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नेशनल हाईवे के अवैध ढाबों-होटलों पर सख्त कार्रवाई, सरकार का बड़ा फैसला

पटना पूरे बिहार में अब प्रशासन का पंजा एक बार फिर चलने वाला है। इस बार सरकार ने नेशनल हाइवे के किनारे अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने का फैसला ले लिया है। जिसके बाद अब आने वाले दिनों में राज्य में एनएच किनारे बुलडोजर गरजते नजर आएंगे। सरकार के फैसले के तहत एनएच किनारे (राइट ऑफ वे) अनधिकृत ढाबा, होटल एवं अन्य व्यावसायिक संरचनाएं हटाए जाएंगे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने 20 दिनों के अंदर अवैध ढाबे और संरचना हटाने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट हाइवे सेफ्टी टास्क फोर्स की ओर से इन अवैध संरचनाओं को हटाया जाएगा। इसके साथ ही एनएच के राइट ऑफ वे क्षेत्र में किसी भी नए ढाबा, होटल अथवा व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। किसी भी नई संरचना के निर्माण से पूर्व संबंधित विभाग- एनएचएआई, एनएच अथवा पथ निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् की बैठक में यह निर्णय लिया। मुख्य सचिव ने एनएच किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये। बैठक में निर्णय लिया गया कि अवैध संरचनाओं को हटाने के साथ अवैध पार्किंग को लेकर भी राज्यभर में व्यापक अभियान चलेगा। बैठक में संबंधित विभागों यथा परिवहन विभाग, पथ निर्माण, एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के पदाधिकारी शामिल हुए। गौर हो कि नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी एवं तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण एवं अनधिकृत पार्किंग के कारण हुई भीषण सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इन घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी किये थे। इसी के अनुपालन मेंकार्रवाई की जा रही है। वाहनों की पार्किंग निर्धारित जगह पर ही बैठक में बताया गया कि बिहार सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में भारी एवं व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। अब वाहनों की पार्किंग केवल निर्धारित जगह पर ही की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों एवं संचालकों पर जुर्माना एवं अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। होटल-प्रतिष्ठानों को अपना पहुंच पथ बनाना होगा वैसे ढाबा, होटल एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिनका प्रवेश सीधे राष्ट्रीय उच्च पथ से है, उन्हें स्वयं वैकल्पिक पहुंच पथ का निर्माण करते हुए प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था करनी होगी। अन्यथा संबंधित अधिनियम कंट्रोल ऑफ नेशनल हाइवे एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र के बाहर, किन्तु हाइवे सेफ्टी जोन (आवासीय क्षेत्र हेतु 40 मीटर एवं व्यावसायिक क्षेत्र के लिए 75 मीटर) के भीतर स्थित संरचनाओं को भी संबंधित विभाग से विधिवत अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

गोमती नगर एक्सटेंशन केस में बड़ी कार्रवाई, होटल-सैलून और संपत्ति पहले ही सीज

गोमती नगर लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह सुसाइड केस में प्रशासन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी बिजनेसमैन शरद सिंह के अपार्टमेंट पर बुलडोजर चलाया। अपार्टमेंट में हुए अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया। इससे पहले प्रशासन शरद सिंह के होटल, सैलून और तीन कारों को भी सीज कर चुका है। मामले में लगातार हो रही कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। सुसाइड से पहले रोते हुए वीडियो बनाया था गोरखपुर निवासी रत्ना सिंह ने 12 मई को गोमतीनगर विस्तार स्थित शालीमार विस्टा अपार्टमेंट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उसने एक वीडियो बनाया था, जिसमें बिजनेसमैन शरद सिंह, उसकी पत्नी पल्लवी सिंह, मंगल यादव, वैशाली और प्रशांत शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। रत्ना ने वीडियो में कहा था कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसकी वजह से वह यह कदम उठाने को मजबूर हो रही है। पुलिस अभी तक एक आरोपी को दबोचा रत्ना के पिता सुधीर सिंह की शिकायत पर गोमतीनगर विस्तार थाने में पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने सिर्फ एक आरोपी मंगलनाथ यादव को गिरफ्तार किया, जो शरद सिंह के होटल में काम करता था। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीएम योगी से मिले थे पीड़िता के पिता 15 मई को रत्ना के पिता ने सीएम योगीसे मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद 16 मई को उन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी अपने रसूख का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बच रहा है और पुलिस कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया और उनकी गिरफ्तारी के लिए छह टीमें गठित की गईं। लखनऊ समेत कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।

बंगाल में बुलडोजर एक्शन तेज, हावड़ा स्टेशन के बाहर अवैध दुकानों पर चला प्रशासन का डंडा

