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डायमंड हार्बर के कई बूथों पर EVM विवाद, चुनाव आयोग दोबारा मतदान पर विचार में

कोलकाता बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के बीच ईवीएम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कई पोलिंग बूथों पर ईवीएम मशीनों में उसके चुनाव चिह्न ‘कमल’ वाले बटन को टेप लगाकर ढक दिया गया, जिससे मतदाता अपनी पसंद का वोट नहीं दे सके। इस आरोप को लेकर सियासत तेज हो गई है और चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख व बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि दक्षिण 24 परगना के फलता क्षेत्र के कई बूथों पर यह गड़बड़ी हुई। उनके अनुसार, हरिणडांगा हाई स्कूल स्थित बूथ संख्या 144 (भाग 170) और बूथ 189 सहित कई जगहों पर भाजपा के विकल्प को टेप से ब्लॉक कर दिया गया। भाजपा ने इसे “डायमंड हार्बर मॉडल” बताते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर चुनावी धांधली का आरोप लगाया। शाह और सुवेंदु में हुई बात इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस है, जबकि भाजपा नेताओं ने आरोपों के जरिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले क्षेत्र डायमंड हार्बर की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, फलता से तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान का नाम भी विवादों में घिरा है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी दो विशिष्ट बूथों का जिक्र करते हुए पुनर्मतदान की मांग की और इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाने का दावा किया। खबर है कि शाह और सुवेंदु के बीच टेलीफोन पर काफी देर बात हुई है जिसमें उन्होंने अधिकारी से पूरी स्थिति की जानकारी ली। सुवेंदु ने दावा किया कि यह अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी जहांगीर खान का पुराना तरीका है, जिसे इस विधानसभा चुनाव में भी दोहराने की कोशिश की गई है। आयोग की चेतावनीः सीसीटीवी से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर होगी कार्रवाई इधर, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि आयोग इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी ईवीएम के बटन पर टेप लगाए जाने की पुष्टि होगी, वहां अनिवार्य रूप से पुनर्मतदान कराया जाएगा। उन्होंने “जीरो टालरेंस” नीति का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं अधिक पाई गईं, तो पूरे क्षेत्र में भी री-पोल कराया जा सकता है। आयोग के अनुसार, मॉक पोल के दौरान ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई थी, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वोटिंग के दौरान ही शरारती तत्वों ने मशीनों से छेड़छाड़ की। सीसीटीवी फुटेज के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई की बात भी कही गई है। छिटपुट चुनावी हिंसा और तनाव के बीच भवानीपुर सहित कुछ अन्य इलाकों में भी झड़प और विरोध प्रदर्शन की खबरें आई हैं। कुल मिलाकर, दूसरे चरण की वोटिंग ने जहां राजनीतिक तापमान बढ़ाया है, वहीं बटन पर टेप विवाद ने नई बहस को जन्म दे दिया है।  

तीन फेज़ में बंगाल चुनाव का ऐलान, डबल फोर्स के साथ सख्त तैयारी में चुनाव आयोग

कोलकाता पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं और इलेक्शन कमिशन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इलेक्शन तीन ही राउंड में इस बार कराए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह आयोग की बड़ी सफलता होगी क्योंकि 2021 में राज्य में 8 राउंड में वोटिंग हुई थी। आमतौर पर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर संवेदनशील स्थिति होती है। इसके अलावा चुनावी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इलेक्शन के राउंड ज्यादा होते थे, लेकिन इस बार कम चरणों में ही इन्हें निपटाने की तैयारी है। 2021 में ज्यादा राउंड होने की एक वजह कोरोना भी था, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर भी बंगाल में ज्यादा राउंड में वोटिंग होती रही है।   चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बंगाल में अर्ध सैनिक सुरक्षा बलों के करीब ढाई लाख जवान तैनात हो सकते हैं। यह आंकड़ा पहले के मुकाबले करीब डबल होगा। इसका मकसद यही है कि कम चरणों में चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा के लिहाज से भी बंगाल एक संवेदनशील राज्य रहा है। फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके बाद जल्दी ही केंद्रीय चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल का दौरा करेगा और तैयारियों का जायजा लेगा। इस संबंध में 5 जनवरी को एक मीटिंग भी हुई थी। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों से बात की थी, जहां इस साल चुनाव होने हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान बंगाल के चुनाव अधिकारियों ने दिल्ली में हुई मीटिंग में बताया कि आखिर कितने राउंड घटाए जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि राज्य तीन राउंड में वोटिंग के लिए तैयार है। इसके लिए सुरक्षा बलों की संख्या में थोड़ा इजाफा करना होगा। फिलहाल चुनावी पंडित इसके भी आकलन में जुट गए हैं कि यदि राउंड कम हुए तो इससे किसे फायदा मिलेगा। भाजपा सूत्र तो इससे उत्साहित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चलने वाले चुनाव में ममता बनर्जी के पास एडवांटेज रहता है। वह कभी बांग्ला कार्ड चलती हैं तो कभी कोई और मुद्दा ले आती हैं। लंबे चुनाव में उनके पास अपने खिलाफ बनी ऐंटी इनकम्बैंसी की काट के लिए मौका होता है। लेकिन यदि चुनाव की अवधि कम हो तो ऐसा नहीं हो पाता। बता दें कि 2021 में बंगाल में चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चले थे और फिर 2 मई को नतीजे आए थे। इस बार राज्य की 294 सीटों पर अप्रैल के आखिरी सप्ताह या फिर मई की शुरुआत में वोट डाले जा सकते हैं।