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जनगणना 2026: 1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी, जानें कौन-से 33 सवाल होंगे आपसे पूछे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। 2027 जनगणना का पहला चरण क्या होगा केंद्र सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर पहले फेज का फ्रेमवर्क बना दिया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेज हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर बेस्ड होगा. जनगणना अधिकारी घरों की गिनती करेंगे और उनकी रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक इसका मकसद यह है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा तैयार हो. इससे सरकार को विकास योजनाएं ज्यादा टारगेटेड तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।  33 सवालों में क्या क्या शामिल रहेगा? इस बार पूछे जाने वाले सवाल घर की संरचना और परिवार की स्थिति को लेकर होंगे. मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस चीज की है, घर में कितने सदस्य रहते हैं और कितने विवाहित जोड़े हैं, यह दर्ज किया जाएगा. घर का मुखिया पुरुष है या महिला और वह किस सामाजिक वर्ग से है. यह भी पूछा जाएगा।  सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा. पीने का पानी, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की उपलब्धता दर्ज होगी. परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार जैसे साधन हैं या नहीं, यह भी जानकारी ली जाएगी. यहां तक कि रोजमर्रा में किस तरह का अनाज ज्यादा खाया जाता है. यह भी नोट किया जाएगा।  जवाब न देने पर क्या होगा? जनगणना एक लीगल प्रोसेस है और जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत सूचना देता है. तो जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रोसेस लागू होती है।  जनगणना का मकसद किसी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं है. असल मकसद यह समझना है कि देश के किस हिस्से में किन सुविधाओं की जरूरत है. सही जानकारी मिलने पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य योजनाओं का बजट सही ढंग से तय किया जा सकता है. इसलिए सहयोग देना आपके इलाके के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।  जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी– शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

इंदौर में जनगणना के लिए आज से प्रशिक्षण कार्यक्रम, जल्द ही पहुंचेगी टीम आपके घर

इंदौर जनगणना 2027 के सफल और सटीक संचालन के लिए इंदौर जिले में फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए विशेष निर्देशों के पालन में इंदौर जिले में तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का खाका तैयार किया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराना है।  दो चरणों में होगा प्रशिक्षण अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है। कॉलेज का परिसर ए.बी. रोड स्थित भंवरकुआं चौराहे के पास है। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण आज 24 मार्च से शुरू होकर 26 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसमें मुख्य रूप से नगर निगम एवं बाह्यवृद्धि क्षेत्रों के ट्रेनर्स शामिल होंगे। इसके पश्चात दूसरा चरण 28 मार्च से 30 मार्च 2026 तक आयोजित होगा, जो जिला स्तर के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है। हर दिन होंगे तीन बैच प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस पूरे कार्यक्रम के दौरान कुल 129 फील्ड ट्रेनर्स को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इन्हें अलग-अलग बैचों में बांटा गया है। प्रत्येक दिन तीन बैच संचालित होंगे, जिनमें प्रति बैच लगभग 28 प्रतिभागी शामिल होंगे। वहीं, जिला स्तरीय सत्रों के लिए दो बैच बनाए गए हैं, जिनमें 23-23 प्रतिभागियों को बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कॉलेज परिसर में ही की सभी व्यवस्थाएं शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए होलकर साइंस कॉलेज के कक्ष क्रमांक बी-101, बी-102 एवं बी-103 को विशेष रूप से आरक्षित किया गया है। अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण स्थल पर सभी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। इसमें बैठने के लिए टेबल-कुर्सी, तकनीकी सहायता के लिए प्रोजेक्टर और कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ-साथ पेयजल और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। यह प्रशिक्षण जनगणना के राष्ट्रीय मिशन को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। 

2027 की जनगणना के लिए यूपी में तेज़ी से काम शुरू, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं. पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का काम किया जाएगा. इस चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी. इसके बाद 22 मई से 20 जून तक अधिकारी घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. राज्य में तय समय सीमा के अंदर काम हो सके इसके लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.  राज्य में जनगणना के लिए अधिकारियों को सभी काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. ये प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और बिना त्रुटि के पूरी की जाए इसके लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. इसमें डेटा संग्रह, प्रविष्टि और निगरानी सब कुछ ऑनलाइन होगा.  छह लाख कर्मचारियों की लगेगी ड्यूटी उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. यही नहीं इस बार पहली बार ऐसा होगा जब लोगों को मोबाइल एप के ज़रिए ख़ुद गणना करने का ऑप्शन भी मिलेगा. इसका मतलब ये होगा कि लोग ख़ुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए जमा कर सकेंगे.  डिजिटल तरीके से की जाएगी जनगणना राज्य में जनगणना का काम काफी बड़ा है जिसे देखते हुए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लगाया जाएगा. जो घर-घर जाकर लोगों की गिनती और आवास की संख्या का डेटा जुटाएंगे. डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर प एक राज्य नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा, जहां पूरी प्रक्रिया की निगरानी रखी जाएगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि काम तय योजना के अनुसार हो रहा है.  नियमों के मुताबिक इस साल होने वाली जनगणना के कार्यक्रम को देखते हुए एक जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में नए तहसीलों, शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों आदि के गठन पर रोक लगा दी जाएगी. ताकि जनगणना के दौरान किसी तरह का बदलाव न हो जिससे डेटा पर कोई प्रभाव न आए. 

