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एयरलाइंस को मिली राहत, केंद्र ने सब्सिडी की अवधि बढ़ाई, इंदौर-भोपाल समेत अन्य शहरों के जुड़ने की संभावना

उदयपुर उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर अब नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की संशोधित उड़ान योजना में वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। इससे एयरलाइंस कंपनियां की ओर से इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे जैसे हाई-डिमांड रूट।  लंबे समय तक मिलने वाली सब्सिडी एयरलाइंस के लिए जोखिम कम करेगी और मेवाड़ को फिर से बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ सकती है। केंद्र सरकार की यह पहल उदयपुर के पर्यटन और मार्बल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि राज्य सरकार चैलेंज मोड के तहत इन बंद रूट्स की डिमांड केंद्र को भेजती है तो इन रूट्स को प्राथमिकता मिल सकती है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े विमान और किफायती किराया मॉडल के साथ इन रूट्स पर पैसेंजर लोड और बढ़ सकता है। पहले से ही इन रूट्स पर करीब 80 फीसदी सीटें भरी जा रही थीं। जो इनके व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने का संकेत है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी लगातार इन फ्लाइट्स को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, जिससे केंद्र स्तर पर इस दिशा में पहल की संभावना और मजबूत हो गई है। ये रूट बंद हुए, यही प्राथमिकता पर     इंदौर रूट (29 मार्च 2026 से बंद) – इसी समर शिड्यूल में कनेक्टिविटी टूटी। व्यापारिक और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह सबसे ज्यादा मांग वाला रूट था।     भोपाल एवं अहमदाबाद (पिछले शिड्यूल से बंद) – मध्य प्रदेश की राजधानी और गुजरात के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र से सीधा हवाई संपर्क कटा हुआ है। इससे यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा है।     पुणे रूट (2020 से बंद) – पिछले 6 सालों से सीधी उड़ान का इंतजार है। पुणे में रहने वाले हजारों मेवाड़ी छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह कनेक्टिविटी सबसे जरूरी है। भास्कर सुझाव – संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया यात्रियों का लोड बढ़ाने में रहेगा कारगार संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया का फार्मूला इन रूट्स पर पैसेंजर लोड बढ़ाने में कारगर हो सकता है। क्योंकि, अब 5 साल तक सरकार वित्तीय घाटे की भरपाई करेगी। इससे उनपर वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित मेवाड़ के बड़े जनप्रतिनिधि इन बंद हुई इन फ्लाइट्स को वापस बहाल कराने की लगातार मांग कर रहे हैं। नए शिड्यूल पर सवाल – जो फ्लाइटें छीनी, उनमें था 80 फीसदी यात्रीभार टूरिस्ट सिटी उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी पिछले कुछ समय से लैंडिंग मोड पर चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि समर शिड्यूल में उदयपुर-भोपाल, उदयपुर-इंदौर और उदयपुर-अहमदाबाद के बीच चलने वाली जिन फ्लाइट्स का बंद किया गया, उनमें करीब 80 फीसदी सीट्स फुल चल रही थीं। वहीं, पुणे जैसा बड़ा आईटी और एजुकेशन हब तो साल 2020 से ही उदयपुर के हवाई नक्शे से गायब है। अभी मुंबई के लिए 6, दिल्ली 4 फ्लाइट, जयपुर 2, और बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए 1-1 फ्लाइट का संचालन हो रहा है।  

तीन नई एयरलाइंस को NOC जारी, जानें क्यों जरूरी थी नई कंपनियों की एंट्री, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली  भारत सरकार ने देश में एविएशन सेक्टर को और मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तीन नई एयरलाइंस-शंख एयर, अलहिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को परिचालन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन एयरलाइंस के शुरू होने से न सिर्फ इंडिगो और एयर इंडिया पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देशभर में हवाई कनेक्टिविटी को भी नया विस्तार मिलेगा। सरकार ने इन तीनों कंपनियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। इंडिगो से जुड़ी हालिया परिचालन चुनौतियों और बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।  