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टैक्सपेयर्स के लिए बजट का संदेश—इनकम टैक्स में बदलाव पर वित्त मंत्री ने क्या साफ किया?

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया और इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जो अब तक किसी भी वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए सबसे ज्यादा बजटों में शामिल हो गया है। बजट भाषण से पहले उन्होंने परंपरा के अनुसार कर्तव्य भवन स्थित वित्त मंत्रालय में कार्यभार संभाला और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। अपने भाषण में वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था, सुधारों और भविष्य की विकास योजनाओं पर जोर दिया। इनकम टैक्स स्लैब में हुआ है बदलाव? बजट 2026 में आम करदाताओं की सबसे ज्यादा नजर इनकम टैक्स स्लैब पर टिकी हुई थी। हालांकि, इस बार वित्त मंत्री ने आयकर की दरों या स्लैब में कोई बड़ा बदलाव करने का ऐलान नहीं किया। लेकिन राहत की बात यह रही कि उन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अब करदाता 31 मार्च तक नाममात्र शुल्क के साथ रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे नौकरीपेशा और छोटे करदाताओं को काफी सहूलियत मिलेगी, जो तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से समय पर रिटर्न नहीं भर पाते। पुरानी टैक्स व्यवस्था अगर पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) की बात करें, तो इसमें स्लैब पहले जैसे ही रखे गए हैं। सालाना ₹2.5 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक की आय पर 5 फीसदी टैक्स देना होगा। ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स और ₹10 लाख से ऊपर की आय पर 30 फीसदी टैक्स लागू रहेगा। इस व्यवस्था में छूट और कटौतियों (जैसे HRA, 80C, 80D) का फायदा मिलता है, इसलिए कई करदाता अभी भी इसे पसंद करते हैं। नई टैक्स व्यवस्था वहीं नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में ज्यादा स्लैब हैं और टैक्स दरें चरणबद्ध तरीके से बढ़ती हैं। ₹4 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। ₹4 से ₹8 लाख तक 5 फीसदी, ₹8 से ₹12 लाख तक 10 फीसदी, ₹12 से ₹16 लाख तक 15 फीसदी, ₹16 से ₹20 लाख तक 20 फीसदी और ₹20 से ₹24 लाख तक 25 फीसदी टैक्स लगेगा। ₹24 लाख से ज्यादा आय पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए आसान मानी जाती है जो ज्यादा कटौतियों का दावा नहीं करते। कुल मिलाकर, बजट 2026 में टैक्स स्लैब भले न बदले हों, लेकिन प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिश जरूर दिखाई दी।  

