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मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, 33 से 36 मंत्री तक बढ़ सकती है संख्या

पटना बिहार को सुंदर बनाना है। समृद्ध और विकसित बनाना है। फैक्ट्री लगानी है। इस दिशा में हरसंभव प्रयास करूंगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सहित रोजगार को और अधिक बढ़ावा मिल सके, इसके लिए काम किया जायेगा।" मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर में जब यह बातें कहीं तो स्पष्ट हो गया कि वह लंबी पारी खेलना चाहते हैं। 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही इस नई टीम की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक दिन पहले यानी रविवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। तारीख उन्होंने नहीं बताई लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद पांच मई तक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा नए चेहरों को मौका जरूर देगी। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। जदयू ने अपने दो पुराने चेहरों को उपमुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार अधिक प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद नहीं लेंगे। यह लगभग तय है। अन्य पुराने चेहरे जैसे श्रवण कुमार, जमां खान, मदन सहनी, लेशी सिंह को दुबारा मौका मिल सकता है। हालांकि निशांत के करीबी कुछ युवा विधायक भी मंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें कुछ को जदयू मौका दे सकती है। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर  एनडीए विचार कर रहा है। विजय सिन्हा का क्या होगा? 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी तो सम्राट चौधरी के साथ विजय सिन्हा भी उपमुख्यमंत्री बने थे। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस विभाग में भ्रष्टाचार अंकुश लगाने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए, जिसकी चर्चा आज तक हो रही है। जनता ने विजय सिन्हा को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा। हालांकि, राजस्व सेवा के अधिकारियों ने उनके काम करने की शैली का विरोध किया और हड़ताल पर चले गए। लेकिन, विजय सिन्हा अपने निर्णय पर अडिग रहे और उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। नई सरकार बनी तो विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री नहीं बने। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के काम की तारीफ की। इसके बाद ऐसा लगा कि विजय सिन्हा को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दिया जाएगा। चर्चा है कि नाराज चल रहे विजय सिन्हा की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें दोबारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ गृह विभाग की भी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।   चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे? 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सम्राट चौधरी सरकार में जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे। विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

भाजपा-जदयू में नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा, पुराने मंत्रियों की हो सकती है वापसी

पटना बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा तेज है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण का नया स्वरूप दिख सकता है। अगड़ी, पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति तीनों के संदर्भ में यह बात कही जा रही है। वहीं, जदयू अपने कुछ पूर्व मंत्रियों के नाम पर यथास्थिति मोड में हैं। भाजपा कुछ पुराने चेहरे पर दृढ़ तो है ही, लेकिन क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण को ध्यान में रख कई नए नाम काे मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद है। क्षेत्रीय समीकरण को साधेगी बीजेपी भाजपा में क्षेत्रीय समीकरण के मामले को सामाजिक समीकरण से जोड़ा जा रहा। मगध क्षेत्र से भाजपा ने अति पिछड़ी जाति को महत्वपूर्ण पद पर जगह दिया हुआ है। इसलिए यह कहा जा रहा कि मगध क्षेत्र से किसी सवर्ण जाति के विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। जिस जिले में भाजपा ने 2025 के विधानसभा चुनाव में बेहतर उपलब्धि हासिल की है, वहां से किसी सवर्ण विधायक को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। इसी तरह तिरहुत प्रमंडल के बारे में भी बात की जा रही। तिरहुत इलाके से पिछली सरकार में अति पिछड़ा वर्ग से एक महिला मंत्री थीं भाजपा कोटे से। इसलिए तिरहुत से भी किसी सवर्ण विधायक को भाजपा कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। दरभंगा इलाके से किसी ब्राह्मण विधायक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। पूर्व में भाजपा ने दो बार अपने कोटे से ब्राह्मण समाज के विधायक को मंत्री बनाया था। एक महिला विधान पार्षद को भी सम्राट सरकार में जगह मिल सकती है। अभी तक वह मंत्री नहीं रही हैं। जदयू में कुछ नए चेहरे को पहली बार मिलेगा मौका जदयू कोटे से सम्राट सरकार में कौन-कौन मंत्री बनेंगे? इस बारे में यह कहा जा रहा कि कई नामों पर यथास्थिति रहेगी। जिन नामों पर यथास्थिति की बात कही जा रही उनमें वे लोग शामिल हैं, जो नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में कई बार मंत्री रह चुके हैं। इनकी संख्या 8 से 9 के बीच रह सकती है। वहीं, जदयू कोटे से कई युवा विधायक जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं, उनको इस बार मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। इस क्रम में वैसे विधायकों का नाम लिया जा रहा, जिन्होंने बड़े संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। लाेजपा (रामविलास), रालोमो व हम में बदलाव की गुंजाइश नहीं मंत्रिमंडल विस्तार के तहत एनडीए के तीन अन्य घटक दल लोजपा (रामविलास) रालोमो व हम की सूची में किसी तरह के बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही। लोजपा (रामविलास) से पूर्व की सरकार में मंत्री रहे एक विधायक को जगह नहीं मिलने की बात चर्चा में जरूर है, लेकिन लोजपा नेतृत्व इसे अफवाह बता रहा।