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बुलडोजर कार्रवाई से उजड़े 10 परिवार, विरोध में रातू रोड पर चक्का जाम

रांची राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बने मकानों को तोड़े जाने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में आक्रोश है और लोग सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के पीछे स्थित खादगढ़ा, महुआ टोली और जयप्रकाश नगर इलाके में मंगलवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 27 कट्ठा सरकारी जमीन पर बने लगभग 10 मकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी थी और उस पर अवैध कब्जा किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई। अचानक घर टूटने से लोग बेघर हो गए कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में नाराजगी फैल गई। लोगों का आरोप है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। कई परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे और अचानक घर टूटने से वे बेघर हो गए हैं। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि साल 2020 में करीब 48 डिसमिल जमीन एक आदिवासी रैयत से खरीदी गई थी और इसके बदले करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए थे। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री आपसी सहमति से हुई थी और वे कानूनी रूप से वहां रह रहे थे। हालांकि बाद में जमीन के मूल मालिक ने मामला दर्ज कराया और अदालत से दखल-दिहानी का आदेश ले लिया। रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया बुधवार को बड़ी संख्या में लोग विरोध में सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने रातू रोड कब्रिस्तान के पास टायर जलाकर सड़क जाम कर दी। इससे रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। खबर लिखे जाने तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता जारी थी। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई पर रोक, मामले की दोबारा जांच, मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन के लेन-देन में कोई विवाद था तो इसकी सजा आम लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारियों ने लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।  

उज्जैन शहर में होगा बुलडोजर ऑपरेशन, 18 बीघा जमीन जल्द होगी खाली

उज्जैन  सिंहस्थ को देखते हुए सरकार जहां उज्जैन में शिप्रा सहित सभी जल स्रोतों में साफ पानी के लिए योजनाएं बना रही है। दावे कर रही है, लेकिन सप्तसागर से दो साल में न तो कब्जे हटे और न सीवेज मिलना रुक पाया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जाहिर की है। कहा है, उज्जैन नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने पहले जारी निर्देशों का न तो सही से पालन किया और न प्रगति के संबंध में समय पर हलफनामा दाखिल किया। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश निर्देशों का पालन करने में प्रतिबद्धता व ईमानदारी की कमी को एनजीटी हल्के में नहीं लेगा। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर व निगम कमिश्नर को निर्देशित कर तालाबों से अतिक्रमण हटवाएं। पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्रवाई करें। पर्यावरण विभाग के पीएस निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करें। शासन से भी दो हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। 36 में से 18 बीघा पर अतिक्रमण सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई कर यह निर्देश दिए। याचिका में बताया गया कि उज्जैन जिले के सप्तसरोवर-रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धनसागर, रत्नाकर सागर, विष्णुसागर और पुरुषोत्तम सागर का धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। राजस्व रिकॉर्ड में यह तालाब गोवर्धन सागर के नाम से खसरा 1281 पर 36 बीघा जमीन में दर्ज हैं। 18 बीघा पर अतिक्रमण हो चुका है। एनजीटी के अगस्त 2024 के आदेश में समिति से जांच कराई थी। अतिक्रमण और सीवेज मिलने की पुष्टि हुई थी।

भोपाल के कई इलाकों में अतिक्रमण हटाए जाने की तैयारी, 1.30 लाख लोग प्रभावित—मंडला और छतरपुर में नई परियोजनाओं से संकट

भोपाल  भोपाल में भोज वेटलैंड व भदभदा, कलियासोत, मदन महल हिल्स में अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मंडला में चुटका मप्र एटॉमिक पावर प्लांट, छतरपुर में डायमंड ब्लॉक लीज परियोजना, न्यू सिंगरौली कोयला खदान परियोजना से 1.30 लाख लोग प्रदेश में बेघर हो सकते हैं। विकास में बाधक बने घर हटाए – 2023 में झुग्गी-झोपड़ी, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के तहत 90 घर तोड़े। इन्हीं वजह से 2022 में 489 घर व दुकानें तोड़ी गईं।  – 2023 में कई परियोजनाओं में आड़े आ रहे 390 अन्य घर खाली कराए। इंदौर में 157 घर पीएम आवास योजना में बने थे। -2022 में ऐसे 245 घर थे। 127 सबसे ज्यादा मच्छी बाजार में खाली। – 2022 में एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 5 गांव में 175 घर खाली कराए। ये रिजर्व के कोर क्षेत्र में थे। एक घर खरगोन में हटाया गया। देशभर में चला नया ट्रेंड लेकिन… बता दें कि देश के कोने-कोने में इस समय जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों, अपराधियों और आतंकियों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह नया ट्रेंड जरूर है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से लेकर विकास परियोजनाओं तक के लिए 2017 से 2023 के बीच यानी सात वर्ष में कम से कम 3.44 लाख मकान तोड़े जा चुके हैं। इन्हीं वजहों से अभी और करीब 1.7 करोड़ लोगों के घर टूटने के जोखिम पर हैं। हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क संगठन द्वारा जुटाई जानकारियों के अनुसार सात साल में हुई कार्रवाइयों की वजह से करीब 16 लाख लोग बेघर हुए, जिनमें से अधिकतर के लिए सरकारी स्तर पर विस्थापन योजनाएं भी बनाई गईं हैं। 2023 में भारत में कुल 1,07,499 और 2022 में 46,371 मकान तोड़े गए। इसके जरिए दोनों वर्षों में क्रमश: 5,15,752 और 2,22,686 लोगों को घरों से निकाला गया।