कब से शुरू होंगी नई एयरलाइंस? NOC मिलने का मतलब यह नहीं है कि ये एयरलाइंस तुरंत उड़ानें शुरू कर देंगी। इसका अर्थ केवल इतना है कि अब ये कंपनियां एयरलाइंस स्थापित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं। यात्रियों को इन सेवाओं का लाभ मिलने में अभी कुछ समय लगेगा। एयरलाइंस शुरू करने के लिए क्या प्रक्रियाएं होंगी पूरी? NOC मिलने के बाद एयरलाइंस कंपनियों को DGCA से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) प्राप्त करना होगा। इसके अलावा विमानों की व्यवस्था, पायलट और केबिन क्रू की नियुक्ति, रूट नेटवर्क की योजना और मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कई महीनों में पूरी होती है, जिसके दौरान एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति और परिचालन क्षमता की भी जांच होती है। अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस परिचालन बेड़े में शामिल होने को तैयार  अल हिंद एयर को केरल-स्थित अलहिंद ग्रुप का समर्थन प्राप्त है। फ्लाईएक्सप्रेस ऐसे इच्छुक एयरलाइंस समूह में शामिल हो रही है, क्योंकि भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते एयरलाइन बाजारों में व्यापक भागीदारी के लिए प्रयास कर रहा है।   यह कदम अक्टूबर में क्षेत्रीय खिलाड़ी फ्लाई बिग के निलंबन के बाद आया, जिससे परिचालन घरेलू कैरियरों की संख्या घटकर 9 रह गई। इन 3 एयरलाइंस की मंजूरी हाल के दिनों में प्रमुख एयरलाइंस, खासकर इंडिगो में हुए परिचालन व्यवधानों से उत्पन्न बाजार चिंताओं के बीच आई है।  क्षेत्रीय भागीदारी आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन  नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान योजना के तहत, विशेषकर कम-सेवा वाले क्षेत्रों में एयरलाइन भागीदारी बढ़ाने पर अपना केन्द्रित रखा है।   इस योजना के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में विस्तार हुआ है, जहां स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर जैसे छोटे कैरियर कम-ज्ञात मार्गों पर सेवाएँ दे रहे हैं।   नवमंजूर एयरलाइंस संभवतः ऐसे मार्गों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर केंद्रीकृत उद्योग में अपने परिचालन स्थापित करेंगी।  हालिया बाजार रुझान और पिछली एयरलाइन विफलताएँ  नए कैरियरों का प्रवेश उस अवधि के बाद हो रहा है जब जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस वित्तीय चुनौतियों के कारण परिचालन से बाहर हो गईं।   नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अस्थिरता ने स्थिरता और लागत प्रबंधन को प्रमुख परिचालन प्राथमिकताएँ बना दिया है।   वर्तमान में, भारत की अनुसूचित एयरलाइंस में इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एलायंस एयर, अकासा एयर, स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर शामिल हैं।  निष्कर्ष  अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस, और शंख एयर का जुड़ना भारत के काफी केंद्रीकृत एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। ये अनुमोदन मौजूदा प्रमुख कैरियरों पर यात्रियों की निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।  नई एयरलाइंस की ज़रूरत क्यों पड़ी? भारत का एविएशन बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। नई एयरलाइंस के जुड़ने से यात्रियों को ज़्यादा सीटें, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धी किराए मिलेंगे। साथ ही बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और यात्रियों के पास फ्लाइट चुनने के अधिक विकल्प होंगे। ये हैं नई एयरलाइंस जो होंगी शुरू शंख एयरः उत्तर प्रदेश स्थित शंख एयर की उड़ानें 2026 की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। कंपनी अगले तीन वर्षों में अपने बेड़े में 20 से 25 विमान शामिल करने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य देश के प्रमुख शहरों और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। अलहिंद एयरः अलहिंद एयर केरल स्थित अलहिंद ग्रुप की पहल है, जिसे ट्रैवल और टूरिज़्म सेक्टर का लंबा अनुभव है। यह एयरलाइन क्षेत्रीय और लो-कॉस्ट उड़ानों पर फोकस करेगी, ताकि आम लोग भी किफायती दरों पर हवाई सफर कर सकें। फ्लाई एक्सप्रेसः फ्लाई एक्सप्रेस का उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ एयर-कार्गो सेवाओं को भी बढ़ावा देना है। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों की ढुलाई को आसान बनाते हुए यह एयरलाइन घरेलू कार्गो सेक्टर की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। विमानन क्षेत्र में एकाधिकार खत्म करने की कवायद वर्तमान में भारतीय आसमान पर टाटा समूह की एअर इंडिया और इंडिगो का एकछत्र राज है। डीजीसीए  के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार का 90% से अधिक हिस्सा इन्हीं दो समूहों के पास है। इसमें भी करीब 65% हिस्सेदारी अकेले इंडिगो के पास है। इस 'डुओपोली' के कारण अक्सर यात्रियों को सीमित विकल्पों और मनमाने किरायों का दंश झेलना पड़ता है। हाल ही में इंडिगो एयरलाइन में आई तकनीकी खामियों ने यह साबित कर दिया कि बाजार का एक ही खिलाड़ी पर अत्यधिक निर्भर होना कितना जोखिम भरा हो सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सरकार का उद्देश्य विमानन बाजार में नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कौन हैं विमानन बाजार के नए खिलाड़ी? 1. अल-हिंद एयर  केरल स्थित अल-हिंद ग्रुप द्वारा प्रवर्तित यह एयरलाइन दक्षिण भारत से अपनी शुरुआत करने जा रही है। अल-हिंद ग्रुप पहले से ही ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में एक बड़ा नाम है, जिसका टर्नओवर लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताया जाता है। कंपनी की योजना शुरुआत में एटीआर-72 (ATR-72) विमानों के साथ क्षेत्रीय मार्गों पर उड़ान भरने की है, और भविष्य में एयरबस A320 विमानों के साथ अंतरराष्ट्रीय मार्गों, विशेषकर खाड़ी देशों (Gulf countries) को जोड़ने का लक्ष्य है। अल हिन्द एयर का प्रवर्तक केरल स्थित अल हिन्द ग्रुप है। इस समूह की जड़ें 1990 के दशक की शुरुआत में जमी थीं, जब इसने एक छोटी ट्रैवल एजेंसी के रूप में शुरुआत की थी।  मीडिया रिपोर्ट्स और कंपनी के दावों के अनुसार, समूह का कुल टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है ।  ट्रैक्सन (Tracxn) के आंकड़ों के अनुसार, … Read more

देश में 3 नई एयरलाइंस, सरकार का बड़ा फैसला, इंडिगो का घमंड टूट सकता है

नई दिल्ली  भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए यह सप्ताह बेहद अहम साबित हुआ है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के आसमान में उड़ान भरने की तैयारी कर रही तीन नई एयरलाइंस को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रदान किया है. शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को मिली इस मंजूरी को एविएशन सेक्टर के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे न सिर्फ यात्रियों के लिए विकल्प बढ़ेंगे, बल्कि हवाई सेवाओं में प्रतिस्पर्धा भी तेज होगी. तीन नई एयरलाइंस को मिला ऑपरेशन का रास्ता पिछले एक सप्ताह के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इन तीनों नई एयरलाइंस की टीमों से मुलाकात की. शंख एयर को पहले ही मंत्रालय से NOC मिल चुका था, जबकि अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को इसी सप्ताह यह महत्वपूर्ण अनुमति दी गई. NOC मिलने के बाद अब ये एयरलाइंस आगे के लाइसेंस और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर व्यावसायिक उड़ानों की तैयारी कर सकेंगी. मंत्रालय का मानना है कि नई एयरलाइंस के आने से सेक्टर में संतुलित विकास होगा. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर विशेष जोर मंत्रालय के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) को और अधिक मजबूत करना है। सरकार की योजना छोटे शहरों को बड़े महानगरों से जोड़ने की है, ताकि आम नागरिकों के लिए हवाई सफर और अधिक सुलभ और किफायती हो सके। इन नई एयरलाइंस के आने से टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच आवाजाही आसान होगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। शंख एयर को मिला एनओसी इन तीनों एयरलाइंस में से शंख एयर अपनी तैयारियों में सबसे आगे चल रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, शंख एयर को पहले ही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल चुका था, जो परिचालन शुरू करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। यह एयरलाइन उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपने मुख्य केंद्र (हब) बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे उत्तर भारत में हवाई सेवाओं का विस्तार होगा। यात्रियों को मिलेगा नया विकल्प नई एयरलाइंस के बाजार में उतरने से विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को टिकट दरों में कमी के रूप में मिल सकता है। मंत्रालय अब इन कंपनियों के सुरक्षा मानकों और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इनके उड़ान भरने की तारीखें तय की जा सकें। विमानन क्षेत्र में इस विस्तार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। बाजार में बढ़ेगा कंपीटिशन, घटेगा यात्रियों का बोझ विमानन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, Shankh Air (शंख एयर), AI Hind Air (एआई हिंद एयर) और FlyExpress (फ्लाईएक्सप्रेस) को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया गया है. सरकार की कोशिश है कि बाजार में केवल चुनिंदा कंपनियों पर निर्भरता कम की जाए. जब आसमान में ज्यादा विमान होंगे और अधिक कंपनियां अपनी सेवाएं देंगी, तो न केवल किराये में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा. उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक फैलेगा नेटवर्क ये तीनों एयरलाइंस देश के अलग-अलग कोनों से अपना ऑपरेशन शुरू करेंगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) को काफी मजबूती मिलेगी:     शंख एयर’ यूपी के हवाई नक्शे को बदलने की तैयारी में है. इसका मुख्य हब लखनऊ और जेवर (नोएडा) के नए एयरपोर्ट को बनाया गया है.     ‘एआई हिंद एयर’ केरल के कोच्चि से अपनी उड़ानें शुरू करेगी, जबकि ‘फ्लाईएक्सप्रेस’ हैदराबाद से अपना संचालन संभालेगी. इन दोनों के आने से दक्षिण भारतीय राज्यों के यात्रियों को काफी राहत मिलने वाली है. क्यों पड़ी नई एयरलाइंस की जरूरत? पिछले कुछ समय से एविएशन मार्केट में केवल दो बड़े खिलाड़ियों का दबदबा होने के कारण किरायों में मनमानी और सेवाओं में कमी की शिकायतें आ रही थीं. हाल ही में प्रमुख एयरलाइंस के साथ हुए तकनीकी विवादों ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया कि विकल्प बढ़ाना अब जरूरी हो गया है. इन तीन नई कंपनियों के आने से मार्केट में बैलेंस बनेगा और आम आदमी के लिए हवाई सफर पहले से कहीं ज्यादा सुगम और किफायती हो जाएगा. दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में भारत नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बनाई गई नीतियों के चलते भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल हो चुका है. हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसी को देखते हुए सरकार नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है. राम मोहन नायडू ने कहा कि मंत्रालय का लगातार प्रयास रहा है कि अधिक से अधिक एयरलाइंस भारतीय आसमान में उतरें, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और किफायती किराए मिल सकें. UDAN योजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती सरकार की उड़ान (UDAN) योजना ने पहले ही स्टार एयर, इंडिया वन एयर और फ्लाई91 जैसी छोटी एयरलाइंस को क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने का मौका दिया है. इन एयरलाइंस ने छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को हवाई नक्शे पर लाने में मदद की है. मंत्रालय का मानना है कि शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस के आने से यह दायरा और बढ़ेगा. आने वाले समय में भारतीय विमानन क्षेत्र में रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

अब अंतिम समय पर कैंसिलेशन में भी 80% रिफंड, हवाई टिकट पर मेडिकल इमरजेंसी कवरेज

