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अपराध की कमाई पर चलेगा बुलडोजर! बिहार में 4000 से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्ती की तैयारी

पटना बिहार में अपराधियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई। दरअसल अपराध से संपत्ति अर्जित करने वाले बिहार के 4000 से अधिक अपराधी और माफियाओं की संपत्तियां अब जब्त होंगी। एसपी की अनुशंसा के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से 800 मामले न्यायालय के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। सोमवार को बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार और एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने इसकी जानकारी दी। पुलिस मुख्यालय में एडीजी (विधि व्यवस्था) ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 107 के तहत संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव है। पुलिस पर हमले के 1166 आरोपित गिरफ्तार एडीजी (विधि व्यवस्था) ने बताया कि विगत तीन माह (जून से अगस्त माह) में 23,958 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इनमें पुलिस पर हमला के मामलों में 1166, सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में 42, भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों में 11 एवं हर्ष फायरिंग के मामलों में 10 सहित कुल 1229 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इसके अलावा, 1270 हत्या, 784 एससी-एसटी एक्ट, 214 डकैती और 473 लूट कांडों के अभियुक्त भी गिरफ्तार हुए। जांच के दौरान बिना निबंधन के मिले 400 महिला छात्रावास केएस अनुपम ने बताया कि राज्य भर में महिला हॉस्टल और कोचिंग संस्थान की जांच को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान सिर्फ पटना में 400 महिला हॉस्टल बिना निबंधन के मिले हैं। पुलिस दीदी की मदद से निजी महिला हॉस्टलों पर नजर रखी जा रही है। इनमें सुरक्षा से संबंधित ऑडिट भी कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ गलत हरकत करने वाले आरोपित शिक्षकों के मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाएगी। पुलिस मुख्यालय इस मामले पर निरंतर नजर रखे हुए है। कांडों के निष्पादन को विशेष अभियान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि लंबित कांडों के पर्यवेक्षण और निष्पादन को लेकर भी अभियान चलाया गया है। अभियान के दौरान दस दिन में 33,390 कांडों का निष्पादन किया गया। इनमें 10,875 कांड एसपी, 9159 कांड डीएसपी और 13356 कांड अंचल पुलिस निरीक्षक स्तर पर निष्पादित किए।

बिहार में थानों का अपग्रेडेशन: 425 थानों में इंस्पेक्टर होंगे थाना प्रभारी

पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधों की जांच को ज्यादा असरदार बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 425 महत्वपूर्ण पुलिस थानों की कमान सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के हाथों में नहीं होगी, बल्कि इन थानों में केवल इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारियों को ही थानाध्यक्ष (थाना प्रभारी) बनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को यह नया आदेश जारी कर दिया है। इन अनुभवी इंस्पेक्टरों के पास अब अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) जैसी शक्तियां होंगी। इनके आने से थानों के अंदर मुकदमों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए दो अलग-अलग विशेष टीमें पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी। 217 नए थाने किए गए अपग्रेड इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने थानों को चुनने का एक बहुत ही साफ-सुथरा पैमाना तय किया है। पहले से तय 208 थानों के अलावा अब राज्य के 217 और थानों को अपग्रेड किया गया है। इन थानों को उनके बड़े आकार, अपराध के लिहाज से संवेदनशीलता और वहां हर साल दर्ज होने वाले कम से कम 350 या उससे अधिक मुकदमों की संख्या को देखकर चुना गया है। डीजीपी के आदेश के बाद यह नया नियम तुरंत पूरे बिहार में लागू कर दिया गया है। रेलवे और जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि अगर कोई इंस्पेक्टर छुट्टी पर भी जाता है, तो उसकी जगह नीचे के रैंक के किसी अधिकारी को इन थानों का परमानेंट चार्ज नहीं दिया जाएगा। थानेदार के नीचे काम करेंगे दो सब-इंस्पेक्टर इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन थानों में इंस्पेक्टर स्तर के थाना प्रभारी के नीचे दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) तैनात किए जाएंगे। इनमें से एक सब-इंस्पेक्टर का काम सिर्फ केसों की जांच करना होगा, जबकि दूसरे सब-इंस्पेक्टर का काम इलाके में शांति बनाए रखना होगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 425 थानों में इस नए तरीके से अफसरों की तैनाती करने से बिहार सरकार की तिजोरी पर कोई भी अतिरिक्त नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी नए पद को बनाने की जरूरत होगी। इस बेहतर व्यवस्था से जहां पुलिस को काम करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी बिना किसी देरी के सीधे थानों में ही हो जाएगा।