बजट 2026 का बड़ा अपडेट: बायबैक टैक्स बढ़ा, STT में संशोधन और अन्य घोषणाएँ

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sithraman) ने अपना 9वां लगातार बजट भाषण (Budget Speech) पूरा किया। इनकम टैक्स स्लैब में वित्त मंत्री ने कोई भी बदलाव नहीं किया है। इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट (IT Act 2025) एक अप्रैल 2025 से लागू होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका ऐलान बजट स्पीच में किया है। बजट 2026 में टैक्स को लेकर क्या-क्या हुआ ऐलान? 1- आईटीआर टाइमलाइन – TR-1 और ITR-2 को फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई तक रहेगी। 2- रिवाइज्ड रिटर्न – अब 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकेगा। इसके लिए थोड़ा सा शुल्क देना होगा। 3- गलत जानकारी देने पर पेनाल्टी इनकम की गलत जानकारी देने पर पेनाल्टी को बढ़ाकर टैक्स की रकम का 100 प्रतिशत कर दिया गया है। 4- विदेशी संपत्तियों खुलासा योजना – छोटे टैक्स पेयर्स 6 महीने तक विदेशी संपत्तियों का खुलासा कर सकते हैं। 5- अचल संपत्तियों का भी खुलाजा जरूरी – अब अचल संपत्तियों का खुलासा ना करने पर जुर्माना लगेगा। 6- ओवरसीज टूर टीसीएस में कटौती – ओवरसीज टूर पैकेज पर लगने वाले टीसीएस को घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यह 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत था। 7- NRI के द्वारा प्रॉपर्टी बेचने पर – अब एनआरआई को अचल संपत्तियों की बिक्री पर टीडीएस लागू होगा। 8- शेयर बायबैक पर देना होगा टैक्स – अब शेयरों के बायबैक पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स देना होगा। यह नियम सभी शेयरहोल्डर्स पर लागू होगा। 9- फ्यूचर एंड ऑप्शंस पर STT में इजाफा – केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर एंड ऑप्शंस पर STT पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। फ्यूचर्स पर STT 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, ऑप्शंस पर STT को बढ़ाकर 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया है। बजट 2025 में हुए थे बड़े ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025 में 12.75 लाख रुपये की आय वाले लोगों को टैक्स फ्री कर दिया था। वित्त मंत्री ने तब ऐलान किया था जिनकी आय 12 लाख रुपये तक है उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। 75000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ लें तो यह छूट 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। बायबैक पर लगेगा कैपिटल गेन्स टैक्स केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि बायबैक अब कैपिटल गेन्स के दायरे में आएगा। यह सभी कैटगरी के शेयरहोल्डर्स पर लागू होगा। 31 मार्च तक फाइल किया जा सकेगा रिवाइज्ड आईटीआर कोई भी कर दाता अब 31 मार्च तक थोड़े से शुल्क के साथ रिवाइज्ड आईटीआर फाइल किया जा सकेगा – वित्त मंत्री इन विदेशी कंपनियों को बड़ा तोहफा  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडियन कंपनियों को क्लाउड सर्विसेज प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलीडे का ऐलान किया गया है। आ गया है नया आयकर कानून केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट स्पीच में कहा कि नया आयकर कानून इस वर्ष एक अप्रैल से लागू होगा। क्या होम लोन की छूट होगी न्यू टैक्स रिजीम में शामिल?  मौजूदा समय में न्यू टैक्स रिजीम में किसी भी निवेश से पर कोई छूट नहीं मिलती है। मिडिल क्लास ओल्ड टैक्स रिजीम की तरह न्यू टैक्स रिजीम में भी होम लोन के ब्याज दरों पर टैक्स में छूट की डिमांड कर रहा है। ओल्ड टैक्स रिजीम या न्यू टैक्स रिजीम  पुरानी कर व्यवस्था में जहां कुछ ही टैक्स स्लैब हैं। तो वहीं नई कर व्यवस्था में अधिक स्लैब बनाए गए हैं। न्यू टैक्स रिजीम के जरिए कोई भी टैक्सपेयर्स 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई भी टैक्स नहीं देगा। इस कर प्रणाली में डायरेक्ट छूट मिलती है। वहीं, ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्सपेयर्स को अलग-अलग इंवेस्टमेंट के जरिए छूट प्राप्त कर सकते हैं। कम होगा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स? मौजूदा समय में जब अब इक्विटी शेयर्स या म्यूचुल फंड्स को 12 महीने से पहले बेचते हैं तो 20 प्रतिशत का टैक्स देना पड़ता है। इसे ही शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है। देखना है कि क्या बजट 2026 में इसको लेकर कोई बदलाव देखने को मिलता है या नहीं? क्या है इनकम टैक्स एक्स का सेक्शन 54 अगर कोई टैक्सपेयर्स पुराना घर बेचकर नया घर अगले दो साल में बनाता है या फिर खरीदता है तो उसे इनकम टैक्स एक्ट 54 के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में छूट मिलती है। मौजूदा समय में यह छूट 10 करोड़ रुपये के रिइंवेस्टमेंट तक मिलता है।  

रोजगार से सुरक्षा तक: बजट 2026 में महिलाओं के लिए खास एलान, लखपति दीदी और शी मार्ट्स पर जोर

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में 2026-27 का बजट पेश किया। हर बार की तरह इस बार भी वित्त मंत्री के पिटारे में महिलाओं के लिए कुछ खास सौगात देखने को मिली। तो आइए जानते हैं इस बार बजट में महिलाओं के लिए क्या-कुछ खास था? लखपति दीदी योजना केंद्र सरकार ने लखपति दीदी योजना को जारी रखने की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत महिलाओं से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज रहित लोन दिया जाता है, जिससे वो आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। इस लोन पर महिलाओं को सरकारी सब्सिडी भी मिलती है। 'शी मार्ट्स' की घोषणा केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना की सफलता के बाद वित्त मंत्री ने 'शी मार्ट्स' (She MARTS) की घोषणा की है। ये मार्ट्स स्वयं सहायता उद्यमियों की ओर से संचालित किया जाएगा और रीटेल आउटलेट के रूप में ऑपरेट करेगा। केंद्र सरकार की इस नई स्कीम का उद्देश्य महिला उद्यमियों की पहुंच बड़ी बाजार तक सुनिश्चित करना है। इसके तहत महिलाएं न सिर्फ अपना खुद का ब्रांड बना सकेंगी, बल्कि अच्छा मुनाफा भी कमा सकेंगी। इससे स्थानीय स्वयं सहायता समूह भी मजबूत होंगे। गर्ल्स हॉस्टल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्राओं को भी बजट में शानदार सौगात दी है। उन्होंने हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की घोषणा की है। देश के लगभग 700 से ज्यादा जिलों में छात्राओं के रहने के लिए गर्ल्स हॉस्टल की नींव रखी जाएगी।  

