samacharsecretary.com

बिहार पुलिस में 49 अधिकारियों को DSP का प्रभार, गृह विभाग ने जारी किया आदेश

पटना। बिहार पुलिस महकमे में 49 पुलिस निरीक्षकों और समकक्ष कोटि के अधिकारियों को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद का अस्थायी कार्यकारी प्रभार दिया गया है। गृह विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इस फैसले के बाद संबंधित अधिकारियों को उच्चतर पद की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा। नालंदा से पटना तक के अधिकारियों के नाम शामिल जारी सूची में नालंदा, पटना, भोजपुर, सारण, जहानाबाद, गया, जमुई और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में तैनात अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सूची में अरुण कुमार, शालिग्राम कुमार, संजय कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, विजय कुमार और संतोष कुमार सिंह जैसे अधिकारी शामिल हैं। महिला अधिकारियों को भी मिला DSP का प्रभार जारी अधिसूचना में महिला अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें भोजपुर की संगीता कुशवाहा, मुंगेर की सीमा कुमारी और बक्सर की कुमारी चन्दना के नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा किशोरी सहचारी और अन्य अधिकारियों को भी DSP पद का अस्थायी कार्यकारी प्रभार दिया गया है। वेतन स्तर-9 के साथ संभालेंगे नई जिम्मेदारी गृह विभाग के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक के मूल कोटि के पद पर अस्थायी कार्यकारी प्रभार दिया गया है। इसके साथ उन्हें वेतन स्तर-9 के वेतनमान के अनुरूप उच्चतर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थायी प्रोन्नति नहीं, अगले आदेश तक रहेगा प्रभार अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था अस्थायी है। इसे नियमित और स्थायी प्रोन्नति नहीं माना जाएगा। संबंधित अधिकारियों का वर्तमान पद अगले आदेश तक DSP के मूल कोटि के पद में उत्क्रमित किया जाएगा। अधिकारियों को उनके कैडर में मूल कोटि की वरीयता के आधार पर उच्चतर पद का प्रभार दिया गया है। DSP का प्रभार पाने वाले सभी 49 अधिकारियों की सूची     अरुण कुमार — नालंदा     शालिग्राम कुमार — जहानाबाद     संजय कुमार सिंह — सारण     भवेश मंडल — दुमका, झारखंड     जितेंद्र कुमार सिंह — भोजपुर     विजय कुमार — नालंदा     संतोष कुमार सिंह — भोजपुर     वैद्यनाथ कुमार — पटना     विश्वरंजन सिंह — भागलपुर     शशि भूषण चौधरी — पटना     जयकान्त साव — जमुई     धनंजय कुमार — गया     विमल कुमार — जहानाबाद     उमाशंकर राय — कटिहार     अरविंद कुमार — नालंदा     अजय कुमार — पटना     अजीत कुमार — पटना     मुकेश चन्द्र कुमार — वैशाली     मोहन कुमार — बलिया, उत्तर प्रदेश     रविन्द्र कुमार — सारण     विश्वनाथ भगत — बोकारो, झारखंड     संजय कुमार गुप्ता — पटना     अभय कुमार सिंह — भोजपुर     राम शंकर सिंह — बेगूसराय     दिलीप कुमार-2 — मुजफ्फरपुर     राम बिलास सिंह — सुपौल     संगीता कुशवाहा — भोजपुर     किशोरी सहचारी — नालंदा     सचिन्द्र यादव — समस्तीपुर     सतीश कुमार सिंह — नालंदा     जितेंद्र कुमार-1 — पटना     विरेंद्र प्रसाद यादव — मधुबनी     वेदनाथ पाठक वैदिक — कटिहार     कमल किशोर सिंह — समस्तीपुर     ओम प्रकाश — वैशाली     सीमा कुमारी — मुंगेर     धर्मेन्द्र कुमार — गया     दिलीप कुमार — बेतिया     राजेश्वर प्रसाद-2 — पूर्वी चंपारण     विजय कुमार सिंह — रोहतास     सौम्य प्रियदर्शी — किशनगंज     अब्दार अहमद खां — सीवान     सुभाष वेदानंद — सहरसा     राकेश रंजन सिंह — अररिया     संजय कुमार-1 — रोहतास     कुमारी चन्दना — बक्सर     अजय कुमार सिंह — औरंगाबाद     निशिकान्त निशी — रोहतास     अनिल कुमार सिन्हा — नालंदा  

