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अमेरिका की ईरान पर हमले की तैयारी, सैटेलाइट तस्वीरों ने किया बड़ा खुलासा

न्यूयॉर्क मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के अड्डों पर बदलाव साफ दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी या जवाबी कार्रवाई से बचाव का संकेत हो सकता है.   अमेरिका-ईरान के बीच तनाव  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से न्यूक्लियर डील चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं. ईरान ने साफ मना कर दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला बहुत बुरा होगा. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे. अब फिर तनाव बढ़ रहा है. ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को मिट्टी से ढक रहा है. टनल बंद कर रहा है, जो हमले की आशंका दिखाता है. सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है? अल उदेद एयर बेस, कतर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय. 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या बढ़ी है. मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स तैनात किए गए है, जो ईरान की मिसाइलों से बचाव के लिए हैं.  मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन: 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक विमान और MQ-9 ड्रोन आए. यह ईरान के करीब है.  प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब: C-5 गैलेक्सी और C-17 ट्रांसपोर्ट विमान दिखे, जो भारी सामान ले जाते हैं. अन्य जगहों जैसे ओमान और डिएगो गार्सिया में भी विमान बढ़े हैं. कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है. इसका मतलब क्या है?     ट्रंप प्रशासन साफ संदेश दे रहा है कि वह तैयार है.     यह हमले की तैयारी हो सकती है, क्योंकि इतनी तैनाती महंगी है.     या ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव, क्योंकि ईरान ने पहले अल उदेद पर हमला किया था.     ईरान भी अपनी न्यूक्लियर साइट्स (जैसे इस्फहान) को मजबूत कर रहा है, टनल मिट्टी से भर रहा है. आगे क्या? बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों तरफ तैयारी जोरों पर है. अगर हमला हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध हो सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह डिप्लोमेसी को मजबूत करने का दबाव भी हो सकता है. 

माइनस 48 डिग्री ठंड और बर्फ की सुनामी, अमेरिका के 18 राज्य जूझ रहे अंधेरे में

न्यूयॉर्क: अमेरिका इन दिनों मानो किसी हॉलीवुड डिजास्टर फिल्म का सेट बना हुआ है, जहां आसमान से गिरती बर्फ, सड़कों पर जमी मोटी आइस की परत और हवा में सिहरन का ऐसा आतंक कि 13,000 से ज्यादा उड़ानें आसमान में उड़ने से पहले ही ठंड की कैद में थम गईं. यह बर्फीला तूफान न सिर्फ पेड़ों को ताश के पत्तों की तरह गिरा दे रहा है बल्कि बत्ती भी गुल कर दे रहा है, जिस वजह से लोग अंधेरे में रहने को मजबूर है. तूफान का असर इतना भयंकर है कि करोड़ों अमेरिकियों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी जमाकर रख दे रहा है. अमेरिका में बर्फीले तूफान से तबाही अमेरिका में एक विशाल और खतरनाक विंटर स्टॉर्म ने तबाही मचानी शुरू कर दी है. शनिवार को तूफान ने