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आसिम मुनीर का सख्त संदेश: पाकिस्तान के ‘मकसद’ पर फिर गरमाया बयान, क्या है अगला एजेंडा?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के पोते और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।   कहां बोल रहे थे मुनीर इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है। अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था। कैसे अलग हैं मुनीर बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है। सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।  

ट्रंप का भरोसेमंद बना पाक सेना प्रमुख! आसिम मुनीर की ‘तरक्की’ से भारत क्यों सतर्क

वाशिंगटन  आज यानी 31 दिसंबर, साल 2025 का आखिरी दिन है। इस साल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने भारत के लिए गहरी चिंता खड़ी कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बार-बार सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की, उन्हें 'माई फेवरिट फील्ड मार्शल' कहा है, और कई मौकों पर ग्रेट फाइटर व हाइली रिस्पेक्टेड जनरल जैसी उपाधियां दी हैं। यह निकटता न केवल पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार डालने की क्षमता रखती है। भारत के एंगल से देखें तो यह ट्रंप की ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी का नतीजा है, जहां पाकिस्तान ने चापलूसी, झूठे नैरेटिव और आर्थिक लालच देकर अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने पक्ष में कर लिया है। लेकिन क्या इसके पीछे की हकीकत भारत के लिए खतरे की घंटी है? आइए समझते हैं कि आखिर कैसे पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर 2025 में ट्रंप के पसंदीदा फील्ड मार्शल बन गए।   सबसे पहले समझिए कि यह निकटता कैसे शुरू हुई। अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए। भारत ने इसका जवाब 'ऑपरेशन सिंदूर' से दिया- पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया, लेकिन सैटेलाइट इमेजेस से साफ हुआ कि उसे ही भारी नुकसान हुआ। चार दिन के संघर्ष के बाद पाकिस्तानी सेना अधिकारी के अनुरोध पर दोनों देशों के DGMO स्तर पर सीधे संपर्क से सीजफायर हुआ। ट्रंप ने इसमें अपना क्रेडिट लिया- दावा किया कि उन्होंने फोन कॉल्स और टैरिफ के जरिए परमाणु युद्ध टाला और एक करोड़ से ज्यादा जिंदगियां बचाईं। भारत ने इसे सिरे से खारिज किया, लेकिन पाकिस्तान ने मौके का फायदा उठाया। भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी विवाद को केवल द्विपक्षीय रूप से हल किया जा सकता है। लेकिन मई से, ट्रंप ने बार-बार इस संघर्ष का जिक्र किया है, चार दर्जन से अधिक मौकों पर जोर देकर कहा है कि उन्होंने युद्धविराम में मध्यस्थता की। उन्होंने विभिन्न मौकों पर विमानों को मार गिराने के दावों को भी दोहराया है। पाक पीएम शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के एक सदस्य ने अल-जजीरा को बताया- भारत के ट्रंप को सीजफायर का श्रेय देने से इनकार करने से एक ऐसा मौका मिला, जिसका आर्मी चीफ मुनीर और PM शरीफ ने तुरंत फायदा उठाया। पूर्व पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर ने भी मई के संघर्ष को निश्चित मोड़ बताया। अमेरिका के लिए कभी सहयोगी, तो कभी खतरनाक देश था पाक पाकिस्तान कभी अमेरिका का एक अहम सहयोगी था और 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए हमलों के बाद उसे एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश का दर्जा दिया गया था। अगले कुछ सालों में रिश्ते खराब हो गए, क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिका के तथाकथित आतंक पर युद्ध में इस्लामाबाद पर धोखे का आरोप लगाया। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने पाकिस्तान पर अमेरिका को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं देने और हथियारबंद ग्रुप्स को पनाह देने का आरोप लगाया। उनके उत्तराधिकारी, जो बाइडेन ने बाद में पाकिस्तान को सबसे खतरनाक देशों में से एक बताया। इसी समय, अमेरिकी पॉलिसी तेजी से भारत की तरफ मुड़ गई, जिसे वॉशिंगटन में चीन के संभावित मुकाबले के तौर पर देखा गया, जो पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक पार्टनर है। फिर भी, अपने दूसरे कार्यकाल के सिर्फ दो महीने बाद ही ट्रंप का रुख बदल गया। मार्च में कांग्रेस के एक जॉइंट सेशन को संबोधित करते हुए, उन्होंने अगस्त 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर एबे गेट बम धमाके के कथित दोषियों में से एक को गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान को धन्यवाद दिया। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक और दर्जनों अफगान नागरिक मारे गए थे, जब अमेरिका अफगानिस्तान से जल्दबाजी में निकल रहा था। फिर शुरू हुआ पाक का चापलूसी वाला दौर भारत के साथ मई में हुए संघर्ष के बाद, मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया, जो पाकिस्तान के इतिहास में यह रैंक पाने वाले दूसरे अधिकारी थे। उसी साल बाद में, एक संवैधानिक बदलाव से चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का पद बनाया गया, जिसे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) एक साथ संभालेंगे। ऑपरेशन सिंदूर में मार खाने के बावजूद मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति का दूत बताया और नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया। यही वह मीठी गोली थी जिसने ट्रंप को प्रभावित किया। जून 2025 में मुनीर को वाइट हाउस में अकेले लंच के लिए बुलाया गया- पाकिस्तानी आर्मी चीफ के लिए ऐतिहासिक पल था। वहां मुनीर ने ट्रंप की चापलूसी की, रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिप्टो डील और ट्रेड ऑफर्स दिए। इसके बाद ट्रंप की प्रशंसा का सिलसिला चला: सितंबर में दूसरी मीटिंग (शरीफ के साथ), अक्टूबर में गाजा पीस समिट में ट्रंप ने मुनीर को फेवरिट फील्ड मार्शल कहा और दिसंबर तक 10 से ज्यादा बार तारीफ की। पाकिस्तान ने इसे अपनी डिप्लोमेटिक कमबैक बताया। पाकिस्तान की रणनीति: चापलूसी और ट्रांजेक्शनल डील्स     पाकिस्तान के लिए मुनीर सोल्जर-डिप्लोमैट बन गए। उन्होंने ट्रंप को:नोबेल का लालच दिया।     बलूचिस्तान के रेयर अर्थ मिनरल्स का ऑफर।     क्रिप्टो और ट्रेड डील्स का वादा।     आतंकवाद विरोध में सहयोग (ISIS-K गिरफ्तारियां)।     गाजा स्टेबलाइजेशन फोर्स में ट्रूप्स भेजने की संभावना (जो अब दबाव बन रहा है)। ट्रंप, जो डील्स के शौकीन हैं, इससे प्रभावित हुए। पाकिस्तान को बेहतर ट्रेड टैरिफ मिले, जबकि भारत पर 50% टैरिफ लगाए गए। क्षेत्रीय और मध्य-पूर्वी संतुलन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान ने 2025 में बांग्लादेश, मध्य एशिया और मध्य-पूर्व में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान के साथ हुई रक्षा संधि को वर्ष की सबसे अहम उपलब्धियों में माना जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान ने गाजा में युद्ध को लेकर ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल में शामिल होने की इच्छा भी जताई है। घरेलू राजनीति और आलोचनाएं जहां विदेशी मोर्चे पर पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ी, वहीं देश के भीतर आलोचनाएं भी तेज हुईं। मई संघर्ष के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा मिला और संवैधानिक संशोधन … Read more

