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योगी सरकार का बड़ा एक्शन! 21 साल पुराने सपा कार्यालय पर चला बुलडोजर

सीतापुर  यूपी के सीतापुर में सुबह-सुबह समाजवादी पार्टी के ऑफिस में योगी सरकार का बुलडोजर गरजा। टॉउन हॉल परिसर में 21 साल पहले नजूल भूमि पर बना कार्यालय चार बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होने पर दो दिन पहले सपा कार्यालय खाली कर दिया गया था। टाउन हॉल परिसर की नजूल भूमि को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल ने नियम विरुद्ध 15 जनवरी 2005 को समाजवादी पार्टी के कार्यालय संचालन के लिए आवंटित किया था। जिसका वार्षिक किराया केवल 100 रुपये था। आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध होने पर पूर्व में नगर पालिका ने उक्त आवंटन को निरस्त कर दिया था। आवंटन निरस्त होने के बाद भी सपा कार्यालय नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था। बीते आठ जून को जिलाधिकारी न्यायालय ने नोटिस जारी कर कार्यालय को 15 दिन के भीतर खाली करने का आदेश जारी किया गया था। प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। तय समय पूरा होने के पहले ही सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने लगभग दो दिन पहले ही कार्यालय खाली कर दिया। कार्यालय खाली होने के बाद सोमवार इसके बाद सोमवार सुबह ही प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर समाजवादी पार्टी कार्यालय पर पहुंच गए। समाजवादी पार्टी कार्यालय की बिल्डिंग को बुलडोजर की मदद से जमीदाज कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सपा कार्यालय को दिया गया था नोटिस नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह ने कहा कि नियमों के तहत संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद भूमि को खाली कराया गया, क्योंकि उस पर अवैध कब्जा था। यहां एक पार्टी कार्यालय संचालित हो रहा था। प्रशासन का उद्देश्य इस भूमि को कब्जामुक्त कराकर सरकारी महाविद्यालय के निर्माण के लिए सुरक्षित करना है। बागपत में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर उधर, बागपत के राजपुर खामपुर गांव में न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बनी करीब 40 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। राजपुर खामपुर गांव में तकिए वाली मस्जिद है। करीब पांच साल पहले गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है। शिकायत के अनुसार तालाब की जमीन पर करीब 40 साल पहले मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। अब न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस और राजस्व विभाग की टीम के साथ शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान गांव में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

हरिद्वार में CM धामी का बुलडोजर एक्शन, अवैध मजार पर चली कार्रवाई, प्रशासन सख्त

 लक्सर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर लक्सर तहसील प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने हरिद्वार में एक और अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया। सहारनपुर झबेडा मार्ग पर सरकारी जमीन पर बनी उक्त मजार को ध्वस्त करने के लिए पहले नोटिस दिया गया था। वहीं गोवर्धनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभियान चलाकर 35 से अधिक अतिक्रमण हटाए। अभियान के दौरान अधिकारियों ने सड़क, नाली और फुटपाथ पर किए गए कब्जों को हटाते हुए व्यापारियों और स्थानीय लोगों को आगे से अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी। 13 लोगों के चालान मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने राजमार्ग किनारे दुकानों व सार्वजनिक भूमि का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान कई अस्थायी ढांचे, सामान और अवैध कब्जे हटाए गए। साथ ही 81 पुलिस एक्ट के तहत 13 लोगों के चालान भी किए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि, सड़क, नालियों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोबारा अतिक्रमण किया गया तो सामान जब्त करने के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अभियान में एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

अवैध कब्जों पर प्रशासन की सख्ती, मंदिर परिसर के निकट मजार पर चला बुलडोजर

 संभल  उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी 'खेड़े वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार' को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है. कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह एक्शन लिया गया।  संभल के बबराला थाना इलाके के बाघऊ गांव में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने गाटा संख्या 592 की सरकारी ऊसर भूमि पर अवैध रूप से बनी मजार को जमींदोज कर दिया. लेखपाल की जांच रिपोर्ट में 24 वर्ग मीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद ग्राम सभा की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी मनोज रावत और चार थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही।  पैमाइश में हुई थी अवैध कब्जे की पुष्टि बीते कुछ महीने पहले राजस्व विभाग की टीम, नायब तहसीलदार और एसडीएम विकास चंद्र ने गांव पहुंचकर जमीन की पैमाइश की थी. इसमें मजार बनाकर सरकारी जमीन घेरने की बात साबित हुई, जिसके बाद मजार की देखभाल करने वाले अजीज को नोटिस दिया गया था. तहसीलदार कोर्ट ने इस अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया था।  डीएम कोर्ट से अपील खारिज होते ही एक्शन तहसीलदार कोर्ट के फैसले के खिलाफ मजार कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 3 जून को खारिज कर दिया. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण के लिए विशेष टीम गठित की. सुरक्षा के लिहाज से बबराला थाना प्रभारी निशांत राठी सहित भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। 

