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भोजशाला विवाद: 18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई, अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण स्थगित

 इंदौर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई है।कल  अधिवक्ता संघ द्वारा की गई हड़ताल की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया था। यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रारंभ की जानी है। सुनवाई में भोजशाला को लेकर किए गए 98 दिनों के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में खोली जाएगी और उसकी कॉपी दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था। बता दें कि हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एएसआई सर्वे को आधार बनाकर भोजशाला के वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर होने के पक्ष में अपने तर्क रखने हैं। इसके लिए हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहेंगे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन (नई दिल्ली) तथा अधिवक्ता विनय जोशी (इंदौर) पैरवी करेंगे। निर्णय होने तक 2003 का आदेश प्रभावशील सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना एवं स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका सात अप्रैल 2003 को एएसआई महानिदेशक द्वारा जारी आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। एएसआई सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष 17000 अवशेष मिले थे। 96 मूर्तियां प्राप्त हुईं। 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा मिला। पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गईं। चारों दिशाओं में 106 स्तंभ पाए गए। 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ मिले। 33 प्राचीन सिक्के मिले। ये सिक्के 10वीं–11वीं शताब्दी एवं परमार युग के बताए गए हैं।  

भोजशाला: 2034 तक मंदिर निर्माण और सरस्वती मूर्ति की लंदन से वापसी का ऐलान

धार  वसंत पंचमी के मौके पर राजा भोज वसंतोत्सव समिति ने शुक्रवार को यहां एक धर्मसभा का आयोजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2034 में भोजशाला के निर्माण को एक हजार साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच भोजशाला का मुकदमा हमें जीतना है और यहां मां सरस्वती के भव्य मंदिर का निर्माण करना है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि लंदन के एक म्यूजियम में मां सरस्वती की मूर्ति है। उसे देश में वापस लाना है। भोजशाला मामले में जो याचिका लगी है उसका मुकदमा जीतना है।  मथुरा, काशी और धार में बने भव्य मंदिर : आलोक कुमार आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला में 992 साल पहले मंदिर बना था। 2034 में जब इसके एक हजार साल जब पूरे होंगे तब इसका निर्माण भी राम मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए। यहां मां सरस्वती की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि मथुरा काशी और धार में भव्य मंदिर बने। देश के केंद्र में स्थित धार को ज्ञान का केंद्र बनाना है। सभी ये संकल्प लें।  मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई विहिप प्रमुख ने कहा कि मुगलकाल में इस मंदिर को तोड़ा गया। हिंदुओं को अपमानित किया गया। देश की तीन हजार कब्रों में कुछ नहीं है। वे खाली हैं। धार में भी ऐसा ही है। मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई। उनकी मौत के 200 साल बाद भोजशाला में उनकी कब्र होने की बात कही गई। इस भोजशाला की लड़ाई हिंदू समाज की है। इसे सभी को मिलकर लड़ना है। आलोक कुमार ने कहा कि जो भी इस देश में रहते हैं, उन्हें देश का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोगों को वंदे मातरम बोलने में हिचकिचाहट होती है। देश के लिए कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम बोलकर फांसी के फंदे को चूमा। हिंदू धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है। शांति में विश्वास रखता है। यह हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं। जिन्हें भोजशाला से ज्यादा प्रेम वो हिंदू धर्म अपना लें : अवधेशानंद गिरि स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भोजशाला की पावन भूमि हिंदुओं की भूमि है। यहां का मंदिर और परिसर भी हमारा है। यहां पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। राजा भोज ने यहां भोजशाला का निर्माण कराया था, ये कभी भी मुगलों की भूमि नहीं हो सकती। जिसे भोजशाला से ज्यादा प्रेम है तो वे हिंदू धर्म अपना लें और हर मंगलवार पूजा करने आ जाएं। देश के मुस्लिम कोई अरब से नहीं आए हैं, उनके पूर्वजों का धर्मांतरण किया गया है। वे भी हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि 2014 को देश सही मायने में आजाद हुआ है। उसने पहले हिंदुओं को दबाया जाता रहा है। जो सनातन की बात करेगा, वही अब देश पर राज करेगा। हमने जो हिंदू राष्ट्र का सपना देखा है वो पूरा होने जा रहा है। 