आसिम मुनीर की बेटी का निकाह सगे भाई के बेटे से, तस्वीरें नहीं और आयोजन रहा सीक्रेट

 इस्लामाबाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था। पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई। आसिम मुनीर की बेटी की शादी क्यों रही इतनी सीक्रेट  पाकिस्तान में आसिम मुनीर की ताकत के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि इसमें देश-दुनिया के 400 वीआईपी मेहमान जुटे थे। आसिम मुनीर ने बेटी की शादी अपने भाई सैयद कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान से ही की है। इस तरह अपने भतीजे से ही आसिम मुनीर ने बेटी की शादी कर दी है, जो आपस में चचेरे भाई-बहन ही थे। इस शादी को लेकर भारत में कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि पाकिस्तान में ऐसी शादियां सामान्य हैं। करीब दो तिहाई शादियां पाकिस्तान में ऐसी ही होती हैं, जिनमें कजिन के बीच रिश्ते होते हैं। इस तरह यह कोई हैरानी वाली बात नहीं है। मुख्य बात यह है कि आसिम मुनीर की बेटी की शादी रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में ही हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था एकदम पुख्ता है। आसिम मुनीर पाकिस्तान में सबसे मजबूत शख्सियत बन चुके हैं और वह किसी भी तरह का रिस्क बाहर आयोजन करके नहीं लेना चाहते थे। यही नहीं इस शादी को इतना सीक्रेट रखा गया कि एक तस्वीर तक मीडिया या सोशल मीडिया में नहीं आई है। पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने कहा कि यह शादी रावलपिंडी में हुई थी। आसिम मुनीर की तीसरी बेटी की शादी उनके ही भाई के बेटे यानी भतीजे से हुई। इस हाईप्रोफाइल शादी में करीब 400 लोग शामिल थे। अपने भाई सैयद कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान को ही आसिम मुनीर ने अपना दामाद चुना है। पहले वह पाकिस्तान की आर्मी में कैप्टन के तौर पर काम करते थे। इसके बाद उन्होंने आर्मी कोटा से ही सिविल सर्विसेज जॉइन किया था और फिलहाल असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। इस आयोजन में आसिफ अली जरदारी, पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी पंजाब की सीएम मरियम नवाज भी मौजूद थे। पिछले हफ्ते हुआ निकाह अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है। कौन है पाकिस्तान का नया दामाद जनरल असीम मुनीर की तीसरी बेटी महनूर का निकाह भाई कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान से हुआ है. अब्दुल रहमान पहले पाकिस्तान सेना में कैप्टन के पद पर थे. इसके बाद वो सेना के कोटे से ही सिविल सर्विसेज में आए और वर्तमान में असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में तैनात हैं. दावा किया जा रहा है कि अब्दुल रहमान, मुनीर के करीबी हैं और दोनों के बीच पहले से ही काफी अच्छे संबंध रहे हैं. बता दें कि मुनीर की चार बेटियां हैं, जिसमें से तीसरी बेटी की ये आलीशान शादी पिछले हफ्ते हुई है. बताया जा रहा है कि मुनीर ने अपनी बेटी की शादी आलीशान तरीके से की है, सुरक्षा कारणों से इस समारोह की कोई तस्वीर बाहर नहीं आने दी गई. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस वेडिंग सेरेमनी में पाकिस्तान की लगभग पूरी सरकार ही आ गई थी. बताया जा रहा है कि गेस्ट लिस्ट में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज, आईएसआई (ISI) चीफ, रिटायर्ड जनरल्स और सेना के कई पूर्व प्रमुख शामिल थे. दावा किया जा रहा है कि रावलपिंडी में हुई इस शादी में 400 खास मेहमानों को ही न्योता दिया गया था. क्या करता है दूल्हा? दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे। पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।