बजट 2026 में बायो-फार्मा से सेमीकंडक्टर तक ‘औद्योगिक संप्रभुता’ का बड़ा दांव

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार का पूरा जोर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के संभावित बजट आकार के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ब्लूप्रिंट पेश किया है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाओं और उसके बाद गठित उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित है। केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन सुधारों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी में है। इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। 1. बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ का बूस्टर फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए सरकार ने 'बायो-फार्मा शक्ति' की घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। • उद्देश्य: ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराना। • इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। • रेगुलेशन: दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। 2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का प्रस्ताव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत तय लक्ष्य से दोगुना हासिल करने के बाद सरकार का उत्साह बढ़ा है। • नया निवेश: इस सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। • फोकस: मुख्य जोर उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्रों पर होगा, ताकि इस सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके। 3. रेयर अर्थ मिशन: आयात निर्भरता घटाने की तैयारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन या अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। 'रेयर अर्थ' तत्वों के खनन और शोध के लिए देश के चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। • राज्य: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। • लक्ष्य: इन कॉरिडोर्स का मुख्य उद्देश्य आयात निर्भरता  को घटाना और घरेलू स्तर पर इन स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की सप्लाई चेन बनाना है। 4. एमएसएमई और शहरी विकास 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आर्थिक ढांचे  को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि शहर विकास के इंजन बन सकें। भविष्य की ओर बढ़ती 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' कुल मिलाकर, ₹54.1 लाख करोड़ के बजट में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाती है। बायो-फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भारी निवेश और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण यह बताता है कि सरकार अब केवल 'असेंबली' नहीं, बल्कि 'मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन' पर फोकस कर रही है।

कृषि क्षेत्र को बजट 2026 से क्या मिलेगा? किसान सम्मान निधि में संभावित इजाफा

नई दिल्ली आगामी एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में किसानों को सरकार से कई उम्मीदें हैं.कृषि विकास को लेकर किसानों की प्रमुख मांगों में खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिलाना एवं पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि में बढ़ोतरी शामिल है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण में जानकारी दी कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के 11 करोड़ किसानों को अब तक कुल 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस किसानों को मजबूत बनाने पर है.  किसानों का मानना है कि इन मांगों को बजट में शामिल करने से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी. बीज, यूरिया, खाद, कृषि यंत्र, ट्रैक्टर, डीजल समेत कई ऐसी चीजे हैं जिनपर GST को कम करके किसानों को बड़ी राहत दी जा सकती है. वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि केंद्रीय बजट 2026 में पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि में इजाफा हो सकता है. क्या बजट 2026 में PM-KISAN योजना की राशि में बदलाव संभव है? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर होती है. हालांकि, मौजूदा हालात में किसान संगठनों और एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई के दौर और खेती में लागत के हिसाब से यह रकम अब कम लगती है.  दरअसल, बीते कुछ सालों में खेती की लागत में तेज उछाल आया है. बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी हर चीज महंगी होती जा रही है. सीमांत और छोटे किसानों के लिए 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता नाकाफी साबित हो रही है. ऐसे में बजट 2026 में इस राशि में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है. इनपुट लागत में कमी और एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किसानों की एक प्रमुख मांग खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और यंत्रों पर GST दरों को कम करने की है. वर्तमान में कीटनाशकों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग जोर पकड़ रही है. इसके अतिरिक्त, बजट में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की संभावना है. सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल सरकार की कई योजनाएं खेती के लिए चलाई जा रही हैं. पीएम धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाएं उन इलाकों में मदद कर सकती हैं जहां खेती कमजोर है. बजट में यह ध्यान रखना चाहिए कि इन योजनाओं का फायदा छोटे किसानों, बारिश पर निर्भर इलाकों और महिलाओं तक पहुंचे.  विकसित भारत की नींव है मजबूत खेती अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो खेती को मजबूत बनाना जरूरी है. बजट 2026 भारतीय खेती को नई दिशा दे सकता है. सरकार के सहयोग से किसान खुशहाल होंगे तो देश भी आगे बढ़ेगा.