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव: 12 रेंज को फिर चार जोन में बांटने की योजना

 पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य में 7 साल पहले खत्म की गई जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने की बात सामने आ रही है. 12 पुलिस रेंज को फिर बांटा जाएगा जोन में फिलहाल बिहार में 12 पुलिस रेंज काम कर रही हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन रेंजों को फिर से जोन में विभाजित किया जाएगा. इससे फील्ड पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी. जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जा सकता है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले की तरह चार जोन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं. 2019 में खत्म हुई थी जोनल व्यवस्था बिहार पुलिस में जुलाई 2019 में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया था. उस समय जोनल सिस्टम को समाप्त कर केवल रेंज व्यवस्था लागू की गई थी. साथ ही बेगूसराय को नया रेंज बनाकर कुल रेंज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी गई थी. अभी किन जिलों को संभालती हैं रेंज? वर्तमान में पटना रेंज में पटना और नालंदा शामिल हैं. मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल आते हैं. भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है. तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं. कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं. वहीं पूर्णिया रेंज में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल हैं. मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा आते हैं. बेगूसराय रेंज में बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल हैं. 37 साल तक लागू रही थी जोन व्यवस्था बिहार पुलिस में जोनल सिस्टम की शुरुआत 1982 में हुई थी. उस समय राज्य को चार जोन- पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत में बांटा गया था. यह व्यवस्था करीब 37 वर्षों तक लागू रही. जोन में आईजी रैंक के अधिकारी और रेंज में डीआईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए जाते थे. पुलिसिंग को और मजबूत करने की कवायद सरकार का मानना है कि जोनल व्यवस्था लागू होने से पुलिस प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा. इसी उद्देश्य से पुराने सिस्टम को नए स्वरूप में फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है.

बिहार पुलिस में सुधार: फील्ड पुलिसिंग मजबूत करने को जोनल ढांचा फिर बनेगा

पटना सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत पुरानी जोनल व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा, जिसे 7 साल पहले खत्म कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में फील्ड पुलिसिंग को अलग-अलग रेंज में बांटा गया था। अब फिर से बिहार के 12 पुलिस रेंज को जोन में बांट दिया जाएगा। फील्ड पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोनल सिस्टम फिर से लागू करने को लेकर पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा गया था जिसे मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। बहुत जल्द इसे लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था में पहले की तरह ही चार जोन बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उसमें कुछ सुधार की भी संभावना है। अभी हैं 12 पुलिस रेंज बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव जुलाई 2019 में किया गया था, तब 4 जोन को खत्म कर सिर्फ रेंज रहने दिया गया था। बेगूसराय को नया रेंज बनाकर तत्कालीन 11 रेंज को बढ़ाकर 12 कर दिया गया था। वर्तमान रेंज के जिलों की बात करें तो पटना रेंज में पटना और नालंदा, मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले शामिल हैं। भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है। वहीं, तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं। कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं। पूर्णिया रेंज में पूरा सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा, तो बेगूसराय रेंज में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले शामिल हैं। इन सभी रेंज में आईजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। 2019 से पहले थे 4 जोन बिहार पुलिस में जोन की व्यवस्था 37 साल तक चली। 1982 में जोनल सिस्टम को लागू किया गया था। कुल चार जोन बनाए गए थे। पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत जोन हुआ करते थे। जुलाई 2019 तक यही व्यवस्था थी और कुल 11 रेंज को तत्कालीन चार जोन में बांटा गया था। रेंज में डीआईजी जबकि जोन में आईजी बैठते थे। तत्कालीन भागलपुर जोन की बात करें तो उस समय इस जोन में भागलपुर और मुंगेर रेंज के 9 जिले शामिल थे। भागलपुर के अंतिम आईजी विनोद कुमार थे।