वीडियो विवाद के बाद बवाल: आसिम मुनीर के गुस्से का शिकार बना इमरान खान का पूर्व सलाहकार, लंदन में जानलेवा हमला

लंदन  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और पूर्व जवाबदेही सलाहकार मिर्जा शहजाद अकबर पर ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में उनके घर के पास नकाबपोश हमलावरों ने जानलेवा हमला किया। हमले में अकबर के चेहरे पर कई मुक्के मारे गए, जिससे उनकी नाक दो जगहों से टूट गई और जबड़े में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया। वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे सुनियोजित हमला करार दिया। पार्टी के अनुसार, हमलावर मास्क, दस्ताने और ओवरकोट पहने हुए था जो पहले से प्लानिंग का संकेत देता है। पीटीआई का दावा है कि हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के इशारे पर किया गया, क्योंकि अकबर उनकी कट्टर आलोचना करते रहे हैं। वायरल भाषण के बाद हमला हमला ऐसे समय हुआ जब अकबर का एक हालिया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर एक प्रदर्शन में अकबर ने मुनीर पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि मुनिर पिछले साढ़े तीन वर्षों से पाकिस्तान को डर और आतंक से चला रहे हैं। अकबर ने अपने भाषण में कहा- उन्होंने हमारे घरों पर हमला किया, हमारे प्रियजनों को अगवा किया, हमें और हमारे नेताओं को अगवा किया। हर तरह की ज्यादतियां कीं ताकि हममें डर पैदा हो। अगर वे सफल होते तो आज हम यहां बड़ी संख्या में न होते। अगर उनका डर फैल जाता तो अदियाला जेल के बाहर इमरान खान की तीन बहनें न बैठी होतीं। इसका मतलब है कि वे असफल हो चुके हैं। उन्होंने मुनीर पर व्यंग्य करते हुए कहा- डर और आतंक उस व्यक्ति में फैल गया है जो अभी भी अपनी यूनिफॉर्म के नीचे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनता है। पीटीआई का कहना है कि यह हमला इसी भाषण का बदला है और इसे सिलसिलेवार दमन का मामला बताया जा रहा है। पार्टी ने ब्रिटिश पुलिस से पूरी जांच की मांग की है। प्रत्यर्पण की कोशिशें और पुराना हमला अकबर 2022 में इमरान खान की सरकार गिरने के बाद से ब्रिटेन में स्व-निर्वासन में रह रहे हैं। पाकिस्तान सरकार उन्हें विभिन्न मामलों में आरोपी मानती है और हाल ही में उनका प्रत्यर्पण मांग रही है। दिसंबर में पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ब्रिटिश अधिकारियों को प्रत्यर्पण दस्तावेज सौंपे थे, जिसमें नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी), फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) और अन्य जांचों के केस शामिल हैं। पाकिस्तानी अदालत ने अकबर को भगोड़ा घोषित किया है। यह अकबर पर ब्रिटेन में दूसरा हमला है। 2023 में हर्टफोर्डशायर में उनके घर पर एसिड अटैक हुआ था, जिसमें उनके चेहरे, सिर और बांह पर जलन के निशान पड़ गए थे। उस हमले के बाद उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर आरोप लगाए थे, लेकिन ब्रिटिश पुलिस जांच बंद कर चुकी है। अकबर के समर्थकों और पीटीआई ने इसे पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व द्वारा विदेशों में आलोचकों को निशाना बनाने का उदाहरण बताया है। मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है कि राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए ट्रांसनेशनल दमन बढ़ रहा है। ब्रिटिश पुलिस ने हमले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज आदि सुरक्षित कर लिए हैं। अकबर ने हमले के बाद कहा कि वे घायल हैं लेकिन हतोत्साहित नहीं। वे पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

