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Budget :जबलपुर में नया फ्लाईओवर: 300 करोड़ की लागत, ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

जबलपुर  यातायात को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक और फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई जा रही है। गढ़ा त्रिपुरी चौक से मेडिकल के बीच बनने वाले इस फ्लाईओवर का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है। दो किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग दो किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से बायपास, मेडिकल कॉलेज, तिलवारा और धनवंतरी नगर की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। आवासीय और चिकित्सा क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक का हिस्सा आवासीय, शैक्षणिक क्षेत्रों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को जोड़ता है। यहां निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही अधिक रहती है। सीमित सड़क चौड़ाई और अवैध कब्जों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई लेग बनाने पर भी विचार इस फ्लाईओवर को बहुउपयोगी बनाने के लिए इसके कई लेग तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आसपास के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जा सकेगा और मुख्य मार्ग के साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी ट्रैफिक का बेहतर वितरण संभव होगा। 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित फ्लाईओवर की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तकनीकी सर्वेक्षण और डिजाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इसी विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर पहले से मौजूद है। साथ ही सगड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर निर्माणाधीन है और बंदरिया तिराहे पर भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है।  

वैश्विक निवेश की निगाहें भारत पर: बजट 2026 में क्या है निवेशकों की उम्मीदें?

नई दिल्ली यूक्रेन-रूस युद्ध, गाजा संकट, लाल सागर में तनाव, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और अमेरिका-यूरोप में ऊंची ब्याज दरों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब भारत के बजट 2026 पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक संस्थाएं आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला मान रही हैं। IMF और World Bank की ताजा रिपोर्टों के अनुसार 2026 में वैश्विक विकास दर 2.7-3% के आसपास रहने की संभावना है।  यूरोप ऊर्जा संकट और युद्ध के असर से जूझ रहा है जबकि  चीन रियल एस्टेट और डिमांड संकट में है। वैश्विक उद्योगों की भारत से उम्मीदें क्यों वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियाँ और निर्यात मांग में गिरावट जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अमेरिकी टैरिफों और निर्यात बाधाओं से भारतीय निर्यातकों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान की उम्मीद उद्योगों को बजट से है।पहले  World Bank ने भारत की ग्रोथ अनुमान को थोड़ा कम कर 6.3% कर दिया था, यह वैश्विक आर्थिक दबाव और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर किया गया था। हालांकि  संशोधन में यह स्वीकार किया गया कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और घरेलू खपत तथा सेवा निर्यात इसे आगे ले जा रहे हैं।     अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक भारत के बजट 2026 से उम्मीद कर रहे हैं।     IMF ने भारत के लिए 2025-26 के GDP अनुमान को 6.6% तक अपग्रेड किया है।     यह दिखाता है कि वास्तव में भारत वैश्विक मंदी के बीच भी प्रगति कर रहा है।     मैन्युफैक्चरिंग और Make in India को टैक्स प्रोत्साहन।     सेमीकंडक्टर, EV, ग्रीन एनर्जी में सब्सिडी।     स्टेबल टैक्स पॉलिसी और आसान निवेश नियम।     डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर खर्च।     Bloomberg और Reuters के अनुसार, बजट के फैसले तय करेंगे कि ग्लोबल सप्लाई चेन चीन से भारत की ओर कितनी तेजी से शिफ्ट होती है।    रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक असर     NATO और एशिया-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच भारत के डिफेंस बजट में बढ़ोतरी पर दुनिया की नजर।     स्वदेशी हथियार और रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा     इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से लॉजिस्टिक्स और व्यापार  मजबूत होगा     विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बजट इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।  वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए चुनौती     मुनाफे में फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड (FII) आउटफ्लो और रुपया की कमजोरी ने भी भारत के लिए विनिमय दर संबंधी जोखिम पैदा कर दिए हैं, जिससे बजट में पूंजी आकर्षण और निवेश-सहायक उपायों की मांग बढ़ी है।     चीन सस्ता उत्पादन केंद्र बना हुआ है।     वियतनाम, बांग्लादेश और मैक्सिको प्रतिस्पर्धा में शामिल।     भारत को स्किल, लॉजिस्टिक्स और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर तेज सुधार जरूरी।  

