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नागौर में धमाके से दहला बड़ली इलाका, 100 फीट दूर तक वाहनों को नुकसान; मकानों में आई दरारें

नागौर नागौर शहर के बड़ली क्षेत्र में गुरुवार सुबह बारूद के गोदाम में भीषण विस्फोट हो गया। हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर घायल हो गए। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके से आसपास के मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं और करीब 100 फीट के दायरे में खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। घटना सुबह करीब 9:40 बजे की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान दो गंभीर घायल युवक भी मिले, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। धमाके से बस के शीशे टूटे, मकानों में आई दरारें विस्फोट का असर घटनास्थल के आसपास के मकानों और वाहनों पर भी पड़ा। करीब 100 फीट दूर खड़ी एक बस के सभी शीशे टूट गए। आसपास के घरों की दीवारों में दरारें आ गईं। धमाके की तेज आवाज सुनकर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर पहुंच गए। पुलिस ने मौके पर भीड़ को नियंत्रित कर राहत एवं बचाव कार्य जारी रखा। गोदाम में और मजदूर होने की आशंका हादसे के समय गोदाम में कितने लोग मौजूद थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। दो युवकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दो गंभीर घायल मिले हैं। मृतकों की पहचान और विस्फोट के वास्तविक कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे घटनास्थल का जायजा ले रही हैं। पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर तैयार किया जाता है बारूद स्थानीय लोगों ने बताया कि गोदाम में पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर बारूद तैयार किया जाता था। गोदाम के एक हिस्से में तैयार पटाखों का स्टॉक भी रखा हुआ था। प्रारंभिक जानकारी में गोदाम मालिक का नाम अमीन बताया जा रहा है। बताया गया है कि उसके पास पटाखों का स्थायी लाइसेंस है। हालांकि, लाइसेंस के तहत कितनी मात्रा में पटाखे रखने की अनुमति थी और मौके पर कितना बारूद व विस्फोटक सामग्री रखी थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लाल किला बम धमाके की पूरी साजिश बेनकाब, उमर उन नबी समेत 13 आरोपियों पर NIA की चार्जशीट में बड़े खुलासे