अवैध कब्जों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, बहराइच में मदरसा और 11 दुकानें ध्वस्त

बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की पयागपुर तहसील के सिंहपुर गांव में प्रशासन ने ग्राम सभा की जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बुल्डोजर चलाया. कोर्ट के आदेश पर तहसीलदार अंबिका चौधरी के नेतृत्व में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने ग्राम सभा की बंजर भूमि पर बने 11 अवैध दुकानों और एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।  ग्राम सभा की जमीन पर लंबे समय से था कब्जा जानकारी के अनुसार सिंहपुर गांव में ग्राम सभा की बंजर भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा कर कुछ लोगों द्वारा दुकानें और एक मदरसा संचालित किया जा रहा था. इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन था. न्यायालय से अतिक्रमण हटाने का आदेश मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी थी. निर्धारित कार्यक्रम के तहत राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।  कार्रवाई के दौरान बुल्डोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध निर्माणों को गिराया गया. प्रशासन की टीम ने पहले संबंधित लोगों को न्यायालय के आदेश और कार्रवाई की जानकारी दी. जिसके बाद बुल्डोजर चलाकर कब्जा हटाया गया. किसी भी तरह के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. हालांकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या सामने नहीं आई।  तहसीलदार अंबिका चौधरी ने बताया कि ग्राम सभा की भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या कब्जा कानूनन गलत है. उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई है. प्रशासन का उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना है, ताकि उसका उपयोग जनहित के कार्यों के लिए किया जा सके।  प्रशासन बोला आगे भी अतिक्रमण के खिलाफ ऐसे होगी कार्रवाई उन्होंने यह भी कहा कि जिले में ग्राम सभा और अन्य सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है. जहां-जहां अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न करें और यदि कहीं अतिक्रमण है तो उसे स्वयं हटा लें।  प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में चर्चा का माहौल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम सभा की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग लंबे समय से उठ रही थी. अब कार्रवाई होने के बाद जमीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जा सकेगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और किसी भी अवैध कब्जाधारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

अवैध कब्जों पर कार्रवाई जारी, बंगाल में TMC नेता के दफ्तर पर चला बुलडोजर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया।  शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था।  स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है।  टीएमसी ने लगाया 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी।  सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे।  इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया।  आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है। टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। बदले की भावना से कार्रवाई वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है। रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

ड्रग माफिया पर प्रशासन सख्त: गंभीर मामलों में आरोपी तस्कर के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

अमृतसर अमृतसर के मजीठा में नशा तस्करों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस और नगर काउंसिल ने संयुक्त रूप से एक नशा तस्कर के घर पर बुलडोजर चलाया। यह कार्रवाई मजीठा के खासा पत्ती इलाके में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। प्रशासन का कहना है कि यह मकान अवैध तरीके से बनाया गया था और पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन तय समय के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। SSP सुहेल मीर ने दी कार्रवाई की जानकारी SSP देहाती सुहेल मीर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई वार्ड नंबर 4 में स्थित उस संपत्ति पर की गई, जहां सुनील और उसका भाई करण उर्फ कन्नू रहते थे। सुनील के खिलाफ हरियाणा में यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज है और वह फिलहाल जेल में बंद है। वहीं करण उर्फ कन्नू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत पांच मामले दर्ज हैं, जिनमें कमर्शियल मात्रा में नशा बरामद होने के केस भी शामिल हैं। कानून के मुताबिक होगी सख्त कार्रवाई एसएसपी सुहेल मीर ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण के आधार पर की गई है। प्रशासन का कहना है कि जहां भी गैर-कानूनी कब्जे या अवैध निर्माण पाए जाएंगे, वहां कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

डबरीपानी में कार्रवाई शुरू: बुलडोजर से महामाया पहाड़ के अतिक्रमण हटाए जाएंगे, पुलिस बल मौजूद