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।

खगड़िया में महिला दारोगा पर गिरी गाज, वर्दी में रील बनाना पड़ा भारी

पटना बिहार पुलिस में सोशल मीडिया और रील बनाने का क्रेज रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला खगड़िया जिले से सामने आया है, जहाँ एक महिला सब-इंस्पेक्टर को पुलिस मुख्यालय के सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ाना भारी पड़ गया है। परबत्ता थाने में तैनात महिला दरोगा निशा कुमारी का वर्दी पहनकर फिल्मी गानों पर रील बनाना अब उनके करियर के लिए मुसीबत बन गया है। वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और अब उन पर निलंबन की नौबत आ गई है। मुख्यालय के आदेश को दिखाया ठेंगा बता दें कि बिहार पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में एक लिखित आदेश जारी किया था, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर रील, वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करेगा। इसके पीछे का मकसद पुलिस की छवि को गंभीर बनाना और अनुशासन बनाए रखना था। लेकिन दरोगा निशा कुमारी पर इन आदेशों का कोई असर नहीं दिखा। उन्होंने न केवल रील बनाई, बल्कि उन्होंने फिल्मी गानों पर टशन दिखाते हुए कई वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ अकाउंट पर शेयर किए। सोशल मीडिया से वीडियो डिलीट किया जैसे ही दरोगा साहिबा की रील सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुई, इसकी भनक गोगरी एसडीपीओ साक्षी कुमारी को लग गई। अधिकारियों के तेवर देख निशा कुमारी ने आनन-फानन में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से सभी वीडियो डिलीट कर दिए। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वीडियो के स्क्रीनशॉट्स व क्लिप्स अधिकारियों तक पहुँच चुके थे। एसडीपीओ साक्षी कुमारी ने इस मामले को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला मानते हुए दरोगा से जवाब-तलब किया है। एसपी की रिपोर्ट के बाद बढ़ेगी मुश्किलें गोगरी एसडीपीओ साक्षी कुमारी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी की एक गरिमा होती है और उसे ठेस पहुँचाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि महिला सब-इंस्पेक्टर निशा कुमारी को कड़ी हिदायत दी गई है। एसडीपीओ ने स्पष्ट किया कि जिले के एसपी के वापस लौटते ही उन्हें विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी और जिसके बाद विभागीय कार्रवाई के तहत सस्पेंशन या अन्य बड़ी सजा मिल सकती है।

अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी, नीतीश सरकार ने पुलिस के लिए नए हथियारों और गोला-बारूद के प्रस्ताव को दी मंजूरी

पटना बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार पुलिस अब अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने जा रही है। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें करीब 43.42 करोड़ रुपये की लागत से नए हथियार और ट्रेनिंग के लिए गोला-बारूद खरीदने की बात कही गई है। 9mm की पिस्टल से लैस होंगे जवान इस बड़ी खरीद में सबसे खास है '(9mm) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल'। गृह विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित राइफल फैक्ट्री से इन पिस्टलों की सप्लाई होगी। पुलिस इसे दो चरणों में खरीदेगी। पहले चरण में 2,500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1,500 पिस्टल ली जाएंगी। सिर्फ इन पिस्टलों की खरीद पर ही करीब 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। ट्रेनिंग के लिए आएंगी 1.20 लाख विशेष गोलियां बिहार पुलिस ने प्रैक्टिस के लिए 1.20 लाख ब्लैंक गोलियां खरीदने का फैसला किया है। इन गोलियों का इस्तेमाल ट्रेनिंग के दौरान किया जाएगा। पुणे की खड़की फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां और महाराष्ट्र के जलगांव फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां आएंगी। इन विशेष गोलियों पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बिहार पुलिस इन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सीधे देश की प्रतिष्ठित फैक्ट्रियों से करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों को चुना गया है। गृह विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब खरीद की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

होली पर रंगों की मस्ती में कानून तोड़ा तो नहीं बख्शेगी बिहार पुलिस, जानें पूरा सुरक्षा इंतज़ाम

