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सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ा अभियान, जामा मस्जिद के आसपास दुकानों पर चला बुलडोजर

चंदौली  चंदौली जिले के प्रमुख शहर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए पूरे दिन कार्रवाई चलाई गई. इस दौरान बुलडोजर से सड़क किनारे बने अतिक्रमणों पर एक्शन लिया गया, जो दुकानों, मकानों और एक कॉलेज के कुछ हिस्सों के रूप में मौजूद थे. इसके साथ ही शहर के मध्य में सड़क किनारे स्थित जामा मस्जिद के कुछ हिस्सों को भी खाली कराया गया. इस कार्रवाई के दौरान मस्जिद के नीचे वाले हिस्से में बनी दुकानों पर बुलडोजर से एक्शन लिया गया, जबकि मस्जिद के ऊपरी हिस्से में स्थित बाउंड्री वॉल और छोटे गुंबदों को मस्जिद कमेटी के लोगों ने खुद ही तोड़ दिया.प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की मुख्य सड़क के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क के किनारे लोगों ने PWD की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना लिए थे. साथ ही शहर की प्रमुख जामा मस्जिद का भी कुछ हिस्सा अवैध रूप से बना लिया गया था, जिससे सड़क चौड़ीकरण के काम में बाधा हो रही थी. इस कार्रवाई के अंतिम चरण में जब प्रशासन की टीम जामा मस्जिद के पास पहुंची तो मस्जिद के सामने बनी दुकानों पर बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया. वहीं मस्जिद के ऊपरी तल पर स्थित बाउंड्री वॉल और गुंबदों को मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया. बता दें कि इस मस्जिद के सड़क की ओर वाले हिस्से में ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें बनी हुई हैं, जबकि ऊपरी तल पर मस्जिद का हिस्सा है. देखें VIDEO:- प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आज के एक्शन में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए हैं और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. SDM डीडीयू नगर चंदौली अनुपम मिश्रा ने ने बताया, ''मुगलसराय रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है. इस दौरान PWD के एक्सईएन, नगर पालिका के एसडीएम, बिजली विभाग के एसडीओ और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा. मैं और सीओ साहब यहां शांति व्यवस्था बनाए रख रहे हैं. इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा स्ट्रक्चर हटाए गए हैं. कुछ लोग खुद भी अपने अतिक्रमण तोड़ रहे हैं और व्यापारियों का भी सहयोग मिल रहा है. हमने सुभाष पार्क से लेकर लेफ्ट साइड की कार्रवाई की है और रेलवे स्टेशन तक जाएंगे. अभी हम मस्जिद और रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे हैं. शुक्रवार और शनिवार को भी यह कार्रवाई जारी रहेगी.''

सम्राट चौधरी का अल्टीमेटम, अवैध कब्जों पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू

मुंगेर  बिहार में अब योगी मॉडल की तर्ज पर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम दे दिया है। आज रविवार को तारापुर पहुंचे सीएम सम्राट चौधरी ने साफ लफ्जों में कहा कि बिहार में अब कानून का राज चलेगा। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ 'बुलडोजर' कार्रवाई की जाएगी। तारापुर में मेरे घर पर भी प्रशासन कार्रवाई कर रहा: सम्राट चौधरी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी का भी घर क्यों न हो। उन्होंने यह भी बताया कि तारापुर में उनके अपने घर पर भी प्रशासन की कार्रवाई हो रही है। कानून सभी के लिए समान है। इससे कोई नहीं बचेगा। तारापुर में सम्राट चौधरी ने सुनी पीएम मोदी के 'मन की बात' सम्राट चौधरी अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना। यहां पर लोगों को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है, जो उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला है। और वे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए आए हैं। नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार को सजाने और विकास करने का काम किया। अब उसी कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। फाइल लटकाई तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई: सम्राट चौधरी उन्होंने अधिकारियों को सख्ती के संकेत देते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ब्लॉक और अंचल स्तर तक मॉनिटरिंग की जाएगी। अगर कोई पदाधिकारी एक महीने से अधिक किसी फाइल को लंबित रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फाइल लटकाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं: CM मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। उन्होंने हर घर तक एक किलोवाट सोलर बिजली पहुंचाने की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में लोगों को बिजली के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  