खैबर पख्तूनख्वा में आसिम मुनीर को लेकर घमासान, विपक्ष की तीखी चेतावनी सेना को

पेशावर  पाकिस्तान में आसिम मुनीर को भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया है। इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का दर्जा भी संविधान संशोधन करके मिला है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि भारत से मिली हार को छिपाया जा सके और जनता में गलत जानकारी देकर ही सही, सेना और सरकार का भरोसा कायम रहे। फिर भी इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पीटीआई से सेना की अदावत जारी है। यहां तक कि गुरुवार को तो खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा में आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए जाने पर विवाद छिड़ गया।   इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की ओर से इमरान खान और खैबर के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर भी विवाद मचा है। सदन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की महिला विधायक सोबिया शाहिद ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। इस पर स्पीकर सुरैया बीबी ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे आसिम मुनीर के पोस्टरों को हटाएं। इसके अलावा उन्होंने पीएमएल-एन की विधायक से भी कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आपकी पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तस्वीरें लहराने का क्या मतलब है। वहीं पीटीआई के विधायकों ने कहा कि इस देश में गंभीर समस्याएं हैं। गरीबी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। इसके बाद भी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पीटीआई नेतृत्व के खिलाफ बयान देते हैं। विशेष तौर पर इमरान खान और सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ उन्होंने जो बोला है, उससे खैबर पख्तूनख्वा के लोगों में गुस्सा है। पीटीआई के विधायक हुमायूं खान ने कहा कि आखिर सेना के लोगों को राजनीतिक मसले में बोलने की क्या जरूरत है। खान ने कहा कि कुछ लोग यहां राष्ट्रपति शासन लगवाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में इससे संकट ही पैदा होगा और लोग ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे।  

