samacharsecretary.com

BRICS बनाम NATO: रूस ने अमेरिका को दिया करारा जवाब, वैश्विक ताकत का दावा

मास्को  रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में अमेरिका और पश्चिमी देशों के समूह नाटो के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा है। लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, “ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं। ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस जैसे समूहों में आम सहमति ज़्यादातर बनी रहती है।” उन्होंने कहा, “ यहां आप नाटो की तरह आसानी से फैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं 'चुप रहो' और सबको पता है कि यह सब कैसे काम करता है।” लावरोव ने आगे कहा कि यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।" बता दें कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूराेपीय संघ में कानून का राज "ब्रसेल्स की तानाशाही" से बदल गया है। इससे पहले ने लावरोव ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अमेरिका पर 'अनुचित तरीकों' का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। लावरोव ने एक इंटरव्यू में कहा, ''अमेरिका भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्यों जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ हमारे व्यापार, निवेश सहयोग और सैन्य-तकनीकी संबंधों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।''

अमेरिका को बड़ा झटका? भारत-चीन-रूस साथ आए, BRICS का डिजिटल भुगतान मॉडल क्या बदल देगा खेल

नई दिल्ली BRICS देशों की मजबूती हमेशा से ही अमेरिका को परेशान करती रही है। भारत, रूस और चीन की अगुवाई वाली इस समूह पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार निशाना साधा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इस समूह का डॉलर को सीधी चुनौती देना। अब ब्रिक्स के सदस्य देश डॉलर का तोड़ लेकर आए हैं जो डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी को और बढ़ा सकती है। BRICS एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जाएगा। बता दें कि भारत इस साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी रहा है। इस बीच डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर एक नए डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में ब्रिक्स की साझा करेंसी को लेकर भी चर्चाएं हुई थीं, लेकिन अब यह स्पष्ट हो हो गया है कि ये समूह नई करेंसी नहीं, बल्कि एक साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाने की तैयारी में है। डिजिटल करेंसी को जोड़ने का प्लान रिपोर्ट के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा। भारत की अहम भूमिका भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है, जिसने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को आसान बनाया है। इसके पीछे एक व्यावहारिक वजह भी है। पहले रूस के साथ व्यापार में रुपये में भुगतान हुआ, लेकिन बाद में रूस के पास इतने रुपये जमा हो गए, जिनका वह ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाया। बहुपक्षीय सिस्टम बनने से ऐसी समस्या से बचा जा सकेगा। काम कैसे करेगा ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम? ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सिस्टम दो अहम तकनीकी आधारों पर काम करेगा। पहला है सेटलमेंट साइकिल। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर चीन एक महीने में भारत से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और भारत चीन से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे पैसों की जरूरत और ट्रांजेक्शन कॉस्ट दोनों कम होंगी। वहीं दूसरा आधार है फॉरेक्स स्वैप लाइन। अगर किसी देश को अस्थायी रूप से दूसरे देश की करेंसी की ज्यादा जरूरत पड़ती है, तो सेंट्रल बैंक आपस में करेंसी बदलकर संतुलन बना सकते हैं। क्यों डॉलर का विकल्प तलाश रहे देश? ब्रिक्स देश काफी अरसे से इस पर विचार कर रहे हैं। रूस को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर करने और उसके 300 अरब डॉलर फ्रीज करने देने के बाद कई देश इसे चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं। इससे पहले ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा पर भी ऐसे कदम उठाए गए थे, लेकिन रूस जैसे बड़े देश के साथ ऐसा होने से डर बढ़ गया। ऐसे में ब्रिक्स का यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक बैकअप की तरह काम कर सकता है, ताकि किसी संकट की स्थिति में व्यापार ठप न हो।

