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मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय निकाय देगा मकान की मंजूरी, T&CP से मिली राहत

भोपाल / इंदौर  मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे।  500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया। मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। कई विभागों की NOC से मिली राहत नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन मामलों में अब भी NOC जरूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी। पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे। नियमों में 5 बड़े बदलाव     दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।     T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।     मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।     अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।     प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

रायपुर में DJ की तेज आवाज से जर्जर इमारत का हिस्सा गिरा, बाल-बाल बचे लोग

रायपुर. राजधानी रायपुर के सदर बाजार इलाके में शुक्रवार देर रात तेज आवाज में डीजे बजाने से एक पुरानी और जर्जर इमारत का सामने का हिस्सा अचानक गिरने से इलाके में हड़कंप मच गया। इमारत गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर पुलिस ने कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई अनहोनी नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक, यह जर्जर इमारत सहेली ज्वेलर्स के सामने स्थित है। इमारत के नीचे पान की दुकान संचालित होती है। बिल्डिंग का हिस्सा गिरने का आभास होते ही दुकानदार और वहां मौजूद लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए। दिन के समय इस इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। देर रात घटना होने से एक बड़ा हादसा टल गया। सीएम साय ने बैठक लेकर जर्जर भवनों को ढहाने के दिए थे निर्देश बता दें कि दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दो दिन पहले ही जर्जर भवनों को लेकर सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बैठक ली थी। सीएम ने निर्देश दिया था कि जर्जर भवन ढहाए जाएं और कलेक्टर-एसपी अपने-अपने क्षेत्रों में भवनों की नियमित निगरानी करें। अधिकारी सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो। मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संभावित खतरों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने पहले ही जारी किया था नोटिस नगर निगम जोन-4 के कमिश्नर के मुताबिक, संबंधित मकान काफी जर्जर स्थिति में था और नगर निगम की ओर से भवन मालिक को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। शुक्रवार देर रात अचानक इमारत का एक हिस्सा गिर गया। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने का काम शुरू किया। आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। तेज आवाज में डीजे बजाने से पुलिस ने किया मना पुलिस ने आसपास के लोगों से भवन के पास तेज आवाज में डीजे या साउंड सिस्टम नहीं बजाने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, जर्जर हिस्से को हटाने और इलाके को सुरक्षित करने के दौरान किसी तरह की अतिरिक्त परेशानी या खतरा न हो, इसके लिए सावधानी बरती जा रही है। फिलहाल नगर निगम जोन अध्यक्ष और निगम की टीम मौके पर मौजूद है। क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने की कार्रवाई जारी है।

पंजाब में अब घर-दुकान बनाने के नियम बदले, पार्किंग से फायर एग्जिट और हाईटेंशन तार तक नए प्रावधान