अब आसमान से होगी अपराधियों और ट्रैफिक पर नजर, बिहार पुलिस खरीदेगी 50 अत्याधुनिक ड्रोन

 पटना बिहार पुलिस विधि-व्यवस्था एवं अपराधियों के साथ प्रमुख शहरों में यातायात की आसमान से निगरानी करेगी। इसके लिए उच्च क्षमता वाले 50 ड्रोन खरीदे जाएंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने इसकी स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 24 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च होंगे। विभागीय जानकारी के अनुसार, विधि-व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 45 लाख की कीमत वाले 40 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इनका इस्तेमाल बिहार पुलिस की ड्रोन यूनिट करेगी। विरोध-प्रदर्शन, मेले पर भी रहेगी नजर राज्य में निकलने वाले विरोध-प्रदर्शन, भीड़ के उपद्रव, मेला-महोत्सव, त्योहार, बड़े आयोजनों आदि में इन ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा पटना समेत प्रमुख शहरों के चौक-चौराहों, पुल आदि पर लगने वाले जाम के कारण और निदान में भी इन ड्रोन का इस्तेमाल पुलिस करेगी। इसके अलावा माओवाद और एंटी क्राइम ऑपरेशन आदि के लिए भी 10 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इसके लिए इस्तेमाल होने वाला ड्रोन और भी अत्याधुनिक होगा जिसकी कीमत 65 लाख होगी। साढ़े छह करोड़ में आएंगे 10 ड्रोन करीब साढ़े छह करोड़ से ऐसे दस ड्रोन खरीदकर पुलिस को दिए जाएंगे। जंगली, दुर्गम एवं पहाड़ी इलाकों में होने वाले पुलिस आपरेशन में इन ड्रोन का सहयोग लिया जाएगा। विभागीय जानकारी के अनुसार, पुलिस आधुनिकीकरण के तहत 50 ड्रोन की खरीद की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से 60 प्रतिशत जबकि राज्य सरकार के स्तर से 40 प्रतिशत की राशि दी जाएगी। आने वाले पर्व-त्योहार को देखते हुए पुलिस की ड्रोन यूनिट को मजबूत किया जा रहा है। नए ड्रोन के आने से भीड़ नियंत्रण एवं निगरानी में पुलिस को काफी सुविधा होगी।

बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल, ADG-DIG स्तर के 36 अफसर बने जिला प्रभारी

