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विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग से हटाया गया अतिक्रमण, 2 मंजिला होटल ध्वस्त

चित्तौड़गढ़ विश्व विरासत में शुमार ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर प्रशासन का बुलडोजर चला. फोर्ट के भीतर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने यह कार्रवाई की. यहां पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध 2 मंजिला होटल बनाया जा रहा था. प्रशासन रविवार (14 जून) अलसुबह भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण को ढहा दिया. सुबह ठीक 4 बजे, जब पूरा शहरवासी गहरी नींद में थे, तब प्रशासनिक अमला अपने दुर्ग पर पहुंचा. अवैध रूप से बन रही इमारत को जमींदोज करने के लिए 10 जेसीबी, 8 ट्रेक्टर, 3 ब्रेकर मशीनों की मदद ली गई. सुरक्षा के लिहाज से दुर्ग की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया. चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. शहर कोतवाली में नामजद मामला भी दर्ज पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठक में प्लानिंग बनाई गई और आज सुबह एक्शन लिया गया. जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. कलक्टर के आदेश के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में एक नामजद मामला भी दर्ज हुआ. पुरातत्व विभाग की जमीन पर पहली बार ऐसी कार्रवाई पुरातत्व विभाग के अधिकारी मनोज द्विवेदी ने बताया कि हमारे संरक्षित क्षेत्र में यह अवैध निर्माण किया गया था. अवैध निर्माण हटाने को लेकर पहले नोटिस भी दिया गया था. जिला प्रशासन के सहयोग से पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण होटल को हटा दिया गया है. राजस्थान में यह अपने आप में पहली ऐसी बड़ी कार्रवाई है, जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है. अगर ऐसी कार्रवाई होती रही, तो हमारी राष्ट्रीय धरोहरें हमेशा सुरक्षित रहेंगी. 8 से 10 रेस्टोरेंट पर चल सकता है बुलडोजर प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र के आसपास हलचल तेज हो गई है. साल 2020 के बाद से चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर करीब 8 से 10 अवैध रेस्टोरेंट और होटलों का निर्माण हुआ है. इन सभी पर कार्रवाई के लिए दिल्ली स्थित आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को पत्र लिखा जा चुका है. जैसे ही वहां से उच्च स्तरीय स्वीकृति मिलेगी, दुर्ग पर बने अन्य अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है.

दालमंडी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासनिक कार्रवाई पर ब्रेक

वाराणसी  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है. अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अस्थायी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना को लेकर चिंतित थे।  याचिकाकर्ता ने नोटिस को दी थी चुनौती यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि कार्रवाई में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हैं और बिना उचित सुनवाई के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।  हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें पेश करने का अवसर दिया है. यह मामला दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम ने उनके मकान को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है, जबकि उनकी आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही विधिवत तामील किया गया है. ऐसे में मकान गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती।  मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को संयुक्त समिति गठित कर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने और उनके पक्ष पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बाद में जारी नोटिस में कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भवन को जर्जर पाया गया है और उसे ध्वस्त किया जाना आवश्यक है।  याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता काज़ी मुहम्मद अकरम एवं उनकी टीम ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई असंवैधानिक एवं अवैध होगी. पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया।  20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति प्रदान की गई है।  खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए. साथ ही 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।  हाईकोर्ट के इस आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में आने वाले प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।   

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खादर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली  यमुना नदी के खादर क्षेत्र में बसी अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के संरक्षित ओ-जोन इलाके से अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद डीडीए अवैध निर्माणों और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर सकती है। क्या है दिल्ली का O-Zone ? दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को O-Zone घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी का यह इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां आवासीय निर्माण और स्थायी मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। क्यों चर्चा में है O-Zone? डीडीए के अनुसार, पिछले कई सालों में यमुना के खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियां और कालोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें से कई जगहों पर सीवर और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है, जिसके कारण गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंचता है। इससे नदीं प्रदूषित होती और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद डीडीए इसी ओ-जोन इलाके को मूल अवस्था में लाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू कर रहा है। दिल्ली के O-Zone में कौन से इलाके? DDA के रिकॉर्ड के मुताबिक, यमुना फ्लडप्लेन के भीतर करीब 90 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई अन्य इलाके शामिल बताए जाते हैं। बता दें ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। बल्कि केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।     मदनपुर खादर     जैतपुर     मीठापुर     झंगोला     सोनिया विहार के कुछ हिस्से     खजूरी खास     करावल नगर के कुछ हिस्से     जगतपुर     बुराड़ी के यमुना किनारे वाले क्षेत्र     उस्मानपुर     गढ़ी मांडू     शेरपुर     बेहटा हाजीपुर     ताजपुर खुर्द     छिल्ला गांव क्षेत्र     कोंडली के कुछ हिस्से     मयूर विहार के यमुना किनारे स्थित क्षेत्र     ओखला बैराज के आसपास के इलाके     आईटीओ बैराज के आसपास का फ्लडप्लेन क्षेत्र  

