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बजट-2026 में बड़ी घोषणाएं: वन विभाग में 1000 पदों पर भर्ती, रायपुर में तीरंदाजी अकादमी, बच्चियों को मिलेगा डेढ़ लाख

रायपुर  छत्तीसगढ़ में साय सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए बस्तर और अन्य पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार का बड़ा रोडमैप सामने रखा है. वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साय सरकार का तीसरा बजट संकल्प थीम पर प्रस्तुत किया.  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बजट 2026–27 को जनकल्याण और विकास को समर्पित बताते हुए कहा कि यह बजट किसानों, महिलाओं, युवाओं और कर्मचारियों के सशक्तिकरण के साथ छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर विशेष प्रावधानों से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आम जनता के जीवन स्तर में सुधार आएगा. रायपुर में 200 बिस्तर वाले अस्पताल, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी में जिला अस्पताल और 15 नए थाने खोले जाएंगे। ई-वाहनों (EV) में सब्सिडी दी जाएगी। नवा रायपुर में राष्ट्रीय तीरंदाजी अकादमी स्थापित होगी और कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार योजना के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलाव बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बस सेवा शुरू की जाएगी और अबूझमाड़-जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी बसाई जाएंगी। स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा 22 हजार करोड़ की राशि मिली है। स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना के लिए 100 करोड़ का प्रावधान है। वनों के संरक्षण के लिए 930 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 1 हजार पदों पर भर्ती होगी। छत्तीसगढ़ सरकार अब 5 प्रमुख मिशन पर काम करेगी। इनमें मुख्यमंत्री एआई मिशन, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन, मुख्यमंत्री खेल उत्कृष मिशन, मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन और मुख्यमंत्री स्टार्टअप और निपुण मिशन शामिल हैं। हर मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह स्वाथ्यगत कारणों से राज्य से बाहर हैं। डॉ रमन सिंह की अनुपस्थिति में धर्मजीत सिंह सभापति के तौर पर आसंदी में रहे। डॉ रमन सिंह सर्वाइकल की दिक्कत से जूझ रहे हैं। इसके चलते कोयंबटूर में भर्ती में किए गए। आज उनकी सर्जरी होगी। धरमलाल कौशिक कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष होंगे। छत्तीसगढ़ बजट 2026-27, बड़ी घोषणाएं-     15 नए पुलिस थाने खोले जाएंगे।     5 नए साइबर थानों का निर्माण होगा।     महिला थानों की संख्या बढ़ाई जाएगी।     तेलीबांधा (रायपुर) थाना का नवीनीकरण होगा।     सीन ऑफ क्राइम यूनिट स्थापना हेतु ₹3 करोड़।     वनों के संरक्षण के लिए ₹930 करोड़, 1000 पदों पर भर्ती।     अभ्यारण्यों के विकास हेतु ₹11,000 करोड़ का प्रावधान।     शक्तिपीठ भ्रमण योजना शुरू, ₹5 करोड़ प्रावधान।     प्रदेश में शक्तिपीठ सर्किट का निर्माण।     राजिम में कांस्य प्रतिमा स्थापना हेतु ₹5 करोड़।     सिरपुर विकास के लिए ₹36 करोड़, रिवर फ्रंट व मेडिटेशन सेंटर बनेगा।     ईको टूरिज्म के लिए फिक्की से एमओयू, ₹500 करोड़ निवेश प्रस्ताव।     सरकारी स्कूली छात्रों के लिए युवा दर्शन योजना, ₹5 करोड़।     रायपुर देवभवन (स्वामी विवेकानंद निवास) राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने ₹5 करोड़।     पत्रकार भ्रमण हेतु बजट प्रावधान।     साहित्य महोत्सव हर वर्ष आयोजित होगा।     अप्रवासी छत्तीसगढ़ियों का NIR सम्मेलन हर साल होगा।     जनसंपर्क विभाग का बजट ₹475 करोड़।     ईवी वाहनों की सब्सिडी के लिए ₹100 करोड़।     नवा रायपुर में राष्ट्रीय तीरंदाजी अकादमी की स्थापना।     नवा रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण।     क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना हेतु ₹57 करोड़।     कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार योजना, ₹100 करोड़।     हर मिशन के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान।     रायपुर में 200 बिस्तर का अस्पताल बनेगा।     5 प्रमुख शहरों के एयरपोर्ट पर शोरूम खोले जाएंगे।     नमक योजना के लिए ₹1,000 करोड़।     पेंशन के लिए ₹1,400 करोड़।     सयानगुड़ी के विकास हेतु ₹5,000 करोड़।     रायपुर मठपुरैना दृष्टिबाधित शाला के लिए ₹2.50 करोड़।     नशा मुक्ति केंद्र संचालन हेतु ₹20 करोड़।     अनुसूचित जाति छात्रों के लिए हॉस्टल-स्कूल निर्माण अनुदान।     OBC छात्राओं के लिए रायपुर में 200 सीट का छात्रावास।     अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण हेतु ₹80 करोड़।     भूमिहीन कृषि परिवारों के लिए ₹600 करोड़।     कृषक उन्नति योजना हेतु ₹10,000 करोड़।     मार्कफेड के लिए ₹6,000 करोड़।     नेचुरल फार्मिंग के लिए ₹40 करोड़।     कृषि पंपों के लिए ₹5,500 करोड़।     रायपुर कालीबाड़ी में 200 बिस्तर MCH अस्पताल व चिरमिरी में जिला अस्पताल निर्माण।     डेयरी समग्र विकास योजना शुरू, ₹90 करोड़।     शिल्पकारों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहयोग।     उपहार प्लेटफॉर्म के लिए ₹25 करोड़।     50 लाख तक के कार्यों की एजेंसी ग्राम सभाएं होंगी।     प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ₹1,700 करोड़।     नवा रायपुर-राजनांदगांव इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स हेतु ₹10 करोड़।     प्रदेश में 23 नए उद्योग स्थापित होंगे।     भिलाई में व्यावसायिक परिसर हेतु ₹10 करोड़।     बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स भवन का निर्माण।     उद्योग बजट तीन गुना बढ़ा, अनुदान हेतु ₹750 करोड़।     खनिज ऑनलाइन 2.2 के लिए ₹35 करोड़।     उद्योग विभाग का बजट ₹248 करोड़ से बढ़कर ₹775 करोड़।     रायपुर में मेगा परीक्षा केंद्र बनेगा।     गिरौदपुरी मेले को ₹50 लाख अनुदान।     5 नालंदा लाइब्रेरी के लिए ₹22 करोड़।     मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना, ₹200 करोड़।     शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख तक इलाज, ₹1,500 करोड़ प्रावधान।     मुख्यमंत्री सड़क योजना के लिए ₹200 करोड़, 36 सड़कें शामिल।     रानी दुर्गावती योजना – 18 वर्ष पर बेटियों को ₹1.5 लाख।     250 महतारी सदन निर्माण, ₹75 करोड़।     मैनपाट व जशपुर कोतेबेरा में पर्यटन विकास।     रायपुर में फूड लैब निर्माण।     कांकेर, कोरबा, महासमुंद में नर्सिंग कॉलेज।     मेकाहारा में एआई उपयोग हेतु ₹10 करोड़।     मितानिन कल्याण निधि के लिए ₹350 करोड़।     मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना लागू।     बस्तर व सरगुजा में डॉक्टरों की भर्ती।     बस्तर-सरगुजा में रोड नेटवर्क कनेक्टिविटी विस्तार।     इंद्रावती बैराज हेतु ₹68 करोड़ स्वीकृत। … Read more