धार में आज विशेष आयोजन: भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार (जुमे की नमाज) एक ही दिन पड़ने से असमंजस जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय और स्थान के बंटवारे का एक विशेष फॉर्मूला तय कर शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया है. आज मौके पर बसंत पंचती की पूजा और नमाज दोनों हो रही है. मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी के विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी की पूजा भारी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए पूजा और नमाज के लिए समय निर्धारित किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया कि हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा कर सकेंगे.  प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा के लिए पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ सहित करीब 8,000 जवानों को तैनात किया है. पूरे परिसर की निगरानी 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और 10 ड्रोनों के जरिए की जा रही है. शांति बनाए रखने के लिए नमाजियों की लिस्ट पहले ही प्रशासन को सौंप दी गई है. एजेंसी के मुताबिक, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं और वे इस व्यवस्था पर सहमत हैं. अब तक साइट को कैसे मैनेज किया गया है? पिछले 23 सालों से एक एडमिनिस्ट्रेटिव व्यवस्था लागू है, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त है. मुसलमानों को साइट पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. इस सिस्टम ने काफी हद तक रोज़ाना के झगड़ों को रोका है, लेकिन जब बड़े हिंदू त्योहार शुक्रवार को पड़ते हैं, तो परेशानियां सामने आती हैं. भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद क्या है? भोजशाला ASI द्वारा संरक्षित एक स्मारक है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह परमार राजा भोज के वक्त से है. इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपना दावा करते हैं. मुस्लिम मान्यता: मुस्लिम समुदाय इस संरचना को सूफी संत कमालुद्दीन के नाम पर कमल मौला मस्जिद मानता है और दावा करता है कि वहां सदियों से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है और इस दावे का खंडन करता है कि यह मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था. हिंदू मान्यता: हिंदू भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जिसके लिए वे संस्कृत शिलालेखों, मंदिर जैसी मूर्तियों और वास्तुकला की विशेषताओं का हवाला देते हैं और दावा करते हैं कि यहां बहुत पहले से मंदिर थी. यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी है, जिसमें विरासत, पुरातत्व और पूजा की निरंतरता की अलग-अलग व्याख्याएं शामिल हैं. दो दशक से हो रही है नमाज और पूजा पिछले 23 साल से चले आ रहे एक इंतज़ाम के तहत, ASI हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त देता है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. साल 2016 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी, जिससे विवादित जगह पर नमाज़ के वक्त को लेकर धार में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं. दोनों पक्षों ने कोर्ट में रखी थी मांग भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन सरस्वती पूजा करने के लिए अधिकारियों से इजाज़त मांगी थी, जबकि मुस्लिम समुदाय ने दिन के महत्व का हवाला देते हुए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज़ पढ़ने की मंज़ूरी के लिए एक ज्ञापन सौंपा था.    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों ने क्या कहा? भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे सूर्योदय से सूर्यास्त तक निरंतर पूजा जारी रखेंगे. वहीं, कमल मौला नमाज इंतजामिया कमेटी के जल्फिकार पठान ने भी शांति बनाए रखने की अपील करते हुए फैसले को सर्वसम्मति से स्वीकार किया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित फैसले का स्वागत किया है. एएसआई की 2003 की व्यवस्था के मुताबिक, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते आए हैं.   सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी एसपी मनीष अवस्थी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें महिला पुलिस इकाइयां भी शामिल हैं. भोजशाला की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और हर वाहन की बारीकी से जांच हो रही है. सोशल मीडिया पर भी चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है, जिससे कोई अफवाह न फैले. परिसर के अंदर सरस्वती पूजा के लिए भगवा झंडों और रंगोली से सजावट की गई है.  

SC का बड़ा आदेश: धार भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग टाइमिंग निर्धारित

धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के साथ नमाज भी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला देते हुए कहा कि हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी। वहीं, मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भोजशाला में पूजा-अर्चना के लिए कानून व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया और कुछ उपाय भी सुझाए। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विवादित भोजशाला में नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों की संख्या जिला प्रशासन को बताई जाए। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। एएसआई की 7 अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ सकते हैं। पिछले 23 सालों से यह व्यवस्था है। इस बार शुक्रवार के दिन ही बसंत पंचमी होने की वजह से प्रशासन के लिए सामने चुनौती खड़ो हो गई है। दरअसल, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई याचिका में आगामी बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026, शुक्रवार) को भोजशाला में केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा की अनुमति देने और मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिंदू पक्ष को बसंत पंचमी पर पूरे दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दे दी है, लेकिन नमाज के समय (1-3 बजे) स्थान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.  इसके बाद CJI ने महाधिवक्ता से पूछा कि क्या आप ये व्यवस्थाएं कर पाएंगे? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि इससे पूजा पूरे दिन जारी रह सकती है. मुस्लिम पक्ष को देनी होगी अनुमानित संख्या इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को गुरुवार शाम तक धार के जिला मजिस्ट्रेट को नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बतानी होगी, ताकि पास जारी हो सकें और प्रवेश-निकास की व्यवस्था हो सके. अदालत ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, सहिष्णुता और सहयोग दिखाएं तथा प्रशासन के साथ मिलकर शांति बनाए रखें. पहले भी चुका है ऐसा वहीं, कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि मुख्य याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है और ये आवेदन एक लंबित मामले में दायर किया गया है. उन्होंने अदालत को बताया कि पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं. साथ ही एएसजी और महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि पहले की तरह पूरी व्यवस्था की जाएगी.   मस्जिद कमेटी की ओर से पेश हुए खुर्शीद दूसरी ओर मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी है. उन्होंने कहा, 'ऐसा ही दोबारा होने दिया जाए. जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है, हम 3 बजे तक जगह खाली कर देंगे. हम न्यूनतम समय मांग रहे हैं और खुशी से समायोजन करने को तैयार हैं. पूजा बाहर भी जारी रह सकती है.' हिंदू पक्ष का तर्क एएसआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है और वे हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं. हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने जोर देकर कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नमाज शाम 5 बजे कर ली जाए तो हिंदू पक्ष पूजा पूरी कर 5 बजे जगह खाली कर देगा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पंडाल-बैरिकेड लगाए जा सकते हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार साझा रहेगा तो न्यायमूर्ति जे. बागची ने कहा कि एक तरफ हवन कुंड रखा जाए और दूसरी तरफ नमाज के लिए विभाजन किया जाए, क्या ये संभव है? इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन थी। तब भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं। इस बार प्रशासन ने पहले से ही यहां सुरक्षा बढ़ा दी है।