कब्रिस्तान भूमि पर कब्जे का मामला, प्रशासन ने ध्वस्त की मस्जिद

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने शनिवार को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को ध्वस्त करना शुरू कर दिया. प्रशासन की मौजूदगी में दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से कई घंटे तक कार्रवाई चली. संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई. कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से "आई लव मोहम्मद" लिखे पोस्टर और हरे रंग का एक झंडा मिलने का दावा भी सामने आया है. पुलिस ने इन सामग्रियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बरामद पोस्टरों और झंडे के संबंध में जांच की जा रही है तथा यह पता लगाया जाएगा कि इन्हें वहां किसने रखा था और उनका उद्देश्य क्या था. उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 409 की भूमि कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी. जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान यहां मस्जिद निर्माण और कब्जे का मामला सामने आया था. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया. सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति को अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके. संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की गई, लेकिन अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कब्रिस्तान के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग के बाद अभिलेखों की जांच की गई थी, जिसमें आरक्षित भूमि पर निर्माण का मामला सामने आया. प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि को ग्राम सभा के माध्यम से कब्रिस्तान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. फिलहाल इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है.

नमो घाट के पास मॉडल स्टेशन प्रोजेक्ट का रास्ता साफ, हटाए गए अवैध कब्जे

वाराणसी वाराणसी में नमो घाट के पास बनने वाले मॉडल स्टेशन के लिए देर रात कब्रिस्तान और अवैध मस्जिद पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया। आदमपुर थाना क्षेत्र के किला कोहना (भदऊं चुंगी) पर स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद मलबा भी रात में ही हटा दिया गया। मस्जिद के पास के कब्रिस्तान से जुड़ी भूमि से भी अवैध कब्जे हटा दिए गए। इस दौरान भारी पुलिस बल के साथ जिला प्रशासन और रेलवे की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं। कार्रवाई के दौरान कई थानों की पुलिस भारी संख्या में अर्धसैनिक बल और पीएसी के जवानों को भी बुला लिया गया था। हालांकि किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। उत्तर रेलवे की निर्माण परियोजनाओं से संबंधित इस भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में रिट दायर की गई थी। रेलवे के पक्ष में फैसला आने के बाद कार्रवाई की गई। बता दें कि काशी रेलवे स्टेशन के जीर्णोद्धार और विस्तार के तहत स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 47.26 एकड़ में निर्माण कार्य प्रस्तावित है। धार्मिक स्थल की भूमि को लेकर रेलवे और स्थानीय पक्षों में विवाद था। वाराणसी में बीती रात 200 साल पुरानी "अजगैब मस्जिद" बुलडोजरों से ढहा दी गयी. 2024 में हुई पैमाइश में यह खुलासा हुआ कि यह मस्जिद रेलवे और कब्रिस्तान की जमीन पर बनी है. नोटिस देने के बाद भी मस्जिद नही हटाई गयी. अब प्रशासन ने कई बुलडोजर लेकर मस्जिद जमीदोज कर दी है. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मंगलवार रात संयुक्त टीम भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची। एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर, एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और इंस्पेक्टर आदमपुर विमल मिश्रा के नेतृत्व में सुरक्षाबलों ने इलाके को घेरे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति नहीं बनी। नमो घाट के पास काशी स्टेशन पर होंगी कई सुविधाएं वाराणसी में नमो घाट के ठीक ऊपर स्थित काशी स्टेशन पर कई सुविधाएं विकसित होने जा रही हैं। यहां प्रस्तावित एयर कॉनकोर्स (गलियारा) दोनों भवनों को जोड़ेगा। लगभग 200 मीटर लम्बा और 100 मीटर लम्बा वातानुकूलित कॉनकोर्स न सिर्फ यात्रियों के लिए पैदल पारपथ (एफओबी) होगा, बल्कि इसमें बैठने की सुविधा होगी। वेटिंग हॉल और लाउंज होंगे। खरीदारी के लिए फूड और मल्टीपरपज स्टॉल भी बनेंगे। प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर चढ़ने और उतरने के लिए सीढ़ियां और एस्केलेटर लगाए जाएंगे। काशी स्टेशन का तकरीबन 350 करोड़ से मेजर अपग्रेडेशन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत स्टेशन के दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन मंजिला बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है। अपग्रेडेशन होने के बाद राजघाट साइड में काशी स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार हो जाएगा, जबकि वर्तमान प्रवेश द्वार सेकेंड एंट्री (द्वितीय प्रवेश द्वार) हो जाएगा। इसके अलावा टिकट घर, रिजर्वेशन काउंटर, पार्किंग, अत्याधुनिक टॉयलेट, वेटिंग हॉल समेत कई अन्य सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। भविष्य में काशी स्टेशन की यार्ड रीमॉडलिंग की भी योजना है। इसके तहत पटरियों और प्लेटफॉर्मों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान प्लेटफॉर्मों की लम्बाई भी बढ़ेगी। फिलहाल काशी स्टेशन पर दोनों तरफ के भवनों को जोड़ने के लिए एयर कॉनकोर्स बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए ट्रैफिक ब्लॉक लेने समेत अन्य बिंदुओं पर प्रस्ताव बन रहा है। लखनऊ जंक्शन (चारबाग) के बाद उत्तर रेलवे (लखनऊ मंडल) का यह दूसरा कॉनकोर्स होगा। यह भवनों की दूसरी मंजिल से जुड़ेगा। यह चौड़े पुल या छत की तरह प्लेटफॉर्म से काफी ऊंचाई पर स्थित होगा। उत्तर रेलवे के एडीआरएम बृजेश कुमार यादव के अनुसार काशी स्टेशन पर मेजर अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के तहत नए भवनों और एयर कॉनकोर्स के निर्माण समेत कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मार्च 2027 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य है।

पंजाब में नशे के खिलाफ सख्ती, बठिंडा में तस्कर की अवैध संपत्ति ध्वस्त

बठिंडा. पंजाब सरकार के युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान के तहत जिला प्रशासन और बठिंडा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नशा तस्करी के मामलों में नामजद आरोपित की अवैध रूप से निर्मित इमारत को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कच्चा धोबियाना निवासी गुरमन सिंह ने अवैध तरीके से इमारत का निर्माण किया था। संबंधित व्यक्ति को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन निर्धारित समय में कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के आदेशों पर कार्रवाई करते हुए इमारत को ढहा दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। पंजाब सरकार के निर्देशों के अनुसार नशा तस्करों और संगीन अपराधों में शामिल आरोपितों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने दावा किया कि बठिंडा पुलिस के सहयोग से अब तक जिले में 14 अवैध इमारतों को ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं, एक मार्च 2025 से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 2564 मामले दर्ज कर 3628 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 96 बड़े नशा तस्कर भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक 87 आरोपियों की करीब 14.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति फ्रीज करवाई जा चुकी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशा तस्करी की सूचना पुलिस या एंटी ड्रग हेल्पलाइन पर दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