चंडीगढ़  पंजाब में सरकार ने बिल्डिंग बनाने के नियम बदल दिए हैं। इनमें घर-दुकान भी शामिल हैं। जिनमें फायर एग्जिट से लेकर पार्किंग और छत तक बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा हाईटेंशन तारों के नीचे या दूरी को लेकर भी अब नए नियम निर्धारित किए गए हैं। सोसाइटीज में पार्किंग के लिए भी अब तय नियम फॉलो करने होंगे। इसके लिए सरकार ने पंजाब शहरी नियोजन और बिल्डिंग (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। 1. 21 मीटर से ऊंची बिल्डिंग में सभी सीढ़ियां फायर एग्जिट यदि इमारत की ऊंचाई 21 मीटर (लगभग 6-7 मंजिल) से अधिक है, तो उसमें चढ़ने-उतरने के लिए बनी सभी सीढ़ियों को अनिवार्य रूप से 'फायर एग्जिट' यानी आपातकालीन निकास की तरह बनाया जाएगा। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में लोग बिना किसी रुकावट के सुरक्षित और तेजी से बाहर निकल सकें, इसके लिए यह व्यवस्था जरूरी होगी। 2. बिजली की ओवरहेड लाइन के नीचे निर्माण नहीं बिजली की ओवरहेड लाइन के आसपास इमारत बनाते समय निर्धारित दूरी रखना जरूरी होगा। 3. दुकान, बूथ और SCO की ऊंचाई 5 मीटर तक बूथ, सामान्य दुकानों और SCO में फर्श से छत तक की ऊंचाई अधिकतम 5 मीटर रखी जा सकेगी। 4. मेजेनाइन में सिर्फ सामान रख सकेंगे बूथ में मुख्य मंजिल और छत के बीच बनाई जाने वाली मेजेनाइन यानी अतिरिक्त छोटी मंजिल का इस्तेमाल सिर्फ सामान रखने के लिए किया जा सकेगा। यहां दुकान का कारोबार या ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था नहीं की जा सकेगी। मेजेनाइन का क्षेत्रफल बूथ के कुल एरिया के दो-तिहाई (2/3) से अधिक नहीं होगा। इसमें कॉरिडोर का क्षेत्रफल शामिल नहीं होगा। खास बात यह है कि मेजेनाइन का यह क्षेत्र FAR में शामिल नहीं किया जाएगा। 5. छत पर सोलर पैनल के लिए राहत अब छत पर सोलर पैनल लगाते समय पैनल के नीचे 2.4 मीटर (लगभग 8 फीट) तक की खाली जगह रखी जा सकेगी। सोलर पैनल और उन्हें लगाने के लिए बनाए गए ढांचे को इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में भी नहीं गिना जाएगा। यानी छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए इस अतिरिक्त ढांचे को FAR की गणना में नहीं जोड़ा जाएगा। 6. छत पर 6 वर्गमीटर तक टॉयलेट अब छत पर अधिकतम 6 वर्ग मीटर (लगभग 64.5 वर्ग फीट) जगह में टॉयलेट बनाया जा सकेगा। इसकी अधिकतम ऊंचाई 2.75 मीटर (लगभग 9 फीट) होगी। टॉयलेट को भी इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में शामिल नहीं किया जाएगा। 7. लिफ्ट सीधे छत तक जा सकेगी अब आवासीय और कमर्शियल समेत सभी तरह की इमारतों में लिफ्ट को सीधे छत तक ले जाने की अनुमति होगी। लिफ्ट का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) 2016 और संबंधित लिफ्ट कानून के अनुसार करना होगा। लिफ्ट की जांच और सर्टिफिकेशन पंजाब के चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर से क्षमता प्रमाण पत्र प्राप्त व्यक्ति ही कर सकेगा। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और सामान लेकर छत तक जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। 8. कार पार्किंग को लेकर भी नए नियम कार पार्किंग के लिए भी लिफ्ट, क्लब हाउस और स्टिल्ट को लेकर भी नियम तय कर दिए गए हैं। 9. जिम और इंडोर गेम्स में FAR की राहत पोडियम पर बने कॉमन जिम या इंडोर गेम्स एरिया का सिर्फ आधा हिस्सा (50%) FAR में गिना जाएगा। इससे ऐसे कॉमन एरिया के निर्माण में FAR के लिहाज से राहत मिलेगी।

सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, अचानक ढही बिल्डिंग; 2 छात्रों को सुरक्षित निकाला, NDRF का रेस्क्यू जारी