गैजेट इंडस्ट्री को बजट से मिला बूस्टर डोज, मोबाइल और टीवी की कीमतों में आएगी गिरावट

नई दिल्ली  केंद्रीय बजट 2026 का ऐलान हो चुका है और भारत सरकार ने इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत खर्च को लगभग दोगुना करने का ऐलान कर दिया है. इस रकम को करीब 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया है.  इस भारी-भरकम बजट से भारतीय इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री मजबूत होगी. इससे भारतीय घरेलू सप्लाई चेन को स्ट्रांग किया जाएगा. साथ ही भारत में विदेशी कंपनियां भारत में अपनी यूनिट लगाएंगी और भारत में निवेश करेंगी.  फोन टीवी, AC आदि को होगा फायदा  इस स्कीम से स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू प्रोडक्ट के मैन्युफैक्चरिंग पर विदेशों पर निर्भरता कम होगी. इससे प्रोडक्ट सस्ते होंगे या नहीं, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. हालांकि अगर टीवी, स्मार्टफोन और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स प्रोडक्ट तैयार करने वाले मैन्युफैक्चरर को सस्ते कंपोनेंट मिलते हैं तो आने वाले दिनों में सस्ते प्रोडक्ट भी भारत में दस्तक देंगे. साथ ही यहां नौकरियों के भी नए अवसर प्राप्त होंगे.  वित्त मंत्री ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ शुरू की गई थी. इस स्कीम के तहत मिले इनवेस्टमेंट प्रपोजल और टारगेट को देखते हुए सरकार ने रकम बढ़ाने का फैसला किया है.  उन्होंने कहा कि इस स्कीम की रकम को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.  केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च में इस स्कीम के लिए 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ मंजूरी दी थी. इस स्कीम के तहत बड़े आउटकम की उम्मीद है. इससे 4.56 लाख करोड़ रुपये का प्रोडक्शन होगा और करीब 59,350 करोड़ रुपये का एडिशनल इनवेस्टमेंट मिलेगा.  46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है अब तक स्कीम के तहत 46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल प्रोपजल इनवेस्टमेंट 54,567 करोड़ रुपये का है. इससे लगभग 51,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है.  आईटी मंत्रालय ने बीते महीने ही Foxconn, Tata Electronics, Samsung, Dixon Technologies और Hikalco Industries जैसी कंपनियों के 22 आवेदन को अप्रूवल दिए हैं.  इन इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा  सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं. इसमें कई पार्ट्स शामिल हैं, जिनकी लिस्ट ये है.      डिस्प्ले मॉड्यूल     सब-असेंबली कैमरा मॉड्यूल     प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA)     लिथियम सेल एनक्लोजर      रेजिस्टर      कैपेसिटर      फेराइट्स आदि  इन कंपोनेंट का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू उपकरणों में होता है.  PLI से कितनी अलग है कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, सरकार की पहले की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम से अलग है. PLI में सब्सिडी प्रोडक्शन से कनेक्टेड होती है, जबकि  इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम में इंसेंटिव तीन अहम पैमानों पर तय किए गए हैं     सालाना रोजगार सृजन     पूंजीगत खर्च (कैपेक्स)     सालाना उत्पादन Apple और Samsung जैसी कंपनियों के भारत में एक्स्ट्रा असेंबली यूनिट्स लगाने केबाद भी देश में वैल्यू एडिशन 15-20% के आसपास है. सरकार इसको बढ़ाकर 30-40% तक करना चाहती है. 

एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए खुशखबरी! मुआवजे के ब्याज पर टैक्स माफ करने का प्रस्ताव बजट में

नई दिल्ली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते समय ऐलान किया कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त होगा। इस प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को मुआवजे की पूरी राशि मिले और उसमें से कोई कटौती न हो। इसके तहत अब ऐसे ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जाएगा। यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में की गई। इस आम बजट में टैक्स से जुड़े कई ऐलान किए गए। मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी हो जाती है, जिससे ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है और पीड़ितों या उनके परिजनों को उस पर टैक्स देना पड़ता है। इस वजह से कई बार पीड़ितों को मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी। उन्हें इलाज, पुनर्वास और रोज़ी-रोटी के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी झेलनी पड़ती थी। कई मामलों में टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था। वित्त मंत्री ने साफ किया कि यह टैक्स छूट सिर्फ 'नेचुरल पर्सन', यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी। सरकार ने इसे मुआवजे की मानवीय भावना से जुड़ा फैसला बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, "मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।" यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है, जिससे चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी। भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और कई लोग घायल होते हैं। मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ती है। अक्सर मामलों में फैसले में देरी होने से ब्याज की रकम बढ़ जाती है, जो पीड़ितों को हुए नुकसान और परेशानी की भरपाई के लिए दी जाती है। अब टैक्स हटने से मुआवजा ज्यादा फायदेमंद होगा। कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार समूहों और बीमा कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा। इस फैसले से मुआवजे की रकम में कटौती नहीं होगी और मामलों के जल्दी निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें टैक्स नियमों को आसान बनाना और ज़रूरतमंद लोगों को सीधी राहत देना शामिल है। साथ ही बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर भी खास ध्यान दिया गया है। इस टैक्स छूट से लाखों प्रभावित परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाला न्याय टैक्स कटौती के कारण कम नहीं होगा।

नौकरियों की नई राह! बजट 2026 में पर्यटन सेक्टर को बूस्ट, 50 बड़े टूरिस्ट स्पॉट्स को बनाया जाएगा वर्ल्ड-क्लास

