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चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन: भारत ने सफलतापूर्वक टेस्ट किया एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली डिफेंस सेक्टर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में आज सुबह-सुबह एक बड़ी खबर तब सामने आई, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर बताया कि DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा का प्रदर्शन करने के लिए लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए. रक्षा मंत्री ने इस पोस्ट के साथ तीन मिसाइलों के परीक्षण की तस्वीरें भी साझा की है. रक्षा मंत्री के पोस्ट ने पोस्ट में यह भी लिखा कि DRDO के इस सफल परीक्षण से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिसके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को रोकने की क्षमता है. रक्षा मंत्री ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।  डीआरडीओ को मिली यह सफलता पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ाने वाला है. इन दोनों देशों के साथ भारत के सीमा सहित कई मुद्दों पर विवाद लंबे समय से है. ऐसे में डीआरडीओ को मिली यह सफलता न केवल दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने वाला है. बल्कि दुश्मन देशों की ओर से होने वाले खतरनाक हमलों को भी रोकने वाला है।  भारत की रक्षा अनुसंधान एंव विकास संगठन (DRDO) को मिली इस सफलता के बारे में एक्स पोस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा- DRDO ने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक टेस्ट किया है, जो दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों से निपटने में मदद करेंगी।  उन्होंने आगे लिखा लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस वाले तीन फ़्लाइटों का टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए गए।  रक्षा मंत्री ने लिखा कि इस टेस्ट में मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया. इंटरसेप्टर ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. इन सिस्टम को नई मिसाइल चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है।  चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हुआ भारत इन सफल परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों में ला खड़ा किया है जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता है. 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज' के पहले फ़्लाइट-टेस्ट के दौरान मध्यम दूरी की एंटी-शिप सुरक्षा का प्रदर्शन किया गया. इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई। 

त्रेता से द्वापर तक: जानिए किस अस्त्र की शक्ति सबसे प्रबल मानी गई है

ब्रह्मा, विष्णु और महेश हिंदू धर्म के तीन मुख्य देवता हैं. इन तीनों को त्रिमूर्ति कहा जाता है. ब्रह्मा जी को जगत का रचयिता, श्री हरि विष्णु को पालनकर्ता और महेश यानी भगवान शिव को जगत का संहारक माना गया है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इस जगत की रचना की है. भगवान श्रीहरि विष्णु जगत का पालन करते हैं. इसी तरह शिव जी को जगत का संहार करने वाला कहा गया है. तीनों ही देवताओं के पास अपने-अपने अस्त्र- शस्त्र हैं. तीनों देवाताओं के अस्त्र- शस्त्र बहुत शक्तिशाली हैं. ब्रह्मा जी के पास ब्रह्मास्त्र है. भगवान श्रीहरि विष्णु के पास सुदर्शन चक्र और शिवजी के पास त्रिशूल है. ये तीनों ही अस्त्र अपने आप में बहुत शक्तिशाली बताए जाते हैं, क्योंकि ये तीनों अस्त्र त्रिमूर्ति के अधीन हैं. मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों अस्त्र पर तीनों देवताओं का अधिकार है, लेकिन कई बार लोगों के मन में ये जानने की इच्छा होती है कि ब्रह्मास्त्र, सुदर्शन चक्र और त्रिशूल में सबसे शक्तिशाली कौन सा अस्त्र है? आइए इस बारे में जानते हैं. ब्रह्मास्त्र- धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मास्त्र के निर्माता स्वंय ब्रह्मा जी माने जाते हैं. ब्रह्मास्त्र बहुत शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है. शक्तिशाली होने के साथ-साथ ये अस्त्र बहुत ही दिव्य और विनाशकारी भी माना जाता है. ब्रह्मास्त्र अचूक अस्त्र है. इस अस्त्र को सिर्फ मंत्रों द्वारा ही सक्रिय किया जा सकता है. सुदर्शन चक्र- इसकी बात करें तो इसे भगवान विष्णु धारण करते हैं, लेकिन उन्हें ये अस्त्र भगवान शिव ने उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर उनको प्रदान किया था. धार्मिक ग्रंथों में सुदर्शन चक्र की उत्पत्ति का संबंध महादेव की तीसरी आंख से जोड़ा जाता है. सुदर्शन चक्र भी एक अचूक अस्त्र है, जिसे कोई काट नहीं सकता. त्रिशूल- मान्यताओं के अनुसार, महादेव ने खुद त्रिशूल का निर्माण किया था. त्रिशूल सबसे दिव्य और अजेय अस्त्र कहा जाता है. इसका वार कभी खाली नहीं जाता है. इसका उपयोग भगवान शिव और माता पार्वती ही कर सकते हैं. इन तीनों ही अस्त्रों की अपनी शक्ति है. तीनों ही अत्यंत विनाशकारी है, लेकिन कई मान्यताओं में त्रिशूल को सबसे घातक और विनाशकारी बताया गया है.