लिए सीधी उड़ानें बंद हो गई हैं। इसका असर यात्रियों की सुविधा पर पड़ा है। अब यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ रही हैं, जिससे यात्रा लंबी और महंगी हो गई है। इसका असर खासतौर पर गर्मी की छुट्टियों की यात्रा योजनाओं पर दिख रहा है। इंटरनेशनल फ्लाइट्स में 35% तक उछाल खाड़ी देशों के ऊपर से गुजरने वाले कई हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। रूट डायवर्जन के कारण दूरी और ईंधन खर्च बढ़ा है। इसका असर इंटरनेशनल टिकट पर ज्यादा दिख रहा है, जहां किराए में 30-35% तक उछाल दर्ज किया गया है। कई फ्लाइट बंद हो गई किराया बढ़ने के साथ-साथ इंदौर के हवाई यात्रियों के लिए एक और बड़ी समस्या कनेक्टिविटी की कमी के रूप में सामने आई है। मार्च के अंत से लागू हुए नए समर शेड्यूल के कारण इंदौर से कई प्रमुख शहरों की सीधी उड़ानें बंद कर दी गई हैं। सीधा संपर्क टूटने की वजह से यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सहारा लेना पड़ रहा है, जो समय और पैसा दोनों के लिहाज से काफी महंगा पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इंटरनेशनल टिकट 30 से 35 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं।खाड़ी देशों के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों में बदलाव के कारण दूरी और ईंधन खर्च बढ़ गया है, जिससे किराए में यह उछाल आया है। फिलहाल एमपी एयर टिकट महंगे होने का असर साफ दिख रहा है और यात्रियों को अपने बजट और यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ रहा है।

रक्षा बंधन से पहले हवाई सफर महंगा, भोपाल फ्लाइट का किराया दोगुना

भोपाल  भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने घर आ रहे हैं। एयरलाइंस कंपनियां इस मौके का भरपूर लाभ उठा रही हैं। रक्षाबंधन पर विमान से भोपाल आना महंगा हो गया है। स्पाट फेयर दो गुना तक हो गया है। 12 एवं 13 अगस्त के बाद विभिन्न शहरों से भोपाल आने का किराया कम है। माना जा रहा है कि 10 अगस्त के बाद भोपाल से जाने वाली उड़ानों में भी स्पॉट फेयर बढ़ेगा। भोपाल से बड़ी संख्या में युवा बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद एवं दिल्ली के आसपास के इलाकों की विभिन्न कंपनियों में काम करते हैं। छात्र वर्ग भी इन शहरों तक आता-जाते हैं। इन्हीं शहरों से भोपाल लौटने का किराया सामान्य से अधिक लिया जा रहा है। स्पॉट फेयर अधिक होने के कारण अंतिम समय में अपने घर आने का निर्णय लेने वालों को महंगा किराया देना मजबूरी है। माना जा रहा है कि 10 अगस्त के बाद भोपाल से वापस जाने वाली उड़ानों में स्पाट फेयर बढ़ेगा। हालांकि अब भी 10 से 13 अगस्त के बीच भोपाल से वापस जाने वाली उड़ानों का किराया सामान्य से अधिक है। पुणे जैसी लेट नाइट उड़ान में भी किराया 12 हजार रुपये से अधिक लिया जा रहा है। पहली बार दिल्ली से आना महंगा दिल्ली जैसे रूट पर चार उड़ानें होने के बावजूद कम किराये में सीट बुक नहीं हो पा रही है। आमतौर पर दिल्ली आने-जाने वाली उड़ानों में किराया सबसे कम होता है। यह पहला मौका है जब दिल्ली रूट पर किराया अधिक है। दिल्ली रूट पर इंडिगो की एक उड़ान कम हो गई है। इसका असर भी किराये में नजर आ रहा है। विंटर शेड्यूल में भोपाल से दिल्ली, बेंगलुरू एवं पुणे तक अतिरिक्त उड़ानें प्रारंभ होंगी। ऐसे में किराया कम होने की संभावना है।