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश करते हुए देश के विभिन्न वर्गों को कई सौगातें दीं, जिसमें रोजगार, शिक्षा, कृषि, और छोटे शहरों के विकास पर फोकस किया गया। बजट में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बौद्ध स्थल के विकास और नए 5 पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की गई। रोजगारपरक विकास के लिए सरकार ने पर्यटन को लेकर गहन कौशल विकास कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "महायान/वज्रयान परंपराओं का एक सभ्यतागत संगम है। जहां अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध परिपथों के विकास के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थयात्रा व्याख्या केंद्र, संपर्क, और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं शामिल होंगी। दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एकीकृत पूर्वी तटीय औद्योगिक गलियारे का विकास होगा और अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पर्यटन स्थलों के निर्माण का प्रस्ताव है। साथ ही पूर्वोदय राज्यों में 4,000 ई-बसों की व्यवस्था का प्रस्ताव भी है। मंदिरों और मठों के विकास के अलावा बजट में रोजगार प्रेरित विकास के लिए पर्यटन को भी महत्व दिया गया है, जिसमें देश में शीर्ष 50 पर्यटन स्थलों को राज्यों की भागीदारी से चैलेंज मोड माध्यम से विकसित किया जाएगा। तीर्थ और पर्यटन स्थलों के होटलों की अवसंरचना को एचएमएल में शामिल किया जाएगा। पर्यटन स्थलों के साथ रोजगार के विकास के लिए होमस्टे के लिए मुद्रा ऋण दिया जाएगा। युवाओं के लिए गहन कौशल विकास की शुरुआत होगी और आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, खासकर वे स्थान जो भगवान बुद्ध के जीवन काल से संबंधित हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ पर्यटक समूहों के लिए वीजा शुल्क छूट भी देने का प्रस्ताव है और ई-वीजा की सुविधाओं की शुरुआत का भी प्रस्ताव है।