पटना बिहार पुलिस मुख्यालय ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 पुलिस पदाधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी व नोडल पदाधिकारी नामित किया है। नयी व्यवस्था में एडीजी (विधि व्यवस्था) केएस अनुपम को पटना, जबकि एडीजी (बी-सैप) नैय्यर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा एडीजी आर मलार विझि को नालंदा, एडीजी ईओयू डॉ. अमित कुमार जैन को वैशाली, एडीजी एसवीयू सुधांशु कुमार को दरभंगा की कमान मिली है। चार अफसरों को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी गयी है। मुख्यालय ने सभी पुलिस पदाधिकारियों को जिला का आवंटन करते हुए 27 सितंबर तक अपने आवंटित जिले का निरीक्षण पूरा करते हुए डीजीपी प्रीता वर्मा को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। किस जिले के प्रभारी कौन? मुख्यालय के मुताबिक, एडीजी रेल डॉ. कमल किशोर सिंह को समस्तीपुर, एडीजी सीआईडी पारसनाथ को मुंगेर, एडीजी आधुनिकीकरण अजिताभ कुमार को गोपालगंज, एडीजी तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा को लखीसराय व शेखपुरा, एडीजी एटीएस अमृत राज को भोजपुर, आईजी (एससीआरबी) राजेश कुमार को पूर्णिया, आईजी (प्रोविजन) पी कन्नन को सारण, आईजी प्रशिक्षण अनुसूया रणसिंह साहू को औरंगाबाद, आईजी रेल पंकज कुमार राज को भागलपुर और नवगछिया, आईजी मद्य निषेध प्रेमलथा को जहानाबाद, आईजी सीआईडी और सीसीएसयू रंजीत कुमार मिश्रा को मधुबनी, आईजी मुख्यालय मनोज कुमार को गया जी, आईजी विशेष शाखा संजय कुमार को बेतिया और बगहा, डीआईजी सीआईडी जयंत कांत को कटिहार, डीआईजी ईओयू मानवजीत सिंह ढिल्लन को रोहतास, डीआईजी विशेष शाखा हरप्रीत कौर को कैमूर, डीआईजी बी-सैप मीनू कुमारी को बेगूसराय, डीआईजी एससीआरबी सुधीर पोरिका को खगड़िया, डीआईजी आधुनिकीकरण तौहिद परवेज को किशनगंज, डीआईजी (विधि एवं मानवाधिकार) सुशील कुमार को शिवहर, डीआईजी मद्य निषेध अनिल कुमार को सहरसा, डीआईजी कार्मिक राजेंद्र कुमार भील को मधेपुरा, डीआईजी (विधि व्यवस्था) आनंद कुमार को मोतिहारी का प्रभारी पुलिस बनाया गया है। डीआईजी साइबर अवकाश कुमार को सीतामढ़ी, डीआईजी सीआईडी दीपक रंजन को बक्सर, डीआईजी इनामुल हक मेंगनू को जमुई, डीआईजी एसयूवी आमिर जावेद को सीवान, डीआईजी प्रशिक्षण राजीव रंजन एक को बांका, डीआईजी ईआरएसएस अजय कुमार पांडेय को अरवल एवं नवादा, डीआईजी एसटीएफ नीरज कुमार सिंह को अररिया और डीआईजी एटीएस सुशांत कुमार सरोज को सुपौल जिले को प्रभारी पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है। डीजीपी को देंगे रिपोर्ट मुख्यालय ने जिन अफसरों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, उनको अपने-अपने आवंटित जिले में जाकर कानून व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। वे निश्चित अंतराल पर संबंधित जिले में बैठक कर उस जिले के कानून व्यवस्था की स्थिति, केसों के अनुसंधान, उसके निष्पादन की स्थिति, ट्रायल, पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली, गश्ती, महिला संबंधित अपराध व पॉक्सो सहित विभिन्न अधिनियमों के क्रियान्वयन और उसकी स्थिति आदि की समीक्षा कर डीजीपी को रिपोर्ट करेंगे। 25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे इसके साथ ही, बिहार पुलिस मुख्यालय के विधि व्यवस्था प्रभाग ने सभी क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी से अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत जिलों में विधि व्यवस्था से संबंधित मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए क्षेत्रीय आईजी व डीआईजी 25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करते हुए जिले के लंबित कांडों, वारंट, इश्तिहार, कुर्की व गश्ती आदि की समीक्षा कर 29 सितंबर तक पुलिस मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट देंगे।

अपराध की कमाई पर चलेगा बुलडोजर! बिहार में 4000 से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्ती की तैयारी

