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बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

नीट छात्रा की मौत पर विपक्ष ने विधानसभा में सरकार को घेरा

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन नीट छात्रा की मौत के मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विधानसभा पोर्टिको में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी की और सरकार से इस गंभीर मामले पर चुप्पी तोड़ने की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि नीट छात्रा की मौत ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 25 विधायकों ने एकजुट होकर सरकार पर अपराध नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया। जांच में लापरवाही का आरोप प्रदर्शन कर रहे नेताओं का कहना था कि सरकार मामले को शुरू से हल्के में लेती रही और जांच प्रक्रिया में लगातार लापरवाही बरती गई। नीट छात्रा की मौत के बाद सरकार ने पहले विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी गई। आरोपियों को बचाने का आरोप  हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि जांच एजेंसियों के गठन के बावजूद अब तक सच्चाई सामने नहीं आई है और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में खत्म होगा आरजेडी, कांग्रेस और RLM में टूट का सस्पेंस?

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 2 फरवरी से होने जा रही है। यह सत्र कई मायनों में रोचक रहने वाला है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार का सदन में 3 फरवरी को पहला बजट पेश करेगी। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों के सीटिंग अरेंजमेंट पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। दरअसल, लालू एवं तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के दावे और अटकलबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब इन दावों से सस्पेंस बजट सत्र में खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार चुनाव में प्रचंड जीत और नई सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं की ओर से विपक्ष में टूट के दावे किए जाने लगे। विधानसभा में 25 सदस्यों वाली आरजेडी और 6 सदस्यों वाली कांग्रेस के अधिकतर विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने और खरमास के बाद पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस बात को लगातार खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों की पार्टी के भोज से दूरी बीते सोमवार को पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इसमें पार्टी के कोई भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष में टूट के दावों को और बल मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में सब कुछ ऑल इज वेल होने का दावा किया। मगर विधायकों की गैरमौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम में भी खटपट चल रही है। बिहार चुनाव में RLM के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें से कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को छोड़ अन्य 3 विधायक शीर्ष नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी भाजपा से नजदीकी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से पार्टी के 3 विधायक एकजुटता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों तीनों विधायक (माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह) ने उन्होंने कुशवाहा की लिट्टी पार्टी से दूरी बनाए रखी। हाल ही में वे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में दिखे। इससे कुशवाहा की पार्टी में बिखराव की अटकलें लगाई जा रही हैं। बजट सत्र में खत्म होगा सस्पेंस? खरमास खत्म हो गया है लेकिन विभिन्न दलों में टूट और खटपट के दावों पर फिलहाल संशय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा के बजट सत्र में यह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। सदन के अंदर आरजेडी-कांग्रेस के विधायक विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे या नहीं, साथ ही आरएलएम के विधायकों का सीटिंग अरेंजमेंट कैसा होगा, यह 2 फरवरी को सत्र के पहले दिन स्पष्ट हो जाएगा।

बिहार विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति खतरे में, सभी 6 विधायक JDU में शामिल होने की संभावना

पटना  बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सभी छह विधायक पाला बदलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज बिस्वान जदयू नेतृत्व के संपर्क में हैं। हाल ही में पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज से सभी छह विधायकों ने दूरी बनाए रखी। 8 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बुलाई गई 'मनरेगा बचाओ' अभियान की बैठक में भी विधायक शामिल नहीं हुए। जदयू के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि कांग्रेस विधायक अपनी पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं और उनके जदयू में शामिल होना बस कुछ ही दिनों की बात है। विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि जदयू को 85 सीटें मिली थीं। यदि कांग्रेस के 6 विधायक जदयू में आते हैं, तो जदयू की संख्या 91 हो जाएगी, जिससे वह भाजपा को पछाड़कर सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। दूसरी ओर, भाजपा भी पीछे नहीं है। वह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' (RLM) के असंतुष्ट विधायकों पर नजर गड़ाए हुए है ताकि अपना शीर्ष स्थान बरकरार रख सके। कुशवाहा की पार्टी में फूट के आसार एनडीए के घटक दल RLM के 4 में से 3 विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट मंत्री बनाने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। हाल ही में इन विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिससे पार्टी टूटने की अटकलें तेज हो गई हैं। RCP की घर वापसी की चर्चा जदयू के पूर्व कद्दावर नेता आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' में शामिल हो गए थे। उनके भी दोबारा जदयू में आने की अटकलें हैं। हाल ही में एक 'कुर्मी सम्मेलन' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तेजस्वी ने सम्राट से मिलाया हाथ, विजय सिन्हा ने छुए सीएम नीतीश के पैर—सदन में दिखे रोचक पल