घर-घर दस्तक देने जाएंगे जनगणना कर्मचारी, प्रशासन ने साफ किया – यह 1 चीज पूछी नहीं जाएगी

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।

मध्य प्रदेश में आबादी की हाईटेक गिनती, जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी

इंदौर  देश में 2011 के बाद से पूरे 15 साल बाद एक बार फिर जनगणना हो रही है. मध्य प्रदेश में 16वीं जनगणना के लिए फिलहाल दो चरणों में कार्य प्रारंभ होगा, जो 2 साल तक चलेगा. देश में रहने वाले नागरिकों की संख्या और जनसंख्या के अनुपात में विकास योजनाओं तथा अन्य सांख्यिकी महत्व के लिए जनगणना की जा रही है. इधर, इंदौर में जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 में शुरू होगा, जो अगले साल फरवरी तक चलेगा. 15 साल बाद शुरू होने जा रही जनगणना इसी प्रकार फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसके तहत देशभर में जनगणना पूरी की जाएगी. लंबे समय बाद हो रही जनगणना उन युवाओं के लिए भी कुतूहल का विषय है, जिन्होंने कभी भी जनगणना जैसी प्रक्रिया में भागीदारी नहीं की है. हालांकि, इस बार जनगणना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें देश के प्रत्येक नागरिक की लगभग पूरी जानकारी सांख्यिकी आंकड़ों में दर्ज की जाएगी. घर-घर जाकर पूछे जाएंगे ये सवाल सांख्यिकी विभाग के मुताबिक इस बार की जनगणना में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें नागरिक का मकान और भूमि स्वामी की स्थिति, पक्का अथवा कच्चा मकान, पीने के पानी का उपलब्ध साधन, खाना पकाने का ईंधन और इंटरनेट के अलावा फोन, टीवी, वाहन आदि जानकारी भी ली जाएगी. इसके अलावा आहार एवं जीवन शैली से जुड़े अन्य सवाल और परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर भी पूछा जाएगा जो पहली बार रिकॉर्ड में दर्ज होंगे. मोबाइल ऐप से दर्ज होगी जानकारी जनगणना को लेकर इंदौर में तैयारी शुरू हो गई है. इसे लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया, "जनगणना में गुणवत्ता और उच्च स्तर से प्राप्त नियमों और निर्देशों का विशेष ध्यान रखा जाएगा." उन्होंने बताया, "जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा. इस चरण में 1 से 30 मई 2026 तक घर-घर जाकर मकानों को सूचीबद्ध कर गणना की जाएगी. इसके पूर्व 15 दिन की समयावधि में ऐप के माध्यम से स्व गणना का विकल्प भी मौजूद रहेगा." प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है. इस दूसरे चरण में डिजिटल माध्यम से घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी. इसके लिए इंदौर में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी. इन्हें विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति की जा रही है." 