पटना बिहार में अपराधियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई। दरअसल अपराध से संपत्ति अर्जित करने वाले बिहार के 4000 से अधिक अपराधी और माफियाओं की संपत्तियां अब जब्त होंगी। एसपी की अनुशंसा के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से 800 मामले न्यायालय के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। सोमवार को बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार और एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने इसकी जानकारी दी। पुलिस मुख्यालय में एडीजी (विधि व्यवस्था) ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 107 के तहत संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव है। पुलिस पर हमले के 1166 आरोपित गिरफ्तार एडीजी (विधि व्यवस्था) ने बताया कि विगत तीन माह (जून से अगस्त माह) में 23,958 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इनमें पुलिस पर हमला के मामलों में 1166, सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में 42, भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों में 11 एवं हर्ष फायरिंग के मामलों में 10 सहित कुल 1229 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इसके अलावा, 1270 हत्या, 784 एससी-एसटी एक्ट, 214 डकैती और 473 लूट कांडों के अभियुक्त भी गिरफ्तार हुए। जांच के दौरान बिना निबंधन के मिले 400 महिला छात्रावास केएस अनुपम ने बताया कि राज्य भर में महिला हॉस्टल और कोचिंग संस्थान की जांच को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान सिर्फ पटना में 400 महिला हॉस्टल बिना निबंधन के मिले हैं। पुलिस दीदी की मदद से निजी महिला हॉस्टलों पर नजर रखी जा रही है। इनमें सुरक्षा से संबंधित ऑडिट भी कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ गलत हरकत करने वाले आरोपित शिक्षकों के मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाएगी। पुलिस मुख्यालय इस मामले पर निरंतर नजर रखे हुए है। कांडों के निष्पादन को विशेष अभियान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि लंबित कांडों के पर्यवेक्षण और निष्पादन को लेकर भी अभियान चलाया गया है। अभियान के दौरान दस दिन में 33,390 कांडों का निष्पादन किया गया। इनमें 10,875 कांड एसपी, 9159 कांड डीएसपी और 13356 कांड अंचल पुलिस निरीक्षक स्तर पर निष्पादित किए।

बिहार में थानों का अपग्रेडेशन: 425 थानों में इंस्पेक्टर होंगे थाना प्रभारी

पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधों की जांच को ज्यादा असरदार बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 425 महत्वपूर्ण पुलिस थानों की कमान सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के हाथों में नहीं होगी, बल्कि इन थानों में केवल इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारियों को ही थानाध्यक्ष (थाना प्रभारी) बनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को यह नया आदेश जारी कर दिया है। इन अनुभवी इंस्पेक्टरों के पास अब अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) जैसी शक्तियां होंगी। इनके आने से थानों के अंदर मुकदमों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए दो अलग-अलग विशेष टीमें पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी। 217 नए थाने किए गए अपग्रेड इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने थानों को चुनने का एक बहुत ही साफ-सुथरा पैमाना तय किया है। पहले से तय 208 थानों के अलावा अब राज्य के 217 और थानों को अपग्रेड किया गया है। इन थानों को उनके बड़े आकार, अपराध के लिहाज से संवेदनशीलता और वहां हर साल दर्ज होने वाले कम से कम 350 या उससे अधिक मुकदमों की संख्या को देखकर चुना गया है। डीजीपी के आदेश के बाद यह नया नियम तुरंत पूरे बिहार में लागू कर दिया गया है। रेलवे और जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि अगर कोई इंस्पेक्टर छुट्टी पर भी जाता है, तो उसकी जगह नीचे के रैंक के किसी अधिकारी को इन थानों का परमानेंट चार्ज नहीं दिया जाएगा। थानेदार के नीचे काम करेंगे दो सब-इंस्पेक्टर इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन थानों में इंस्पेक्टर स्तर के थाना प्रभारी के नीचे दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) तैनात किए जाएंगे। इनमें से एक सब-इंस्पेक्टर का काम सिर्फ केसों की जांच करना होगा, जबकि दूसरे सब-इंस्पेक्टर का काम इलाके में शांति बनाए रखना होगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 425 थानों में इस नए तरीके से अफसरों की तैनाती करने से बिहार सरकार की तिजोरी पर कोई भी अतिरिक्त नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी नए पद को बनाने की जरूरत होगी। इस बेहतर व्यवस्था से जहां पुलिस को काम करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी बिना किसी देरी के सीधे थानों में ही हो जाएगा।