CDF बनने के बाद आसिम मुनीर का असर बढ़ा, CJCSC की जगह ली नई प्रणाली में

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त करने की औपचारिक मंजूरी दे दी. उन्हें यह पद पांच साल के कार्यकाल के लिए दिया गया है. राष्ट्रपति द्वारा यह मंजूरी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा भेजी गई उस संस्तुति पर दी गई, जिसमें उन्हें सेना प्रमुख और CDF पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की गई थी. नए संवैधानिक संशोधन के तहत पद का गठन पिछले महीने पाकिस्तान की संसद ने 27वें संविधान संशोधन को पारित किया था, जिसके तहत CDF का पद सृजित किया गया. इस पद का उद्देश्य देश की रक्षा संरचना में यूनिटी ऑफ कमांड सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण परिस्थिति में त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना है. CDF पद ने चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के पद की जगह ले ली है, जिसे अब खत्म कर दिया गया है. राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं दीं राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जरदारी ने नई नियुक्ति के लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को शुभकामनाएं दी हैं. इसके साथ ही राष्ट्रपति ने एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू को दो साल का कार्यकाल विस्तार भी मंजूर किया है, जो उनके मौजूदा कार्यकाल के 19 मार्च, 2026 को पूरा होने के बाद लागू होगा. मुनीर का कार्यकाल और नियुक्ति प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पहले आसिम मुनीर को आर्मी चीफ और CDF दोनों पदों पर नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया था, जिसे बाद में राष्ट्रपति को भेजा गया. आसिम मुनीर को नवंबर 2022 में COAS नियुक्त किया गया था, उस समय उनका कार्यकाल तीन वर्षों का था. लेकिन 2024 में इसे बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया था. सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद उस देरी से जुड़ी अटकलों पर विराम लगा, जिनमें कहा जा रहा था कि नए CDF की नियुक्ति समय पर नहीं हो पा रही. नियुक्ति 27 नवंबर से लंबित थी, जब पिछले CJCSC जनरल साहिर शमशाद मिर्जा सेवानिवृत्त हुए थे.

शहबाज के फैसले से अटका आसिम मुनीर का CDF नोटिफिकेशन, पाकिस्तान में सुर्खियों में मामला

नई दिल्ली पाकिस्तान में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) नोटिफिकेशन की देरी ने सियासी हलचल तेज कर दी है. पाकिस्तान में सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PMLN) सूत्रों के मुताबिक यह देरी सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे बड़ी सौदेबाजी चल रही है. दावा है कि नवाज शरीफ अगली बार भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने सेना प्रमुख असिम मुनीर के सामने सीधे डील रखी है. सूत्रों का कहना है कि नवाज शरीफ और मरियम नवाज ने असिम मुनीर के CDF और COAS दोनों पदों पर पांच साल का कार्यकाल मंजूर करने के बदले में अपनी शर्तें रखीं. PMLN की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया कि अगर असिम मुनीर को पांच साल का टेन्योर चाहिए, तो उन्हें नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करनी होगी. इसी वजह से CDF नोटिफिकेशन को रोककर मोलभाव किया जा रहा है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह पूरा सत्ता-संतुलन अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुए मरी प्लान का हिस्सा है. इस मीटिंग में नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ, असिम मुनीर, मरियम नवाज, असीम मलिक और मोहसिन नकवी शामिल थे. मीटिंग में दस साल के एक नए संयुक्त सत्ता ढांचे पर सहमति बनी थी. PMLN का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से वादा पूरा कर दिया, यानी असिम मुनीर के लिए पांच साल का रास्ता खोल दिया. अब बारी सेना प्रमुख की है कि वे मरी प्लान के मुताबिक नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएं. शरीफ खानदान की क्या है डिमांड? इसी के साथ नवाज शरीफ और मरियम नवाज सेना से भविष्य की सुरक्षित गारंटियां भी मांग रहे हैं. मरियम नवाज के एक करीबी साथी के अनुसार शरीफ परिवार चाहता है कि आने वाले वर्षों के लिए भी उनका राजनीतिक स्पेस सुरक्षित किया जाए. टॉप सूत्रों का दावा है कि नवाज शरीफ ने फौज में कुछ अहम प्रमोशन और पोस्टिंग को भी अपनी कंसल्टेंसी और सहमति के साथ मंजूर किए जाने की मांग रखी है. दावा है कि लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया को वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया जाए और लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक को कमांडर NSC की जिम्मेदारी दी जाए. इसके अलावा कुछ अन्य मेजर और लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारियों को भी अहम पदों पर लगाने की मांग की गई है. CDF नोटिफिकेशन का क्या है विवाद? इस बीच पाकिस्तान की राजनीति में एक और सवाल उठ रहा है. क्या शहबाज शरीफ खुद अटकाव की वजह हैं? CDF का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है, जबकि असिम मुनीर का कार्यकाल 29 नवंबर को बढ़ना था. शहबाज लंदन यात्रा पर थे और स्वास्थ्य कारणों से उनकी वापसी में देरी हुई, जिससे कई नई चर्चाओं को हवा मिली. कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि शहबाज शरीफ जानबूझकर दूरी बनाए हुए थे, ताकि असिम मुनीर को पांच साल का कार्यकाल और CDF का पद देने में अपनी राजनीतिक जोखिम को कम कर सकें. उनके साइन का इंतजार होने की वजह से पाकिस्तान में एक तरह का संवैधानिक खालीपन भी बन गया है.