केंद्र ने पेश किया बजट 2026: जानें देशभर के लिए 10 अहम फैसले

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट पेश करते हुए कहा कि 'सुधार एक्सप्रेस' अपनी राह पर है। बजट भाषण में उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने 'कोरी बयानबाजी' के बजाय 'सुधारों' का रास्ता चुना है। कहा कि देश 'विकसित भारत' बनने की दिशा में कदम उठाता रहेगा। 7 नए हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर से लेकर हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल तक, बजट की 10 बड़ी बातों पर आइए नजर डालते हैं। 1- सात हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर और एक फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में अलग-अलग शहरों के बीच सात हाई-स्पीड कॉरिडोर और पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत के बीच एक नए विशेष फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। – ये प्रस्तावित गलियारे मुंबई और पुणे, पुणे और हैदराबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई, चेन्नई और बेंगलुरु, दिल्ली और वाराणसी तथा वाराणसी और सिलीगुड़ी के बीच विकसित किए जाएंगे। – पश्चिम बंगाल के डंकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाला एक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। – अभी अहमदाबाद और मुंबई के बीच एक हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम जारी है। इसी तरह, कई राज्यों और जिलों में दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – ईस्टर्न और वेस्टर्न का काम जारी है। 2- हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। देश में 700 से अधिक जिले हैं। 3- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40 हजार करोड़ – इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती देने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया जाएगा। – पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दो जगहों पर हाई टेक्नॉलजी वाले 'टूल रूम' स्थापित किए जाएंगे। – देश में स्मार्ट टीवी और मोबाइल उत्पादन में और ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। – देश में मोबाइल फोन का उत्पादन चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक करीब 6.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक या लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। 5- यूनिवर्सिटी टाउनशिप का ऐलान एजुकेशन सेक्टर पर खास फोकस रहा। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बनाने की घोषणा। – यूनिवर्सिटी टाउनशिप में आवास, रिसर्च फैसिलिटी, स्टार्टअप स्पेस, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक ढांचा शामिल होगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और रिसर्चर को एक बेहतर और जीवंत शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। -पूर्वी भारत में शिक्षा और विकास को बढावा देने के लिए नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोले जायेंगे। 6- किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ीं योजनाएं – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट 2026-27 में मत्स्य पालन, पशुपालन योजना को मजबूत बनाने के साथ ही देश के काजू और नारियल को वैश्विक ब्रांड बनाया जाएगा। -भारतीय काजू और भारतीय कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्राण्ड बनाए जाने का प्रस्ताव -500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की पहल से मत्स्य पालन क्षेत्र को सुदृढ़ करने के साथ ही पशुपालन क्षेत्र में उद्यमशीलता विकास से रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएंगे। – कोकोनट प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही एक करोड़ किसानों समेत तीन करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करेगी। । -चंदन के कारोबार को बढ़ाने के लिए सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर भारतीय चंदन इकोसिस्टम के गौरव को पुनर्स्थापित किया जाएगा। 7- देश के भीतर डेटा सेंटर को बढ़ावा देने के लिए 'टैक्स हॉलिडे' – उन विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक 'टैक्स हॉलिडे' का लाभ मिलेगा जो देश में स्थित डेटा सेंटर का उपयोग करके दुनिया भर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं प्रदान करती हैं। – सीतारमण ने कहा कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और डेटा सेंटर में निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। – इस टैक्स हॉलिडे का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को एक भारतीय पुनर्विक्रेता इकाई के माध्यम से भारतीय ग्राहकों को सेवाएं देनी होंगी। 