अवैध निर्माण पर कड़ा वार: Punjab में कॉलोनियों पर चला बुलडोज़र, प्रशासन अलर्ट

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की गाइडलाइन और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद, PAPRA एक्ट 1995 के तहत समय-समय पर अनधिकृत कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए और उन्हें समय-समय पर डिमोलिश किया गया। आज एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट रूपिंदर कौर की देखरेख में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर रितेश गोयनका, असिस्टेंट टाउन प्लानर पुनीत डिगरा, असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रभजोत सिंह और जिला प्रशासन/रेगुलेटरी टीम की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव राजूवाल में PAPRA एक्ट 1995 का उल्लंघन करके बनाई गई अनधिकृत कॉलोनी को डिमोलिश किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाले डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए, गांव राजूवाल में बनी अनधिकृत कॉलोनियों को PAPRA एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के मालिक सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज़ करके सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि PAPRA एक्ट-1995 के अमेंडमेंट 2024 के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की जेल और 25 लाख से 5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेगुलेटरी विंग समय-समय पर गुरदासपुर जिले में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन की जांच कर रहा है। इसके साथ ही काम रोकने के लिए संबंधित एक्ट के तहत नोटिस जारी कर रहा है और संबंधित पुलिस स्टेशन अफसर को आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए कह रहा है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी गैर-कानूनी कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें जो सरकार से मंजूर न हों और किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लें ताकि प्रॉपर्टी को नुकसान न हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा उन्होंने कहा कि PUDA एरिया में 19 मार्च 2018 से पहले जो भी अनधिकृत कॉलोनियां अप्लाई की गई हैं, वे कॉलोनाइजर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करके तुरंत अपनी कॉलोनियों को रेगुलर करवा लें, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कॉलोनाइजर/प्रमोटर डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना कोई कंस्ट्रक्शन करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

संभल में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह पर चला बुलडोजर, जमींदोज किया गया

 संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. सदर कोतवाली क्षेत्र के बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को ध्वस्त करने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची. इस दौरान बुलडोजर से अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।  यह कार्रवाई एसडीएम निधि पटेल के नेतृत्व में की गई, जिसमें नायब तहसीलदार दीपक जुरैल और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी शामिल रहे. मौके पर किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सदर कोतवाली पुलिस के साथ-साथ आरआरएफ और पीएसी के जवान भी तैनात रहे, जिससे पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।  प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 1240 की 168 वर्गमीटर जमीन, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, उस पर इमामबाड़ा बनाकर अवैध कब्जा किया गया था. वहीं गाटा संख्या 1242 की 87 वर्गमीटर भूमि, जो पशुचर के लिए आरक्षित है, उस पर ईदगाह का निर्माण कर लिया गया था।  इस मामले की शुरुआत जनवरी महीने में हुई थी, जब लेखपालों की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की थी. 14 जनवरी को जांच रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध कब्जे की पुष्टि हुई. इसके बाद 18 जनवरी को धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।  कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 जनवरी को तहसीलदार कोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया. उसी आदेश के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।  अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।   

बड़े तालाब के पास रसूखदारों के 347 अवैध बंगलों पर शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई

 भोपाल भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील शहर की पहचान है लेकिन भीड़ भाड़ और अवैध निर्माण ने यहां घूमने आने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. क्योंकि बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है. 6 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 21 अप्रैल तक चलेगा. कुल 15 दिनों तक चलने वाली इस कार्रवाई में जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं।  पहले दिन भदभदा में चला ‘पीला पंजा’अभियान के पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. यहां 9 दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और पीछे नहीं हटेगी।  भोज वेटलैंड रूल्स के बाद सख्ती प्रशासन का कहना है कि 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसी नियम के तहत सभी निर्माण हटाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई तालाब की पारिस्थितिकी, जलस्तर और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।  राजा भोज ने कराया था झील का निर्माण भोपाल की बड़ी झील को भोजताल या अपर लेक भी कहा जाता है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा निर्मित भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है. यह आज भोपाल शहर की पहचान भी है. यह शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और 2002 में इसे 'रामसर साइट' का दर्जा मिला. यहां बोट क्लब, खूबसूरत व्यू और वॉटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।  ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा  

बुलडोजर कार्रवाई से उजड़े 10 परिवार, विरोध में रातू रोड पर चक्का जाम

रांची राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बने मकानों को तोड़े जाने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में आक्रोश है और लोग सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के पीछे स्थित खादगढ़ा, महुआ टोली और जयप्रकाश नगर इलाके में मंगलवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 27 कट्ठा सरकारी जमीन पर बने लगभग 10 मकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी थी और उस पर अवैध कब्जा किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई। अचानक घर टूटने से लोग बेघर हो गए कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में नाराजगी फैल गई। लोगों का आरोप है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। कई परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे और अचानक घर टूटने से वे बेघर हो गए हैं। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि साल 2020 में करीब 48 डिसमिल जमीन एक आदिवासी रैयत से खरीदी गई थी और इसके बदले करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए थे। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री आपसी सहमति से हुई थी और वे कानूनी रूप से वहां रह रहे थे। हालांकि बाद में जमीन के मूल मालिक ने मामला दर्ज कराया और अदालत से दखल-दिहानी का आदेश ले लिया। रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया बुधवार को बड़ी संख्या में लोग विरोध में सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने रातू रोड कब्रिस्तान के पास टायर जलाकर सड़क जाम कर दी। इससे रातू रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। खबर लिखे जाने तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता जारी थी। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई पर रोक, मामले की दोबारा जांच, मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन के लेन-देन में कोई विवाद था तो इसकी सजा आम लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारियों ने लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।  

