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Bihar MLC Election: 9 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते, पवन सिंह और निशांत कुमार के नाम भी शामिल

पटना  बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार  को औपचारिक रूप से पूरी हो गई. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया. इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के नए चेहरे पवन सिंह को लेकर रही, जिन्हें पहली बार पार्टी ने विधान परिषद भेजा है।  पहली बार विधान परिषद पहुंचे पवन सिंह भाजपा ने इस बार विधान परिषद चुनाव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया था. नामांकन के बाद से ही उनकी उम्मीदवारी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। अब निर्विरोध निर्वाचन के साथ पवन सिंह का विधान परिषद पहुंचना तय हो गया है. माना जा रहा है कि पवन सिंह विधानपरिषद में अपने इलाके के लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।  बीजेपी के चार उम्मीदवार हुए निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के खाते से पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. इनमें संजय मयूख लगातार तीसरी बार विधान परिषद पहुंचे हैं, जबकि पवन सिंह और शीला पंडित के लिए यह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत मानी जा रही है।  जेडीयू के चार उम्मीदवारों को भी मिली जीत जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन कुमार भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।  एलजेपी (रामविलास) और आरजेडी को भी एक-एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. दोनों नेताओं का विधान परिषद पहुंचना पहले से लगभग तय माना जा रहा था।  नामांकन वापसी की समय सीमा तक नहीं हुआ कोई बदलाव निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन वापसी का समय बुधवार शाम 3 बजे तक निर्धारित था. लेकिन, किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. चूंकि जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।  यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ संगठनात्मक जरूरत नहीं, बल्कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी हिस्सा है. खासकर पवन सिंह की एंट्री को भाजपा के बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है. भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है, जिसका लाभ यूपी चुनाव में भी देखने को मिल सकता है. बहरहाल, सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के साथ बिहार विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव बिना मतदान के ही संपन्न हो गया है।  पवन सिंह और भाजपा उम्मीदवारों की CM से होगी मुलाकात भाजपा के उम्मीदवार पवन सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मिलेंगे।भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय मयूख के साथ पार्टी के सभी निर्वाचित उम्मीदवार मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जदयू के चारों निर्वाचित MLC करेंगे नीतीश कुमार से मुलाकात जनता दल यूनाइटेड के सभी 4 निर्वाचित विधान पार्षद प्रमाण पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। इसके लिए वे 7, सर्कुलर रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचेंगे। जदयू के नवनिर्वाचित सदस्य पार्टी नेतृत्व का आशीर्वाद लेने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। राजद के सुनील सिंह लेंगे लालू-राबड़ी और तेजस्वी का आशीर्वाद राजद के निर्वाचित उम्मीदवार सुनील सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद राजद नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे पहले तेजस्वी यादव से मिलेंगे और उसके बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आशीर्वाद लेंगे। राजद इसे संगठन की एकजुटता और नेतृत्व के प्रति सम्मान के रूप में देख रही है। औपचारिक निर्वाचन के साथ नए सदस्यों की होगी परिषद में एंट्री निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलने के बाद सभी 10 उम्मीदवार औपचारिक रूप से बिहार विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे।निर्विरोध निर्वाचन के कारण इस बार मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर ली।अब सभी की नजर परिषद में इन नए सदस्यों की भूमिका और राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी।

एमएलसी सीट के लिए चुनावी बिगुल फूंका, भागलपुर-सह-बक्सर सीट पर उपचुनाव का शेड्यूल जारी, आचार संहिता लागू

पटना    बिहार विधान परिषद की एक महत्वपूर्ण सीट पर उपचुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. यह सीट पिछले साल नवंबर से खाली पड़ी थी, जिस पर अब चुनावी घमासान शुरू होने वाला है. आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए 12 मई को वोट डाले जाएंगे और 14 मई को यह साफ हो जाएगा कि सदन में राधाचरण शाह का उत्तराधिकारी कौन बनेगा. क्यों खाली हुई यह सीट और क्या है इसका समीकरण? यह उपचुनाव भागलपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के लिए हो रहा है. इस सीट से विधान परिषद सदस्य रहे राधाचरण शाह ने पिछले साल इस्तीफा दे दिया था. नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में वे संदेश विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए, जिसके बाद 16 नवंबर 2025 से यह सीट रिक्त थी. राधाचरण शाह जुलाई 2015 से ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. अब इस सीट पर जो भी नया चेहरा जीतकर आएगा, उसका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक रहने वाला है. नामांकन से लेकर नतीजों तक- जानें पूरा शेड्यूल चुनाव आयोग ने इस उपचुनाव के लिए एक विस्तृत समय-सारणी तैयार की है. इसकी शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ होगी. इच्छुक उम्मीदवार 23 अप्रैल तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे. इसके अगले दिन यानी 24 अप्रैल को नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी. जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, उनके लिए 27 अप्रैल की समय सीमा तय की गई है. इसके बाद 12 मई को मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी और 14 मई को मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी. आयोग ने निर्देश दिया है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 मई तक संपन्न करा ली जाए. आचार संहिता लागू निर्वाचन आयोग की इस घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब सरकार इस क्षेत्र में कोई नई घोषणा या लुभावनी योजनाओं का ऐलान नहीं कर सकेगी. राधाचरण शाह के संदेश विधानसभा से विधायक बनने के बाद अब उनकी विरासत को कौन संभालेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं.