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अमरकंटक में बनेगी नई सैटेलाइट सिटी, नर्मदा उद्गम की सुरक्षा के लिए 11 हजार हेक्टेयर में होगा विकास

अमरकंटक  मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा उद्गम स्थल को प्रदूषण से बचाने के लिए अमरकंटक सैटेलाइट सिटी बसाएगी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र का दायरा सात हजार से बढ़ाकर 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया है। चार गांवों की जमीन पर होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं बनेंगी। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा।मध्य प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए सरकार यहां एक सुनियोजित नया शहरी क्षेत्र विकसित करेगी। इसके लिए अमरकंटक के निवेश क्षेत्र का दायरा 7 हजार से बढ़ाकर 11,657 हेक्टेयर से अधिक कर दिया गया है। नर्मदा उद्गम स्थल की सुरक्षा इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई थी। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) ने इसके लिए निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है। योजना के तहत पर्यटकों के ठहरने की जगह नर्मदा के उद्गम स्थल से दूर बनाई जाएगी। दुकानें और दूसरी कारोबारी गतिविधियां भी वहां से हटाई जाएंगी। इसका मकसद गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकना है। नर्मदा को प्रदूषण से बचाना मकसद इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद हुई। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। इसके लिए पर्यटकों की नई बसाहट और व्यावसायिक गतिविधियों को उद्गम स्थल से दूर ले जाने की योजना है, ताकि सीवेज नर्मदा में न पहुंचे। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें होटल, सड़क और आवासीय क्षेत्रों की जगह तय की जाएगी। इन 4 गांवों में बनेगी सैटेलाइट सिटी सैटेलाइट सिटी के लिए चुने गए चार गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी। नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है। नर्मदा उद्गम (Narmada river origin) का इलाका धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम है। इसी वजह से सरकार वहां सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करना चाहती है। क्या इससे उद्गम पर दबाव घटेगा? योजना का मकसद पर्यटन का बोझ उद्गम से दूर रखना है। अमरकंटक सैटेलाइट सिटी कहां बनेगी? निवेश क्षेत्र (वह इलाका जिसमें विकास की योजना बनती है) का दायरा बढ़ा है। पहले यह करीब सात हजार हेक्टेयर था। अब यह 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है। नई सैटेलाइट सिटी चार गांवों की दो हजार 134.14 हेक्टेयर जमीन पर बसेगी। यह इलाका अमरकंटक के मुख्य संवेदनशील क्षेत्र से दूर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी। इन 4 गांवों में बनेगा नया शहर अमरकंटक सैटेलाइट सिटी (Amarkantak satellite city) के लिए पोंडी, लालपुर, बरसोत और सेंदुखार गांव चुने गए हैं। इन चारों गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को कम बाधाओं में सुनियोजित शहरी क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी। ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं। पोंडी सबसे बड़ा हिस्सा है। यहां 999.21 हेक्टेयर जमीन है और आबादी 1,554 है। लालपुर में 447.97 हेक्टेयर जमीन और 810 लोग हैं। बरसोत में 417.14 हेक्टेयर जमीन और 521 लोग हैं। सेंदुखार में 269.80 हेक्टेयर जमीन और सिर्फ 69 लोग हैं। चारों गांवों की कुल आबादी करीब तीन हजार है। 15 गांव/क्षेत्रीय इकाइयों का मास्टर प्लान अमरकंटक के मुख्य क्षेत्र और नई सैटेलाइट सिटी समेत कुल 15 क्षेत्रीय इकाइयों को नए निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है। कृषि भूमि पर कॉटेज और स्विमिंग पूल अमरकंटक के विकास के लिए 2020 में मास्टर प्लान में बदलाव कर कृषि भूमि पर ‘कृषि पर्यटन’ को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था। मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कृषि भूमि पर कॉटेज, कैंपिंग साइट, रेस्टोरेंट, योग-नेचुरोपैथी केंद्र, वेलनेस/आध्यात्मिक केंद्र और स्विमिंग पूल की अनुमति दी गई। इसके अलावा गैर-प्रदूषणकारी उद्योग, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

अमरकंटक क्षेत्र में बाघ की दहशत, रास्ते से गुजरते शिक्षक का वीडियो वायरल

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही  लगभग सालभर के अंतराल के बाद अमरकंटक ज्वालेश्वर मार्ग पर बाघ की चहल कदमी दिखाई दी है। अमरकंटक से वापस लौट रहे स्थानीय शिक्षक ने बाघ के मूवमेंट को अपने मोबाइल फोन में कैद किया है। वीडियो में बाघ सड़क के बीचों बीच चलता दिखाई दे रहा है। एक सियार भी बाघ के आसपास दिखाई दे रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क के दोनों ओर नुकीली कांटेदार तार होने के कारण बाघ उसे पार नहीं कर पा रहा है और बार-बार सड़क पर आना-जाना कर रहा है। बता दें कि बीते वर्ष कान्हा नेशनल पार्क से भटकर एक बाघिन ने मरवाही वनमंडल के मरवाही के जंगलों और गौरेला रेंज से जुड़े जंगलो में काफी समय बिताया था, जो काफी कौतूहल का विषय बन गया था। इस बाघिन को बड़ी आसानी के साथ उस दौरान देखा जा सकता था, इसी बाघिन ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा के ज्वालेश्वर क्षेत्र में लगभग 15 दिनों तक विचरण करते हुए देखी गई थी, जिसका बाद में रेस्क्यू कर लिया गया था। बीती रात 5 फरवरी को शिक्षक योगेश बिसेन परिवार सहित अमरकंटक से वापस लौट रहे थे, इसी दौरान रास्ते मे एक बड़े जानवर बाघ को देख कर टिठक गए। उन्होंने तत्काल अपना फ़ोन निकालकर इस बाघ का वीडियो बना लिया। इस बाघ के आसपास एक सियार भी था। माना जा रहा है कि अचानक मार्ग में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण नए इलाके की तलाश में बाघ यहां पहुंच गया होगा।

नए साल से पहले भूपेश बघेल ने अमरकंटक में मां नर्मदा का लिया आशीर्वाद

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साल के अंतिन दिन अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा की पूजा अर्चना किया. बीती शाम को वो जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के दौरे पर थे. जहां वो कांग्रेस जिलाअध्यक्ष के शपथ ग्रहण में हुए थे. बता दें कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए मां नर्मदा से प्रदेश की खुशहाली की कामना किया है. उन्होंने अपने पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा- त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे अमरकंटक में अपने निर्मल जल से कंकर-कंकर को भी शंकर बनाने वाली जीवनदायिनी मां नर्मदा के पवित्र दर्शन कर, बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख और समृद्धि की कामना की. इस दौरान कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला कांग्रेस कमेटी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अध्यक्ष गजमती भानु भी सीएम के साथ मौजूद थे.