बजट सरप्राइज: शादीशुदा दंपतियों को मिल सकती है भारी टैक्स छूट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। खबर है कि वित्त मंत्रालय वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने की तैयारी में है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो पति-पत्नी मिलकर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को होगा, जहां एक ही कमाने वाला सदस्य है। अभी ऐसे परिवार दूसरे जीवनसाथी की छूट और टैक्स स्लैब का पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। क्या है सिस्टम फिलहाल भारत में टैक्स सिस्टम ऐसा है कि शादीशुदा होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है, अलग PAN, अलग छूट और अलग कटौती मिलती हैं। अगर पत्नी की इनकम नहीं है, तो उसकी बुनियादी छूट सीमा बेकार चली जाती है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि USA और Germany की तरह भारत में भी जॉइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प होना चाहिए, जहां परिवार को एक इकोनॉमिक यूनिट माना जाता है। जॉइंट टैक्सेशन में पति-पत्नी की कुल इनकम जोड़कर टैक्स लगाया जाएगा और इसके लिए अलग टैक्स स्लैब हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है। जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को ₹3 लाख तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा ₹6 लाख या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मिडिल क्लास फैमिली को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, मेडिकल इंश्योरेंस और दूसरे कटौती को भी बेहतर तरीके से एडजस्ट किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने की बात कही जा रही है। सरचार्ज पर भी राहत मिल सकती है साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी ₹50 लाख से ज्यादा इनकम पर सरचार्ज लगता है, लेकिन जॉइंट टैक्सेशन में इसकी सीमा ₹75 लाख या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे हाई टैक्स ब्रैकेट में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अब सबकी नजरें यूनियन बजट 2026-27 पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट सेशन 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा।

मध्य प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति के लिए रोलिंग बजट पर काम

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार तीन साल का रोलिंग बजट तैयार करेगी। प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति- विकसित मध्य प्रदेश 2047 पर केंद्रित वर्ष 2026-27, वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के लिए त्रिवर्षीय रोलिंग बजट तैयार किया जाएगा। इसके लिए 15 सितंबर से 30 सितंबर तक विभागवार बैठकें होंगी। 31 अक्टूबर को नई योजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे और एक अक्टूबर से 15 नवंबर तक द्वितीय चरण की चर्चा की जाएगी। बता दें कि इससे पहले बजट निर्माण में 28 से 31 जुलाई तक विभागीय प्रशिक्षण और प्रारंभिक चर्चा की जा चुकी है। इसके अलावा इस बार भी राज्य सरकार द्वारा शून्य आधार बजटिंग की प्रक्रिया को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित बजट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। शून्य आधार बजटिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर योजना के पीछे ठोस उद्देश्य हो, उसका समाज पर प्रभाव दिखे और प्रत्येक व्यय राज्य की विकास प्राथमिकताओं से मेल खाता हो। बजट स्वीकृति के पहले हर योजना का होगा मूल्यांकन प्रत्येक योजना के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे होगा और उसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। इस प्रक्रिया में गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त करने और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत करने पर भी विचार किया जाएगा। दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें होंगी आयोजित बजट निर्माण के लिए दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। 31 मार्च 2026 को समायोजन प्रस्तावों की अंतिम तिथि रखी गई है। वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की भी गणना अलग होगी। विभागों को अपने स्थायी खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, भत्तों की गणना करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के वेतन में तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि जोड़ी जाएगी। महंगाई भत्ते की गणना क्रमश: 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत और 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। संविदा कर्मचारियों के वेतन में चार प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का भी प्रविधान रहेगा। अजा-अजजा उपयोजना के लिए न्यूनतम बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सेगमेंट कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। आफ-बजट व्यय और केंद्रीय योजनाओं पर भी रहेगी निगरानी जिन विभागों को भारत सरकार से सीधे फंड प्राप्त होता है, उन्हें वह राशि भी बजट प्रस्ताव में दर्शानी होगी। इसके अलावा, आफ-बजट ऋण, प्रोत्साहन योजनाओं का वित्तीय असर, और नवीन योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बजट की तैयारी के लिए जो आइएफएमआइएस प्रणाली अपनाई गई है, उसमें तय समय के बाद प्रविष्टि की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा में दर्ज करें और विभागीय बैठक के पूर्व पूरी जानकारी तैयार रखें।