नेशनल हाईवे के अवैध ढाबों-होटलों पर सख्त कार्रवाई, सरकार का बड़ा फैसला

पटना पूरे बिहार में अब प्रशासन का पंजा एक बार फिर चलने वाला है। इस बार सरकार ने नेशनल हाइवे के किनारे अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने का फैसला ले लिया है। जिसके बाद अब आने वाले दिनों में राज्य में एनएच किनारे बुलडोजर गरजते नजर आएंगे। सरकार के फैसले के तहत एनएच किनारे (राइट ऑफ वे) अनधिकृत ढाबा, होटल एवं अन्य व्यावसायिक संरचनाएं हटाए जाएंगे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने 20 दिनों के अंदर अवैध ढाबे और संरचना हटाने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट हाइवे सेफ्टी टास्क फोर्स की ओर से इन अवैध संरचनाओं को हटाया जाएगा। इसके साथ ही एनएच के राइट ऑफ वे क्षेत्र में किसी भी नए ढाबा, होटल अथवा व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। किसी भी नई संरचना के निर्माण से पूर्व संबंधित विभाग- एनएचएआई, एनएच अथवा पथ निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् की बैठक में यह निर्णय लिया। मुख्य सचिव ने एनएच किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये। बैठक में निर्णय लिया गया कि अवैध संरचनाओं को हटाने के साथ अवैध पार्किंग को लेकर भी राज्यभर में व्यापक अभियान चलेगा। बैठक में संबंधित विभागों यथा परिवहन विभाग, पथ निर्माण, एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के पदाधिकारी शामिल हुए। गौर हो कि नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी एवं तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण एवं अनधिकृत पार्किंग के कारण हुई भीषण सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इन घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी किये थे। इसी के अनुपालन मेंकार्रवाई की जा रही है। वाहनों की पार्किंग निर्धारित जगह पर ही बैठक में बताया गया कि बिहार सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में भारी एवं व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। अब वाहनों की पार्किंग केवल निर्धारित जगह पर ही की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों एवं संचालकों पर जुर्माना एवं अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। होटल-प्रतिष्ठानों को अपना पहुंच पथ बनाना होगा वैसे ढाबा, होटल एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिनका प्रवेश सीधे राष्ट्रीय उच्च पथ से है, उन्हें स्वयं वैकल्पिक पहुंच पथ का निर्माण करते हुए प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था करनी होगी। अन्यथा संबंधित अधिनियम कंट्रोल ऑफ नेशनल हाइवे एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र के बाहर, किन्तु हाइवे सेफ्टी जोन (आवासीय क्षेत्र हेतु 40 मीटर एवं व्यावसायिक क्षेत्र के लिए 75 मीटर) के भीतर स्थित संरचनाओं को भी संबंधित विभाग से विधिवत अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

गोमती नगर एक्सटेंशन केस में बड़ी कार्रवाई, होटल-सैलून और संपत्ति पहले ही सीज

गोमती नगर लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह सुसाइड केस में प्रशासन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी बिजनेसमैन शरद सिंह के अपार्टमेंट पर बुलडोजर चलाया। अपार्टमेंट में हुए अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया। इससे पहले प्रशासन शरद सिंह के होटल, सैलून और तीन कारों को भी सीज कर चुका है। मामले में लगातार हो रही कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। सुसाइड से पहले रोते हुए वीडियो बनाया था गोरखपुर निवासी रत्ना सिंह ने 12 मई को गोमतीनगर विस्तार स्थित शालीमार विस्टा अपार्टमेंट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उसने एक वीडियो बनाया था, जिसमें बिजनेसमैन शरद सिंह, उसकी पत्नी पल्लवी सिंह, मंगल यादव, वैशाली और प्रशांत शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। रत्ना ने वीडियो में कहा था कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसकी वजह से वह यह कदम उठाने को मजबूर हो रही है। पुलिस अभी तक एक आरोपी को दबोचा रत्ना के पिता सुधीर सिंह की शिकायत पर गोमतीनगर विस्तार थाने में पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने सिर्फ एक आरोपी मंगलनाथ यादव को गिरफ्तार किया, जो शरद सिंह के होटल में काम करता था। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीएम योगी से मिले थे पीड़िता के पिता 15 मई को रत्ना के पिता ने सीएम योगीसे मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद 16 मई को उन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी अपने रसूख का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बच रहा है और पुलिस कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया और उनकी गिरफ्तारी के लिए छह टीमें गठित की गईं। लखनऊ समेत कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।

बंगाल में बुलडोजर एक्शन तेज, हावड़ा स्टेशन के बाहर अवैध दुकानों पर चला प्रशासन का डंडा