बिजली, ट्रांसपोर्ट सिस्टम सबकुछ ठप कर दिया. यहां तक कि हजारों उड़ानें रद्द कर दी गईं और कई राज्यों में बिजली गुल हो गई. मौसम विभाग के मुताबिक, यह तूफान 2,300 मील से ज्यादा क्षेत्र में फैला है और इसका असर 180 मिलियन से अधिक लोगों पर पड़ रहा है, यानी अमेरिका की आधी आबादी से ज्यादा. राष्ट्रपति ट्रंप ने किया इमरजेंसी का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तक 1 दर्जन राज्यों के लिए इमरजेंसी की घोषणा को मंजूरी दे दी थी और आगे भी और राज्यों के लिए इसकी घोषणा होने की उम्मीद है। गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने बताया कि संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने कई राज्यों में आवश्यक सामग्री, कर्मचारी और खोज एवं बचाव दल तैनात कर दिए हैं। नोएम ने कहा कि हम बस यही अपील करते हैं कि सभी लोग समझदारी दिखाएं और अगर संभव हो तो घर पर ही रहें। बर्फ, बारिश से नहीं बची कोई जगह नेशनल वेदर सर्विस ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में तापमान बेहद कम रहेगा और बर्फ जल्दी नहीं पिघलेगी. जिससे राहत और बहाली के कार्यों में देरी होगी. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार तक कम से कम दर्जनभर राज्यों में आपातकाल की मंजूरी दे दी है. FEMA ने कई राज्यों में राहत सामग्री, खोज व बचाव दल और अतिरिक्त स्टाफ पहले ही तैनात कर दिया है. होमलैंड सिक्योरिटी की सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कृपया घर पर रहें, अनावश्यक यात्रा बिल्कुल न करें. टेक्सास, लुइजियाना में पावर बत्ती गुल, पेड़‑तार टूटकर गिरे पावरआउटेज.us के अनुसार शनिवार तक तूफान से प्रभावित क्षेत्रों में 120,000 से ज्यादा घरों में बिजली कट गई. टेक्सास और लुइजियाना में ही लगभग 50,000 लोग प्रभावित हुए. टेक्सास के शेल्बी काउंटी में बर्फ के भार से पेड़ टूटे और बिजली की लाइनें गिर गईं. 13,000 उड़ानें रद्द – महामारी के बाद सबसे खराब स्थिति FlightAware के अनुसार शनिवार और रविवार को मिलाकर 13,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं. यह संख्या कोविड‑19 महामारी के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा रद्द उड़ानों में से है. सबसे ज्यादा प्रभावित एयरपोर्ट:     ओक्लाहोमा सिटी — शनिवार की सभी उड़ानें रद्द, रविवार सुबह की उड़ानें भी बंद     डलास–फोर्ट वर्थ — 700 से ज्यादा उड़ानें रद्द     शिकागो, अटलांटा, नैशविल, शार्लोट — भारी व्यवधान     वॉशिंगटन D.C. — रविवार की लगभग सभी उड़ानें पहले ही रद्द कर दी गईं पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में अलर्ट: “48 घंटे घर से न निकलें” जॉर्जिया में अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोग 48 घंटे तक घरों में रहें. राज्य के प्रमुख मौसम विज्ञानी विल लैंक्सटन ने कहा कि यह दशक का सबसे बड़ा आइस स्टॉर्म हो सकता है… बर्फ जैसा नहीं, आइस सबसे खतरनाक होती है. राज्य में हाईवे पर नमक‑पानी (brine) डालने का काम रात भर चलता रहा, लेकिन अधिकारी बोले कि इस दौरान सड़कों को सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल होगा. उत्तर‑पूर्व में एक फुट से ज्यादा बर्फ की भविष्यवाणी तूफान अब उत्तर‑पूर्व की ओर बढ़ रहा है. न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरन ममदानी ने कहा कि इस मौसम में कृपया बाहर न निकलें… कोई जोखिम न लें. गर्म कपड़े पहनें और घर पर ही रहें.     