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हुड्डा सरकार पर नियम बदलकर भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

पंचकूला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है। आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। इसमें धोखाधड़ी से धन का गबन और स्वयं या दूसरों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है। सीबीआई ने आरोप पत्र के साथ हरियाणा सरकार की केस चलाने की मंजूरी को भी चार्जशीट के साथ अदालत में जमा कराया है। इसमें हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा का नाम शामिल है। इस मामले में अदालत ने संबंधित लिपिक को दस्तावेजों की जांच कर चार जून को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे। जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इन्हें बनाया गया आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के बेटे कंवर प्रीत सिंह संधू : हुड्डा के सहपाठी डीडी संधू के बेटे डॉ. गणेश दत्त रतन : हुड्डा के दोस्त। मोना बेरी : हुड्डा के ओएसडी बलदेव राज बेरी डागर कात्याल : हुड्डा के दोस्त सुनील कात्याल के बेटे प्रदीप कुमार : हुड्डा के निजी सचिव राम सिंह के बेटे मनजोत कौर : हुड्डा की परिचित की बहू चंडीगढ़ साफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नंदिता हुड्डा : हुड्डा के पैतृक गांव की निवासी व कांग्रेस नेत्री    

Haryana Assembly Row: भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ‘समानांतर सदन’ पर कारण बताओ नोटिस, स्पीकर हरविंदर कल्याण सख्त

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देने तथा विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाने की विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कार्यवाही को स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने विपक्ष के नेता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। स्पीकर ने विपक्ष के नेता से पूछा कि उन्होंने किस आधार पर विधानसभा के विशेष सत्र को असंवैधानिक बताया और किस अधिकार अथवा नियम के तहत विधानसभा परिसर में विधायकों को इकट्टा करते हुए समानांतर सदन की कार्यवाही का संचालन किया। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर की ओर से ऐसी कड़ी कार्रवाई पहली बार की गई है। हालांकि पूर्व में भी विपक्ष द्वारा विधानसभा परिसर के बाहर समानांतर सदन चलाए जाते रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका था, जब विधानसभा परिसर के भीतर कांग्रेस विधायकों ने समानांतर सदन चलाया, जिस पर स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने कड़ा रुख अपनाया है। भूपेंद्र हुड्डा ने विधानसभा विशेष सत्र को बताया असंवैधानिक ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देते हुए उसके बहिष्कार की घोषणा कर दी थी और विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाया था। हरविन्द्र कल्याण ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से भी इस विषय पर टिप्पणी मांगी है। मुख्य सचिव से टिप्पणी मांगने के पीछे स्पीकर की सोच यह हो सकती है कि बुलाया गया सत्र पूरी तरह से संवैधानिक था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों को विधानसभा परिसर में समानांतर सत्र के लिए इकट्ठा करने का कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत है, बल्कि विधानसभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि उन्होंने किन नियमों व संसदीय प्रथाओं के तहत इस प्रकार की अवांछित गतिविधि की है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लिखे पत्र में यह भी पूछा गया है कि 27 अप्रैल को आयोजित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र व उसकी कार्यवाही को उनके द्वारा किस संवैधानिक या प्रक्रियात्मक आधार पर असंवैधानिक करार दिया गया। क्या बोले स्पीकर हरविन्द्र कल्याण? इसके अतिरिक्त, सदन में नारी सशक्तीकरण वंदन संशोधन अधिनियम के समर्थन में प्रस्तुत सरकारी प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताने के पीछे क्या ठोस आधार हैं। कल्याण ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है और किसी भी प्रकार की समानांतर या भ्रामक गतिविधि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा इनके सदस्यों की गरिमा व प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे इस विषय पर शीघ्र और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।

हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा और AJL को क्लीन चिट, ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग केस भी हुआ बंद