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही प्रशासन एक्शन मोड में है. शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन के बाहर गंगा घाट और बस स्टैंड के पास अवैध रूप से बनी दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. इस बीच बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने साफ कर दिया है कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मीडिया  को दिए इंटरव्यू में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे इस अभियान को लेकर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बुलडोजर अब पूरे देश में चलेगा. जहां कहीं भी अवैध निर्माण होगा, वहां बुलडोजर तैनात किया जाएगा.' उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में जो नई सरकार सत्ता में आई है, उसने पहले ही दिन से इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है. 'किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं ' मंत्री ने अवैध काम करने वालों को चेतावनी और सलाह देते हुए कहा, 'मैं उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल हैं, वो कानून के दायरे में रहकर अपना काम करें. अगर वो ऐसा करते हैं, तो सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी. हम सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.' टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज हुई FIR को लेकर दिलीप घोष ने कहा, 'ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और उनके नेताओं ने हमेशा तानाशाही रवैया अपनाया है. उस समय लोग सिर्फ डर की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करवा पाते थे.' दिलीप घोष ने आगे कहा कि अब हालात बदल चुके हैं. लोग अब शिकायत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पुलिस भी उन शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार बैठी है. इसलिए अब पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा. हावड़ा स्टेशन के बाहर भारी सुरक्षा में चला बुलडोजर बता दें कि शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन पर सालों से फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा जमाकर चल रही दुकानों को हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया. ये पूरा क्षेत्र रेलवे परिसर के अधीन आता है, इसलिए कार्रवाई के दौरान IOW विभाग, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और हावड़ा सिटी पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर तैनात रहे. अवैध मदरसों पर भी होगी सख्त कार्रवाई अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदिराम टुडू ने भी अवैध धार्मिक और शैक्षणिक निर्माणों को लेकर सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में जितने भी मदरसे अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं, उन सभी को खत्म किया जाएगा. इसके साथ ही, जो लोग भी ऐसे अवैध मदरसों को संचालित कर रहे थे, उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी.

हाई कोर्ट आदेश पर विवाद: 72 की जगह 240 वकील चैंबर तोड़े जाने का आरोप

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. यहां सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चला दिया गया. दूसरी तरफ इस दौरान वकील विरोध में खड़े थे. वकीलों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. यहां नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची थी और कई चैंबरों को हटाना शुरू कर दिया. मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों का है. सुबह नगर निगम और पुलिस की टीम अचानक मौके पर पहुंची. कुछ ही देर में बुलडोजर ने सड़क किनारे बने चैंबरों को तोड़ना शुरू कर दिया. प्रशासन का कहना था कि ये निर्माण अवैध थे और अतिक्रमण हटाने के तहत कार्रवाई की जा रही है. लेकिन जैसे-जैसे बुलडोजर आगे बढ़ा, विरोध भी तेज हो गया. मौके पर पहुंचे वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल किया. अधिवक्ताओं का कहना है कि अदालत ने केवल 72 चैंबर हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन नगर निगम और पुलिस ने उसी आदेश की आड़ में करीब 240 चैंबर गिरा दिए. पुराने हाई कोर्ट परिसर के बाहर वर्षों से वकीलों के छोटे-छोटे चेंबर बने हुए थे. इन्हीं में बैठकर अधिवक्ता अपने मुवक्किलों से मिलते और केस से जुड़ा कामकाज करते थे. वकीलों का कहना है कि अचानक कार्रवाई से उनके काम पर असर पड़ा है. बुलडोजर चलने के दौरान कई वकील विरोध जताने लगे, नारेबाजी हुई, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण बन गया. हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया. नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और अवैध कब्जा हटाना जरूरी था. लेकिन अधिवक्ताओं का सवाल है कि अगर कोर्ट ने 72 चैंबर हटाने को कहा था, तो उससे तीन गुना ज्यादा ढांचे क्यों गिराए गए? लखनऊ में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई जगह बुलडोजर अभियान चल रहा है. फिलहाल कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. अधिवक्ताओं ने कहा है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ आगे भी आवाज उठाएंगे. दूसरी तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही बता रहा है. इस कार्रवाई के बाद कोर्ट परिसर के आसपास माहौल तनावपूर्ण बना रहा. वकीलों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा. पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात रखा.

सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ा अभियान, जामा मस्जिद के आसपास दुकानों पर चला बुलडोजर

चंदौली  चंदौली जिले के प्रमुख शहर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए पूरे दिन कार्रवाई चलाई गई. इस दौरान बुलडोजर से सड़क किनारे बने अतिक्रमणों पर एक्शन लिया गया, जो दुकानों, मकानों और एक कॉलेज के कुछ हिस्सों के रूप में मौजूद थे. इसके साथ ही शहर के मध्य में सड़क किनारे स्थित जामा मस्जिद के कुछ हिस्सों को भी खाली कराया गया. इस कार्रवाई के दौरान मस्जिद के नीचे वाले हिस्से में बनी दुकानों पर बुलडोजर से एक्शन लिया गया, जबकि मस्जिद के ऊपरी हिस्से में स्थित बाउंड्री वॉल और छोटे गुंबदों को मस्जिद कमेटी के लोगों ने खुद ही तोड़ दिया.प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की मुख्य सड़क के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क के किनारे लोगों ने PWD की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना लिए थे. साथ ही शहर की प्रमुख जामा मस्जिद का भी कुछ हिस्सा अवैध रूप से बना लिया गया था, जिससे सड़क चौड़ीकरण के काम में बाधा हो रही थी. इस कार्रवाई के अंतिम चरण में जब प्रशासन की टीम जामा मस्जिद के पास पहुंची तो मस्जिद के सामने बनी दुकानों पर बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया. वहीं मस्जिद के ऊपरी तल पर स्थित बाउंड्री वॉल और गुंबदों को मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया. बता दें कि इस मस्जिद के सड़क की ओर वाले हिस्से में ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें बनी हुई हैं, जबकि ऊपरी तल पर मस्जिद का हिस्सा है. देखें VIDEO:- प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आज के एक्शन में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए हैं और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. SDM डीडीयू नगर चंदौली अनुपम मिश्रा ने ने बताया, ''मुगलसराय रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है. इस दौरान PWD के एक्सईएन, नगर पालिका के एसडीएम, बिजली विभाग के एसडीओ और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा. मैं और सीओ साहब यहां शांति व्यवस्था बनाए रख रहे हैं. इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा स्ट्रक्चर हटाए गए हैं. कुछ लोग खुद भी अपने अतिक्रमण तोड़ रहे हैं और व्यापारियों का भी सहयोग मिल रहा है. हमने सुभाष पार्क से लेकर लेफ्ट साइड की कार्रवाई की है और रेलवे स्टेशन तक जाएंगे. अभी हम मस्जिद और रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे हैं. शुक्रवार और शनिवार को भी यह कार्रवाई जारी रहेगी.''

सम्राट चौधरी का अल्टीमेटम, अवैध कब्जों पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू

मुंगेर  बिहार में अब योगी मॉडल की तर्ज पर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम दे दिया है। आज रविवार को तारापुर पहुंचे सीएम सम्राट चौधरी ने साफ लफ्जों में कहा कि बिहार में अब कानून का राज चलेगा। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ 'बुलडोजर' कार्रवाई की जाएगी। तारापुर में मेरे घर पर भी प्रशासन कार्रवाई कर रहा: सम्राट चौधरी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी का भी घर क्यों न हो। उन्होंने यह भी बताया कि तारापुर में उनके अपने घर पर भी प्रशासन की कार्रवाई हो रही है। कानून सभी के लिए समान है। इससे कोई नहीं बचेगा। तारापुर में सम्राट चौधरी ने सुनी पीएम मोदी के 'मन की बात' सम्राट चौधरी अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना। यहां पर लोगों को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है, जो उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला है। और वे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए आए हैं। नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार को सजाने और विकास करने का काम किया। अब उसी कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। फाइल लटकाई तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई: सम्राट चौधरी उन्होंने अधिकारियों को सख्ती के संकेत देते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ब्लॉक और अंचल स्तर तक मॉनिटरिंग की जाएगी। अगर कोई पदाधिकारी एक महीने से अधिक किसी फाइल को लंबित रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फाइल लटकाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं: CM मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। उन्होंने हर घर तक एक किलोवाट सोलर बिजली पहुंचाने की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में लोगों को बिजली के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  