भोजशाला की 700 साल पुरानी त्रासदी: 271 साल तक ज्ञान का केंद्र रही, जानें इतिहास

धार  क्या काशी की ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में हिंदुओँ को पूजा का हक मिलेगा? दरअसल ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में मुस्लिम मस्जिद है. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू मंदिर होने की मान्यता है.ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू पक्ष पूजा अर्चना की इजाजत मांग रहा है. ज्ञानवापी के सर्वे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदुओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दे दी थी. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला के भी ASI सर्वे का आदेश कोर्ट ने दिया था. अब भोजशाला में भी हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि पूजा की इजाजत मिल जाएगी. 23 जनवरी को बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरअसल, इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू संगठनों ने दिन भर माता सरस्वती की पूजा- अर्चना की प्रशासन से इजाजत मांगी है।  इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच तीन बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी। तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग है। इस पर आज यानी 22 जनवरी को सुनवाई है। धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। इसके बाद कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला पर हमले किए। कई सालों तक मां सरस्वती की प्रतिमा भोजशाला में दबी रही। इसके बाद अंग्रेज आए। वे यहां से खुदाई कर वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम ले गए। खिलजी के आक्रमण से लेकर अब तक भोजशाला को उसकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। खिलजी ने कईं बार किया आक्रमण  भोजशाला का निर्माण परमार वंश के महान राजा राजा भोज ने 1034 ईस्वी के आसपास किया था. वह एक महान योद्धा के साथ ही कला साहित्य और विज्ञान के संरक्षक भी थे. उन्होंने ही यहां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित की थी. उस समय यह एक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था. जहां दुनिया भर से लोग व्याकरण और खगोल विज्ञान पढ़ने आते है. ‌ वाग्देवी की यही प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है. कहा जाता है कि 1875 के आसपास खुदाई के दौरान यहां से सरस्वती माता की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा मिली थी. जिसे एक अंग्रेज अफसर मेजर किनकैड अपने साथ लंदन ले गया. लंबे समय इसे वहां से वापस लाकर भोजशाला में ससम्मान स्थापित करने की मांग की जा रही है. भोजशाला विवाद के दौरान भी यही मूर्ति इसका सबसे बड़ा प्रमाण बनती है. दरअसल खिलजी के धार पर आक्रमण कर भोजशाला को काफी नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद मुस्लिम शासकों ने इसके ढांचे में भी कई बदलाव किए. 15 सी सदी के आसपास मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने यहां कुछ उसको मस्जिद के रूप में भी इस्तेमाल किया था. उसी दौरान यहां कुछ दरगाह और मस्जिद भी बनाई गई. मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद मानता है. बसंत पंचमी पर यहां भव्य आयोजन होते रहे हैं जबकि कईं बार विवाद की स्थिति भी बन चुकी है. धार में पहले कई बार धार्मिक तनाव रह चुका है. लेकिन धार्मिक गुरु और प्रशासन की सहमति से अब सब कुछ शांत वातावरण में होता है. भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होते है. मंगलवार को हिंदू पूजा करते है जबकि शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते है. बाकी दिनों के लिए यह स्थल पर्यटकों के लिए खुला रहता है. यहां बड़ी संख्या में पुरानी मूर्तियां और कलाकृति देखने को मिलती है. ‌ भोजशाला की बनावट देखते ही आपको उस समय की हिंदू संस्कृति और कलाकृति की झलक मिलती है. ‌यहां के खंभों पर संस्कृत में कई शिलालेख खुदे हुए है. जिनमें व्याकरण और काव्य के नियम लिखे गए है. दीवारों पर परमार काली मूर्तियां, श्लोक और संरचनाएं दिख जाती है. भोजशाला काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है जानकार मानते है कि इसकी संरचना किसी मस्जिद जैसी नहीं बल्कि एक पारंपरिक भारतीय पाठशाला या मंदिर जैसी है. एक बार फिर वसंत पंचमी से पहले भोजशाला का मुद्दा गरमा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 2024 में ही यहां वैज्ञानिक सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट बनाई है. इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना था कि मौजूदा ढांचे के नीचे क्या कोई मंदिर के अवशेष मौजूद है. फिलहाल इस‌ सर्वे की रिपोर्ट आना बाकि है. अगर आप भी भोजशाला जाना चाहते है तो मंगलवार और शुक्रवार छोड़कर कभी भी जाकर इसके इतिहास को और करीब से देख सकते हैं. अब जानिए कोर्ट में क्या है भोजशाला के मामले का स्टेटस भोजशाला मंदिर या मस्जिद, साइंटिफिक सर्वे पूरा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि भोजशाला का पूर्ण आधिपत्य हिंदुओं को सौंपा जाए। ये मंदिर है या मस्जिद इसका कैरेक्टर तय करने के लिए एएसआई से साइंटिफिक सर्वे कराया जाए। 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। एएसआई ने और समय मांगा जिसपर 2 जुलाई 2024 तक का समय दिया गया। एएसआई ने फिर समय मांगा जिसपर कोर्ट ने 15 जुलाई तक की तारीख दी। इस तारीख को एएसआई ने साइंटिफिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी। एएसआई ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और कार्बन डेटिंग मेथड की मदद से अपना सर्वे शुरू किया। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दूसरी तरफ हाईकोर्ट के 11 मार्च के 2024 के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2024 को विशेष अनुमति याचिका लगाई। इसमें पूरा पक्ष सुनने की मांग की गई। 1 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिया। जिसमें साइंटिफिक सर्वे पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सर्वे रिजल्ट के आधार पर बिना सुप्रीम … Read 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भोजशाला पर तनाव, 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमा एक साथ, धार में हाई अलर्ट और 8000 सुरक्षा बल