टेक्सस में पारा –24°C तक गिरा- अमेरिका के कई राज्यों में रिकॉर्ड‑तोड़ ठंड दर्ज की गई, जिसमें टेक्सस में विंड चिल माइनस 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.     कई राज्यों में इमरजेंसी का ऐलान- राष्ट्रपति और गवर्नर्स ने हालात को देखते हुए दर्जनभर से अधिक राज्यों में आपातकाल घोषित किया.     14 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी तूफान की चपेट में- लगभग 140 मिलियन (14 करोड़) लोग इस बर्फीले तूफान और आइस‑स्टॉर्म के मार्ग में हैं.     9,000 से अधिक फ्लाइटें रद्द- देशभर में 13000 उड़ानें रद्द हुईं, कुछ एयरपोर्ट्स पर सभी उड़ानें बंद करनी पड़ीं     आइस स्टॉर्म का असर तूफान जैसा- बिजली गुल, कई राज्यों में 68,000 से अधिक पावर आउटेज दर्ज हुए, सबसे ज्यादा प्रभावित टेक्सस और लुइजियाना.     सड़कों पर खतरनाक स्थिति- राजमार्ग बंद, बर्फीली सड़कें, गिरते पेड़ और आइस के कारण कई राज्यों में रोड शटडाउन करना पड़ा.     पूर्वोत्तर में 30 सेमी तक बर्फबारी- वॉशिंगटन D.C. से बोस्टन तक 1 फुट (30 सेंटीमीटर) तक बर्फ गिरने की भविष्यवाणी     स्कूल–चर्च–इवेंट्स बंद- कई शहरों में स्कूल, चर्च सर्विसेज, म्यूज़िक शोज़ और परेड रद्द या ऑनलाइन कर दिए गए मिडवेस्ट में –40°C तक की ठंड, प्रदर्शनकारी भी जमे मिडवेस्ट के कई राज्यों में तापमान माइनस 40°C तक गिर गया, जहां 10 मिनट में ही फ्रॉस्टबाइट हो सकता है. विस्कॉन्सिन के राइनलैंडर में –38°C तापमान दर्ज हुआ, जो 30 वर्षों में सबसे कम है. मिनियापोलिस में ICE के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग –21°C में भी सड़कों पर डटे रहे. स्कूल और कार्यक्रम रद्द, चर्च ऑनलाइन, परेड बंद फिलाडेल्फिया और ह्यूस्टन में सोमवार को स्कूल बंद किए गए. UNC Chapel Hill और University of Mississippi ने भी क्लास कैंसिल कर दी. नैशविल में Grand Ole Opry शो बिना दर्शकों के हुआ. जबकि लुइजियाना में मार्डी ग्रास परेड रद्द कर दी गई. यह तूफान इतना अनोखा क्यों है? NOAA के मौसम विज्ञानी जॉश वीस के अनुसार, यह तूफान दो कारणों से एकदम अलग है, क्योंकि इसका दायरा बहुत विशाल है, ये तूफान 2,000 मील से ज्यादा के एरिया को चपेट में लेगा. सिर्फ … Read more

सफेद मौत अमेरिका में फैल रही, 23 करोड़ लोग प्रभावित, सिर्फ 10 मिनट बाहर रहना खतरनाक

वॉशिंगटन  अमेरिका में इस वक्त मौसम वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूल हुए हैं. हाल ही में कुदरत के कहर की चेतावनी जारी की गई है. जिसमें 23 करोड़ से ज्यादा लोगों के सिर पर ‘सफेद मौत’ का साया मंडरा रहा है. ये वॉर्निंग विंटर स्टॉर्म फर्न को लेकर की गई है, जो कई राज्यों में तबाही मचाने वाला है. दावा किया जा रहा है कि इस बार पिछले साल तक के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. इस तूफान की वजह से इंसानों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. बताया जा रहा है कि इस सफेद तूफान का सामना करने वाले का शरीर 10 मिनट में फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आ जाएगा. कितने राज्यों में ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ यह कोई मामूली बर्फबारी नहीं है बल्कि यह