पटना बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने शनिवार को होली से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए। होली चार मार्च को मनाई जाएगी। डीजीपी कंट्रोल रूम को हर 2 घंटे में मिलेगी अपडेट कुमार ने बताया कि होली पर उपद्रव नहीं किया जायेगा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पुलिस थानों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर दो घंटे में डीजीपी नियंत्रण कक्ष को स्थिति की रिपोर्ट दें।" असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश एडीजी (विधि-व्यवस्था) पंकज कुमार दराद ने निर्देश दिया है कि पुलिस पिछले तीन वर्षों की घटनाओं का विश्लेषण करे। अक्सर देखा गया है कि होली की आड़ में पुरानी दुश्मनी या भूमि विवाद को लेकर वारदातों को अंजाम दिया जाता है। असामाजिक तत्वों के खिलाफ धारा-126 और BNSS के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सीसीए (CCA) की धारा-3 और बीएनएसएस की धारा-170 के तहत गिरफ्तारी भी हो सकती है। संदिग्ध लोगों से धारा-135 के तहत बॉन्ड भरवाया जाएगा, जिसका मिलान अनुमंडल दंडाधिकारी कार्यालय से होगा। राज्य में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात राज्यभर में होली को लेकर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सभी जिलों में 12 कंपनी रेंज रिजर्व बल, 31 कंपनी बीसैप (बिहार सशस्त्र पुलिस बल), 2768 पीटीसी प्रशिक्षु सिपाही और 5100 होमगार्ड तैनात किए गए हैं। इसके अलावा तीन कंपनी केंद्रीय पुलिस बल की भी तैनाती की गई है। राजधानी पटना में सबसे अधिक सुरक्षा बल लगाए गए हैं। यहां तीन कंपनी रेंज रिजर्व बल, तीन कंपनी बीसैप, 535 नवनियुक्त सिपाही और 400 होमगार्ड तैनात रहेंगे। इसके अतिरिक्त दरभंगा, बेगूसराय, जमुई, मुंगेर, रोहतास, बक्सर, गया और मोतिहारी में भी अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे आपसी सौहार्द बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या नियंत्रण कक्ष को दें, ताकि होली का त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में मनाया जा सके।

बिहार में पुलिस जवानों को हर रोज लगानी होगी दौड़

भागलपुर. बिहार पुलिस सुनते ही एक तस्वीर उभरती थी- थुलथुल काया और उस पर वर्दी। अब यह तस्वीर बदलने वाली है। अब बिहार पुलिस के जवान और पदाधिकारी स्मार्ट दिखेंगे। चुस्त-दुरुस्त काया और उस पर सलीके से पहनी हुई वर्दी। पुलिस मुख्यालय ने अब स्मार्ट पुलिसिंग के लिए पुलिस जवान और अधिकारियों को स्मार्ट बनाने का निर्णय लिया है। जी हां, अब पुलिस जवान और आफिसरों की प्रत्येक दिन सुबह में पुलिस केंद्र के मैदान पर हाजिरी लगेगी, जहां वे अपने बाडी को फिट रखने के लिए एक घंटे तक पसीना बहाएंगे। रेंज के भागलपुर, नवगछिया और बांका के पुलिस केंद्र में सिंथेटिक ट्रैक बनाया जाएगा। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ लगा कर पुलिस जवान और अधिकारी थुलथुल काया से निजात पाकर खुद को फिट बनाएंगे। लापरवाह पुलिस कर्मियों पर होगी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सिंथेटिक ट्रैक मुहैया कराने को हरी झंडी मिल गई है। बहुत जल्द सारी सुविधाएं पुलिस मुख्यालय पुलिस केंद्र में मुहैया करा दी जाएगी। पुलिस केंद्र में अब सिर्फ जिम खोलना ही मकसद नहीं है, बल्कि रोजाना जवानों को वहां उपस्थित हो वर्क-आउट भी करना है, जिसकी मानीटरिंग एसएसपी, एसपी, डीएसपी, सार्जेंट मेजर करेंगे। सुबह यदि पुलिसकर्मी बैरक या क्वार्टर में रहकर खर्राटे लेते रहेंगे या आराम तलबी दिखाएंगे तो उनका यह कृत्य लापरवाही की श्रेणी में लाया जाएगा और उनपर जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वरीय पुलिस पदाधिकारी भी पहुंचने लगे हैं अभ्यास में भागलपुर रेंज में जवानों की संख्या करीब चार हजार है। जिसमें हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक, इंस्पेक्टर को जोड़ दें तो यह संख्या पांच हजार के पार हो जाएगी। भागलपुर में जहां एसएसपी प्रमोद कुमार यादव, सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार समेत कई पदाधिकारी भी नियमित अभ्यास में पुलिस जवानों के बीच पहुंच रहे हैं। नवगछिया और बांका जिले में भी कमोवेश सक्षम पुलिस अधिकारियों की ऐसी उपस्थिति जवानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करेगी। वजन होगा कम, मांसपेशियों को मिलेगी मजबूती पालीयूरेथेन या लैटेक्स से तैयार की जाने वाली सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने से कई फायदे होते हैं। इस पर दौड़कर पुलिसकर्मी न सिर्फ अपनी वजन कम कर सकेंगे बल्कि उनकी मांसपेशियां भी मजबूत बन जाएगी। बैड कालेस्ट्रोल से उन्हें मुक्ति मिलेगी। उच्च रक्तचाप, हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ते समय यदि पुलिसकर्मी गिर जाएं तो भी उन्हें चोटें कम आएगी। पुलिस मुख्यालय की तरफ से अभिनव प्रयोग चुस्त-दुरुस्त शरीर स्मार्ट पुलिसिंग का सबसे प्रमुख हिस्सा है। पुलिसकर्मी-पदाधिकारियों की टीम तभी बेहतर प्रदर्शन कर सकती जब वो पूरी तरह फिट और चुस्त-दुरुस्त हों। पुलिस मुख्यालय की तरफ से यह अभिनव प्रयोग पुलिसिंग को और बेहतर बना देगा। – विवेक कुमार, रेंज आईजी, भागलपुर।

बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई के 462 पदों पर होगी भर्ती

पटना. बिहार पुलिस में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर आया है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने बिहार पुलिस रेडियो (वितंतु) संवर्ग में सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) के 462 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू होगी और चार मार्च तक चलेगी। पुरुष, महिला और मंगलामुखी सभी श्रेणी के अभ्यर्थी इस भर्ती में आवेदन कर सकेंगे। शैक्षणिक योग्यता और पात्रता तय इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय के साथ विज्ञान में स्नातक (बीएससी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को 45 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना होगा। आयोग ने साफ किया है कि शैक्षणिक योग्यता की जांच सभी चरणों में की जाएगी। ऊंचाई और शारीरिक मानकों का निर्धारण भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। अनारक्षित और पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 165 सेंटीमीटर तय की गई है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों के लिए यह मानक 160 सेंटीमीटर रखा गया है। सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेंटीमीटर निर्धारित की गई है। तीन चरणों में होगी पूरी चयन प्रक्रिया एएसआई भर्ती की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 100 अंकों का एक प्रश्न पत्र होगा। इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक विषयों से 40 प्रश्न और भौतिकी से 60 प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि दो घंटे की होगी और प्रश्न वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय होंगे। 30 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य माने जाएंगे। मुख्य परीक्षा में दो प्रश्न पत्र प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र सामान्य भाषा ज्ञान का होगा, जिसमें सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी से 50-50 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। यह परीक्षा इंटरमीडिएट स्तर की होगी और डेढ़ घंटे की होगी। इसमें न्यूनतम 30 अंक लाना अनिवार्य होगा, हालांकि इसके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे। दूसरा प्रश्न पत्र स्नातक स्तर की भौतिकी का होगा, जिसमें 100 अंकों के 100 प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि तीन घंटे की रहेगी। नेगेटिव मार्किंग और शारीरिक दक्षता परीक्षा प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.2 अंक काटे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के भौतिकी प्रश्न पत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके आधार पर रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। तीसरे चरण की यह परीक्षा अर्हक प्रकृति की होगी, जिसमें कोई अंक नहीं दिए जाएंगे, लेकिन सभी मानकों में सफल होना अनिवार्य होगा। युवाओं के लिए बड़ा मौका बीपीएसएससी की यह भर्ती बिहार पुलिस में तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। आयोग ने अभ्यर्थियों से समय पर आवेदन करने और आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ने की अपील की है, ताकि किसी भी तरह की गलती से बचा जा सके।