चंडीगढ़ पंचकूला की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को भी बंद कर दिया। यह आदेश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 25 फरवरी के एक फैसले के बाद आया है, जिसमें 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके तहत इस मामले में हुड्डा और अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुड्डा सुनवाई के दौरान खुद अदालत में पेश हुए। हुड्डा के वकील एस.पी.एस. परमार ने यहां पत्रकारों को बताया कि धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने ईडी की शिकायत को बंद कर दिया क्योंकि हुड्डा और 'नेशनल हेराल्ड' के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को सीबीआई की जांच वाले मुख्य मामले में पहले ही आरोपमुक्त किया जा चुका था। उच्च न्यायालय ने पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन के संबंध में हुड्डा और एजेएल के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने अप्रैल 2021 के विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे और उनकी आरोपमुक्त करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए कथित अपराधों के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया भी साबित नहीं होते हैं। अदालत ने माना कि इस मामले में उनके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया, ''मुकदमे को जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।'' यह मामला 1982 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा एजेएल को पंचकूला के सेक्टर 6 में एक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण 1992 में इस प्लॉट को वापस ले लिया गया था। हुडा ने 1995 और 1996 में एजेएल की अपीलें खारिज कर दी थीं। साल 2005 में हुड्डा के हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद, इस भूखंड को एजेएल को मूल दर पर दोबारा आवंटित कर दिया गया। हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, 2016 में राज्य के सतर्कता ब्यूरो ने एक मामला दर्ज किया, जिसे बाद में सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया। आरोप लगाया गया था कि भूखंड के दोबारा आवंटन से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ। अप्रैल 2021 में, विशेष सीबीआई अदालत ने हुड्डा और एजेएल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साज़िश) और 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। इसके बाद हुड्डा ने विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। ईडी ने 2019 में इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था।

पंचकूला एजेएल मामल,हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष अदालत ने हुड्डा और मोतीलाल वोरा को दी क्लीन चिट

चंडीगढ सीबीआई की विशेष अदालत ने पंचकूला में प्रकाशन समूह एसोसिएटिड जनरल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लॉट आवंटित करने के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शुक्रवार को आरोप मुक्त कर दिया । मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर के सरकारी भूखंड आवंटित करने से संबंधित है। सीबीआई ने हुड्डा समेत एचएसवीपी के चार वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया था। हुड्डा पर आरोप था कि 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया। मोतीलाल वोरा को भी आरोप मुक्त करार दिया इस मामले में पूर्व कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा को भी आरोप मुक्त करार दिया गया है। वोहरा का करीब छह साल पहले निधन हो चुका है। इस मामले में सुनवाई के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा शुक्रवार को अदालत में पेश हुए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीबीआई कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें स्पेशल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने कहा था कि बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं हो रहे। ऐसे में कोर्ट ने आरोप तय करने के आदेशों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई कोर्ट के विशेष जज राजीव गोयल ने भी इस मामले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आरोप मुक्त कर दिया है। क्या है पूरा मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकूला में अखबार शुरू करने के लिए 1982 में जमीन आवंटित की गई, तब कांग्रेस के कई नेता एजेएल के पदाधिकारी थे। इनमें मोतीलाल वोरा चेयरमैन थे। जब जमीन आवंटित हुई, तब कांग्रेस की सरकार थी और भजनलाल मुख्यमंत्री थे। 1992 में भजनलाल सरकार ने ये प्लॉट रिज्यूम कर लिया था। इसमें तर्क दिया गया था कि छह महीने में निर्माण कार्य शुरू करना था, जो 10 साल में पूरा नहीं हो सका। एजेएल ने प्लॉट रिज्यूम करने के आदेश को चैलेंज किया था। 2005 में हरियाणा में कांग्रेस सरकार वापस आने पर हुड्डा ने यह प्लॉट फिर से एजेएल को आवंटित कर दिया। सीबीआई ने दर्ज किया था केस सीबीआई ने 27 जनवरी 2017 को मामले में केस दर्ज किया था। इसके बाद 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दायर की। 2021 से लेकर 2025 तक हाईकोर्ट ने इस केस में सुनवाई पर स्टे लगाए रखा। प्रदेश में 10 साल हुड्डा सरकार रही। इसके बाद 2014 में भाजपा की सरकार बनी। 5 मई 2016 को हरियाणा राज्य की विजिलेंस ब्यूरो ने इस विषय में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को 4 अप्रैल 2017 में सौंप दी गई। CBI ने भी अपना केस रजिस्टर्ड किया था। राहुल महाजन