बर्फ, जमा देने वाली बारिश और ‘आर्कटिक कोल्ड’ का वो जानलेवा मिश्रण है जो पूरे अमेरिका को ठप कर देगा. बताया जा रहा है कि ये भयानक तूफान 2,300 मील लंबा मौत का रास्ता तय करने वाला है. यानी इसकी चपेट में टेक्सास से लेकर न्यूयॉर्क तक, करीब 15 राज्य आने वाले हैं. आने वाला खतरा देखते हुए यहां की सरकारों ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है. टूट जाएंगे Winter Storm के सारे रिकॉर्ड न्यूयॉर्क सिटी और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में पिछले 4 साल की सबसे बड़ी बर्फबारी होने की आशंका है. रविवार का दिन इन शहरों के लिए सबसे खतरनाक होगा, जब बर्फीले तूफान की रफ्तार और तीव्रता अपने चरम पर होगी. सोमवार तक चलने वाला यह तूफान अपने पीछे 1 फुट से ज्यादा बर्फ और जानलेवा पाला यानी जमी हुई बर्फ छोड़ जाएगा. इस खतरे को देखते हुए शनिवार के लिए 1,400 से ज्यादा उड़ानें पहले ही रद्द की जा चुकी हैं. डलास और फोर्ट वर्थ जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सन्नाटा पसरने वाला है. इसके अलावा भारी बर्फ की वजह से बिजली की लाइनें टूटने का खतरा है. दक्षिण के राज्यों में 2 इंच तक की बर्फ की परत जम सकती है. इसकी वजह से हजारों घर अंधेरे में डूब सकते हैं. 10 मिनट बाहर रहे तो… इस तूफान के साथ ‘पोलर वोर्टेक्स’ (Polar Vortex) की ठंडी हवाएं भी मिक्स हो जाएंगी यानी दोगुनी तबाही का अंदेशा है. शिकागो और मिडवेस्ट के इलाकों में तापमान -30 से -46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इतनी ठंड में सिर्फ 10 मिनट बाहर रहने पर ‘फ्रॉस्टबाइट’ का खतरा है. यानी इंसान का शरीर सुन्न पड़ जाएगा. फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आए शरीर के अंग काले पड़ जाते हैं. कंडीशन ज्यादा सीरियस होने पर फ्रॉस्टबाइट अंगों को गला सकती है.

हरियाणा के 54 लोग अमेरिका से निर्वासित, जानिए किन जिलों से हैं सबसे ज्यादा

दिल्ली/कैथल   अवैध रूप से डंकी रूट के जरिये अमेरिका पहुंचने वाले हरियाणा के 54 युवाओं को अमेरिका ने शनिवार देर रात डिपोर्ट कर भारत भेज दिया। विशेष विमान द्वारा इन युवाओं को दिल्ली एयरपोर्ट पर बेड़ियों में बांधकर लाया गया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इन्हें आधिकारिक प्रक्रिया के तहत भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों के हवाले किया। एयरपोर्ट पर हरियाणा पुलिस की विशेष टीमें पहले से मौजूद थीं। जिन युवाओं के खिलाफ आपराधिक और गिरोह से जुड़े मामलों की जानकारी थी, उन्हें मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। बाकी युवाओं को कागजी कार्रवाई के बाद उनके गृह जिलों में भेज दिया गया।   करनाल के सबसे अधिक डिपोर्ट डिपोर्ट हुए 50 युवाओं में सबसे ज्यादा करनाल के 16 लोग और कैथल जिले के 14 लोग शामिल हैं। इनके अलावा कुरुक्षेत्र के पांच, जींद के तीन सहित अन्य जिलों के लोग है। लॉरेंस बिश्नोई का करीबी लखविंद्र भी किया डिपोर्ट वहीं इनमें सबसे बड़ा मामला कैथल के गांव तितरम निवासी लखविंद्र उर्फ लाखा का है। लाखा लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई गिरोह का सक्रिय सदस्य है और 2022 से अमेरिका में बैठकर हरियाणा-पंजाब के व्यापारियों से फिरौती मांगने के नेटवर्क का संचालन कर रहा था। हरियाणा एसटीएफ की अंबाला