भविष्य की दिशा तय करेगा Budget 2026 – दुनिया के विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ऊँची ब्याज दरों ने निवेश की रफ्तार धीमी कर दी है, वहीं यूरोप आर्थिक सुस्ती से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।Moody’s, S&P और OECD जैसे प्रमुख वैश्विक रेटिंग और शोध संस्थानों के मुताबिक भारत की GDP ग्रोथ 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। मजबूत घरेलू मांग, निरंतर सरकारी पूंजीगत व्यय और संरचनात्मक सुधार भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अब “Global Growth Driver” कहा जा रहा है।OECD का मानना है कि Budget 2026 में लिए गए सुधारात्मक और दूरदर्शी फैसले भारत को अगले दशक में सुपर इकॉनमी की श्रेणी में पहुँचा सकते हैं। वैश्विक संकट के इस दौर में भारत का बजट अब केवल घरेलू आर्थिक दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया की आर्थिक धड़कन से जुड़ चुका है। यह बजट तय करेगा कि भारत केवल उभरती शक्ति बना रहेगा या वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा और सुपर शक्ति । निर्यात और प्रतिस्पर्धा वैश्विक बाजार में भारत के निर्यात को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उद्योग जगत टैक्स राहत, आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज और नए Free Trade Agreements (FTA) की मांग कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक Budget 2026 को पूंजी आकर्षण और निवेश सुरक्षा के संकेतक के रूप में देख रहे हैं। FDI में अतिरिक्त छूट, सुविधा-केंद्रित टैक्स नीति और निवेश-अनुकूल विनियमन को इन्वेस्टमेंट-लीड ग्रोथ के लिए अनिवार्य माना जा रहा है, ताकि भारत विदेशी पूंजी के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश गंतव्य बन सके। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर, बजट से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहा है। ड्यूटी में कटौती, उत्पादन प्रोत्साहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से भारत न केवल घरेलू EV मांग को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक EV बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक ताकत भी बन सकता है। टेक्नोलॉजी और AI में अगली वैश्विक छलांग AI और एडवांस टेक्नोलॉजी अब केवल उद्योग नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति बन चुकी है। टेक सेक्टर की अपेक्षा है कि Budget 2026 में AI-संबंधित सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्लेटफॉर्म, स्किल-बिल्डिंग और R&D को प्राथमिकता दी जाए, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा सके।।  भारत की साइलेंट स्ट्रेंथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अब मूल अवसंरचना माना जा रहा है। डिजिटल बैंकिंग, पेमेंट सिस्टम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ी पारदर्शिता और पहुँच ने भारत को वैश्विक निवेश और व्यापार के लिए अनुकूल और भरोसेमंद वातावरण प्रदान किया है। Budget 2026 भारत के आर्थिक भविष्य का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जो यह तय करेगा कि भारत केवल वैश्विक संकटों से सुरक्षित रहेगा या दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने वाला नेता बनेगा।  वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का उभरता रोल लगभग $700 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $387.6 बिलियन का सेवा निर्यात और दुनिया का सबसे बड़ा $135.4 अरब का रेमिटेंस प्रवाह ये आंकड़े बताते हैं कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।    

निवेशकों की नजर Budget 2026 पर: ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG में कमी की उम्मीद

नई दिल्ली अगले महीने पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और एक्सपर्ट्स ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रख दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न मिलेगा और वे लंबी अवधि के लिए निवेश करने को प्रेरित होंगे। STT कम करने की मांग पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स ज्यादा होने की वजह से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं ताकि सट्टेबाजी के बजाय निवेश को बढ़ावा मिले। होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद फिलहाल अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और निवेशकों के बीच किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। इंडेक्सेशन का लाभ फिर से मिले रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स (नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स) पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% कर दे। इससे लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सकेगी। निवेश बढ़ेगा तो इकोनॉमी को फायदा होगा टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का फ्लो शेयर बाजार की तरफ बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है। सरकार के लिए चुनौती रेवेन्यू और निवेशकों की उम्मीदों के बीच बैलेंस बनाने की होगी।