8- टैक्स से जुड़े अहम ऐलान – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर से 31 मार्च करने का प्रस्ताव किया। – मामूली शुल्क के भुगतान के साथ आयकरदाता इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। – शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के मामले में टीडीएस 5 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत – मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजा को कर से छूट मिलेगी। – एक अप्रैल से आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो जाएगा, जो छह दशक पुराने कर कानून का स्थान लेगा। – विदेश में अघोषित संपत्ति पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। – जब तक अपील लंबित रहती है तब तक टैक्स पेयर को पेनाल्टी पर इंट्रेस्ट नहीं देना होगा। 9- MSME की मदद के लिए ‘कॉरपोरेट मित्र’ – सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) की सहायता के लिए मझोले (श्रेणी-दो) और छोटे (श्रेणी-तीन) शहरों में 'कॉरपोरेट मित्रों' का एक दस्ता तैयार किया जाएगा। – 'कॉरपोरेट मित्रों' का यह दस्ता एमएसएमई को किफायती लागत पर अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। – इस दस्ते को तैयार करने के लिए आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई जैसे पेशेवर संस्थानों को अल्पकालिक मॉड्यूल पाठ्यक्रम और व्यावहारिक टूल डिजाइन करने में सहयोग प्रदान करेगी। 10- राजकोषीय घाटा को जीडीपी का 4.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य – सरकार को उम्मीद है कि 2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत रहेगा जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 4.4 प्रतिशत से कम है। – सीतारमण ने अपने 2026-27 के बजट भाषण में कहा कि सरकार अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कर हस्तांतरण राशि के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये प्रदान करेगी जबकि शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। – केंद्रीय बजट 2026-27 का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। – चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट में अनुमानित राजकोषीय घाटा (सरकारी व्यय और आय के बीच का अंतर) सकल घरेलू उत्पाद (जीडपी) का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रेयर अर्थ कॉरिडोर का राज: Budget 2026 में क्यों चुने गए सिर्फ ये 4 राज्य?

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को आधुनिक तौर-तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' (Rare Earth Corridors) के निर्माण का एक दूरदर्शी प्रस्ताव रखा है। यह कदम मुख्य रूप से चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता कम करने और भविष्य के उद्योगों (EV, रक्षा, और अक्षय ऊर्जा) को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है। क्या है रेयर अर्थ कॉरिडोर? वित्त मंत्री ने खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को समर्पित कॉरिडोर विकसित करने के लिए सहायता देने की घोषणा की है। यह पहल नवंबर 2025 में शुरू की गई 7,280 करोड़ रुपये की 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट स्कीम' का ही विस्तार है। ये केवल खदानें नहीं हैं, बल्कि एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र हैं। इसके जरिए तटीय रेत से दुर्लभ खनिजों को निकालना, कच्चे अयस्क को शुद्ध ऑक्साइड और धातुओं में बदलना और इन खनिजों का उपयोग करके परमानेंट मैग्नेट और अन्य हाई-टेक घटकों का निर्माण करना। इन चार राज्यों को ही क्यों चुना गया? भारत में 'रेयर अर्थ' तत्वों का सबसे बड़ा भंडार समुद्री तटों पर पाया जाता है। ओडिशा और केरल के तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट और इल्मेनाइट जैसे खनिजों का विशाल भंडार है। यहां IREL (इंडिया) लिमिटेड जैसी कंपनियों की इकाइयां और प्रमुख बंदरगाह पहले से मौजूद हैं जो परिवहन और निर्यात को आसान बनाते हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल (EV) के बड़े मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर हैं, जिन्हें इन खनिजों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसका भारत के लिए क्या महत्व है? वर्तमान में चीन वैश्विक रेयर अर्थ बाजार के 90% से अधिक हिस्से को नियंत्रित करता है। घरेलू कॉरिडोर भारत को वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से सुरक्षित करेंगे। भारत की चीन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। ईवी मोटरों के लिए 'परमानेंट मैग्नेट' अनिवार्य हैं। इस कॉरिडोर से भारत में बैटरी और मोटर निर्माण सस्ता होगा। मिसाइल गाइडिंग सिस्टम, लड़ाकू विमान और रडार में इन खनिजों का उपयोग होता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा विंड टर्बाइन और सोलर पैनल के निर्माण में तेजी आएगी, जिससे 2070 तक 'नेट जीरो' लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने इसे बजट के 'प्रथम कर्तव्य' के हिस्से के रूप में पेश किया है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और ₹40,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फंड भी घोषित किया गया है, जो इस पूरे इकोसिस्टम को मजबूती देगा।  