BRICS के बैंक NDB में मेंबरशिप के लिए पाकिस्तान ने चीन से सहयोग की अपील की

बीजिंग  आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान अपनी बेचारगी का हवाला देकर भीख मांगने में कसर नहीं छोड़ता। वहीं चीन पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है। अब पाकिस्तान ने BRICS देशों के बैंक न्यू डिवेलपमेंट बैंक (NDB) की सदस्यता के लिए चीन से गुहार लगाई है। इसके बदले में उसने चीन को ऑफर भी दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन की कंपनियों, उद्योगों और खनिजों के क्षेत्र में निवेश के लिए ज्यादा मौके उपलब्ध करवाएगा। शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में चीन के वित्त मेंत्री लियाओ मिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एनडीबी की सदस्यता को लेकर बात की। औरंगजेब ने चीन से कहा कि वह एनडीबी की सदस्यता दिलाने में उसकी मदद करे। उन्होंने कहा कि इसके बदले पाकिस्तान में तकनीक, कृषि, उद्योग और खनिज के क्षेत्र में चीनी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। बता दें कि ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर एनडीबी बनाया है जिसका उद्देश्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, सतत पोषणीय विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी फंडिंग उपलब्ध कराना है। विकासशील देशों के विकास में यह बैंक बड़ी भूमिका निभाता है। इसी साल फरवरी में इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी ने एनडीबी में 582 मिलियन डॉलर के शेयर्स की खरीद की मंजूरी दी है। फाइनेंस डिवीजन के बयान के मुताबिक इसीसी ने पाकिस्तान की एनडीबी में सदस्यता को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तान ने नवंबर 2024 में ब्रिक्स की सदस्यता के लिए भी आवेदन किया था। बताया गया था कि चीन ने इस्लामाबाद को इसके लिए भरोसा दिया था। हालांकि पीएम मोदी से चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया। तुर्की को पार्टनर देशों में शामिल किया गया था लेकिन पाकिस्तान को नहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने कहा था कि वह ब्रिक्स में ज्यादा देशों का स्वागत करने को तैयार है लेकिन फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएंगे। पीएम मोदी ने कहा था कि किसी देश को सदस्यता देने से पहले विचार किया जाना चाहिए कि उसमें ब्रिक्स के संस्थापक देशों की राय शामिल हो। बता दें कि ब्रिक्स के संस्थापक देशों में रूस, चीन, भारत और ब्राजील का नाम है।

पुतिन ने ब्रिक्स के एजेंडे से अमेरिका को दिया संकेत, चीन ने भी समर्थन जताया

तियानजिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर पहुंचे। उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने ब्रिक्स देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले 'भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों' के खिलाफ एकजुट रुख अपनाया है। माना जा रहा है कि पुतिन ने चीन की धरती से अमेरिका को संदेश दिया है कि 'भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों' के खिलाफ वे एकजुट हैं। पुतिन ने यह बातें चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि रूस और चीन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स की क्षमता को मजबूत करने के लिए एकजुट हैं। पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग ब्रिक्स सदस्यों और वैश्विक स्तर पर 'सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों' के खिलाफ साझा रुख अपनाते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में सुधार का समर्थन करते हैं। पुतिन ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दे रहे हैं। ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात इसके नए सदस्य हैं। पुतिन ने उम्मीद जताई कि तियानजिन में होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन 10-सदस्यीय संगठन को नई गति देगा, समकालीन चुनौतियों और खतरों का सामना करने की इसकी क्षमता को मजबूत करेगा, तथा यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इससे अधिक न्यायसंगत बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में मदद मिलेगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वार्ता करेंगे और द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित परेड में भी शामिल होंगे।  

पीएम मोदी का BRICS समिट में आतंकवाद पर करारा प्रहार, देखते रह गए बाकी देश

जोहान्सबर्ग जोहान्सबर्ग में आयोजित BRICS समिट 2025 में भारत के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का मुद्दा छाया रहा। BRICS के सभी सदस्य देशों ने इस हमले की सख्त निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प दोहराया। रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों ने भी भारत के साथ एकजुटता दिखाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है। आतंक को समर्थन देने वालों को मिले सजा : पीएम मोदी पीएम मोदी ने इस मंच से पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर हमला बोलते हुए कहा, आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है। आतंक को शह और समर्थन देने वालों को सजा मिलनी चाहिए। कोई भी देश या संस्था इस खतरे से अलग नहीं रह सकता। मोदी ने कहा कि पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर किया गया हमला कायरता की निशानी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता रहेगा और आतंक को जड़ से खत्म करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में पहलगाम में अमानवीय और कायराना आतंकी हमला हुआ. यह मानवता पर हमला था. ब्रिक्स में पीस एंड सिक्योरिटी एंड रिफॉर्म ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस सत्र के दौरान पीएम मोदी ने शांति और भाईचारे के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जताते हुए पड़ोसी मुल्क पर निशाना साधते हुए कहा कि दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं है. अगर कोई देश आतंकवाद का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आतंकवाद का समर्थन या इसकी मौन सहमति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पीएम मोदी ने सभी देशों से इस पर निर्णायक फैसला लेने को कहा है. उन्होंने कहा कि भारत महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध से प्रेरित होकर शांति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा. फिर चाहे परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल हो, शांति मानवता के कल्याण के लिए सबसे बेहतरीन मार्ग रहेगा. ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की इतना ही नहीं ब्रिक्स समिट में शामिल नेताओं ने भी कड़े शब्दों में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की. इस दौरान आतंकवाद के हर प्रारूप से निपटने, सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को पनाह देने से निपटने पर प्रतिबद्धता जताई. आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेस नीति बनाने और इसके लिए दोहरे मानदंड को खारिज किया जाना चाहिए. ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संयुक्त बयान जारी किया. इस बयान में कहा गया कि हम 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए. हम आतंकवाद के लिए जीरो टॉलरेंस अपनाने का आग्रह करते हैं और आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मापदंडों को खारिज करने का आग्रह करते हैं.