 अंबिकापुर  अंबिकापुर के महामाया मंदिर (Mahamaya Temple) और महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी के संरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह चार एक्सीवेटर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा जाने लगा। पहले दिन 20 से अधिक मकानों को हटाने की तैयारी की गई है।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति को रोका जा सके। कई वर्षों से जारी था कब्जे का खेल वन विभाग के अनुसार, अंबिकापुर शहर से लगे डबरीपानी, श्रीगढ़, खैरबार, नवागढ़ और बधियाचुआ क्षेत्र में लंबे समय से वनभूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे थे। ये क्षेत्र धीरे-धीरे नए आवासीय इलाकों के रूप में विकसित हो गए, जहां सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं। पिछले वर्ष वन विभाग ने श्रीगढ़ और चोरकाकछार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया। विभाग ने कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया था, लेकिन किसी ने वैध दस्तावेज पेश नहीं किए। रात को चस्पा किया नोटिस, सुबह पहुंचा बुलडोजर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई डबरीपानी से शुरू की गई है। यहां के 54 लोगों को अंतिम बेदखली का नोटिस जारी किया गया था। कुछ अतिक्रमणकारियों ने अंतिम बेदखली का नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। गुरुवार रात वन विभाग के कर्मचारी डबरीपानी पहुंचे और घरों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया। शुक्रवार सुबह फारेस्ट एसडीओ श्वेता कम्बोज के नेतृत्व में वन विभाग और पुलिस जवानों का अमला बुलडोजर लेकर डबरीपानी पहुंचा और कार्रवाई शुरू की गई। पार्षद बोले- वन विभाग ने कार्रवाई में की देरी पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि मार्च 2026 में ही रिजर्व फारेस्ट से 157 लोगों को अवैध कब्जा हटाने के लिए अंतिम बेदखली नोटिस की अवधि समाप्त हो गई थी। पुलिस बल दिए जाने के बाद भी डीएफओ अभिषेक जोगावत ने कार्रवाई नहीं की, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई थी। आलोक दुबे ने कहा कि यहां दूसरे राज्यों से आए समुदाय विशेष के लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। सभी चिन्हित अतिक्रमण हटाए जाएंगे- एसडीओ एसडीओ फारेस्ट श्वेता कम्बोज ने कहा कि 157 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी हुआ है। इनमें महामाया पहाड़, नवागढ़, डबरीपानी के अतिक्रमणकारी शामिल हैं। डबरीपानी में 54 अतिक्रमणकारियों में जिन लोगों को हाईकोर्ट से स्टे मिला है, उनका अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। शेष लोगों को चिन्हित कर उनका कब्जा तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। श्वेता कम्बोज ने कहा कि सभी चिन्हित अतिक्रमणकारियों को अवैध कब्जा हटाया जाएगा। आज से यह कार्रवाई शुरू हो गई है। 27 मार्च को जारी हुआ था अंतिम नोटिस वन विभाग ने 27 मार्च 2026 को अतिक्रमणकारियों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर वनभूमि खाली करने को कहा था। इसके बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। कार्रवाई में देरी होने के कारण कई कब्जाधारी हाईकोर्ट पहुंच गए और उन्हें स्थगन आदेश मिल गया। भाजपा पार्षद आलोक दूबे ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने वनभूमि से नियमानुसार कब्जा हटाने के निर्देश दिए। रातभर रही हलचल, लोग हटाने लगे सामान गुरुवार देर शाम वन विभाग की टीम डबरीपानी पहुंची और शुक्रवार से कार्रवाई शुरू करने की मुनादी कराई गई। क्षेत्र में नोटिस भी चस्पा किए गए। इसके बाद से इलाके में हलचल बढ़ गई। कई अतिक्रमणकारियों ने रात में ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था। शुक्रवार सुबह वन और राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू करने से पहले लोगों को एक बार फिर सामान हटाने का समय दिया गया, जिसके बाद तोड़फोड़ शुरू हुई। 54 अतिक्रमणकारी डबरीपानी में चिन्हित भारतीय वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी और अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट श्वेता काम्बोज ने बताया कि केवल डबरीपानी क्षेत्र में 54 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया है। इनमें से कुछ लोगों को न्यायालय से स्थगन आदेश मिला है, जबकि कुछ के आवेदन FRA के तहत लंबित हैं। ऐसे मामलों को छोड़कर बाकी कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित वन विभाग के अनुसार, महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी, नवागढ़ और घुटरापारा के संरक्षित वन क्षेत्रों में कुल 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए हैं। इन सभी को 27 मार्च 2026 को अंतिम नोटिस जारी किया गया था और 29 मार्च 2026 तक अतिक्रमण हटाने की समयसीमा तय की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान सरगुजा कलेक्टर अवकाश पर थे, जिसके कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी हुई। बाद में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए लोगों ने वनभूमि पर कब्जा किया है। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। राजनीतिक मुद्दा बना वनभूमि अतिक्रमण महामाया पहाड़ से लगे वन क्षेत्रों में अवैध कब्जे का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के तहत अतिक्रमण को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। वहीं कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाती रही है।

