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डीटीसी की नई योजना: बसों की लाइव लोकेशन और टाइमिंग मोबाइल ऐप और डिजिटल बोर्ड पर दिखेगी

नई दिल्ली  मेट्रो की तरह बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों को भी पता चलेगा कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है और वह कितनी देर में बस स्टॉप पर पहुंचेगी। यात्रियों को यह जानकारी न सिर्फ मोबाइल पर ऐप के जरिए बल्कि बस स्टॉप पर लगने वाले डिजिटल पब्लिक इन्फर्मेशन बोर्ड पर भी मिलेगी। डीटीसी इसके लिए आईआईटी कानपुर की भी मदद लेगा। पिछले सप्ताह डीटीसी बसों को लेकर हुई बैठक में इस पर फैसला हुआ है। सरकार डीटीसी बसों के रूटों के बेहतर रेशनलाइजेशन और टाइम-टेबल पर काम करना चाहती है। ताकि यात्री जिस रूट की बस पकड़ना चाहते हैं। उसे लाइव ट्रैक कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि इसे लागू करने के लिए तकनीकी मदद आईआईटी कानपुर से लेंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर लेवल पर 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यात्रियों को होगी आसानी बस स्टॉप पर खड़े यात्री जान सकेंगे कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है। बसों की लाइव ट्रैकिंग सेवा शुरू करने से पहले आईआईटी दिल्ली और DTIDC (दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम) मिलकर एक स्टडी भी कर रहे है, ताकि दिल्ली के बस नेटवर्क को मजबूत, डेटा-आधारित और बेहतर तरीके से फिर से डिजाइन किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में ईस्ट दिल्ली में 121, वेस्ट जोन में 181 और नॉर्थ जोन में 194 बस रूट्स रेशनलाइजेशन पर भी काम चल रहा है। कैसे बेहतर होगी बसों की लाइव ट्रैकिंग ? पिछली सरकार में भी बसों की लाइव ट्रैकिंग व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, लेकिन यह सिर्फ एनडीएमसी एरिया के बस स्टॉप और चार्टर ऐप, वन दिल्ली ऐप पर उपलब्ध थी। मगर तब डीटीसी और क्लस्टर स्कीम के तहत दो बसों में लगे जीपीएस का रखरखाव ठीक नहीं होने के कारण योजना पटरी से उतर गई। अब मौजूदा सरकार में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई गई है। अब दिल्ली में क्लस्टर स्कीम को खत्म करके सिर्फ डीटीसी के पास बसों का परिचालन है। बसें ओपेक्स मॉडल पर चलाई जा रही है, यानी परिचालन से लेकर रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास है। इसके अलावा डीटीसी ने अपना खुद का एक कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया है, जहां पर सभी बसों की जीपीएस के जरिए निगरानी की जा रही है। आईआईटी कानपुर से तकनीकी मदद ली जाएगी। इसके अलावा अब सिर्फ एनडीएमसी एरिया ही नहीं बल्कि पूरी दिल्ली में 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।  

महिलाओं के लिए दिल्ली की मुफ्त बस सुविधा में बदलाव, नए साल में लागू हो सकता है नया सिस्टम

 दिल्ली दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर का तरीका जल्द बदलने जा रहा है। नए साल के शुरुआती दिनों में ही नए सिस्टम को लागू किया जा सकता है। पिंक सहेली कार्ड को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। मुफ्त बस सफर का फायदा लेने के लिए महिलाओं को स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा। इसके साथ ही पेपर वाले पिंक टिकट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अक्टूबर 2019 में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर की शुरुआत की थी। भाजपा सरकार ने मुफ्त सफर की सुविधा को जारी रखते हुए इसके तरीके में बदलाव की घोषणा की थी। सरकार का कहना है कि नए सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी। भाजपा पिंक टिकट सिस्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाती रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (DTC) ने स्मार्ट कार्ड जारी करने के लिए दो प्राइवेट वेडर्स को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार शहरभर में इसके लिए काउंटर्स खोलेगी। दिल्ली के पते वाला आधार कार्ड का इस्तेमाल करत हुए महिलाएं पिंक सहेली कार्ड के लिए अप्लाई कर सकेंगी। कहां बनेंगे कार्ड, क्या शर्तें रिपोर्ट के मुताबिक काउंटर डीएम, एसडीएम के दफ्तरों, बस डिपो और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर खोले जाएंगे ताकि लोग आसानी से वहां पहुंच सकें। अधिकारियों के मुताबिक सहेली कार्ड प्राप्त करने के लिए दिल्ली निवासी होना अनिवार्य है। कार्ड के लिए न्यूनतम उम्र 12 साल होनी चाहिए। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड कैसे काम करेगा नया सिस्टम, कार्ड नहीं तो क्या होगा सफर के दौरान महिलाओं को अपने स्मार्ट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर टच करना होगा। मौजूदा व्यवस्था में कंडक्टर महिलाओं को पिंक टिकट देते हैं। लेकिन नई व्यवस्था में वह सफर कर रही महिलाओं से कार्ड लेंगे और ईटीएम पर टच करके वापस कर देंगे। यदि किसी महिला के पास स्मार्ट कार्ड नहीं हुआ तो टिकट खरीदनी होगी। बस पास भी होंगे स्मार्ट पिंक सहेली कार्ड के अलावा दो अन्य श्रेणी के स्मार्ट कार्ड भी बनाए जाएंगे। वरिष्ठ नागरिक, विकलांग, खिलाड़ी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता समेत 12 श्रेणियों के लोगों को पास भी स्मार्ट कार्ड में बदले जाएंगे। इसके अलावा आम लोग भी स्मार्ट कार्ड बनवाकर इसे रिचार्ज करा सकेंगे। यह मेट्रो कार्ड की तर्ज पर काम करेगा।