पटना बिहार विधानसभा की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों के शपथग्रहण के साथ शुरू हुआ। वहीं, शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कई रोचक पल भी देखने को मिले। तेजस्वी ने सम्राट से हाथ मिलाया दरअसल, गृहमंत्री सम्राट चौधरी की शपथ के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपनी सीट से खड़े हो गए और सम्राट चौधरी के साथ हाथ मिलाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुनार के पैर छुए। इसके बाद तेजस्वी यादव से गले मिले। शपथ ग्रहण के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच सौहार्द दिखाई दिया। बता दें कि तारापुर विधानसभा सीट से निर्वाचित उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे पहले शपथ ली। उनके बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शपथ ली, जो लगातार चौथी बार लखीसराय से विधायक हैं। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों ने प्रोटेम स्पीकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अभिवादन किया। गौरतलब हो कि राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र खास माना जा रहा है। लगभग 10 वर्षों बाद सत्ता पक्ष में 200 से अधिक विधायक बैठेंगे, जिससे सदन का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रचंड बहुमत के कारण सरकार के लिए विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना आसान होगा, जबकि विपक्ष मात्र 38 सदस्यों तक सिमट गया है। ऐसे में विपक्ष पर अधिक प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभाने का दबाव रहेगा। गौरतलब है कि इससे पहले 2010 में राजग विधायकों की संख्या 200 से अधिक थी। 

नई विधानसभा का पहला सत्र शुरू होने को तैयार, बिहार में अगले दिन होगा अध्यक्ष पद का चुनाव

पटना  बिहार विधानसभा का पहला सत्र 1 दिसंबर को शुरू होगा और इस दिन सभी नए सदस्यों का शपथ ग्रहण कराया जायेगा. इसके अलगे दिन यानी 2 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा. 3 दिसंबर को सेंट्रल हॉल में विधानसभा और विधान परिषद की संयुक्त बैठक में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का अभिभाषण होगा. इसके अगले दिन राज्यपाल की अभिभाषण पर चर्चा होगी. फिर 5 दिसंबर को दूसरी अनुपूरक बजट का सदन में बहस होगी और विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा. क्या होता है विनियोग विधेयक राज्य विनियोग विधेयक को पारित करना एक जरुरी प्रोसेस है. पहले इस विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद में मंजूरी मिलती है. इसके बाद इसे राज्यपाल के पास भेजा जाता है. राज्यपाल की स्वीकृति मिलने पर यह कानून बन जाता है, जिसके बाद राज्य की संचित निधि से खर्च की अनुमति मिलती है. इस बार सदन में क्या नया होगा बिहार विधानसभा में इस बार सदन की कार्यवाही बिल्कुल नई तकनीक के साथ चलने वाली है. सभी विधायकों की सीटों पर टैबलेट लगा दिए गए हैं, जिनके जरिए वे सवाल पूछेंगे. इससे सदन के अंदर कागज का इस्तेमाल लगभग खत्म हो जाएगा. नेवा योजना के तहत विधानसभा को डिजिटल बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. 18वीं बिहार विधानसभा के नए चुने गए विधायकों को यह व्यवस्था एक तरह से स्वागत-उपहार के रूप में मिलेगी. शुक्रवार को सभी सीटों पर टैब लगाने का काम लगभग पूरा हो गया. विधान परिषद में यह व्यवस्था पहले ही लागू हो चुकी है.

बिहार विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव सीएम नीतीश ने राज्यपाल को सौंपा

पटना आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बड़ा दिन है। पहले सीएम मंत्रिमंडल की बैठक में यह वर्तमान सरकार की अंतिम कैबिनेट खत्म हो गई। इस बैठक में 17वीं विधानसभा भंग करने की सिफारिश की गई। सभी मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सीएम नीतीश कुमार राजभवन पहुंचे। वहां उन्होंने कुछ राज्यापल से बातचीत की। इसके बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव सौंप दिया। 19 नवंबर को मौजूदा विधानसभा भंग हो जाएगी। जनता दल यूनाईटेड विजय चौधरी ने कहा कि राजभवन में सीएम नीतीश कुमार ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंप दिया। मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी गई है। 20 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। पीएम मोदी भी इसमें शामिल होंगे। इधर, कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सीएम हाउस पहुंचे। उनके साथ कुछ अन्य मंत्री भी थे। इसके बाद सभी मंत्री सीएम नीतीश कुमार के साथ सचिवालय पहुंचे। यहां बैठक शुरू हुई। इधर, सचिवालय के अंदर किसी को भी अंदर जाने नहीं दिया गया। राजभवन के बाहर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इधर, राजभवन से निकलने के बाद नीतीश कुमार अपनी पार्टी के नेताओं के साथ विधायक दल की बैठक करेंगे। जदयू के नेता सीएम नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुनेंगे। मंगलवार भाजपा के विधायक दल की बैठक होगी। गुरुवार को नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्ममंत्री पद की शपथ लेंगे। गांधी मैदान में पांच हजार वीआईपी आएंगे इधर, गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी शुरू हो चुकी है। आम लोगों के लिए 17 से 20 नवंबर को प्रवेश में पाबंदी लगा दी गई है। गांधी मैदान में लगभग 5000 वीवीआईपी अतिथियों के बैठने के लिए एक विशेष खंड तैयार किया जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा समेत सभी भाजपा और एनडीए शासित मुख्यममंत्री के साथ-साथ विपक्ष के कुछ बड़े चेहरे भी शामिल हो सकते हैं।