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव: 12 रेंज को फिर चार जोन में बांटने की योजना

 पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य में 7 साल पहले खत्म की गई जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने की बात सामने आ रही है. 12 पुलिस रेंज को फिर बांटा जाएगा जोन में फिलहाल बिहार में 12 पुलिस रेंज काम कर रही हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन रेंजों को फिर से जोन में विभाजित किया जाएगा. इससे फील्ड पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी. जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जा सकता है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले की तरह चार जोन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं. 2019 में खत्म हुई थी जोनल व्यवस्था बिहार पुलिस में जुलाई 2019 में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया था. उस समय जोनल सिस्टम को समाप्त कर केवल रेंज व्यवस्था लागू की गई थी. साथ ही बेगूसराय को नया रेंज बनाकर कुल रेंज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी गई थी. अभी किन जिलों को संभालती हैं रेंज? वर्तमान में पटना रेंज में पटना और नालंदा शामिल हैं. मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल आते हैं. भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है. तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं. कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं. वहीं पूर्णिया रेंज में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल हैं. मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा आते हैं. बेगूसराय रेंज में बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल हैं. 37 साल तक लागू रही थी जोन व्यवस्था बिहार पुलिस में जोनल सिस्टम की शुरुआत 1982 में हुई थी. उस समय राज्य को चार जोन- पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत में बांटा गया था. यह व्यवस्था करीब 37 वर्षों तक लागू रही. जोन में आईजी रैंक के अधिकारी और रेंज में डीआईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए जाते थे. पुलिसिंग को और मजबूत करने की कवायद सरकार का मानना है कि जोनल व्यवस्था लागू होने से पुलिस प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा. इसी उद्देश्य से पुराने सिस्टम को नए स्वरूप में फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है.

बिहार पुलिस में सुधार: फील्ड पुलिसिंग मजबूत करने को जोनल ढांचा फिर बनेगा

पटना सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत पुरानी जोनल व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा, जिसे 7 साल पहले खत्म कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में फील्ड पुलिसिंग को अलग-अलग रेंज में बांटा गया था। अब फिर से बिहार के 12 पुलिस रेंज को जोन में बांट दिया जाएगा। फील्ड पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोनल सिस्टम फिर से लागू करने को लेकर पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा गया था जिसे मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। बहुत जल्द इसे लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था में पहले की तरह ही चार जोन बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उसमें कुछ सुधार की भी संभावना है। अभी हैं 12 पुलिस रेंज बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव जुलाई 2019 में किया गया था, तब 4 जोन को खत्म कर सिर्फ रेंज रहने दिया गया था। बेगूसराय को नया रेंज बनाकर तत्कालीन 11 रेंज को बढ़ाकर 12 कर दिया गया था। वर्तमान रेंज के जिलों की बात करें तो पटना रेंज में पटना और नालंदा, मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले शामिल हैं। भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है। वहीं, तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं। कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं। पूर्णिया रेंज में पूरा सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा, तो बेगूसराय रेंज में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले शामिल हैं। इन सभी रेंज में आईजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। 2019 से पहले थे 4 जोन बिहार पुलिस में जोन की व्यवस्था 37 साल तक चली। 1982 में जोनल सिस्टम को लागू किया गया था। कुल चार जोन बनाए गए थे। पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत जोन हुआ करते थे। जुलाई 2019 तक यही व्यवस्था थी और कुल 11 रेंज को तत्कालीन चार जोन में बांटा गया था। रेंज में डीआईजी जबकि जोन में आईजी बैठते थे। तत्कालीन भागलपुर जोन की बात करें तो उस समय इस जोन में भागलपुर और मुंगेर रेंज के 9 जिले शामिल थे। भागलपुर के अंतिम आईजी विनोद कुमार थे।