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रव‍िवार को बड़ा हादसा हो गया. तीन मंज‍िला बिल्डिंग गिरने से बड़ी संख्या छात्र मलबे में दब गए. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं. पुल‍िस और प्रशासन के अधि‍कारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं. बताया जा रहा है कि हादसा करीब 1 बजकर 30 मिनट पर हुआ है. रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी है।  सत्य निकेतन में बिल्डिंग का मलबा हटाने का काम जारी, मौके पर दमकल की 12 गाड़ियां मौजूद सत्य निकेतन इलाके में एक हॉस्टल की इमारत के गिरने के बाद अब मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है. मौके पर जेसीबी के साथ-साथ दमकल की भी 12 गाड़िया मौके पर मौजूद हैं. अंदर फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।  सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर जताया दुख सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर दुख जताया है. उन्‍होंने एक्‍स पर जानकारी दी क‍ि, ''RK पुरम के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से बहुत चिंता है. DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर बचाव कार्य कर रही हैं. एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को खाली करा लिया गया है। फँसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद पहुँचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है. हालात पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियाँ आपसी तालमेल के साथ काम कर रही हैं। हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।  सीएम बोलीं- हर संभव कोशिश जारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सत्य निकेतन में हुए हादसे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें राहत-बचाव अभियान चला रही हैं।  उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर हादसे से सटी इमारत को खाली करा लिया गया है. रेखा गुप्ता ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने की हर संभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां आपसी तालमेल से काम कर रही हैं. नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. मलबा पूरी तरह हटने के बाद ही पता चलेगा कि हादसे में कितने लोग फंसे थे और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।    दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस हादसे पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्द से जल्द लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है. राहत और बचाव कार्य जारी है।  दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी इस हादसे पर दुख जताया है. उनका कहना है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, DDMA, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की बचाव टीमें मौके पर मौजूद हैं और जो लोग फंसे हैं उन्हें निकालने की हर संभव कोशिश की जा रही है।  ये हादसा मोती बाग के सत्य निकेतन स्थित शिव मंदिर के पास की है, जहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं।  दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर मिली हादसे की जानकारी फायर डिपार्टमेंट को 1 बजकर 33 मिनिट पर इस हादसे की जानकारी मिली. फायर डिपार्टमेंट की 12 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं. राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है और टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं. 3 से 4 लोगों को मलबे से निकाला भी जा चुका है और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।  जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग में एक पीजी चल रहा था जिसकी वजह से मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका है. रेस्क्यू टीमों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी मलबा हटाने और लोगों को निकालने में जुटे हैं।  विधायक ने लिया हालात का जायजा आरके पुरम के विधायक अनिल शर्मा ने दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ये बहुत दुखद घटना है. इससे ज्यादा दिल दहला देने वाली कोई बात नहीं हो सकती. स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से इस बिल्डिंग में PGs में पढ़ने और रहने आते हैं, बिल्डिंग गिर गई है. हालांकि ये बताना मुश्किल है कि कितने स्टूडेंट्स हैं. चाहे वो पांच हों, दस हों, या बीस. लेकिन हमें पक्का पता है कि स्टूडेंट्स अंदर फंसे हुए हैं।   चश्‍मदीद ने कहा- बच्चे चिल्ला रहे हैं, हमें बचाओ, हमें बचाओ चश्मदीद युवक ने कहा, "मेरी दुकान पास ही है. हम अंदर बैठे थे तभी अचानक हमें भूकंप जैसी गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे, वहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर चुकी थी. कुछ शव निकाले गए और चार ऐसे बच्चों को भी बचाया गया जिनकी सांसें चल रही थीं. मलबे के अंदर से अभी भी आवाज़ें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, 'हमें बचाओ, हमें बचाओ!'… वहां कम से कम 25-30 बच्चे थे. पास ही लड़कों और लड़कियों का PG था. 4-5 लोगों को बचाया गया है; 2-3 शव निकाले गए हैं और और भी शव मिलने की आशंका है. वे बेसमेंट बना रहे थे।  'बिल्डिंग गिरते ही हम भागकर निकले' हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इमारत अचानक गिर गई. लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया. आसपास मौजूद लोग तुरंत वहां से भागे. चश्मदीद के मुताबिक, मलबे में 20 से 30 लोग दबे हो सकते हैं. एक अन्य चश्मदीद ने भी बताया कि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे।  मलबे के नीचे से फोन कर रहे लोग मौके पर पहुंचे आरके पुरम के विधायक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि कुछ लोग मलबे के नीचे से फोन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग अभी अंदर फंसे हो सकते हैं. बचाव अभियान लगातार जारी है।  स्थानीय … Read more