यूनिट ने गैंगस्टर लॉरेंस के करीबी लखविंद्र उर्फ लाखा को गिरफ्तार कर लिया। कैथल के अलावा अन्य जिलों में भी उस पर फिरौती मांगने जैसे कई मामले दर्ज हैं। इसके अलावा डिपोर्ट होकर आए दूसरे मोस्ट वांटेड सुनली सरधानिया का नाम भी शामिल हैं। जो हत्या सहित 24 आपराधिक वारदातों में वांछित है। सुनील को भिवानी में एक हत्या के केस में उम्र कैद और पंचकूला में डकैती के मामले में 10 साल की सजा हुई थी। दोनों मामलों में कोर्ट से जेल से जमानत आने के बाद उसने फर्जी पते पर अपना पासपोर्ट बनवाया था। इसके बाद 2024 में है विदेश भाग गया था। अमेरिका द्वारा रिपोर्ट किए गए युवकों में से एसटीएफ में दोनों आरोपियों तुरंत हिरासत में ले लिया। अब दोनों पुलिस रिमांड पर लिया है। कर्ज लेकर गए थे विदेश डिपोर्ट हुए युवाओं में ज्यादातर वे हैं जिन्होंने अपने परिवार की जमीन, गहने बेचकर और ब्याज पर पैसा लेकर डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका जाने का प्रयास किया था। लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सीमा सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया और महीनों तक जेलों व डिटेंशन कैंपों में रखा। इन युवाओं में से अधिकांश ने 2024 और 2025 में यह सफर तय करना शुरू किया था। कैसे होता है डंकी रूट का सफर   डिपोर्ट हुए युवकों ने बताया कि पहले दिल्ली से ब्राजील जाया जाता है। वहां एजेंट लोकल गिरोहों के सहारे आगे भेजते हैं। ब्राजील से कोलंबिया, फिर पनामा और वहां से मौत का जंगल कहे जाने वाले दरियन गैप की शुरुआत होती है। 6 से 15 दिन तक लगातार जंगलों में पैदल चलना होता है। तेज बारिश, कीचड़, सांप-बिच्छू, दलदल को लांघकर कर आगे बढ़ना होता है। थककर गिर जाने वालों को डोंकर वहीं छोड़ देते है। कई बार उनको चलने के लिए मारपीट कर मजबूर किया जाता है। डोंकर हर चरण पर उनसे पैसे वसूलते हैं। इनमें पनामा ₹3–5 लाख, ग्वाटेमाला ₹5–7 लाख, मैक्सिको ₹6–10 लाख, अमेरिका बॉर्डर पार ₹2–4 लाख रुपए वसूले जाते हैं। सभी को मिलाकर लगभग 50–70 लाख रुपये खर्च होते हैं। फिर भी गारंटी शून्य रहती है।   सोचा था वहां पहुंचकर जिंदगी बदल जाएगी, पर जिंदगी ही खतरे में पड़ गई कैथल के गांव का 26 वर्षीय युवक ने बताया कि हम 18 लोग पनामा के जंगल में थे। दो लोग दलदल में धंस गए, कोई बचाने नहीं रुका। हम सब रोते हुए आगे बढ़ गए। डोंकर बोलते थे — ‘जिंदा रहना है तो बढ़ो, पीछे देखा तो तुम भी मरोगे। ग्वाटेमाला पहुंचने पर उससे 6 लाख रुपये, मैक्सिको की सीमा पर 6 लाख रुपये और अमेरिका सीमा तक पहुंचाने के नाम पर 3 लाख रुपये और ले लिए गए। अमेरिका की सीमा पर प्रवेश करते ही अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 28 से 70 दिन डिटेंशन कैंप में बंदी रहे, जहां 50–100 लोग एक ही बैरक में रहते थे। उन्हें भोजन में सिर्फ ब्रेड और सूप दिया जाता था। इसके अलावा उन्हें भाषा की समस्या रही तथा कोई कानूनी सहायता नहीं दी गई। अब तक 654 लोग किए जा चुके हैं डिपोर्ट इससे पहले भी हरियाणा के अमेरिका में अवैध तरीके से रहने वाले कुल 654 लोग अब तक डिपोर्ट किए जा चुके हैं। जनवरी से जुलाई 2025 तक हरियाणा के 604 नागरिकों को हथकड़ी पहनाकर सेना के जहाज से भारत डिपोर्ट किया गया था। अब हाल ही में 50 और लोगों को डिपोर्ट किए जाने के बाद यह संख्या बढ़कर 654 हो गई