टेक कंपनियों के लिए खुशखबरी! Budget 2026 में डेटा सेंटर पर 2047 तक टैक्स छुट

नई दिल्ली Budget 2026: वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने आज लगातार अपना नौवां बजट पेश किया है। इस दौरान उन्होंने क्लाउड सर्विसेस और डेटा सेंटर्स को लेकर भी बड़ी घोषणा की। वित्त मंत्री ने लोकल डेटा सेंटर बनाए रखने वाली क्लाउड सर्विसेस के लिए Tax Holiday शुरू करने की योजना की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भारत में स्थित डेटा सेंटर के जरिए दुनिया भर में क्लाउड सर्विस देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स में छूट देगी। यह पहल देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पॉलिसी का मकसद डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देना और क्लाउड प्रोवाइडर्स को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।   भारत में मजबूत होगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दरअसल, प्रस्तावित टैक्स हॉलिडे खास तौर पर उन क्लाउड सर्विसेज को टारगेट करता है जो भारतीय क्षेत्र में डेटा सेंटर बनाते और चलाते हैं। यह कदम डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी कंपनियों को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। हालांकि, एलिजिबल होने के लिए, विदेशी कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को विशेष रूप से भारतीय रीसेलर के जरिए सर्विस देनी होगी। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा, "मैं किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव करती हूं, जो भारत में स्थित डेटा सेंटर का इस्तेमाल करके ग्लोबल कस्टमर्स को क्लाउड सर्विस देती है। हालांकि, ऐसी कंपनियों को एक भारतीय रीसेलर एंटिटी के जरिए भारतीय कस्टमर्स को सर्विस देनी होगी।" "मैं यह भी प्रस्ताव करती हूं कि अगर भारत से डेटा सेंटर सर्विस देने वाली कंपनी एक संबंधित एंटिटी है, तो कॉस्ट पर 15% का सेफ हार्बर दिया जाए।" लोकल डेटा सेंटर वाले क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को टैक्स इंसेंटिव देकर, इस पॉलिसी का मकसद डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करते हुए भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में ज्यादा निवेश को बढ़ावा देना है। विदेशी रिसोर्सेस पर निर्भरता कम होगी इससे पहल से देश में घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और विदेशी डेटा स्टोरेज रिसोर्सेस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। टैक्स छूट का ढांचा क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए लोकल डेटा सेंटर ऑपरेशंस को आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह नई पॉलिसी भारतीय बाजार में क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के काम करने की रणनीति पर काफी असर डाल सकती है। लोकल डेटा सेंटर वाली कंपनियों को टैक्स में फायदा होगा, जिससे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश हो सकता है और बेहतर सर्विस मिल सकती हैं।  

डिजिटल इंडिया का नया दशक: Budget 2026 में युवाओं को मिलेगा गेमिंग और VFX का बूस्ट