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई किरायों के रिफंड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई ड्राफ्ट गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर किसी यात्री को मेडिकल इमरजेंसी के कारण टिकट रद्द करनी पड़े, तो एयरलाइन को पूरा पैसा लौटाना होगा या फिर क्रेडिट नोट देना होगा। ट्रैवल एजेंट के जरिए खरीदे टिकट का रिफंड भी अब सीधे एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी। यानी ऑनलाइन पोर्टल या एजेंट से खरीदे टिकट के मामले में भी यात्री को एयरलाइन ही रिफंड देगी। इसके लिए 21 कार्यदिवस की समय सीमा तय की गई है। ड्राफ्ट नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव 30 नवंबर 2025 तक मांगे गए हैं। टिकट बदलने का समय बढ़ेगा डीजीसीए ने एक और राहत देने का प्रस्ताव रखा है, अब यात्री 48 घंटे के भीतर टिकट में बदलाव मुफ्त में कर सकेंगे, बशर्ते ये बदलाव:- घरेलू उड़ान के लिए- प्रस्थान से कम से कम पांच दिन पहले और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए- प्रस्थान से 15 दिन पहले किया जाए। पहले यह सुविधा सिर्फ 24 घंटे और सभी उड़ानों के लिए सात दिन पहले तक सीमित थी। व्हीलचेयर और सुविधा नियमों में बदलाव डीजीसीए ने दिव्यांग यात्रियों के यात्रा मानकों को भी अपडेट किया है। व्हीलचेयर अब केवल दिव्यांग यात्रियों के लिए प्राथमिकता में रहेगी। सक्षम यात्री व्हीलचेयर का उपयोग करेंगे तो उन पर शुल्क लगेगा। एयरपोर्ट पर अम्बुलिफ्ट, एरोब्रिज या टोवेबल रैंप उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। जहां इनमें से कुछ भी न हो, वहां अंतिम विकल्प के रूप में स्टेप-लैडर की अनुमति दी गई है- हालांकि इसे लेकर विकलांग अधिकार समूहों ने नाराजगी जताई है। एयरपोर्ट को दिव्यांग यात्रियों के लिए स्पष्ट साइन बोर्ड, अलग ड्रॉप-ऑफ जोन और पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना होगा। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को डिजिटल मैप भी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। हवाई टिकटों में इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी सरकार हवाई टिकटों में ऐसा इनबिल्ट इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे उड़ान से कुछ ही घंटे पहले टिकट रद्द करने पर भी 80% तक रिफंड मिल सकेगा। यह पूरी कवरेज यात्रियों से कोई अतिरिक्त शुल्क लिए बिना दी जाएगी, प्रीमियम एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की साझेदारी से भरा जाएगा। अभी की व्यवस्था के अनुसार, उड़ान के तीन घंटे के भीतर रद्द करने पर टिकट नो-शो माना जाता है और कोई रिफंड नहीं मिलता। मेडिकल इमरजेंसी साबित करने पर एयरलाइन कभी-कभी रिफंड दे देती हैं, लेकिन यह पूरी तरह उन्हीं के विवेक पर निर्भर है। कैसे काम करेगा नया प्लान? सरकार और एयरलाइंस मिलकर ऐसा मॉडल लाने जा रही हैं जिसमें लगभग ₹50 प्रति टिकट के हिसाब से बीमा लागत निकाली जा सकती है। इससे उड़ान से चार घंटे पहले तक रद्द टिकटों पर 80% रिफंड दिया जा सकेगा। कुछ एयरलाइंस पहले ही बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू कर चुकी हैं। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (ओटीए) अभी भी यात्रियों को अलग से इंश्योरेंस खरीदने का 'नज' देती हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि बेस किराए में ही सुरक्षा शामिल हो, ताकि 'पैसा डूब जाने' का डर न रहे। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव और कब लागू होगा? अथॉरिटीज के मुताबिक रिफंड से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसमें रिफंड मिलने में देरी, रिफंड राशि में कटौती, या फिर पैसा न देकर फ्यूचर क्रेडिट थमा देना – जो सीमित अवधि तक ही मान्य रहता है। इसीलिए डीजीसीए ने भी अपने रिफंड नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है ताकि यात्रियों की परेशानी कम की जा सके और प्रक्रिया पारदर्शी बने। सरकारी अधिकारी कह रहे हैं कि यह इनबिल्ट इंश्योरेंस मॉडल दो से तीन महीनों में लागू किया जा सकता है, बशर्ते एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की गणना संतुलित बैठ जाए।