टेक्नोलॉजी के साथ जनगणना: विदिशा में मोबाइल एप से पहली बार होगी घर-घर काउंटिंग

विदिशा  आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। जिले में भी पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जनगणना कराई जाएगी। इस बार गणनाकर्मियों को भारी-भरकम रजिस्टर लेकर घर-घर नहीं जाना होगा, बल्कि मोबाइल एप के जरिए ही मकानों की गणना और जनसंख्या से जुड़ी समस्त जानकारी दर्ज की जाएगी। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत जिले में जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके लिए जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी जल्दी ही प्रारंभ की जा रही है। पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जनगणना का पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच संपन्न होगा, जिसमें मकानों की गणना की जाएगी। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में वास्तविक जनसंख्या गणना होगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल एप आधारित यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता भी बढ़ाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनगणना इकाइयों का निर्धारण कर लिया गया है और प्रशासनिक सीमाएं पहले ही फ्रीज की जा चुकी हैं, ताकि गणना के दौरान किसी प्रकार का परिवर्तन न हो। छह माह घर-घर दस्तक देंगे कर्मचारी जनगणना के पहले चरण में जिले के प्रत्येक गांव, कस्बे और शहरी वार्ड में मकानों की गणना की जाएगी। इसमें आवासीय और गैर-आवासीय भवनों का विवरण दर्ज किया जाएगा। मकान किस प्रकार का है, उसका उपयोग क्या है, निर्माण सामग्री, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई गैस, इंटरनेट, वाहन जैसी सुविधाओं की जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज होगी। इस चरण का उद्देश्य जिले के भौतिक ढांचे की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। इस दौरान शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में तैनात सरकारी अमला घर-घर दस्तक देकर जानकारी हासिल करेगा। जनसंख्या गणना में दर्ज होगी परिवारों की जानकारी जनगणना का दूसरा चरण अगले साल फरवरी में शुरू होगा। इसमें जिले की वास्तविक जनसंख्या से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास, दिव्यांगता सहित अन्य सामाजिक और आर्थिक बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार इस चरण में जातिगत आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होगी और पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जनगणना एप तैयार, रजिस्टर से मुक्ति इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह डिजिटल होना है। अब तक सरकारी अमला नागरिकों की सारी जानकारी रजिस्टर में दर्ज करते था, लेकिन इस बार प्रत्येक गणनाकर्मी के पास मोबाइल या टैब रहेगा, जिसमें जनगणना एप इंस्टॉल होगा। उसी एप के माध्यम से जीपीएस लोकेशन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे दोहराव की संभावना कम होगी और रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही किसी भी स्तर पर त्रुटि होने पर तुरंत सुधार की सुविधा भी रहेगी। प्रशिक्षण और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था अधिकारियों का कहना है कि जनगणना को त्रुटिरहित बनाने के लिए कर्मचारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में एप संचालन, डेटा सुरक्षा, नागरिकों से संवाद और गोपनीयता के नियमों की जानकारी दी जाएगी। जिले में चार्ज अधिकारी, सुपरवाइजर और नोडल अधिकारियों के माध्यम से सतत निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। किसी भी शिकायत या समस्या के त्वरित निराकरण के लिए नियंत्रण तंत्र भी तैयार किया जा रहा है। रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर जेपी शर्मा का कहना है जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि जिले के भविष्य की नींव है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास, पेयजल, रोजगार और सामाजिक योजनाओं की रूपरेखा इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है। इसलिए जनगणना के दौरान कर्मचारियों को वास्तविक जानकारी ही उपलब्ध कराना चाहिए।     जनगणना की प्रक्रिया जिले में शुरू हो गई है। दो माह बाद एक अप्रैल से मकानों की गणना का कार्य शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा है। सही और पूरी जानकारी देने से ही जिले के विकास की सटीक तस्वीर सामने आएगी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य में योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और नीति निर्धारण का काम किया जाएगा।     – सेवाराम रैकवार, जिला योजना अधिकारी, विदिशा।  

छत्तीसगढ़ सरकार की तैयारी: 2027 जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी

रायपुर   राज्य में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। यह जनगणना देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार ने गृह विभाग को बनाया नोडल राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की पहली बैठक मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में 6 जनवरी आयोजित की गई, जिसमें जनगणना की रूपरेखा, कार्ययोजना और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए गृह विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। गृह विभाग भारत सरकार, जनगणना निदेशालय और राज्य के सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 के डिजिटल रोडमैप, संगठनात्मक ढांचे और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। डिजिटल गणना, मोबाइल ऐप से होगा डेटा संग्रह निदेशक ने बताया कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी। आंकड़ों का संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जबकि इसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इस बार नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा राज्य को इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस बड़े कार्य के लिए राज्य में लगभग 63 हजार प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। जनगणना से पहले पूर्व-परीक्षण (प्री-टेस्टिंग) का कार्य नवंबर 2025 में कबीरधाम जिले के कुकदूर, महासमुंद जिले की महासमुंद तहसील के चयनित गांवों और रायपुर नगर निगम के एक वार्ड में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इन अनुभवों को मुख्य जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी मुख्य सचिव ने बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। इस अवधि का निर्धारण मानसून और स्कूल शिक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में देशभर में एक साथ जनसंख्या गणना की जाएगी। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जनगणना 2027 राज्य की भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की मजबूत आधारशिला होगी। उन्होंने सभी विभागों से मिशन मोड में समन्वय के साथ कार्य करने और आम जनता से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग की अपील की। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना) मनोज पिंगुआ, निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय, एनआईसी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

बस्तर में जनगणना की अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारियां

जगदलपुर. जिले में आगामी जनगणना 2026-27 के मद्देनजर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी कड़ी में जिले में जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए हैं। जनगणना अधिनियम 1948 और राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के तहत उक्त दायित्व सम्बन्धी नियुक्तियां की गई हैं, जो तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। संभाग और जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में यह महाअभियान चलाया जाएगा। बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह को संभागीय जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बस्तर जिले के कलेक्टर हरिस एस. प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी के रूप में कमान संभालेंगे। इनके सहयोग के लिए अपर कलेक्टर चंद्रिका प्रसाद बघेल और डिप्टी कलेक्टर सु हीरा गवर्ना को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है, वहीं योजना एवं सांख्यिकी विभाग के उप संचालक सुरेश चन्द्र सिंह अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी का दायित्व निभाएंगे। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना के सूक्ष्म नियोजन और क्रियान्वयन के लिए अनुविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों को जिम्मेदारी दी गई है। जगदलपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र की जिम्मेदारी नगर आयुक्त प्रवीण वर्मा को सौंपी गई है, जिन्हें नगर चार्ज जनगणना अधिकारी बनाया गया है। इसी प्रकार राजस्व अनुविभाग स्तर पर जगदलपुर अनुविभाग हेतु ऋषिकेश तिवारी, तोकापाल अनुविभाग हेतु शंकर लाल सिन्हा, बस्तर अनुविभाग हेतु गगन शर्मा, लोहण्डीगुड़ा अनुविभाग हेतु नीतीश वर्मा और बकावण्ड अनुविभाग हेतु मनीष कुमार वर्मा को अनुविभागीय जिला प्रशासन ने ग्रामीण अंचलों में जनगणना कार्य की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सभी तहसीलदारों को चार्ज जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है। इसमें जगदलपुर तहसीलदार राहुल गुप्ता, नानगुर तहसीलदार दीपिका देहारी, तोकापाल तहसीलदार यशोदा केतारप, बस्तर तहसीलदार जॉली जेम्स और भानपुरी तहसीलदार जीवेश कुमार शोरी, लोहण्डीगुड़ा तहसीलदार कैलाश पोयाम, बकावण्ड तहसीलदार जागेश्वरी गावड़े, दरभा तहसीलदार सुनील कुमार ध्रुव, बास्तानार तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा और करपावण्ड तहसीलदार गौतम गौरे को भी उनके राजस्व क्षेत्राधिकार के भीतर जनगणना का प्रभारी बनाया गया है। नगर पंचायत बस्तर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी तरून पाल लहरे को नगर चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है।

VHP की बड़ी मांग: जनगणना में सभी लोग खुद को हिंदू के रूप में रजिस्टर कराएं

बेंगलुरु  VHP यानी विश्व हिंदू परिषद ने आगामी जनगणना में सभी से खुद को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हिंदू समाज में बंटवारे की कोशिश को रोकना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने की प्रयासों को रोकना है और एकजुट रहना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए मापदंड होना चाहिए।  अध्यक्ष अरुण कुमार ने जनगणना में सभी को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की यह वजह बताई है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक में लिंगायतों के कुछ वर्ग, आदिवासी इलाकों में सारणा और जाटवों के कुछ वर्ग और सामान्य में कुछ एससी एसटी में खुद को हिंदू पक्ष बताने के लिए अभियान चला रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदू समाज को बांटने वाले ऐसे प्रयास असफल हों और हम एकजुट रहें।' दिल्ली में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को तय करने के लिए जो नियम हैं, उनपर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अल्पसंख्यकों को सिर्फ आबादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसमें यह भी देखा जाना चाहिए कि किसी विशेष धर्म का पालन करने वालों ने पिछड़ेपन या दबाव का सामना किया है, जिसके चलते उन्हें विशेष अधिकार दिए जाएं।' कुमार ने फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट लागू किए जाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से आजाद किया जाए और हिंदू समुदाय को तत्काल सौंप दिया जाए। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ भी अभियान तेज करने की अपील की है। जनगणना की क्या तैयारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे। इसमें कहा गया है कि लगभग 700-800 की आबादी के लिए एक प्रगणक को नियुक्त किया जाएगा और प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक होगा। आपात स्थितियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक भी रखे जाएंगे। आगामी जनगणना 2027 में देश भर में जनगणना के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। आरजीआई ने इन सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMS) नामक एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। इसमें पहला चरण, मकान सूचीकरण और आवास गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। यह कवायद डिजिटल होगी और इसमें 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के अनुसार, जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।