उत्तम नगर दिल्ली में बुलडोजर एक्शन फिर से शुरू, ट्राइब्यूनल ने राहत की अर्जी खारिज की

नई दिल्ली  उत्तम नगर की उसी पुनर्वासित कालोनी में  सुबह एक बार फिर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जहां कुछ दिन पहले तरुण नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बार निगम पूरी कानूनी तैयारी के साथ पहुंचा था। जैसे ही निगम के लिए गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डिमालिशन पर रोक हटाई, वैसे ही निगम ने उन विवादित इमारतों को गिराना शुरू कर दिया जो कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई थीं। के अनुसार तरुण की हत्या के कुछ दिन बाद ही जब निगम ने इस मामले में आरोपितों में से एक के घर के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाया था, तब इस मामले में 13 पक्षकारों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की राहत देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था। 28 अप्रैल को याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल पहुंचे। 29 अप्रैल हुई सुनवाई में निगम ने दलील दी कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए स्टे हटा दिया। इसके अगले ही दिन निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी। निगम पश्चिमी जोन के अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान दो संपत्तियों पर निगम ने हथौड़ा चलाया। इनमें एक संपत्ति वह थी जिसपर तीन प्लाटों को जोड़कर इमारत खड़ी की गई थी। वहीं दूसरी संपत्ति ऐसी थी, जिसपर दो प्लाट को जोड़कर घर बनाया गया था। सुबह जब निगम की टीमें कार्रवाई करने पहुंचीं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। इस इलाके में कई आवासीय इकाइयों को आपस में जोड़कर बड़ी इमारतें बना ली गई थीं. एक मामले में तीन घरों को मिलाकर एक ढांचा बनाया गया, जबकि दूसरे मामले में दो इकाइयों को जोड़ा गया था. इस मामले में आरोपी के परिवार ने पहले 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उन्हें 15 दिनों की अंतरिम राहत दी थी।  कोर्ट ने परिवार को एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया. 29 अप्रैल को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने ठोस आधार की कमी की बात कही. इसके बाद स्टे ऑर्डर हटा लिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2026 को होगी।  क्या था पूरा मामला? बता दें कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित जेजे कॉलोनी, हस्तसाल में होली के दौरान तरुण के परिवार की एक बच्ची ने पानी का गुब्बारा फेंका था. गुब्बारे का पानी पड़ोसी महिला पर गिर गया. इसी बात पर दो पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें 26 साल के तरुण की मौत हो गई थी. अब उसी मामले के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का डंडा चला है। 

भोपाल में बड़ा तालाब के पास बुलडोजर की कार्रवाई, 9 दुकानों को गिराया, 347 अन्य पर कार्रवाई की तैयारी

भोपाल बड़ा तालाब के किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। भदाभदा इलाके से कार्रवाई की शुरुआत हुई है। तालाब किनारे अवैध रूप से बने नौ दुकानों को सोमवार को जमींदोज कर दिया गया है। वहीं, 347 लिस्टेड जगह हैं, जिन पर कार्रवाई होनी है। इसे लेकर भोपाल प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। 21 अप्रैल तक चलेगा अतिक्रमण अभियान दरअसल, भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील जो न सिर्फ शहर की पहचान है बल्कि भोपाल की जनता की प्यास भी बुझाती है। इसी बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर आज से बुलडोजर चलना शुरू हो गया है जो 21 अप्रैल तक चलेगा। जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं, जिन पर अवैध निर्माण किया गया है। भदभदा इलाके में चला बुलडोजर पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला है। नौ दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला, कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन बुलडोजर चलता रहा। बड़े तालाब के किनारे है अतिक्रमण     भोपाल की शान है बड़ा तालाब     नोटिस के बाद गुरुवार से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू     347 अतिक्रमणकारियों को लिस्टेड किया गया     नोटिस देने के बाद हो रही है कार्रवाई 15 दिनों में हटाया जाएगा अतिक्रमण वहीं, तालाब किनारे जितने भी अतिक्रमण हैं वो 15 दिनों के अंदर हटाए जाएंगे। 16 मार्च 2022 के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। एनजीटी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्नित कर रहा है। सभी लोगों को चिह्नित कर नोटिस दिया गया था। इसके साथ ही उनसे कहा गया था कि आप खुद से हटा लें, नहीं तो प्रशासन हटाएगी। गौरतब है कि आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर लोग खुद हटा रहे हैं। हर इलाके से अतिक्रमण हटाने के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है। प्रेमपुरा में हटाई गई दुकानों और मकानों की जमीन की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक 2788 रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। 72 घंटे में दुकानों को खाली कराया गया था, इसके बाद सोमवार सुबह एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राऊत टीम के साथ कार्रवाई शुरू की। टीटी नगर सर्कल में एफटीएल क्षेत्र में 116 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें 68 सरकारी और 48 निजी जमीन पर बने हैं। निजी जमीन पर बने 92 निर्माण-होटल, रिसोर्ट, फार्महाउस, मकान और दुकान की अलग से जांच चल रही है। नगर निगम ने इन्हें नोटिस देकर दस्तावेज मांगे हैं। पहले नोटिस, फिर कार्रवाई… अतिक्रमण चिह्नित करने के बाद संबंधित को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे गए और सुनवाई की गई। जिन मामलों में अतिक्रमण पाया गया, वहां कार्रवाई की गई। बुजुर्ग दंपति को राहत… भदभदा चौराहे पर कार्रवाई के दौरान टीम एक कमरे तक पहुंची, जहां चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग दंपति रह रहे थे। उन्हें देख एसडीएम टीटी नगर अर्चना शर्मा ने कमरा नहीं तोड़ने के निर्देश दिए और अधिकारियों को देखभाल के लिए कहा। एफटीएल के 50 मीटर दायरे में सख्ती बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर तक के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस सीमा के भीतर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं बचेगा। 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। इसी आधार पर पूरी कार्रवाई की जा रही है। इन गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा इलाके में भी बड़ी संख्या में निर्माण किए गए हैं। 25 फरवरी से शुरू हुआ अभियान 28 फरवरी के बाद धीमा पड़ गया था, लेकिन अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए रोजाना कार्रवाई का शेड्यूल तय कर दिया है। किस दिन कहां चलेगा बुलडोजर 10 अप्रैल: हलालपुरा 11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे) 12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड 15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान, मैरिज गार्डन) 17 अप्रैल: हुजूर तहसील 18-19 अप्रैल: टीटी नगर 20 अप्रैल: बैरागढ़ शेष अतिक्रमण 21 अप्रैल: हुजूर तहसील अंतिम कार्रवाई वन विहार में पिलर निर्माण पर नया विवाद कार्रवाई के बीच वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने का मामला सामने आया है। विशेषज्ञ इसे वेटलैंड नियमों के खिलाफ बता रहे हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने इस मामले को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने की तैयारी की है।  

अवैध निर्माण पर सख्ती: पानीपत में कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, बिल्डर भी रडार पर

पानीपत. नगर निगम पानीपत ने बुधवार को अवैध कॉलोनियों और कब्जाधारियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए कई स्थानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। यह कार्रवाई हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 के तहत पूर्व में जारी नोटिसों की अनदेखी के बाद की गई। जिलाधीश द्वारा नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुमित नांदल की निगरानी में निगम टीम ने पुलिस बल के साथ मिलकर विभिन्न स्थानों पर अवैध निर्माण ध्वस्त किए। बरसत रोड स्थित भैंसवाल मोड़ पर निगम भूमि पर अवैध रूप से बने करीब 15 खोखे और एक डेयरी को तोड़ा गया। इसके अलावा सरदार के डेरा के पास करीब तीन एकड़ में विकसित अवैध कॉलोनी में सड़कों और नींव को ध्वस्त किया गया। विजय नगर क्षेत्र में करीब 2 एकड़ में विकसित हो रही कॉलोनी सहित आसपास की लगभग 16 एकड़ में फैली दो अवैध कॉलोनियों में भी सड़कों व नींव पर कार्रवाई की गई। उझा रोड स्थित बीबीएम एन्कलेव, उझा गेट के पास तथा इंडो फार्म के नजदीक भी अवैध निर्माणों को हटाया गया। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनी काटने वाले मालिकों और प्रॉपर्टी डीलरों के खिलाफ धारा 350-सी के तहत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी। दो से तीन बार नोटिस दिए – शहर में 32 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, जिन्हें पहले ही दो से तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्लाट खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। –डॉ. पंकज यादव, आयुक्त नगर निगम पानीपत