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भारत का ऑपरेशन सिंदूर: आधी रात 1.30 बजे हमले के पीछे की असली वजह सामने आई

नई दिल्ली  पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने रात के डेढ़ बजे ही ऑपरेशन सिंदूर क्यों चलाया था? इस बारे में CDS अनिल चौहान ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची में एक कार्यक्रम में बताया कि 7 मई 2025 की रात को पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया था. रात 1 बजे से 1:30 बजे के बीच हमला किया था और इतनी रात को इतने बजे हमला करने के पीछे भी 2 वजहें थीं.   इन 2 वजहों से किया आधी रात को हमला उन्होंने कहा कि आधी रात के करीब अंधेरा घना होता है, उस समय सैटेलाइट इमेज कैप्चर करना और सबूत इकट्ठा करना सबसे मुश्किल काम होता है. फिर भी भारतीय सेना ने रात 1 से 1:30 बजे के बीच हमला किया, क्योंकि भारत को अपने सैटेलाइट पर भरोसा था कि वे रात को भी तस्वीरें कैप्चर कर पाएंगे. दूसरा कारण यह था कि भारतीय सेना पाकिस्तान के नागरिकों को नुकसान से बचाना चाहती थी. हालांकि हमला करने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:30-6 बजे के बीच होता, लेकिन उस समय पहली अजान या पहली नमाज होती है. बहावलपुर और मुरीदके में उस समय लोगों की काफी चहल-पहल हो सकती थी. इसलिए रात के एक से डेढ़ बजे के बीच हमला किया.   7 मई को ही क्यों किया गया था अटैक? CDS अनिल चौहान ने बताया कि 7 मई की रात को ही पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करने का फैसला कई कारणों से किया गया था. एक तो उन दिनों फ्लाइट्स की आवाजाही बंद थी, दूसरा मौसम भी अनुकूल था. 7 मई के बाद बारिश होने का पूर्वानुमान था, इसलिए फैसला किया गया कि 7 मई की रात को मौसम साफ रहेगा तो उसी तारीख को ऑपरेशन सिंदूर चलाया जाए, जिसमें इस बार सेना के तीनों अंगों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि उरी और बालाकोट एयर स्ट्राइक में सिर्फ एयरफोर्स ने जिम्मेदारी निभाई थी. सेना को बैक स्पोर्ट के लिए स्टैंड बाय मोड पर रखा गया था.

महू में CDS चौहान ने कहा, सुरक्षा के लिए सतत युद्ध की तैयारी जरूरी

इंदौर भारत को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनना है। हमें अब महाभारत की तरह शस्त्र और शास्त्र दोनों को साथ में लेकर चलना होगा। महाभारत का सबसे अच्छा योद्धा अर्जुन शस्त्र तो चला सकता था। परंतु शास्त्र का ज्ञान श्रीकृष्ण ने दिया तब जाकर पांडव युद्ध जीत सके। भारत एक शांतिप्रिय देश है। परंतु लेटिन में एक कहावत है। यदि शांति बनाए रखना है, तो हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहो। ये बातें चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने महू के आर्मी वार कॉलेज में मंगलावार को शुरू हुई दो दिवसीय ‘रण संवाद‘ कार्यक्रम में कही। तकनीक का युद्ध पर प्रभाव थीम पर आयाेजित इस संवाद कार्यक्रम में देश के तीनो सैन्य ईकाईयों के अधिकारी शामिल हुए। शुभारंभ मौके पर सीडीएस चौहान ने कहा कि पिछले दो साल से हम रणसंवाद जैसे कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे। जिससे हम हमारी सेनाओं को पुन: आकार दे सकें। इस तरह के आयोजन में मिलने वाले सुझाओं को अमल में लाकर हम आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने ऋग्वेद का उदाहरण देते हुए कहा कि हर दिशा से आने वाली जानकारी व सुझावों पर ध्यान देकर विशलेषण करने की आवश्यकता है। तकनीक के साथ आधुनिकता को अपनाने वाला ही जीतेगा रेस     सीडीएस चौहान ने कहा कि सबसे बड़े अर्थशास्त्री कौटिल्य व चाणक्य ने कहा कि किसी भी युद्ध को जीतने के लिए शक्ति, उत्साह और युक्ति की आवश्यकता होती है।     हमें यह अभी भांपने की जरुरत है कि भविष्य में किस तरह के युद्ध हो सकते है। ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा लेकिन उसने हमें बहुत कुछ सिखाया और भविष्य के लिए तैयार रहने की प्रेरणा दी।     तकनीकी रूप से युद्ध में मजबूती से डटे रहने की यह एक रेस है जिसमें सभी देश दौड़ रहे हैं। इसमें वही जीतेगा जो सबसे अधिक आधुनिक होगा।     भविष्य के युद्धों में विजय प्राप्त करने के लिए हमें तकनीकी रूप से मजबूत होने के साथ अपनी क्षमताओं का विकास करना होगा।     ऐसे में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस), सायबर, क्वांटम और इलेक्ट्रानिक वारफेयर का समावेश कर अपनी सेनाओं को संयुक्त प्रशिक्षण देने की जरूरत है।     राष्‍ट्र की सुरक्षा सभी के लिए सर्वाेपरि है। इसमें टेक्नोलाजी पार्टनरशिप, अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध व कूटनीति का अहम रोल है। रक्षा मंत्री समापन समारोह में होंगे शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार देर रात महू पहुंचे। वे महू में आयोजित रण संवाद कार्यक्रम के अंतिम दिन बुधवार को महू में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। बुधवार को सैन्य रणनीति के इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा     दूसरे दिन युद्ध में इंटीग्रेट तकनीक के महत्व संबंधित प्रशिक्षण     भविष्य के लिए भारतीय नौसना तकनीकी तैयारी     जमीन युद्ध में मानव रहित प्रणाली का एकीकरण व 2035 तक बल संरचनाओं व सामरिक संचालन की पुनर्कल्पना।     अंतरिक्ष पर आधारित निगरानी और सेटकाम-ए ढांचे काे एकीकृत करना     डिजिटल युग में प्रतिद्वंदी की सप्लाय चैन को बाधित करना