नई दिल्ली Budget 2026 का ऐलान हो चुका है। इस बजट में सरकार ने एक अलग और नया रास्ता चुना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान बताया कि अब भारत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि क्रिएटिव इंडस्ट्री को भी देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना चाहता है। इसी सोच के तहत सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे सेक्टर को 'ऑरेंज इकोनॉमी' का नाम दिया गया है। मोबाइल गेमिंग, OTT प्लेटफॉर्म, डिजिटल फिल्में और ऑनलाइन कंटेंट की बढ़ती मांग से ये इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि अगर सही ट्रेनिंग और प्लेटफॉर्म दिया जाए, तो यही युवा देश को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिला सकते हैं। बजट में किए इन ऐलान से आने वाले सालों में Animation, VFX और Gaming जैसे क्षेत्र लाखों नौकरियां पैदा कर सकते हैं। खास बात यह है कि सरकार अब स्कूल और कॉलेज स्तर से ही छात्रों को कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल स्किल्स से जोड़ना चाहती है। Orange Economy क्या है सरकार ने Budget 2026 में ‘Orange Economy’ की बात की है। इसमें Animation, VFX, Gaming, Comics और डिजिटल कंटेंट जैसे सेक्टर शामिल हैं। ये वो सेक्टर हैं जिनमें आइडिया, सोच और क्रिएटिविटी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। दुनिया भर में इन इंडस्ट्रीज की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता। सरकार का मानना है कि भारत में पहले से ही कई बड़ी फिल्में, वेब सीरीज और गेम्स पर काम हो रहा है। VFX और Animation का इस्तेमाल अब हर फिल्म और ऐड में आम बात हो गई है। ऐसे में सरकार चाहती है कि यह काम विदेशों में आउटसोर्स होने के बजाय भारत में ही हो और इससे देश के युवाओं को रोजगार मिले। Budget 2026 में हुआ ये ऐलान Budget 2026 में सरकार ने ऐलान किया है कि देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में Content Creator Labs खोली जाएंगी। इन लैब्स में छात्रों को Animation, Gaming, VFX और डिजिटल कंटेंट बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स भी सीख सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। अगर क्रिएटिव स्किल्स को सही दिशा दी जाए, तो आने वाले समय में यह सेक्टर करोड़ों रुपये की इंडस्ट्री बन सकता है और लाखों युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार दे सकता है। रोजगार और युवाओं को होगा फायदा Animation, Gaming और VFX जैसे सेक्टर में काम करने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स की जरूरत होती है। बजट में किए ऐलानों से उन युवाओं को फायदा मिलेगा जो डिजाइन, स्टोरीटेलिंग, गेम डेवलपमेंट या डिजिटल आर्ट में रुचि रखते हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक आने वाले कुछ सालों में यह सेक्टर करीब 20 लाख लोगों को रोजगार दे सकता है। इसमें फ्रीलांस काम, स्टार्टअप और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स के मौके भी शामिल होंगे।

युवाओं पर फोकस: बजट 2026 में शिक्षा के लिए 139,289 करोड़ का मेगाप्लान

नई दिल्ली लोकसभा में आज बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई बड़े ऐलान किए। वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एजुकेशन सेक्टर के मद्देनजर 1,39,289 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया है। इस मास्टरप्लान के जरिए सरकार का मानना है कि पढ़ाई को रोजगार, उद्यम और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि डिग्री हाथ में होने के साथ-साथ काम का हुनर भी युवाओं के पास हो। सरकार ने शिक्षा और नौकरी के बीच की दूरी कम करने के लिए एक नई सोच के साथ ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ (Education to Employment and Enterprise – EEE) स्टैंडिंग कमेटी बनाने का ऐलान किया है। यह कमेटी खासतौर पर सेवा क्षेत्र, नई इंडस्ट्री और उभरती टेक्नोलॉजी में युवाओं को दक्ष बनाने पर फोकस करेगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए भटकते हैं। हायर एजुकेशन और STEM में बेटियों पर खास फोकस बजट में उच्च शिक्षा और खासतौर पर STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ बढ़े ही नहीं, बल्कि स्थायी बने। इसी सोच के तहत देश के हर ज़िले में हायर एजुकेशन STEM संस्थानों से जुड़े गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे दूर-दराज़ से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की जगह मिलेगी। इसके साथ ही, औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इन टाउनशिप का मकसद पढ़ाई और इंडस्ट्री को एक ही इकोसिस्टम में लाना है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और नौकरी के मौके मिल सकें। रिसर्च और साइंस को बढ़ावा देने के लिए देश में चार बड़े टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सेंटर बनाए या अपग्रेड किए जाएंगे, जिससे युवा वैज्ञानिक और रिसर्चर अंतरिक्ष विज्ञान की ओर आकर्षित हों। स्किल डेवलपमेंट और फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर दांव डिजिटल दौर की जरूरतों को समझते हुए बजट में स्किल डेवलपमेंट को केंद्र में रखा गया है। खासतौर पर तेजी से बढ़ रहे AVGC सेक्टर यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स पर बड़ा ऐलान हुआ है। सरकार ने देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का फैसला किया है। यह कदम उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो क्रिएटिव फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं और सीधे रोजगार या स्टार्ट-अप की राह पकड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, हेल्थ और केयर सेक्टर को ध्यान में रखते हुए 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई है। बुजुर्गों, मरीजों और विशेष जरूरतों वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह सेक्टर आने वाले समय में रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है। वहीं, दिव्यांग युवाओं के लिए इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक कस्टमाइज्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। खोले जाएंगे नए संस्थान बजट 2026 में शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए कई नए संस्थानों की घोषणा की गई है। पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) खोला जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में डिजाइन और क्रिएटिव एजुकेशन को नई पहचान मिलेगी। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना की जाएगी, ताकि टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री को स्किल्ड प्रोफेशनल्स मिल सकें। इसके साथ-साथ दस चुनिंदा विषयों में अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए नए संस्थान बनाए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। विदेश पढ़ाई करने वालों को राहत विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों के लिए भी बजट राहत लेकर आया है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश शिक्षा के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर TCS दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ छात्रों बल्कि उनके परिवारों पर भी वित्तीय बोझ कम होगा और विदेशी शिक्षा पहले से ज्यादा सुलभ बनेगी।  