नई दिल्ली दिल्ली में लाल किला के पास पिछले साल 10 नवंबर को बम ब्लास्ट हुआ था. इस मामले में जांच कर रही NIA ने अब चार्जशीट दाखिल कर दी है. NDTV के पास इस चार्जशीट की कॉपी है. इसके मुताबिक, इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी ही था. डॉ. उमर ही वह आतंकी था जो सुसाइड बॉम्बर था।  NIA ने अपनी चार्जशीट में 13 लोगों को आरोपियों बनाया है. इस चार्जशीट में सभी 13 आतंकियों की तस्वीर भी सामने आ गई है. चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि जांच के दौरान जो सबूत हाथ लगे, उससे साबित होता है कि धमाके के वक्त उमर कार में ही मौजूद था। लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 29 लोग घायल हो गए थे।   राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में अहम दावे सामने आए हैं। NIA की चार्जशीट RC-21/2025/NIA/DLI के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी ने कार के अंदर रहते हुए कथित तौर पर IED को सक्रिय किया था।एनआईए के मुताबिक, धमाके के समय आरोपी उमर उन नबी कार के अंदर मौजूद था और उसने कथित तौर पर एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को सक्रिय किया। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इस पूरे घटनाक्रम को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जोड़ते हुए जांच के निष्कर्ष पेश किए हैं।NIA ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री का प्रभाव था। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास कथित तौर पर ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक/हत्यारा कैसे बनें’ मिली थी, जिसे एजेंसी ने AQAP से जुड़ा मैनुअल बताया है। NIA का कहना है कि इस सामग्री में विस्फोटक, हथियार, गुप्त अभियानों और IED से संबंधित जानकारी के अलावा ऑपरेशनल सुरक्षा, निगरानी, बच निकलने और गुप्त गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी शामिल थी। एजेंसी के मुताबिक, बरामद दस्तावेज केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनमें ऐसी जानकारियां भी थीं जिनका इस्तेमाल किसी आतंकी सेल की गतिविधियों में किया जा सकता था। कार के अंदर बैठकर खुद दबाया था बटन NIA की चार्जशीट में साफ लिखा है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त गाड़ी के अंदर ही मौजूद था. उसने कार के भीतर बैठकर कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया और आईईडी (IED) को खुद एक्टिवेट कर दिया. यह हमला अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. आतंकी किसी भी कीमत पर लाल किले जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगह पर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे।  ‘How to Become an Assassin’ मैनुअल से ली गई ट्रेनिंग जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आतंकी रेडिकलाइजेशन के लिए ऑनलाइन डार्क कंटेंट का सहारा ले रहे थे. आरोपी अल-कायदा (AQAP) से जुड़े एक डिजिटल मैनुअल फॉलो कर रहे थे, जिसका टाइटल था— ‘Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin’. इस किताब में सिर्फ नफरत भरे भाषण ही नहीं थे बल्कि हथियारों, एक्सप्लोसिव्स, TATP के इस्तेमाल और रिमोट-कंट्रोल डेटोनेटर बनाने की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान बनाने, चोरी-छिपे मूवमेंट करने और अकेले हमला करने की स्ट्रैटेजी भी सिखाई गई थी।  ‘पैनिक अटैक’ के चक्कर में जल्दी कर दिया ब्लास्ट NIA के खुलासे के मुताबिक, आतंकी लाल किले की रेकी पिछले लगभग दो सालों से कर रहे थे. दिसंबर 2023 से ही उमर उन नबी अपने साथियों के साथ कई बार लाल किले के चक्कर काट चुका था. हालांकि हमले की तारीख पहले से 10 नवंबर तय नहीं थी. दरअसल, श्रीनगर में जब उसके साथी आतंकियों की धरपकड़ शुरू हुई तो उमर बुरी तरह घबरा गया. उसे लगा कि पुलिस उस तक कभी भी पहुंच सकती है. इसी डर और पकड़े जाने के खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के पास जाकर खुद को उड़ा लिया।  लोकतंत्र के खिलाफ नफरत और शरिया का एजेंडा अल-फलाह स्थित ठिकाने से NIA को हाथ से लिखे कई नोट्स मिले हैं. इन नोट्स में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खारिज करते हुए शरिया कानून लागू करने की बातें लिखी थीं. चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की वजह यही थी कि यह ‘भारतीय राज्य और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक’ है।    हिंसक विचारधारा का आरोप अपनी चार्जशीट में एनआईए ने कुछ प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी व्यवस्था’ बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, इस सामग्री में यह विचार भी सामने रखा गया कि मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री, गजवा-ए-हिंद के संदर्भ और इराक, अफगानिस्तान तथा अमेरिका में हुए विभिन्न विद्रोहों का उल्लेख भी था। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को कथित AGuH मॉड्यूल की वैचारिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा है। फर्जी पहचान और गुप्त गतिविधियों की ट्रेनिंग का दावा चार्जशीट में NIA ने यह भी कहा है कि बरामद सामग्री में कथित आतंकी नेटवर्क के सदस्यों के लिए ऑपरेशनल निर्देश मौजूद थे। एजेंसी के मुताबिक, इनमें पहचान छिपाने, गुप्त तरीके से घुसपैठ करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग फर्जी पहचान तैयार करने जैसे तरीकों का उल्लेख था। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में हमले की रणनीतियों, लक्षित हमलों, अकेले किए जाने वाले हमलों और आत्मघाती हमलों से जुड़ी सामग्री भी मौजूद थी।  

जालंधर-अमृतसर धमाकों के पीछे खालिस्तानी-ISI नेटवर्क, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी

 जालंधर/अमृतसर पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान समर्थित खुफिया एजेंसी, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। बीते महीनों में कई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। अप्रैल 2026 में पटियाला-राजपुरा रेल ट्रैक पर कम तीव्रता का आईईडी विस्फोट हुआ जिसे बड़े हमले की साजिश के तौर पर देखा गया।  चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला हुआ जिससे राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल मच गई। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सिरहिंद रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया गया जबकि नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया था।  मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर विस्फोट की घटना भी सामने आई जिसकी जांच एनआईए ने की थी। इन घटनाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने कई बड़ी कामयाबियां भी हासिल की हैं। अप्रैल 2026 में तरनतारन से भारी मात्रा में आरडीएक्स और आधुनिक हथियार बरामद कर एक बड़े हमले को टाल दिया गया। जनवरी 2026 में होशियारपुर में बीकेआई से जुड़े मॉड्यूल से ढाई किलो आरडीएक्स, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। गुरदासपुर, नवांशहर और अमृतसर में भी हथियारों की बरामदगी ने संकेत दिया कि आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं। सीसीटीवी गैंग की गिरफ्तारी पंजाब और देश के अन्य इलाकों में बीते कुछ समय से ऐसी गतिविधियां नोटिस की जा रही है जिससे खुफिया एजेंसियों के काम खड़े हो गए हैं. बीते कुछ समय में देश के अलग-अलग इलाकों में सीसीटीवी गैंग की गिरफ्तारी भी इसी से जुड़ी घटना मानी जा रही है. ये गैंग हाईवे टोल प्लाजा और अन्य इलाकों संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी इंस्टॉल कर उसका एक्सेस पाकिस्तान में बैठे आकाओं को देते थे. इन सभी गतिविधियों के पीछे आतंकी लांडा और रिंदा का हाथ माना जा रहा है।  आतंकी लखबीर सिंह लांडा आतंकी घोषित बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा खालिस्तानी आतंकी लखबीर सिंह लांडा को भारत सरकार ने यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है. कनाडा में बैठे लांडा पर मोहाली इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर RPG हमले का मास्टरमाइंड होने, पाकिस्तान से IED और हथियारों की तस्करी, टारगेट किलिंग और जबरन वसूली के आरोप हैं. वह हरदीप सिंह निज्जर और गुरपतवंत सिंह पन्नून जैसे आतंकियों से जुड़ा था. एनआईए ने उस पर इनाम रखा है. लांडा पंजाब के तरन तारन का रहने वाला है और कनाडा के एडमंटन में छिपा बैठा ISI के इशारे पर मॉड्यूल चला रहा है।  हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा गैंग फिर सक्रिय दूसरी ओर, पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के गैंग को फिर सक्रिय करने की कोशिशें सामने आई हैं. महाराष्ट्र के नांदेड़ पुलिस ने रिंदा के पिता चरण सिंह संधू और भाई नवजोत सिंह संधू को एक्सटॉर्शन के मामले में गिरफ्तार किया है. पुलिस को शक है कि रिंदा अभी भी अपने परिवार के जरिए नांदेड़ और आसपास के इलाकों में धमकियां देकर वसूली करवा रहा है. रिंदा पर 2021 में पंजाब पुलिस पर हमले समेत कई मामलों में 10 लाख का इनाम है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या रिंदा ISI के साथ मिलकर अपना पुराना गैंग भारत में फिर से खड़ा कर रहा है।  इधर, लखनऊ में यूपी एटीएस की एक बड़ी कामयाबी भी इसी सिलसिले में देखी गई. संदिग्ध आतंकी तुषार चौहान उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान और समीर खान की कस्टडी रिमांड खत्म होने वाली है. एटीएस ने नोएडा से दोनों को पिस्टल, रकम और अन्य सुराग मिलने की बात कही है. दोनों पाकिस्तानी हैंडलर्स (ISI से जुड़े मेजर हामिद, इकबाल आदि) के इशारे पर ग्रेनेड अटैक और टारगेट किलिंग की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को रैडिकलाइज करने की साजिश भी सामने आई।  अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है। अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। इस पूरे परिदृश्य में गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ नई चुनौती बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने 400 से अधिक गैंगस्टर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया जिससे स्पष्ट हुआ कि संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच तालमेल बढ़ रहा है। यही नेटवर्क स्थानीय स्तर पर हमलों को अंजाम देने और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में भूमिका निभा रहा है।   भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड हमला और पुलिस थानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं दर्शाती हैं कि आतंकी संगठनों का मकसद पंजाब के शांत माहौल को बिगाड़ना और डर फैलाना है। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं।इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है। पंजाब फिलहाल संवेदनशील दौर से गुजर रहा है जहां सुरक्षा तंत्र लगातार सतर्क है। 

स्विट्जरलैंड में नए साल के जश्न के दौरान ब्लास्ट, 40 की मौत, मचा हड़कंप

वालिस कैंटन नए साल के जश्न के बीच गुरुवार को स्विट्जरलैंड में बड़ा हादसा हो गया है। यहां एक स्की रिजॉर्ट में धमाके के बाद कई लोगों के मौत की आशंका जताई गई है। स्विस पुलिस ने गुरुवार सुबह बताया कि यह धमाका लक्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट सिटी क्रैंस मोंटाना में एक बार में हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाके में 40 लोगों की जलकर मौत हो गई है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि धमाके के समय बार में 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे। दक्षिण-पश्चिमी स्विट्जरलैंड के वालिस कैंटन में एक पुलिस प्रवक्ता गैटन लैथियन ने एएफपी को बताया, "अज्ञात कारण से धमाका हुआ है। कई लोग घायल हुए हैं और कई लोगों की मौत हुई है।" उन्होंने बताया कि धमाका सुबह करीब 1:30 बजे ले कॉन्स्टेलेशन नाम के एक बार में हुआ, जो पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। उस वक्त लोग यहां नए साल का जश्न मना रहे थे। धमाके के तुरंत बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया. घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को घेराबंदी में लेकर जांच जारी है. पुलिस के मुताबिक धमाका उस वक्त हुआ, जब रिजॉर्ट में नए साल की पार्टियां चल रही थीं. धमाका देर रात करीब डेढ़ बजे हुए था, जब लोग जश्न में डूबे हुए थे. स्थानीय मीडिया के मुताबिक जिस बिल्डिंग में बार है, वो आग की लपटों में घरी हुई थी और चीख-पुकार सुनी जा सकती थी. पूरा इलाका पुलिस ने कर दिया सील इस घटना के बाद इस पूरे इलाके को पुलिस ने सील कर दिया है और वो इस जांच में जुटी हुई है कि आखिर रिसॉर्ट में आग लगी कैसे? चूंकि यहां के बार में आग लगती हुई देखी गई है, ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि वहीं कुछ हुआ होगा. वो बात अलग है कि अब तक घटना की वजह के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है. फायरफाइटर्स लोगों को वहां से निकालने में लगे हुए हैं. क्या है क्रांस मोंटाना और क्यों है मशहूर? जहां ये घटना हुई है, वो क्रांस मोंटाना इलाका स्विट्जरलैंड का एक मशहूर और बेहद लग्जरी हिल स्टेशन है. यह देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में वालेस कैंटन में स्थित है और खास तौर पर अपने स्की रिसॉर्ट्स, खूबसूरत नजारों और हाई-एंड लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है. क्रांस मोंटाना समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊंचाई पर बसा है और यहां से ऐल्प्स माउंटेन रेंज के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं. सर्दियों में यह जगह स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और विंटर स्पोर्ट्स के लिए दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है, जबकि गर्मियों में हाइकिंग, गोल्फ और हेल्थ रिसॉर्ट्स के लिए मशहूर रहती है. यह शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने गोल्फ टूर्नामेंट्स, लग्जरी होटल्स, स्पा और फाइन डाइनिंग के लिए भी जाना जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में अमीर पर्यटक, सेलिब्रिटी और बिजनेस लीडर्स छुट्टियां मनाने आते हैं. स्विस मीडिया के हवाले से सामने आई तस्वीरों में एक इमारत में आग लगी हुई देखी जा सकती है। वहीं पास ही कई इमरजेंसी गाड़ियां दिखाई दे रही थीं। पुलिस ने बताया है कि बचाव अभियान जारी है। इस बीच स्काई न्यूज ने पुलिस के हवाले से बताया कि इस घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कुछ स्थानीय मीडिया का कहना है कि यह आंकड़ा बहुत ज्यादा हो सकता है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने मरने वालों की संख्या की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है। कहा जा रहा है कि कई लोगों के जलने के बाद उनका इलाज जारी है। पुलिस ने एक बयान में कहा है कि इलाके को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और क्रैन्स-मोंटाना के ऊपर नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है।

क्वेटा में बड़ा आतंकी हमला: सैन्य ठिकाने पर फिदायीन हमला और गोलीबारी, 10 जवान शहीद

 क्वेटा पाकिस्तान के क्वेटा शहर में स्थित सेना के मुख्यालय आज भयंकर धमाका हुआ है. पूर्वी क्वेटा में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय के पास मंगलवार को एक ज़ोरदार विस्फोट के बाद अचानक गोलीबारी हुई. विस्फोट की आवाज मॉडल टाउन और आसपास के इलाकों में सुनी गई, जिसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. विस्फोट से आस-पास के घरों और इमारतों की खिड़कियां टूट गईं. पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट डॉन के अनुसार इस धमाके में अबतक 10 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 32 लोग घायल हो गए हैं. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है. बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर और स्वास्थ्य सचिव मुजीब-उर-रहमान ने सिविल अस्पताल क्वेटा, बीएमसी अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में आपातकाल की घोषणा कर दी है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी सलाहकार, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ ड्यूटी पर हैं. बचाव सूत्रों ने पुष्टि की है कि घायलों और मृतकों के शवों को सिविल अस्पताल क्वेटा भेज दिया गया है. सूत्रों के अनुसार धमाके के बाद शहर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया है. धमाके के बाद मौके पर फायरिंग की भी आवाज सुनी गई है. इसके बाद लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं. धमाके के बाद घटनास्थल से धुएं का गुबार निकलते हुए देखा गया.  शुरुआती रिपोर्ट में पता चला है कि धमाका बेहद तेज था, लेकिन धमाके की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ पाई है.  इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है.  धमाके की तस्वीरें वहां लगी एक सीसीवीटी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. इसमें धमाके की आवाज और आग की लपटें देखी जा सकती हैं.  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट का पता लगाने के लिए जांच जारी है. बचाव दल और पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं, जबकि तलाशी अभियान के लिए इलाके को सील कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल कर्मचारी ड्यूटी पर हैं.  क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. ये स्थान चरमपंथी हिंसा का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां पर अलगाववादी और चरमपंथी हिंसा की घटनाएं आम है. इसमें लश्कर-ए-झंगवी (LeJ) और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (ISKP) के नाम आते हैं.  इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) भी इस इलाके में सक्रिय है. हाल-फिलहाल में बलूच अलगाववादी हमले भी यहां बढ़े हैं.