अवैध निर्माण पर कड़ा वार: Punjab में कॉलोनियों पर चला बुलडोज़र, प्रशासन अलर्ट

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की गाइडलाइन और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद, PAPRA एक्ट 1995 के तहत समय-समय पर अनधिकृत कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए और उन्हें समय-समय पर डिमोलिश किया गया। आज एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट रूपिंदर कौर की देखरेख में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर रितेश गोयनका, असिस्टेंट टाउन प्लानर पुनीत डिगरा, असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रभजोत सिंह और जिला प्रशासन/रेगुलेटरी टीम की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव राजूवाल में PAPRA एक्ट 1995 का उल्लंघन करके बनाई गई अनधिकृत कॉलोनी को डिमोलिश किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाले डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए, गांव राजूवाल में बनी अनधिकृत कॉलोनियों को PAPRA एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के मालिक सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज़ करके सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि PAPRA एक्ट-1995 के अमेंडमेंट 2024 के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की जेल और 25 लाख से 5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेगुलेटरी विंग समय-समय पर गुरदासपुर जिले में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन की जांच कर रहा है। इसके साथ ही काम रोकने के लिए संबंधित एक्ट के तहत नोटिस जारी कर रहा है और संबंधित पुलिस स्टेशन अफसर को आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए कह रहा है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी गैर-कानूनी कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें जो सरकार से मंजूर न हों और किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लें ताकि प्रॉपर्टी को नुकसान न हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा उन्होंने कहा कि PUDA एरिया में 19 मार्च 2018 से पहले जो भी अनधिकृत कॉलोनियां अप्लाई की गई हैं, वे कॉलोनाइजर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करके तुरंत अपनी कॉलोनियों को रेगुलर करवा लें, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कॉलोनाइजर/प्रमोटर डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना कोई कंस्ट्रक्शन करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

संभल में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह पर चला बुलडोजर, जमींदोज किया गया

 संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. सदर कोतवाली क्षेत्र के बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को ध्वस्त करने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची. इस दौरान बुलडोजर से अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।  यह कार्रवाई एसडीएम निधि पटेल के नेतृत्व में की गई, जिसमें नायब तहसीलदार दीपक जुरैल और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी शामिल रहे. मौके पर किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सदर कोतवाली पुलिस के साथ-साथ आरआरएफ और पीएसी के जवान भी तैनात रहे, जिससे पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।  प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 1240 की 168 वर्गमीटर जमीन, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, उस पर इमामबाड़ा बनाकर अवैध कब्जा किया गया था. वहीं गाटा संख्या 1242 की 87 वर्गमीटर भूमि, जो पशुचर के लिए आरक्षित है, उस पर ईदगाह का निर्माण कर लिया गया था।  इस मामले की शुरुआत जनवरी महीने में हुई थी, जब लेखपालों की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की थी. 14 जनवरी को जांच रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध कब्जे की पुष्टि हुई. इसके बाद 18 जनवरी को धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।  कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 जनवरी को तहसीलदार कोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया. उसी आदेश के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।  अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।   

बड़े तालाब के पास रसूखदारों के 347 अवैध बंगलों पर शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई

 भोपाल भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील शहर की पहचान है लेकिन भीड़ भाड़ और अवैध निर्माण ने यहां घूमने आने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. क्योंकि बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है. 6 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 21 अप्रैल तक चलेगा. कुल 15 दिनों तक चलने वाली इस कार्रवाई में जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं।  पहले दिन भदभदा में चला ‘पीला पंजा’अभियान के पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. यहां 9 दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और पीछे नहीं हटेगी।  भोज वेटलैंड रूल्स के बाद सख्ती प्रशासन का कहना है कि 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसी नियम के तहत सभी निर्माण हटाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई तालाब की पारिस्थितिकी, जलस्तर और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।  राजा भोज ने कराया था झील का निर्माण भोपाल की बड़ी झील को भोजताल या अपर लेक भी कहा जाता है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा निर्मित भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है. यह आज भोपाल शहर की पहचान भी है. यह शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और 2002 में इसे 'रामसर साइट' का दर्जा मिला. यहां बोट क्लब, खूबसूरत व्यू और वॉटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।  ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा  

बुलडोजर कार्रवाई से उजड़े 10 परिवार, विरोध में रातू रोड पर चक्का जाम

रांची राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बने मकानों को तोड़े जाने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में आक्रोश है और लोग सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के पीछे स्थित खादगढ़ा, महुआ टोली और जयप्रकाश नगर इलाके में मंगलवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 27 कट्ठा सरकारी जमीन पर बने लगभग 10 मकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी थी और उस पर अवैध कब्जा किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई। अचानक घर टूटने से लोग बेघर हो गए कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में नाराजगी फैल गई। लोगों का आरोप है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। कई परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे और अचानक घर टूटने से वे बेघर हो गए हैं। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि साल 2020 में करीब 48 डिसमिल जमीन एक आदिवासी रैयत से खरीदी गई थी और इसके बदले करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए थे। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री आपसी सहमति से हुई थी और वे कानूनी रूप से वहां रह रहे थे। हालांकि बाद में जमीन के मूल मालिक ने मामला दर्ज कराया और अदालत से दखल-दिहानी का आदेश ले लिया। रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया बुधवार को बड़ी संख्या में लोग विरोध में सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने रातू रोड कब्रिस्तान के पास टायर जलाकर सड़क जाम कर दी। इससे रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। खबर लिखे जाने तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता जारी थी। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई पर रोक, मामले की दोबारा जांच, मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन के लेन-देन में कोई विवाद था तो इसकी सजा आम लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारियों ने लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।