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही प्रशासन एक्शन मोड में है. शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन के बाहर गंगा घाट और बस स्टैंड के पास अवैध रूप से बनी दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. इस बीच बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने साफ कर दिया है कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मीडिया  को दिए इंटरव्यू में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे इस अभियान को लेकर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बुलडोजर अब पूरे देश में चलेगा. जहां कहीं भी अवैध निर्माण होगा, वहां बुलडोजर तैनात किया जाएगा.' उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में जो नई सरकार सत्ता में आई है, उसने पहले ही दिन से इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है. 'किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं ' मंत्री ने अवैध काम करने वालों को चेतावनी और सलाह देते हुए कहा, 'मैं उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल हैं, वो कानून के दायरे में रहकर अपना काम करें. अगर वो ऐसा करते हैं, तो सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी. हम सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.' टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज हुई FIR को लेकर दिलीप घोष ने कहा, 'ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और उनके नेताओं ने हमेशा तानाशाही रवैया अपनाया है. उस समय लोग सिर्फ डर की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करवा पाते थे.' दिलीप घोष ने आगे कहा कि अब हालात बदल चुके हैं. लोग अब शिकायत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पुलिस भी उन शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार बैठी है. इसलिए अब पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा. हावड़ा स्टेशन के बाहर भारी सुरक्षा में चला बुलडोजर बता दें कि शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन पर सालों से फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा जमाकर चल रही दुकानों को हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया. ये पूरा क्षेत्र रेलवे परिसर के अधीन आता है, इसलिए कार्रवाई के दौरान IOW विभाग, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और हावड़ा सिटी पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर तैनात रहे. अवैध मदरसों पर भी होगी सख्त कार्रवाई अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदिराम टुडू ने भी अवैध धार्मिक और शैक्षणिक निर्माणों को लेकर सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में जितने भी मदरसे अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं, उन सभी को खत्म किया जाएगा. इसके साथ ही, जो लोग भी ऐसे अवैध मदरसों को संचालित कर रहे थे, उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी.

हाई कोर्ट आदेश पर विवाद: 72 की जगह 240 वकील चैंबर तोड़े जाने का आरोप

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. यहां सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चला दिया गया. दूसरी तरफ इस दौरान वकील विरोध में खड़े थे. वकीलों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. यहां नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची थी और कई चैंबरों को हटाना शुरू कर दिया. मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों का है. सुबह नगर निगम और पुलिस की टीम अचानक मौके पर पहुंची. कुछ ही देर में बुलडोजर ने सड़क किनारे बने चैंबरों को तोड़ना शुरू कर दिया. प्रशासन का कहना था कि ये निर्माण अवैध थे और अतिक्रमण हटाने के तहत कार्रवाई की जा रही है. लेकिन जैसे-जैसे बुलडोजर आगे बढ़ा, विरोध भी तेज हो गया. मौके पर पहुंचे वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल किया. अधिवक्ताओं का कहना है कि अदालत ने केवल 72 चैंबर हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन नगर निगम और पुलिस ने उसी आदेश की आड़ में करीब 240 चैंबर गिरा दिए. पुराने हाई कोर्ट परिसर के बाहर वर्षों से वकीलों के छोटे-छोटे चेंबर बने हुए थे. इन्हीं में बैठकर अधिवक्ता अपने मुवक्किलों से मिलते और केस से जुड़ा कामकाज करते थे. वकीलों का कहना है कि अचानक कार्रवाई से उनके काम पर असर पड़ा है. बुलडोजर चलने के दौरान कई वकील विरोध जताने लगे, नारेबाजी हुई, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण बन गया. हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया. नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और अवैध कब्जा हटाना जरूरी था. लेकिन अधिवक्ताओं का सवाल है कि अगर कोर्ट ने 72 चैंबर हटाने को कहा था, तो उससे तीन गुना ज्यादा ढांचे क्यों गिराए गए? लखनऊ में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई जगह बुलडोजर अभियान चल रहा है. फिलहाल कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. अधिवक्ताओं ने कहा है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ आगे भी आवाज उठाएंगे. दूसरी तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही बता रहा है. इस कार्रवाई के बाद कोर्ट परिसर के आसपास माहौल तनावपूर्ण बना रहा. वकीलों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा. पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात रखा.