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बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है। नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं। पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी। सत्ता के बंटवारे का समीकरण बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।  

उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। माननीय उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इसके तहत भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। संशोधन के अनुसार भर्ती के स्रोत से जुड़े नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम-18, पदोन्नति से संबंधित नियम-20, नियुक्ति से जुड़े नियम-22 और परिशिष्ट-1 में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।

कैबिनेट ने दी हरी झंडी: बिहार की नई पांच साल की योजना और तीन मुख्य प्राथमिकताएँ

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय के मंत्रिमंडल कक्ष में कैबिनेट की बैठक करेंगे। आज की बैठक काफी महत्वपूर्ण है। सीएम रोजगार और नौकरी समेत कई प्रमुख एजेंडों पर मुहर लगा सकते हैं। बैठक में सभी मंत्री और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। इससे नौ दिसंबर को हुई बैठक में सीएम नीतीश कुमार ने 19 एजेंडों पर मुहर लगाई थी। इसमें तीन नए विभागों बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी। इसके बाद विभागों की संख्या बढ़कर 48 हो गई। सरकार की ओर से कहा गया था कि तीन विभागों का गठन रोजगार और नौकरी के अवसर बढ़ाने के लिए हुआ है। सीएम नीतीश कुमार अपने एक्स पर लिखते हैं कि  24 नवंबर 2005 को जब से हमलोगों की सरकार बनी, तब से राज्य में कानून का राज है और लगातार 20 वर्षों से सभी क्षेत्रों और सभी वर्गों के विकास के लिए काम किया गया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्य में सुशासन के कार्यक्रमों के अन्तर्गत सात निश्चय (2015-2020) और सात निश्चय-2 (2020-2025) में न्याय के साथ विकास से जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के बाद बिहार को सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने हेतु अब सात निश्चय-3 कार्यक्रमों को लागू करने का निर्णय लिया गया है। ये हैं सात अहम बिंदु 1.दोगुना रोजगार- दोगुनी आय 2. . समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार 3.कृषि में प्रगति-प्रदेश की समृद्धि 4.उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य 5.सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन 6.मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार 7.सबका सम्मान-जीवन आसान