उज्जैन शहर में होगा बुलडोजर ऑपरेशन, 18 बीघा जमीन जल्द होगी खाली

उज्जैन  सिंहस्थ को देखते हुए सरकार जहां उज्जैन में शिप्रा सहित सभी जल स्रोतों में साफ पानी के लिए योजनाएं बना रही है। दावे कर रही है, लेकिन सप्तसागर से दो साल में न तो कब्जे हटे और न सीवेज मिलना रुक पाया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जाहिर की है। कहा है, उज्जैन नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने पहले जारी निर्देशों का न तो सही से पालन किया और न प्रगति के संबंध में समय पर हलफनामा दाखिल किया। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश निर्देशों का पालन करने में प्रतिबद्धता व ईमानदारी की कमी को एनजीटी हल्के में नहीं लेगा। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर व निगम कमिश्नर को निर्देशित कर तालाबों से अतिक्रमण हटवाएं। पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्रवाई करें। पर्यावरण विभाग के पीएस निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करें। शासन से भी दो हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। 36 में से 18 बीघा पर अतिक्रमण सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई कर यह निर्देश दिए। याचिका में बताया गया कि उज्जैन जिले के सप्तसरोवर-रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धनसागर, रत्नाकर सागर, विष्णुसागर और पुरुषोत्तम सागर का धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। राजस्व रिकॉर्ड में यह तालाब गोवर्धन सागर के नाम से खसरा 1281 पर 36 बीघा जमीन में दर्ज हैं। 18 बीघा पर अतिक्रमण हो चुका है। एनजीटी के अगस्त 2024 के आदेश में समिति से जांच कराई थी। अतिक्रमण और सीवेज मिलने की पुष्टि हुई थी।

भोपाल के कई इलाकों में अतिक्रमण हटाए जाने की तैयारी, 1.30 लाख लोग प्रभावित—मंडला और छतरपुर में नई परियोजनाओं से संकट

भोपाल  भोपाल में भोज वेटलैंड व भदभदा, कलियासोत, मदन महल हिल्स में अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मंडला में चुटका मप्र एटॉमिक पावर प्लांट, छतरपुर में डायमंड ब्लॉक लीज परियोजना, न्यू सिंगरौली कोयला खदान परियोजना से 1.30 लाख लोग प्रदेश में बेघर हो सकते हैं। विकास में बाधक बने घर हटाए – 2023 में झुग्गी-झोपड़ी, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के तहत 90 घर तोड़े। इन्हीं वजह से 2022 में 489 घर व दुकानें तोड़ी गईं।  – 2023 में कई परियोजनाओं में आड़े आ रहे 390 अन्य घर खाली कराए। इंदौर में 157 घर पीएम आवास योजना में बने थे। -2022 में ऐसे 245 घर थे। 127 सबसे ज्यादा मच्छी बाजार में खाली। – 2022 में एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 5 गांव में 175 घर खाली कराए। ये रिजर्व के कोर क्षेत्र में थे। एक घर खरगोन में हटाया गया। देशभर में चला नया ट्रेंड लेकिन… बता दें कि देश के कोने-कोने में इस समय जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों, अपराधियों और आतंकियों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह नया ट्रेंड जरूर है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से लेकर विकास परियोजनाओं तक के लिए 2017 से 2023 के बीच यानी सात वर्ष में कम से कम 3.44 लाख मकान तोड़े जा चुके हैं। इन्हीं वजहों से अभी और करीब 1.7 करोड़ लोगों के घर टूटने के जोखिम पर हैं। हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क संगठन द्वारा जुटाई जानकारियों के अनुसार सात साल में हुई कार्रवाइयों की वजह से करीब 16 लाख लोग बेघर हुए, जिनमें से अधिकतर के लिए सरकारी स्तर पर विस्थापन योजनाएं भी बनाई गईं हैं। 2023 में भारत में कुल 1,07,499 और 2022 में 46,371 मकान तोड़े गए। इसके जरिए दोनों वर्षों में क्रमश: 5,15,752 और 2,22,686 लोगों को घरों से निकाला गया।