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।

खगड़िया में महिला दारोगा पर गिरी गाज, वर्दी में रील बनाना पड़ा भारी

पटना बिहार पुलिस में सोशल मीडिया और रील बनाने का क्रेज रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला खगड़िया जिले से सामने आया है, जहाँ एक महिला सब-इंस्पेक्टर को पुलिस मुख्यालय के सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ाना भारी पड़ गया है। परबत्ता थाने में तैनात महिला दरोगा निशा कुमारी का वर्दी पहनकर फिल्मी गानों पर रील बनाना अब उनके करियर के लिए मुसीबत बन गया है। वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और अब उन पर निलंबन की नौबत आ गई है। मुख्यालय के आदेश को दिखाया ठेंगा बता दें कि बिहार पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में एक लिखित आदेश जारी किया था, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर रील, वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करेगा। इसके पीछे का मकसद पुलिस की छवि को गंभीर बनाना और अनुशासन बनाए रखना था। लेकिन दरोगा निशा कुमारी पर इन आदेशों का कोई असर नहीं दिखा। उन्होंने न केवल रील बनाई, बल्कि उन्होंने फिल्मी गानों पर टशन दिखाते हुए कई वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ अकाउंट पर शेयर किए। सोशल मीडिया से वीडियो डिलीट किया जैसे ही दरोगा साहिबा की रील सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुई, इसकी भनक गोगरी एसडीपीओ साक्षी कुमारी को लग गई। अधिकारियों के तेवर देख निशा कुमारी ने आनन-फानन में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से सभी वीडियो डिलीट कर दिए। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वीडियो के स्क्रीनशॉट्स व क्लिप्स अधिकारियों तक पहुँच चुके थे। एसडीपीओ साक्षी कुमारी ने इस मामले को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला मानते हुए दरोगा से जवाब-तलब किया है। एसपी की रिपोर्ट के बाद बढ़ेगी मुश्किलें गोगरी एसडीपीओ साक्षी कुमारी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी की एक गरिमा होती है और उसे ठेस पहुँचाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि महिला सब-इंस्पेक्टर निशा कुमारी को कड़ी हिदायत दी गई है। एसडीपीओ ने स्पष्ट किया कि जिले के एसपी के वापस लौटते ही उन्हें विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी और जिसके बाद विभागीय कार्रवाई के तहत सस्पेंशन या अन्य बड़ी सजा मिल सकती है।

अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी, नीतीश सरकार ने पुलिस के लिए नए हथियारों और गोला-बारूद के प्रस्ताव को दी मंजूरी

पटना बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार पुलिस अब अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने जा रही है। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें करीब 43.42 करोड़ रुपये की लागत से नए हथियार और ट्रेनिंग के लिए गोला-बारूद खरीदने की बात कही गई है। 9mm की पिस्टल से लैस होंगे जवान इस बड़ी खरीद में सबसे खास है '(9mm) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल'। गृह विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित राइफल फैक्ट्री से इन पिस्टलों की सप्लाई होगी। पुलिस इसे दो चरणों में खरीदेगी। पहले चरण में 2,500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1,500 पिस्टल ली जाएंगी। सिर्फ इन पिस्टलों की खरीद पर ही करीब 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। ट्रेनिंग के लिए आएंगी 1.20 लाख विशेष गोलियां बिहार पुलिस ने प्रैक्टिस के लिए 1.20 लाख ब्लैंक गोलियां खरीदने का फैसला किया है। इन गोलियों का इस्तेमाल ट्रेनिंग के दौरान किया जाएगा। पुणे की खड़की फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां और महाराष्ट्र के जलगांव फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां आएंगी। इन विशेष गोलियों पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बिहार पुलिस इन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सीधे देश की प्रतिष्ठित फैक्ट्रियों से करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों को चुना गया है। गृह विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब खरीद की प्रक्रिया में तेजी आएगी।