इस बजट में आपकी जेब पर क्या असर? मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स के लिए मुख्य घोषणाएं

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (फरवरी) को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। खास बात यह रही कि भारत के स्वतंत्र इतिहास में पहली बार बजट रविवार को प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री ने बजट को पारंपरिक ‘बही-खाता’ शैली के कवर में रखे डिजिटल टैबलेट के माध्यम से पेश किया। अपने भाषण में निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता, वित्तीय अनुशासन और सतत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की और महत्वपूर्ण आयात निर्भरता को कम किया है। इन प्रयासों के चलते भारत ने लगभग 7% की उच्च विकास दर हासिल की है और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। आइए जानते हैं आम आदमी के लिए केंद्रीय बजट 2026 का क्या मतलब है? करदाताओं को राहत – संशोधित आयकर रिटर्न (Revised ITR) भरने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। – ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई पहले की तरह ही रहेगी। – गैर-ऑडिट मामलों और ट्रस्ट्स के लिए रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा 31 अगस्त कर दी गई है। – एनआरआई को बड़ी राहत: संपत्ति बिक्री पर अब TDS की कटौती खरीदार करेगा, जिससे कागजी कार्रवाई आसान होगी। रोजगार के नए अवसर – पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है, जिससे सड़क, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। – 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से निर्माण कार्य और कनेक्टिविटी दोनों को बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों और MSME को मजबूती – ₹10,000 करोड़ का विशेष फंड छोटे और मझोले उद्योगों को मजबूत बनाने के लिए। – आसान लोन, नीति समर्थन और नई तकनीक से छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा। महंगाई पर नियंत्रण और सस्ती चीजें – आत्मनिर्भर भारत पर जोर देकर आयात पर निर्भरता कम की जाएगी, जिससे लंबे समय में जरूरी वस्तुएं सस्ती रहेंगी। – सप्लाई चेन मजबूत होने से कीमतों में स्थिरता आएगी। महिलाओं और बेटियों के लिए सुविधाएं – देश के हर जिले में एक बालिका छात्रावास बनाया जाएगा, जिससे शिक्षा और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी। – टेक्सटाइल और MSME सेक्टर में महिलाओं के लिए रोजगार के नए मौके। यात्रा और रोजमर्रा की सुविधा – सड़क, रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बेहतर होने से यात्रा समय घटेगा और ईंधन खर्च कम होगा। – शहरों और गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्वास्थ्य और आयुष सेवाएं – आयुष फार्मेसियों और ड्रग टेस्टिंग लैब्स का उन्नयन किया जाएगा। – मेडिकल और वेटरनरी शिक्षा को बढ़ावा, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियां – मेगा टेक्सटाइल पार्क से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था – राजकोषीय घाटा घटकर GDP का 4.3% रहने का अनुमान। – सरकार के अनुसार 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, जिससे आर्थिक स्थिरता मजबूत हुई। कुल मिलाकर आम आदमी को क्या फायदा? • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे • टैक्स भरना आसान होगा • बेहतर सड़क, रेल और सुविधाएं मिलेंगी • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार • महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता