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सतना के ग्राम बैरहना में 24 अप्रैल से श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का आयोजन

सतना सतना जिले के अंतर्गत ग्राम बैरहना में दिनांक 24 अप्रैल से 1 मई  2026 तक विशाल श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है ! जिसमे चित्रकूट आश्रम के पीठाधीश्वर श्री 1008 राजगुरु स्वामी श्री बद्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज के श्री मुख से कथा की अमृत वर्षा होगी ! कार्यक्रम के आरम्भ में भव्य कलशजल शोभा यात्रा प्रातः 9:00 बजे ग्राम बैरहना में निकाली जायेगी एवं प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से नित्य भगवत रस की वर्षा हरि इच्छा तक।  कथा के मुख्य यजमान श्री युगल किशोर पांडे, राम सखी पांडेय पुष्पराज पांडेय ,शिवहर पांडेय ,शीतल संत श्री राम दस जी महाराज , श्री कृष्ण पांडेय एवं समस्त पांडेय परिवार ! इस पवन कार्यक्रम में जगत में कल्याण के लिए किया जाएगा एवं साधु संतों का समागम रहेगा ! कथा के अंतिम चरण में विशाल भंडारे के आयोजन भी 1 मई को किया जाएगा। 

ईरान जंग पर भागवत का बयान, स्वार्थी हितों के कारण हुआ युद्ध, भारत ही करेगा इसे खत्म

नागपुर   ईरान-अमेरिका जंग पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है. नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध केवल स्वार्थी हितों का परिणाम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर मोहन भागवत ने नसीहत दी कि दुनिया को संघर्ष की नहीं, बल्कि सद्भाव की जरूरत है. उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि युद्ध केवल भारत ही खत्म कर सकता है।  महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है. कई देश कह रहे हैं कि केलल भारत ही चल रहे युद्ध को खत्म कर सकता है. दुनिया के चिंतकों के ध्यान में बार-बार देशों से आवाज़ उठ रही है कि चल रहे युद्ध को खत्म भारत ही कर सकता है क्योंकि विकासशील भारत की प्रवृत्ति का ज्ञान है।  मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2,000 वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों के साथ प्रयोग करती रही है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता एवं हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं।  आरएसएस प्रमुख भागवत ने नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं.’ उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है. मोहन भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए।  उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं. भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है।