 धार धार की प्रसिद्ध भोजशाला में 23 जनवरी को पूजा और नमाज के समय के टकराव को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है. 11वीं सदी के इस स्मारक पर अधिकार को लेकर चल रहे विवाद के बीच इंदौर रेंज के आईजी (IG) अनुराग ने  सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए जिला प्रशासन ने लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की. मुसलमान 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद मानते हैं, जबकि हिंदू इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताते हैं. भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन पूजा करने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति मांगी है, जबकि मुस्लिम समुदाय ने एक ज्ञापन सौंपकर शुक्रवार होने के कारण दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी है. पिछले 23 सालों से चली आ रही एक व्यवस्था के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI इस ढांचे की रक्षा करता है. एएसआई ने हिंदुओं को हर  भोजशाला में पूजा करने का अधिकार दिया है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति है. पत्रकारों से बात करते हुए भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा, "सरस्वती पूजा के अवसर पर बसंत पंचमी (23 जनवरी) को बिना किसी रुकावट के पूजा का आयोजन करना हमारा लक्ष्य है. पूजा सूर्योदय से लगातार होगी. अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे." उन्होंने जोर देकर कहा, "हम किसी भी हालत में भोजशाला परिसर खाली नहीं करेंगे. हमने इसे पहले भी खाली नहीं किया था और अब भी खाली नहीं करेंगे." इस बीच, मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला चौकी पर ASI के महानिदेशक को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 23 जनवरी को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक बिना किसी रुकावट के शुक्रवार की नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी गई. उधर, इंदौर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अनुराग ने धार का दौरा किया और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ बैठक की. बाद में उन्होंने विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद का दौरा किया और परिसर का निरीक्षण किया. पत्रकारों से बात करते हुए, IPS अधिकारी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार में खासकर भोजशाला के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा. उन्होंने कहा, "23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार दोनों हैं. इसलिए, लोगों को यह त्योहार सद्भाव और शांति के साथ मनाना चाहिए. बसंत पंचमी के लिए लगभग 8000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. इन कर्मियों में CRPF और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान शामिल होंगे." पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस दौरान पेट्रोलिंग की जाएगी और शहर की निगरानी CCTV कैमरों से की जाएगी. पुलिस अफसर अनुराग ने कहा कि संवेदनशील इलाकों और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि 2016 में भी बसंत पंचमी (12 फरवरी) शुक्रवार को पड़ी थी और भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था. उस साल शहर में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं. हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुसलमान इसे कमाल मौला मस्जिद कहते हैं. जुलाई 2024 में ASI ने विवादित भोजशाला-कमाल-मौला मस्जिद परिसर की अपनी वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में जमा की थी.