कर्नाटक में सरकारी कार्रवाई से बढ़ा विवाद, बेंगलुरु में 400+ घरों को किया गया ध्वस्त

बेंगलुरु बेंगलुरु में 400 से ज़्यादा घरों को गिराने के बाद कर्नाटक सरकार विवादों में घिर गई है. जिससे सैकड़ों लोग, जिनमें ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बेघर हो गए हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में हुई इस बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई ने सत्ताधारी कांग्रेस और केरल लेफ्ट फ्रंट यूनिट के बीच ज़बरदस्त जुबानी जंग छेड़ दी है.  जानकारी के अनुसार 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव में फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में तोड़फोड़ की गई. जिससे करीब 400 परिवार बेघर हो गए. यह कार्रवाई ऐसे वक्त में की गई, जब शहर में साल की सबसे ज़्यादा ठंड पड़ रही है. बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा चलाए गए इस अभियान में 4 JCB और 150 से ज़्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे.  कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में उतरे लोग  मामले में कर्नाटक सरकार ने कहा कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास एक झील के किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे. हालांकि, निवासियों ने दावा किया कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं मिला था. पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बेदखल कर दिया. इससे सैकड़ों लोगों को कड़ाके की ठंड में सड़कों पर और अस्थायी शेल्टरों के नीचे रातें बितानी पड़ रही हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ निवासियों के हवाले से बताया गया है कि  वे 25 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैलिड आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं. निकाले गए ज़्यादातर लोग प्रवासी हैं और मज़दूर के तौर पर काम करते हैं. यह मुद्दा अब कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा विवाद बन गया है. इस एक्शन के खिलाफ लोग विरोध में उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.  एक गुट ने राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही कार्रवाई के विरोध में दलित संघर्ष समिति जैसे कई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. कार्रवाई की केरल के मुख्यमंत्री ने की निंदा इस कार्रवाई को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस की की निंदा की है. उन्होंने इसे कांग्रेस की "अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति" बताया है. एक्स पर किए गए एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि दुख की बात है कि संघ परिवार की अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत चलाई जा रही है. जब कोई सरकार डर और ज़बरदस्ती से शासन करती है, तो संवैधानिक मूल्य और मानवीय गरिमा सबसे पहले शिकार होते हैं. वहीं मामले में केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि कांग्रेस सरकार की "अमानवीय कार्रवाई" इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है. जो लोग धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के नाम पर सत्ता में आए हैं, वे गरीब लोगों के घरों को तोड़कर एक बार फिर अपना पाखंड दिखा रहे हैं.  उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिनाराई को दिया जवाब सीपीआई और केरल सीएम की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह इलाका कब्ज़ा की गई कचरा फेंकने की जगह थी. लेकिन लैंड माफिया इसे झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमने लोगों को नई जगहों पर शिफ्ट होने का समय दिया था. हम बुलडोज़र चलाने में विश्वास नहीं करते. पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए शिवकुमार ने ज़ोर देकर कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस के सीनियर नेता ने यह भी कहा कि पिनारयी विजयन जैसे सीनियर नेताओं को बेंगलुरु की समस्याओं के बारे में पता होना चाहिए. हम अपने शहर को अच्छी तरह जानते हैं और हम ऐसी झुग्गियों को बढ़ावा नहीं देना चाहते जो लैंड माफिया की एक्टिविटीज़ को बढ़ावा देती हैं.   

धार्मिक स्थल पर बुलडोजर कार्रवाई से हरिद्वार में हड़कंप, पुलिस ने संभाली कमान

हरिद्वार  उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में अवैध धार्मिक संरचनाओं पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। हरिद्वार जिला प्रशासन का बुलडोजर अक्सर अतिक्रमण के खिलाफ गरजता नजर आ रहा है। मंगलवार को रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। बताया जाता है कि यह मजार सिंचाई विभाग की जमीन पर बना था। इस अतिक्रमण के खिलाफ सिंचाई विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। पहले मजार से संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया। इसके बाद प्रशासन ऐक्शन लिया और बुलडोजर चलाकर करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को जमींदोज कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद पूरे उत्तराखंड में सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ तेजी से अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात रही ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दावा किया था कि उत्तराखंड में अब तक 9000 एकड़ से अधिक जमीन इसी तरह के अवैध कब्जों से खाली कराई गई है। सीएम ने कहा था कि सूबे में कोई भी हरे रंग की चादर डालकर सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। इसी संकल्प को लेकर सूबे में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही प्रशासन की ओर लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी विकृत मानसिकताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।