‘सर्वेसर्वा’ बने असीम मुनीर! सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां सीमित, राजनीति में मचा तूफ़ान

नई दिल्ली  पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर अब तीनों सेना के प्रमुख बन गए हैं। पाकिस्तान के इतिहास में यह बड़ा बदलाव हुआ है। पाकिस्तानी असेंबली में इस बिल को 234 मतों के साथ पास किया गया। असीम मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) होंगे। असीम 27 नवंबर से इस पद का कार्यभार संभालेंगे। इसके बाद परमाणु हथियारों का भी कमांड उन्हीं के हाथों में होगा। हैरानी की बात यह है कि इस संशोधन के साथ ही मुनीर की शक्तियां बढ़ गईं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों में कमी आई है। इस संशोधन के प्रावधान के तहत मुनीर अब अपने कार्यकाल को समाप्त करने के बाद भी इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे। वह ना तो रिटायर होंगे, ना उनसे यह पद लेकर किसी और को दिया जाएगा। आसान सी भाषा में कहें, तो अब वह सर्वेसर्वा होंगे। संशोधन के अनुसार, सभी संवैधानिक मामलों को कोर्ट से हटाकर फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट (एफसीसी) में शिफ्ट किया जाएगा। इसके तहत अब जजों की नियुक्ति भी सरकार ही करेगी। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, 27वें संशोधन में आखिरी समय में कुछ बदलाव किया गया। इसके तहत फिलहाल वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान (सीजेपी) याह्या अफरीदी अपने कार्यकाल के दौरान सीजेपी के पद पर ही रहेंगे। सीजेपी अफरीदी ने अक्टूबर 2024 में 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी, ऐसे में उनका कार्यकाल तीन साल बाद खत्म होगा। संशोधन के अनुसार सीजेपी का मतलब दोनों मुख्य न्यायाधीशों में से वरिष्ठ न्यायाधीश है। यह प्रावधान अफरीदी के अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद लागू होगा। यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी उनकी ताकत छीन ली गई है। मुनीर पहले पर्दे के पीछे से सरकार संभाल रहे थे, लेकिन अब लग रहा है कि वह पर्दे से बाहर आकर सत्ता संभालेंगे। दरअसल, नेशनल कमांड अथॉरिटी पहले परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम की निगरानी और कंट्रोल करती थी। इसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री करते थे। हालांकि, इस पर भी मुनीर का कंट्रोल होगा। विपक्ष इस संशोधन के खिलाफ आवाज उठा रहा है। पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ जमकर इसका विरोध कर रही है। पीटीआई नेताओं ने ना केवल सत्र का बहिष्कार किया, बल्कि विधेयक की प्रतियां भी फाड़ दी। तहरीक तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान ने इस संशोधन के खिलाफ जन आंदोलन का ऐलान भी किया है। हालांकि, यह आंदोलन कब होगा, इसे लेकर फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

अब फौज ही फैसला करेगी! आसिम मुनीर बने Supreme Commander, PM भी रहेंगे साइडलाइन?

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर का कद एक बार फिर बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक बहुचर्चित 27वां संविधान विधेयक पाकिस्तान की संसद में पास हो गया है। इसके तहत सेना प्रमुख के बेतहाशा ताकत मिल गई है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब तीनों सेनाओं के प्रमुख होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अगुआई में ये सारे बदलाव लागू होंगे। इस नए कानून से सेना प्रमुख को सुपरपावर मिल जाएगी जो कि तख्तापलट को संवैधानिक मंजूरी देने के बराबर है।   इस विधेयक में संविधान के 243वें आर्टिकल में बदलाव किया गया है। यह आर्टिकल सशस्त्र बलों से जुड़ा हुआ है। इसके तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के मशविरे पर सेना प्रमुख और रक्षा बल प्रमुख की नियुक्ति करेंगे। सेना प्रमुख अब रक्षा बलों के प्रमुख भी होंगे। इसके अलावा रक्षा प्रमुख ही राष्ट्रीय सामरिक कमान के प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री से सलाह करके करेंगे। बता दें कि आसिम मुनीर को पहले ही फील्ड मार्शल का पद दे दिया गया था। वहीं इस संविधान संशोधन विधेयक से इसे संवैधानिक मान्यता दे दी गई है। फील्ड मार्शल का पद और विशेषाधिकार आजीवन बने रहेंगे। इसके अलावा अब जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया जाएगा। पाकिस्तान के कानून मंत्री ने बताया कि अब 27 नवंबर के बाद से सीजेसीएससी के पद पर नियुक्ति नहीं होगी। इसके अलावा इस कानून से सरकार को फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और ऐडमिरल ऑफ फ्लीट के पद पर अधिकारियों के पदोन्नत करने का अधिकार भी मिल जाता है। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से परेशान होने के बाद पाकिस्तान ने ये बदलाव किए हैं। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने पिछले महीने कहा था कि भारत के हमलों में अमेरिकी एफ-16 विमान समेत कम से कम 12 पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए। भारत का कहना है कि मई में भारतीय सेना द्वारा विभिन्न पाकिस्तानी सैन्य ढांचों पर बमबारी के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष समाप्त करने का अनुरोध किया था। संघर्ष के तुरंत बाद, पाकिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ के पद पर पदोन्नत कर दिया, जिससे वह देश के इतिहास में इस पद पर पदोन्नत होने वाले दूसरे शीर्ष सैन्य अधिकारी बन गये थे। ॉ इसके अलावा सेना का समन्वय ठीक करने के लिए उसने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद सृजित करने की योजना बनाई थी। प्रधानमंत्री भी फील्ड मार्शल को हटा नहीं सकते बता दें कि फील्ड मार्शल का पद प्रधानमंत्री भी छीन नहीं सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सामरिक कमान के कमांडरों की नियुक्ति करेंगे जिससे पाकिस्तान के परमाणु कमान ढांचे पर सैन्य नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। इसके अलावा फील्ड मार्शल पर महाभियोग लगाने या फिर उपाधि खत्म करने का अधिकार भी प्रधानमंत्री के पास नहीं होगा। रिटायरमेंट के बाद फील्ड मार्शल को और भी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

टीटीपी का सीधे शब्दों में चैलेंज — अगर मां का दूध पिया है तो आकर लड़ो: आसिम मुनीर ललकारे गए

काबुल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। भले ही सीजफायर को आगे बढ़ाया गया हो, लेकिन बीच-बीच में संघर्ष के मामले सामने आ ही जाते हैं। इस बीच, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP या पाकिस्तानी तालिबान) ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को धमकी दी है। पाकिस्तानी तालिबान ने मुनीर से कहा है कि अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो। टीटीपी के सामने आए वीडियोज में उसके कमांडर का कहना है कि मुनीर को अपने सैनिकों को मरने के लिए भेजने के बजाए, अपने टॉप अधिकारियों को जंग के मैदान में भेजना चाहिए। खबर के अनुसार, तमाम वीडियोज में आठ अक्टूबर को खैबर पख्तनूख्वा के कुर्रम इलाके में हुए हमले के फुटेज भी शामिल हें। इसमें टीटीपी ने 22 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था, जिससे हड़कंप मच गया। हालांकि, पाकिस्तान ने संख्या को छिपाते हुए सिर्फ 11 सैनिकों के मारे जाने की ही बात स्वीकारी। एक वीडियो में टीटीपी का सीनियर कमांडर जिसकी पहचान कमांडर काजिम से हुई है, वह पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर को धमकी देते हुए दिखाई दे रहा। वीडियो में काजिम कहता है, ''अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो।'' वीडियो में आगे कहता है कि अगर तुमने अपनी मां का दूध पिया है, तब हमसे लड़ाई करो। इस वीडियो से पाकिस्तानी सेना में दहशत व्याप्त हो गई है। पाकिस्तान ने काजिम पर दस करोड़ (पाकिस्तानी रुपये) का इनाम रख दिया है। माना जा रहा है कि काजिम हाल ही में पाक सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर की हत्या में शामिल था। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि काजिम, जो कुर्रम जिले का रहने वाला है, पाराचिनार जा रहे मिलिट्री काफिलों और शिया समुदाय की गाड़ियों पर हमलों के पीछे भी था। उस पर कुर्रम के डिप्टी कमिश्नर जावेदुल्लाह महसूद की हत्या की कोशिश की साज़िश रचने का भी आरोप है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते 2023 से ही खराब हैं, लेकिन अब ज्यादा तनाव पैदा हो गया है। इस्लामाबाद ने बार-बार इस बात पर चिंता जताई है कि आतंकवादी बॉर्डर पार से हमले करने के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।