कर्नाटक में सरकारी कार्रवाई से बढ़ा विवाद, बेंगलुरु में 400+ घरों को किया गया ध्वस्त

बेंगलुरु बेंगलुरु में 400 से ज़्यादा घरों को गिराने के बाद कर्नाटक सरकार विवादों में घिर गई है. जिससे सैकड़ों लोग, जिनमें ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बेघर हो गए हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में हुई इस बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई ने सत्ताधारी कांग्रेस और केरल लेफ्ट फ्रंट यूनिट के बीच ज़बरदस्त जुबानी जंग छेड़ दी है.  जानकारी के अनुसार 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव में फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में तोड़फोड़ की गई. जिससे करीब 400 परिवार बेघर हो गए. यह कार्रवाई ऐसे वक्त में की गई, जब शहर में साल की सबसे ज़्यादा ठंड पड़ रही है. बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा चलाए गए इस अभियान में 4 JCB और 150 से ज़्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे.  कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में उतरे लोग  मामले में कर्नाटक सरकार ने कहा कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास एक झील के किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे. हालांकि, निवासियों ने दावा किया कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं मिला था. पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बेदखल कर दिया. इससे सैकड़ों लोगों को कड़ाके की ठंड में सड़कों पर और अस्थायी शेल्टरों के नीचे रातें बितानी पड़ रही हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ निवासियों के हवाले से बताया गया है कि  वे 25 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैलिड आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं. निकाले गए ज़्यादातर लोग प्रवासी हैं और मज़दूर के तौर पर काम करते हैं. यह मुद्दा अब कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा विवाद बन गया है. इस एक्शन के खिलाफ लोग विरोध में उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.  एक गुट ने राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही कार्रवाई के विरोध में दलित संघर्ष समिति जैसे कई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. कार्रवाई की केरल के मुख्यमंत्री ने की निंदा इस कार्रवाई को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस की की निंदा की है. उन्होंने इसे कांग्रेस की "अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति" बताया है. एक्स पर किए गए एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि दुख की बात है कि संघ परिवार की अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत चलाई जा रही है. जब कोई सरकार डर और ज़बरदस्ती से शासन करती है, तो संवैधानिक मूल्य और मानवीय गरिमा सबसे पहले शिकार होते हैं. वहीं मामले में केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि कांग्रेस सरकार की "अमानवीय कार्रवाई" इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है. जो लोग धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के नाम पर सत्ता में आए हैं, वे गरीब लोगों के घरों को तोड़कर एक बार फिर अपना पाखंड दिखा रहे हैं.  उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिनाराई को दिया जवाब सीपीआई और केरल सीएम की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह इलाका कब्ज़ा की गई कचरा फेंकने की जगह थी. लेकिन लैंड माफिया इसे झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमने लोगों को नई जगहों पर शिफ्ट होने का समय दिया था. हम बुलडोज़र चलाने में विश्वास नहीं करते. पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए शिवकुमार ने ज़ोर देकर कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस के सीनियर नेता ने यह भी कहा कि पिनारयी विजयन जैसे सीनियर नेताओं को बेंगलुरु की समस्याओं के बारे में पता होना चाहिए. हम अपने शहर को अच्छी तरह जानते हैं और हम ऐसी झुग्गियों को बढ़ावा नहीं देना चाहते जो लैंड माफिया की एक्टिविटीज़ को बढ़ावा देती हैं.   

धार्मिक स्थल पर बुलडोजर कार्रवाई से हरिद्वार में हड़कंप, पुलिस ने संभाली कमान

हरिद्वार  उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में अवैध धार्मिक संरचनाओं पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। हरिद्वार जिला प्रशासन का बुलडोजर अक्सर अतिक्रमण के खिलाफ गरजता नजर आ रहा है। मंगलवार को रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। बताया जाता है कि यह मजार सिंचाई विभाग की जमीन पर बना था। इस अतिक्रमण के खिलाफ सिंचाई विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। पहले मजार से संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया। इसके बाद प्रशासन ऐक्शन लिया और बुलडोजर चलाकर करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को जमींदोज कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद पूरे उत्तराखंड में सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ तेजी से अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात रही ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दावा किया था कि उत्तराखंड में अब तक 9000 एकड़ से अधिक जमीन इसी तरह के अवैध कब्जों से खाली कराई गई है। सीएम ने कहा था कि सूबे में कोई भी हरे रंग की चादर डालकर सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। इसी संकल्प को लेकर सूबे में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही प्रशासन की ओर लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी विकृत मानसिकताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।

सुबह 4 बजे रतलाम में बड़ी कार्रवाई, एक्सप्रेसवे किनारे अवैध ढाबों पर चला बुलडोजर

रतलाम  सोमवार तड़के 4 बजे उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रशासन का बुलडोजर एक ढाबे पर गरजा. यह कार्रवाई नामली थाना क्षेत्र के बड़ौदा गांव के पास फोरलेन और दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के किनारे पर बने ढाबे हुई है. यहां अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों की शिकायत मिलने पर पुलिस और प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है. सुबह 4:00 बजे शुरू हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करीब 8:00 तक चली. इस दौरान 2 ढाबों को प्रशासन की टीम ने जमींदोज किया है. हालांकि, प्रशासन और पुलिस की इस कार्रवाई को ढाबा संचालक और ग्रामीणों ने गलत बताया है. प्रशासन के ऊपर निजी जमीन पर बने ढाबे को जमींदोज करने का आरोप लगाया है. अवैध ढाबों पर चला प्रशासन का बुलडोजर लेबड़ नयागांव फोरलेन पर जावरा से नामली के मध्य कई अवैध ढाबे संचालित हो रहे थे. इन ढाबों में मादक पदार्थों की तस्करी सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियां चलने के आरोप लग रहे थे. मिली शिकायतों के आधार पर स्थानीय पुलिस टीम और प्रशासन द्वारा संयुक्त कार्रवाई सोमवार की सुबह 4 बजे की गई है. दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे बने इन ढाबों को जमींदोज कर दिया गया है. इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद रहा है. प्रशासन की मनसा पर उठ रहे सवाल हालांकि, कथित अतिक्रमण के खिलाफ हुए पुलिस एक्शन पर सवाल उठ रहे हैं. ढाबा संचालकों का कहना है कि "ढाबे का निर्माण नियमानुसार निजी जमीन पर किया गया था. किसी प्रकार की अवैध गतिविधि यहां संचालित नहीं हो रही थी." बड़ौदा के पूर्व सरपंच अभिषेक शर्मा ने बताया कि "प्रशासन राजनीति से प्रेरित होकर अन्यायपूर्ण कार्रवाई कर रहा है. ऐसी क्या मजबूरी है कि पुलिस और प्रशासन रात के अंधेरे में कार्रवाई करने यहां पहुंचा. हमें सूचना तक नहीं दी गई." रात के अंधेरे में पहुंची पुलिस प्रशासन की टीम दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के पास हुए कथित अतिक्रमण को हटाने की यह कार्रवाई पुलिस और प्रशासन के द्वारा सुबह 4:00 बजे की गई. इसके लिए आसपास के पुलिस थानों का फोर्स लेकर एडिशनल एसपी, रतलाम सीएसपी, एसडीओपी और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. रतलाम ग्रामीण एसडीम विवेक सोनकर ने बताया कि "लंबे समय से हाईवे के किनारे अतिक्रमण कर ढाबे बनाए जाने और अवैध गतिविधियां संचालित करने की शिकायत मिल रही थी. जिस पर सोमवार को पुलिस प्रशासन की टीम द्वारा कार्रवाई की गई है." नामली थाने पहुंचकर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी इस कार्रवाई को लेकर ढाबा संचालकों और स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है. उन्होंने इसे पुलिस की दादागिरी बताया है. साथ ही विरोध दर्ज करवाया है. बुलडोजर एक्शन से आक्रोशित ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करने नामली थाने पर पहुंचे हैं. उधर सुबह-सुबह अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन की टीम को ग्रामीणों के जोरदार विरोध का सामना करना पड़ गया है.

अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई: संभल में मदरसा-मैरिज पैलेस ध्वस्त, सुरक्षा बल तैनात

संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ एक बार फिर से बुलडोजर से कार्रवाई जारी है। कई एकड़ भूमि पर बने इस निर्माण में लोग मदरसा और बारात घर चला रहे थे। इसको लेकर कोई विरोध ना हो, इसके लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही माहौल तनावपूर्ण न हो, इसके लिए पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है, साथ ही लोगों को घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है। अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी इस मामले पर संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि जिले भर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। यह तालाब की जमीन है जिस पर एक बड़ा मैरिज पैलेस बना है। तहसीलदार ने 30 दिन पहले इसे गिराने का आदेश जारी किया था। इसके बाद कोई अपील दायर नहीं की गई इसलिए आज ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आगे कहा, 'कोर्ट में सभी पक्षों को सुना गया। उसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने आदेश जारी किया और हम उसी के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। सभी की राय है कि अगर यह अवैध रूप से बना है तो इसे गिरा दिया जाना चाहिए।' प्रशासन ने इसे खुद गिराने का फैसला किया डीएम के अलावा संभल के एसपी केके बिश्नोई ने बताया, 'संभल के असमोली थाने के अंतर्गत राय बुजुर्ग गांव में एक तालाब और खाद के गड्ढों के लिए जमीन है। उन्हें इसे गिराने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। 30 दिन की समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्होंने अभी तक इसे नहीं गिराया है। प्रशासन ने इसे खुद गिराने का फैसला किया है। यह अवैध निर्माण था। उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था। यह अवैध निर्माण मदरसे और बारात घर की तरह उपयोग में लिया जा रहा था और कई एकड़ जमीन पर फैला हुआ था।'

धर्मांतरण केस में कार्रवाई तेज: जेल में बंद सबरोज का घर धराशायी, बुलडोजर एक्शन जारी

बलरामपुर  उत्तर प्रदेश में आजकल धर्मांतरण के मामले लागातार सामने आ रहे हैं. यह मुद्दा गरमाता जा रहा है. छांगुर बाबा सिंडिकेट का भांडा फूटने के बाद आगरा, अलीगढ़ समेत अब सुल्तानपुर में धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया. प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार सख्ती से कार्रवाई कर रहा है. अब बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के भतीजे पर बुलडोजर एक्शन का कहर बरपा है. जेल में बंद सबरोज का घर आज बुलडोजर से ढहा दिया गया. बताया जा रहा है कि गांव की जमीन पर अवैध कब्जा कर घर बनाया गया था. इसलिए ये कार्रवाई हुई है. इससे पहले छांगुर की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चल चुका है. सबरोज का मकान छांगुर की कोठी से 1 किमी दूर रेहरा माफी गांव में ही बना हुआ था. सबरोज एटीएस की गिरफ्त में हैं. छांगुर के बाद एटीएस ने 19 जुलाई को उसे गिरफ्तार किया था. सबसे पहले सबरोज के घर उतरौला कोतवाली की फोर्स यानी 30 पुलिसकर्मी, सीओ राघवेंद्र सिंह और एएसपी विशाल पांडेय पहुंचे. वहां सुरक्षा व्यवस्था देखी. इसके बाद एसडीएम सत्यपाल प्रजापति पहुंचे. फिर सुबह 11 बजे टीम उतरौला तहसील की टीम दो बुलडोजर लेकर पहुंची. दो बुलडोजर ने 7 मिनट में छत ढहाई और 10 मिनट में दीवारें गिरा दी. इसके बाद पिलर खोद दिए. कुल 20-25 मिनट में पूरे घर को जमींदोज कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान कुछ लोग मौजूद थे. मगर, जैसे ही कार्रवाई पूरी तो सब गायब हो गए. वहीं, प्रशासन ने कहा कि सबरोज को 3 बार नोटिस दिया जा चुका था. आखिरी नोटिस 18 जुलाई को दिया गया था. सबरोज का यह घर गौडास बुजुर्ग क्षेत्र के ग्राम रेहरा माफी में बना हुआ है. प्रशासन का कहना है कि यह आवास अवैध कब्जा करके बनाया गया था. लगभग 300 स्क्वायर फीट में बना हुआ था. इसमें एक किचन, एक कमरा और एक बरामदा बना हुआ था. बता दें, सबरोज की पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं. बड़ा बेटा 10 साल और छोटा 6 साल का है. आसपास के लोगों ने बताया कि ​सबरोज की पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई है.