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बरगी डैम में रिकॉर्ड गिरावट, एक्सपर्ट बोले- गेट खोलने पर भी नहीं निकलेगा पानी; बारिश नहीं हुई तो गहराएगा संकट

जबलपुर  बरगी बांध में 42 सालों बाद इतना पानी कम हो गया है कि बांध के तल से अनोखी चीजें निकलकर सामने आ रही है. कहीं, अचानक पुरानी नाव सामने आने से चर्चा का विषय बनी हुई है तो कहीं मंदिर दिखाई देने से लोग हैरान हैं. वहीं, बरगी बांध के दक्षिणी तट का गेट पूरी तरह ऊपर दिखाई देने लगा है, जिसे पिछले 42 सालों में लोगों ने जल भराव के बाद कभी नहीं देखा था।  बरगी बांध के बुरे हाल, कभी नहीं सूखा इतना पानी जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने इस विशाल डैम में रोजाना 5 सेंटीमीटर के करीब पानी कम हो रहा है. बरगी बांध का कुछ पानी गर्मी की वजह से उड़ जाता है, तो वहीं कुछ हिस्सा नर्मदा नदी में प्रवाह बनाए रखने, पावर प्लांट चलाने और नहरों के लिए निरंतर प्रवाहित किया जाता है. खरीफ के मौसम में किसानों को धान की खेती के लिए नहरों से पानी भेजा जाता है, जिससे अब बांध का पानी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी और बांध के प्रभारी राजा राम रोहित ने बताया, ''बांध में रोज 5 सेंटीमीटर पानी की कमी आ रही है और बांध का वर्तमान जलस्तर समुद्र तल से 407.45 मीटर है. इसके अनुसार बांध में अब मात्र 5.5 मीटर पानी ही शेष बचा है।  आज तक बांध का ऐसा हाल नहीं देखा बरगी नगर में रहने वाले स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने कहा, '' बचपन से ही बरगी नगर में ही रहे हैं लेकिन बांध में इतना कम पानी पहले कभी नहीं देखा. बरगी बांध का पानी कम होने के साथ ही बांध के कुछ ऐसे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं, जो पहले लोगों ने कभी नहीं देखे. बरगी बांध में बायीं ओर से नहर से पानी नरसिंहपुर जिले के लिए जाता है और दायीं ओर पानी को सतना तक ले जाने की तैयारी है. फिलहाल यह पानी कटनी जिले तक जा रहा है।  पहली बार 407 मीटर तक गिरा बरगी डैम का जलस्तर बरगी डैम को फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, वहीं इसकी दायीं नहर का गेट लगभग 409 मीटर पर लगा हुआ है और डैम का पानी कभी 408 मीटर के नीचे नहीं जाता था. लेकिन इस साल यह पानी 407 मीटर के स्तर तक गिर गया है. इसकी वजह से बांध की दायीं ओर का कैनाल गेट पानी के ऊपर नजर आ रहा है. नीरज मिश्रा ने कहा, '' बरगी बांध में पहली बार पानी 42 साल पहले भरा गया था और 42 साल में यह पहला मौका है जब यह गेट पानी के बाहर आया है।  इतना बड़ा है डैम का कैनाल गेट पानी से बाहर नजर आ रहा बरगी डैम का कैनाल गेट लगभग 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट ऊंचाई का एक भीमकाय स्ट्रक्चर है, जिसमें 50 फीट हिस्सा हमेशा पानी में डूबा रहता है. बांध के इस हिस्से से जो पानी छोड़ा जाता है उससे दायीं नहर में पानी जाता है, यह नहर किसी नदी से कम नहीं है. इस हिस्से में लोहे के तीन बड़े गेट हैं. जब इससे पानी छोड़ा जाता है तो दायीं नहर में लगभग 20 फीट पानी होता है. यह इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना है. इसी पानी को जबलपुर से कटनी और कटनी के आगे स्लीमनाबाद टनल से होते हुए सतना तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।  बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है। 15 साल में सबसे खराब स्थिति बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था। जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है। बिजली उत्पादन पर असर कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है। डैम के तल में नजर आया मंदिर और पुरानी बोट बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में पानी कम होने की वजह से एक मंदिर भी चर्चा में है, जो हमेशा पानी में डूबा रहता था. इस बार ये मंदिर पानी के बाहर नजर आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ बरगी बांध के पुनर्वास विभाग की एक नाव भी चर्चा में है, जो लावारिस छोड़ दी गई थी और पानी कम होने की वजह से अब दिख रही है. बरगी बांध में अचानक इतना पानी कम क्यों हुआ यह चर्चा और जांच का विषय है. जांच ये होनी चाहिए कि बांध का पानी केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हुआ है या कोई लापरवाही बरती गई है. क्योंकि बांध से इस तरह पानी कम होना भविष्य में संकट की ओर इशारा कर रहा है।  पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है। लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर … Read more

जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज दुर्घटना: 4 की गई जान, 14 सुरक्षित; सर्च ऑपरेशन तेज

जबलपुर नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर से करीब 25 किमी दूर बरगी बांध में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया, जहां तेज आंधी के दौरान एक क्रूज डूब गया। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस क्रूज में करीब 29 पर्यटक सवार थे। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं। शाम की घटना घटना शाम करीब छह बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार क्रूज पर्यटकों को लेकर बांध की लहरों के बीच चल रहा था, तभी अचानक तेज आंधी चली और क्रूज अनियंत्रित होकर पानी में समा गया। 15 लोगों को बचाया गया अब तक करीब 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। क्रूज के कैप्टन महेश पटेल लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। मंत्री मौके के लिए रवाना घटना की जानकारी मिलते ही राकेश सिंह डुमना एयरपोर्ट से सीधे घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।

बरगी बांध पर संकट, 7 साल से रिसाव जारी, विशेषज्ञों ने दी ‘बड़ी आपदा’ की चेतावनी

जबलपुर  केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने रानी अवंती बाई सागर परियोजना (बरगी बांध) की गैलरी से लगातार हो रहे पानी के रिसाव को गंभीर खतरा बताया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) को तीन दिन पहले सौंपी रिपोर्ट में संयुक्त जांच दल ने अनेक सवाल उठाए हैं। साथ ही एनवीडीए को नोटिस देकर 30 दिनों में जवाब मांगा है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। क्या निकला रिपोर्ट में रिपोर्ट के अनुसार बरगी बांध के रखरखाव, निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर खामियां हैं। टीम ने माना है कि बांध की स्थिति से लेकर खतरे तक को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बांध की मैसनरी स्पिलवे गैलरी से वर्ष 2018 से रिसाव बना हुआ है। सात वर्षों बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। इस पर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने एनवीडीए को चेतावनी दी है कि इतने लंबे समय तक रिसाव को नजरअंदाज करना बांध की संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर सकता है और भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। निगरानी तंत्र कमजोर रिपोर्ट में बांध के सुरक्षा वर्गीकरण को भी भ्रामक बताया गया है। निरीक्षण दल के अनुसार, बरगी बांध को मामूली कमियों की श्रेणी में रखना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। रिसाव के दबाव और व्यवहार को मापने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रभावी निगरानी प्रणाली का अभाव है। साथ ही, अति-संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की आवाजाही जारी है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने भी इसे लाखों लोगों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ बताया है। अधिकारियों का क्या कहना राजेश सिंह, ईई, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने सितंबर 2025 में निरीक्षण किया था। कुछ कमियां निकाली हैं, जिनका सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद जांच करवाकर हम पता करेंगे कि कहां-कहां से पानी की रिसाव हो रहा है।