रियल एस्टेट पर बजट 2026 का असर — घर खरीदने वालों और निम्न-मध्य वर्ग की उम्मीदें

भागलपुर केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट 2026-27 पेश करने जा रही है, जिसमें अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। बजट से पहले देशभर के अलग-अलग सेक्टर्स में उम्मीदों और सुझावों की चर्चा तेज हो गई है। रियल एस्टेट, शेयर बाजार, एमएसएमई, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को लेकर बजट से क्या अपेक्षाएं हैं, इसे लेकर एक्सपर्ट्स ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए अपनी राय रखी है। ईस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि रियल एस्टेट ऐसा सेक्टर है जो हर आम आदमी को सीधे प्रभावित करता है। यह सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 7 प्रतिशत का योगदान देता है और कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार भी देता है। उन्होंने कहा कि बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा पर दोबारा विचार होना चाहिए। अभी 45 लाख रुपए तक के घर को अफोर्डेबल माना जाता है, लेकिन आज के समय में यह सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपए की जानी चाहिए, ताकि ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट की भी मांग की। उनका कहना है कि बिल्डर्स को इनपुट टैक्स का लाभ नहीं मिलने से निर्माण लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर घर की कीमतों पर पड़ता है। अगर सरकार इनपुट टैक्स क्रेडिट देती है तो मकानों की कीमत घटेगी और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना आसान होगा। इसके अलावा, उन्होंने ब्याज दरों में कटौती और इनकम टैक्स में होम लोन पर अतिरिक्त राहत देने की भी उम्मीद जताई। इसके अलावा, भागलपुर के सीए और अर्थशास्त्री प्रदीप झुनझुनवाला ने कहा कि बजट आम जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष टैक्स राहत की मांग की। उनका कहना है कि सीनियर सिटीजन्स के लिए टीडीएस की सीमा और टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर कम से कम एक करोड़ रुपए करने की मांग की। उन्होंने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में भी बदलाव की जरूरत बताई। मौजूदा समय में एक लाख रुपए की छूट बहुत कम है, जिसे बढ़ाकर कम से कम पांच लाख रुपए किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने भागलपुर के बुनकरों, टेक्सटाइल सेक्टर, कृषि आधारित उद्योग और टूरिज्म सेक्टर को भी बजट में विशेष प्राथमिकता देने की मांग की। वहीं टैक्स एक्सपर्ट और सीए संजय कुमार सकल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चलते वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और टैरिफ तनाव के चलते शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। पिछले कुछ समय से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से बाजार लगातार गिर रहा है, पहले युद्ध का प्रभाव था फिर टैरिफ ने बाजार को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, "हम इस बजट से ये उम्मीद करते हैं कि कुछ ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे निवेशकों को फायदा हो, खासकर कैपिटल गेन टैक्स को लेकर। पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता था। फिर इस पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया, बाद में इसे और बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया।" उन्होंने कहा कि अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को कम किया जाता है या खत्म किया जाता है, तो इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार को सहारा मिलेगा। इसके साथ ही महिला उद्यमी प्रिया सोनी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। हालांकि, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी जागरूकता की कमी है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में बड़े पोस्टर्स और अभियानों के जरिए दी जानी चाहिए, ताकि हर महिला इसका लाभ उठा सके। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई बढ़ने के मुकाबले महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी नहीं हुई है। मातृत्व वंदन योजना और पोषण योजनाओं की राशि बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, महिला उद्यमियों के लिए सिर्फ फंडिंग ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग सपोर्ट और अलग महिला बाजार की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि वे अपने उत्पाद आसानी से बेच सकें।

Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट की मांग की

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की शीर्ष संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने होम लोन पर मिलने वाली ब्याज कटौती की सीमा बढ़ाने, किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है. NAREDCO का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और शहरी परिस्थितियों को देखते हुए आवास क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके. होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने की मांग NAREDCO के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की छूट सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सीमा करीब 12 वर्ष पहले तय की गई थी, जबकि इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है. जैन के अनुसार, ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, जिससे आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाए. किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव जरूरी NAREDCO ने किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है. संगठन का कहना है कि वर्तमान में 45 लाख रुपये तक के घरों को किफायती आवास माना जाता है, लेकिन बढ़ती भूमि कीमतों और निर्माण लागत के कारण यह सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है. संस्था ने सुझाव दिया कि 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकेंगी और खरीदारों को एक प्रतिशत जीएसटी जैसी कर राहत का लाभ मिलेगा. रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने पर जोर NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र देश की जीडीपी, रोजगार सृजन और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद अब तक इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो डेवलपर्स को सस्ते ऋण, बेहतर वित्तीय संसाधन और निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी. इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और आवास की आपूर्ति बढ़ेगी. किराये के आवास को बढ़ावा देने की जरूरत NAREDCO ने किराये के आवास को प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. प्रवीण जैन ने बताया कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न मात्र एक से तीन प्रतिशत के बीच है, जिससे रियल एस्टेट कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना आकर्षक नहीं रह गया है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कर छूट, वित्तीय प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन के जरिए किराये के आवास को बढ़ावा दे सकती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके. सरकारी जमीन और PPP मॉडल का प्रस्ताव निरंजन हीरानंदानी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार अपने पास उपलब्ध खाली पड़ी जमीन का उपयोग किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास निर्माण के लिए करे. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे तेजी से आवासीय परियोजनाओं का विकास संभव होगा. 2030 तक 1000 अरब डॉलर का सेक्टर NAREDCO का अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1,000 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है. संगठन का मानना है कि यदि बजट में आवास ऋण, कर ढांचे और नीति सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को और गति देगा.

ओल्ड टैक्स रिजीम पर बजट 2026 में बड़ा फैसला? सैलरी वालों की बढ़ सकती है खुशी

 नई दिल्ली एक फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा. इस बजट से पहले टैक्सपेयर्स के मन में ये सवाल उठ रहा है कि ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का भविष्य क्या होगा. क्योंकि करीब 95 फीसदी लोग न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में शिफ्ट हो चुके हैं. दरअसल, सरकार पहले ही न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना चुकी है, और सरकार का फोकस भी न्यू टैक्स रिजीम पर ही है. इस बीच लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या बजट में सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर सकती है? ओल्ड टैक्स रिजीम का क्या होगा? हालांकि जानकार मान रहे हैं कि इस बजट में ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह खत्म करने की संभावना कम है, लेकिन इसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाने की रणनीति जरूर अपनाई जा सकती है, क्योंकि जिस तरह से न्यू टैक्स रिजीम में लगातार पिछले कुछ वर्षों से बदलाव हो रहे हैं. उससे सरकार का रुख साफ है कि वह एक सरल, कम छूट वाला और कम विवाद वाला टैक्स सिस्टम चाहती है.  न्यू टैक्स रिजीम इसी सोच पर आधारित है, जिसमें कम टैक्स स्लैब (Tax Slab) हैं और ज्यादातर छूट और कटौतियां हटा दी गई हैं. लेकिन अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास होम लोन, HRA, LIC, PPF, ELSS और NPS जैसे निवेश के विकल्प हैं, यानी उन्होंने इन विकल्पों में निवेश कर रहे हैं. जानकार ये बता रहे हैं कि इस बजट में सरकार न्यू टैक्स रिजीम को और लोकप्रिय बनाने के लिए कदम उठा सकती है, ताकि बाकी टैक्सपेयर्स भी ओल्ड टैक्स रिजीम को छोड़कर न्यू में शिफ्ट हो जाएं.  न्यूज टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने की कवायद इनमें सबसे बड़ा कदम स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाना हो सकता है. अभी न्यू टैक्स रिजीम में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर सकती है. इसका सीधा फायदा सैलरीड क्लास को मिल सकता है. फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी पर कोई आयकर नहीं लगता है.  दूसरा बड़ा और अहम बदलाव NPS को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल करना हो सकता है. फिलहाल ओल्ड टैक्स रिजीम में NPS पर अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है, जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह सुविधा नहीं है. अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम में भी NPS (खासतौर पर एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन) को टैक्स फ्री या डिडक्शन के दायरे में लाती है, तो रिटायरमेंट सेविंग को बढ़ावा मिलेगा और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए न्यू रिजीम ज्यादा आकर्षक बन जाएगी.  अगर ओल्ड टैक्स रिजीम की बात करें तो इसमें सैलरीड क्लास को 50,000 रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसके अलावा 80C के तहत PF, LIC, ELSS में निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट, 80D में हेल्थ इंश्योरेंस, HRA, और होम लोन के ब्याज पर टैक्स बचाया जा सकता है. इस रिजीम में टैक्स स्लैब 0 से 2.5 लाख तक शून्य, 5 लाख तक 5%, 10 लाख तक 20% और उससे ऊपर 30% है.