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अन्नदाता भी, ऊर्जादाता भी: खेती और सौर ऊर्जा के तालमेल से बढ़ेगी किसानों की आय- शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनाज के लबालब भंडारों के साथ स्वच्छ ऊर्जा में भी दुनिया का नेतृत्व कर रहा भारत- शिवराज सिंह कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे कृषि और ऊर्जा मंत्रालय: ग्रामीण युवाओं को गांव में ही मिलेंगे नए रोजगार- शिवराज सिंह गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 308 गीगावाट पार, एग्रीवोल्टाइक से 2050 की बिजली मांग होगी पूरी- प्रह्लाद जोशी पीएम कुसुम के अगले चरण में शुरू होगा दुनिया का सबसे बड़ा एग्रीवोल्टाइक अभियान- केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी नई दिल्ली  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश का किसान अब केवल "अन्नदाता" ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा को अपनाकर वास्तविक अर्थों में "अन्नदाता भी और ऊर्जादाता भी" बनने जा रहा है। बुधवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय '7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस' के उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि खेती और सौर ऊर्जा का संगम विश्व कल्याण और किसानों की आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एग्रीवोल्टाइक नीति ऐसी बननी चाहिए जो देश के 85 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों के खेतों पर व्यावहारिक रूप से खरी उतरे। सभागार में देश-विदेश के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में पहुंचे किसान भाइयों का स्वागत करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक तकनीक से एक ही जमीन पर ऊपर सौर पैनल से बिजली पैदा होगी और नीचे फसल लहलहाएगी। उन्होंने इसे सरल देसी अंदाज में समझाते हुए कहा कि यह "आम के आम और गुठलियों के दाम" तथा "हिंग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा" जैसा सशक्त मॉडल है। उन्होंने कहा कि पुराने समय में कहा जाता था 'रहिमन पानी राखिये', लेकिन आज के युग में स्थिति ऐसी है कि 'रहिमन बिजली राखिये', क्योंकि आधुनिक जीवन और खेती में बिना बिजली सब शून्य है, इसलिए खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन को जोड़ना किसानों के हित में सबसे बड़ा कदम है। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि एक दौर था जब भारत खाद्य सुरक्षा के लिए खाद्यान्न आयात पर निर्भर था, लेकिन आज देश के अन्नदाताओं के पसीने की बदौलत अन्न भंडार गेहूं और धान से पूरी तरह लबालब भरे हुए हैं। भारतीय कृषि क्षेत्र लगातार 4.5 प्रतिशत की मजबूत विकास दर बनाए हुए है, जो अपने आप में एक बड़ा कीर्तिमान है। कृषि उत्पादों का निर्यात 52.55 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड पर पहुंच चुका है और हाल ही में रबी सीजन 2026-27 की बुवाई भी शुरू हो चुकी है, जिसमें दलहन और तिलहन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के समक्ष जमीनी हकीकत रखते हुए स्पष्ट किया कि भारत में औसत भूमि जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर है और 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे व सीमांत हैं, जिनके पास इतनी जमीन नहीं है कि वे खेती छोड़कर केवल सोलर प्लांट लगा सकें। उन्होंने जोर दिया कि प्रयोगशालाओं और सरकारी संस्थानों में तो पैसा लग जाता है, लेकिन किसान को अपनी गाढ़ी कमाई लगानी पड़ती है, इसलिए मॉडल ऐसा होना चाहिए जो छोटे किसान के खेत में व्यावहारिक रूप से सफल हो और कृषि उत्पादन किसी भी कीमत पर न रुके। उन्होंने कहा कि केवल सोलर पैनल के नीचे कुछ पौधे लगा देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि पैनल की ऊंचाई, खंभों के बीच की दूरी और जुताई की व्यवस्था ऐसी रखनी होगी ताकि किसान हर साल अपनी पसंद से फसल और फसल-चक्र बदल सके। श्री चौहान ने व्यावहारिक चुनौतियों के समय रहते समाधान पर बल देते हुए कहा कि पैनलों से गिरने वाले वर्षा जल के सुरक्षित निकास और संचयन का पुख्ता प्रबंध हो ताकि खेतों में मिट्टी का कटाव न हो और पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग हो सके। उन्होंने बिजली खरीद, ग्रिड तक पहुंच और किसानों को समय पर पारदर्शी भुगतान की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही सुझाव दिया कि किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को इसमें सक्रिय रूप से जोड़ा जाए और उपकरणों के संचालन, मरम्मत व रखरखाव का प्रशिक्षण स्थानीय ग्रामीण युवाओं व महिलाओं को दिया जाए ताकि गांवों में ही रोजगार के बड़े अवसर तैयार हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी परियोजना बीच में छोड़ दे या अनुबंध समाप्त होने पर पैनल हटाने पड़ें, तो उसका कोई भी वित्तीय या भौतिक बोझ किसान पर न आए, इसकी जिम्मेदारी शुरुआत में ही तय होनी चाहिए। श्री चौहान ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के नेतृत्व की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए विश्वास दिलाया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए कृषि मंत्रालय कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।   इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह 7वां संस्करण अब तक आयोजित सभी छह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की तुलना में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक है, जिसमें रिकॉर्ड भागीदारी के चलते अतिरिक्त हॉल की व्यवस्था करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया आर्थिक संकटों से जूझ रही है, तब भारत चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी विकास दर के साथ विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है।  

नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं

रायपुर नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। राज्य की दो महिलाओं, बिलासपुर नगर निगम की मती रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की मती हेमलता खत्री ने केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर की 1000 अमृत मित्रों के साथ अपने कार्यों के अनुभव साझा किए। नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के तहत शहरी जल प्रबंधन एवं सतत विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें छत्तीसगढ़ की 75 “अमृत मित्र” महिलाओं ने भागीदारी की। ये महिलाएं राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचना संचालन तथा सामुदायिक जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने विगत 11 मार्च को रायपुर रेलवे स्टेशन में हरी झंडी दिखाकर महिलाओं के इस दल को नई दिल्ली के लिए रवाना किया था।  “अमृत मित्र महोत्सव” में भागीदारी करने वाली स्वसहायता समूहों की ये महिलाएँ 'वीमेन फॉर ट्री' अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ की ये “अमृत मित्र” महिलाएँ अपने-अपने शहरों में तकनीकी और सामुदायिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं। घरों तक सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जल गुणवत्ता के परीक्षण, जल उपचार संयंत्रों (WTP) और वितरण नेटवर्कों के संचालन तथा रखरखाव में सहयोग के साथ ही जल संरक्षण तथा “कचरे से कंचन” जैसे अभियानों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का महत्वपूर्ण काम ये महिलाएं कर रही हैं। देशभर के स्वसहायता समूहों के सर्वोत्तम अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के इस राष्ट्रीय मंच को छत्तीसगढ़ की दो अमृत मित्रों ने भी साझा किया। बिलासपुर की मती रुक्मिणी गोस्वामी ने महोत्सव में कहा कि हम केवल पौधे ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम भी कर रहे हैं। इस पहल से हमें आजीविका का अवसर भी मिला है जिससे हम अपने परिवार की आय में योगदान दे पा रहे हैं। वहीं लोरमी की मती हेमलता खत्री ने राष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जल संरक्षण के लिए वृहद पैमाने पर हम लोग वृक्षारोपण करने के साथ ही अपने बच्चे की तरह पौधों की देखभाल और रक्षा कर रहे हैं। इन पौधों को बढ़ते हुए देखकर हमें बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है।  "अमृत मित्र महोत्सव के लिए चयनित महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई… नई दिल्ली के भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने कार्यों और अनुभवों को प्रस्तुत करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। 'वीमेन फॉर ट्री – अमृत मित्र योजना' से महिला समूहों को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का भी अवसर मिल रहा है। इस पहल से उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण के कार्य में योगदान देने का संतोष भी प्राप्त हो रहा है।" – उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव  

दुनिया को लोकतंत्र के सबक: चुनाव आयोग भारत मंडपम में सिखाएगा इलेक्शन मैनेजमेंट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) दुनिया के विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन संस्थानों को अपने अनुभव साझा करने जा रहा है। आयोग 21 से 23 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में पहला इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IICDEM-2026) आयोजित करने जा रहा है। यह भारत द्वारा लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा।   इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले, चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में वैश्विक सम्मेलन में उनके नेतृत्व में संचालित होने वाले 36 थीमैटिक ग्रुप्स पर विस्तार से चर्चा की गई। आधिकारियों के अनुसार, ये थीम चुनाव प्रबंधन के सभी पहलुओं को कवर करती हैं और चुनाव प्रबंधन निकायों के समृद्ध एवं विविध अनुभवों पर आधारित ज्ञान के भंडार का विकास करने का उद्देश्य रखती हैं। ये 36 थीमैटिक ग्रुप्स राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित होंगे, जिनमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञ भी योगदान देंगे। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) द्वारा निर्वाचन आयोग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक चुनावी चुनौतियों पर साझा समझ विकसित करना, सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और नवाचारों का आदान-प्रदान करना तथा समाधानों का सह-निर्माण करना है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में यह सम्मेलन भारत के अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल IDEA के 2026 के लिए काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के बाद आयोजित हो रहा है। सम्मेलन की थीम है- समावेशी, शांतिपूर्ण, लचीली और सतत दुनिया के लिए लोकतंत्र। सम्मेलन में विश्व भर के चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे, साथ ही वैश्विक संगठनों, भारत में विदेशी मिशनों तथा चुनावी प्रक्रियाओं के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के कार्यक्रम में सामान्य एवं प्लेनरी सत्र शामिल होंगे, जैसे उद्घाटन सत्र, ईएमबी लीडर्स प्लेनरी, ईएमबी वर्किंग ग्रुप मीटिंग्स तथा ईसीआईनेट (निर्वाचन सहयोग के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म) का शुभारंभ। इसके अलावा थीमैटिक सत्र वैश्विक चुनावी थीम्स, मॉडल अंतरराष्ट्रीय चुनावी मानकों तथा चुनावी प्रक्रियाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों पर केंद्रित होंगे। सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु एवं डॉ. विवेक जोशी भाग लेने वाले ईएमबी प्रमुखों एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करेंगे। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन में चार आईआईटी, छह आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों तथा भारतीय जन संचार संस्थान जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी होगी। प्रतिभागियों को भारत की चुनावी व्यवस्था, प्रक्रियाओं एवं तकनीकी नवाचारों से परिचित कराया जाएगा, जो भारतीय चुनावों को विश्व की लोकतंत्रों में एक आदर्श बनाते हैं। बता दें कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में वर्तमान समय में विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से लाखों-करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम काटकर वोट चोरी कर रहा है, जिससे अल्पसंख्यक, गरीब और विपक्षी समर्थक क्षेत्रों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने, पश्चिम बंगाल में प्रतिष्ठित हस्तियों जैसे अमर्त्य सेन और मोहम्मद शमी को नोटिस भेजे जाने, तथा असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसी तरह की शिकायतों के बाद विपक्ष इसे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक बता रहे हैं।