है। हरियाणा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी पिछले तीन वर्षों में हरियाणा से 3000 से अधिक युवा डंकी रूट से विदेश जाने के प्रयास में पकड़े गए हैं। इनमें से कई को जंगलों और सीमाई रास्तों पर वापस धकेल दिया गया, जबकि 200 से अधिक युवा अब तक लापता या ठगी का शिकार बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 100 से अधिक युवा अभी भी विदेशी जेलों में बंद हैं, जहां वे कानूनी सहायता के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन काट रहे हैं। यह स्थिति केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट बन चुकी है। परिवार कर्ज के बोझ में डूब रहे हैं, युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और गांवों में असुरक्षा और असमंजस का माहौल बढ़ रहा है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब मानव तस्करी, एजेंट नेटवर्क और अवैध यात्रा सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई की रणनीति तैयार कर रही हैं।

चांडलर लैंगविन के बयान से बवाल, भारतीयों पर की गई टिप्पणी से भड़की प्रतिक्रियाएं

वाशिंगटन अमेरिकी लीडर चांडलर लैंगविन ने भारतीयों के खिलाफ सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक पोस्ट किए हैं। इसे लेकर उन पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। फ्लोरिडा के इस राजनेता की टिप्पणियों के खिलाफ सिटी काउंसिल ने निंदा प्रस्ताव पारित किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम के बाद लैंगविन को अब कोई भी एजेंडा तय करने से पहले सहमति लेनी होगी। साथ ही, उन्हें आधिकारिक बयान से रोक दिया गया है और समितियों से भी हटा दिए गए हैं। लैंगविन ने भारतीयों की सामूहिक रूप से निर्वासन की मांग की थी। उसने कहा कि कोई भी भारतीय यूएस की परवाह नहीं करता और वे केवल आर्थिक शोषण के लिए यहां हैं। चांडलर लैंगविन ने अपनी पोस्ट में भारतीयों पर अमेरिका का शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्टॉकटन हादसे का जिक्र किया, जहां भारतीय मूल के हरजिंदर सिंह पर गैरकानूनी यूटर्न के कारण तीन लोगों की मौत का आरोप है। 2 अक्टूबर को अपनी जन्मदिन की पोस्ट में लैंगविन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सभी भारतीयों के वीजा रद्द करने और उन्हें तत्काल निर्वासित करने की मांग की थी। उसने लिखा, 'आज मेरा जन्मदिन है और मैं चाहता हूं कि ट्रंप सभी भारतीय वीजा रद्द करें और उन्हें तुरंत निर्वासित करें। अमेरिका अमेरिकियों के लिए है।' अमेरिकी नेता के बयान की कड़ी निंदा लैंगविन ने कहा कि भारतीय अमेरिकियों की जेब खाली करने के लिए यहां हैं। वे अमेरिका की संस्कृति में घुलमिल नहीं सकते। 18 अक्टूबर की पोस्ट में उन्होंने रूढ़िवादी हिंदुओं और भारतीयों का जिक्र किया जो उनकी निर्वासन की मांग का समर्थन करते हैं। हालांकि, बाद में लैंगविन ने साफ किया कि उनकी टिप्पणियां केवल अस्थायी वीजा धारकों के लिए थीं, न कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए। इन टिप्पणियों के बाद अमेरिका भर में भारतीय-अमेरिकी समूहों ने लैंगविन की कड़ी निंदा की है। उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है। इस विवाद ने यूएस में नस्लीय और आप्रवासी मुद्दों पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।