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चिकन नेक पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनेगा

भारत की रणनीतिक नब्ज 'चिकन नेक' पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान: जमीन के नीचे बनेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर!  सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित 'चिकन नेक' – वह संकरी भूमि पट्टी जो भारत की शिराओं में सबसे संवेदनशील धमनी की तरह काम करती है। मात्र 20 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पट्टी, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरी हुई, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी गलियारा है। वर्षों से दुश्मन ताकतें इसी की कमजोरी को निशाना बनाती रहीं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे अभेद्य किले में बदलने का मास्टरस्ट्रोक प्लान तैयार किया है। जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 'चिकन नेक' के टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाया जाएगा। यह न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अटल बना देगा!कल्पना कीजिए – पहाड़ों और जंगलों के बीच वह संकरा कॉरिडोर, जहां आज रेल लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क आपस में उलझे हुए हैं। भीड़भाड़, प्राकृतिक आपदाएं या दुश्मनी की साजिशें – सब कुछ यातायात को ठप कर सकती हैं। लेकिन अब यह सब भूमिगत हो जाएगा! नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा, "यह अंडरग्राउंड लाइन सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है।" प्राकृतिक विपत्तियों हो या मानवीय खतरों, यह टनल सबको झेल लेगी। यात्री ट्रेनें तेज रफ्तार से दौड़ेंगी, मालगाड़ियां बिना रुकावट पहुंचेंगी, और सबसे अहम – डिफेंस लॉजिस्टिक्स यानी सेना का हथियार-बारूद, सैनिकों की आवाजाही बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दुश्मन भले ही आसमान से निगाह रखे या जमीन पर साजिश रचे, लेकिन भूमिगत कॉरिडोर को छू भी न पाएंगे!यह प्लान सिर्फ टनल तक सीमित नहीं। मौजूदा रेल ट्रैक को चार-लाइन (फोर-लेन) में बदला जाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए। रेल मंत्री वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, "नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले इस 40 किमी स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने की योजना है। इससे कनेक्टिविटी मजबूत और सुरक्षित होगी।" यह भारत की लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अभेद्य बनाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो देश का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट जोन है, अब दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। भारत अब चिकन नेक को चिकन नेक नहीं, बल्कि 'स्टील नेक' बना रहा है – मजबूत, लचीला और अटल!इस ऐतिहासिक कदम से पूर्वोत्तर के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। तेज ट्रेनें, सस्ता माल ढुलाई, पर्यटन में उछाल और निवेश का दौर – सब कुछ संभव हो जाएगा। केंद्र सरकार की यह दूरदृष्टि न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के सपने को साकार करेगी। क्या आप तैयार हैं इस क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बनने को?

रणनीतिक चाल: चिकन नेक को सुरक्षित करने के लिए 40 KM अंडरग्राउंड कनेक्शन का प्लान

नई दिल्ली बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है. सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’ अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए कहां से कहां तक ? प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है. बजट पर बात करते हुए जानकारी दी रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’ डिफेंस के लहजे से अहम अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है. सुरक्षा के लिए जरूरी नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके.

BSF की नई रणनीति, भारत-बांग्लादेश सीमा पर 12 फीट ऊंची स्मार्ट फेंसिंग का निर्माण

सिलीगुड़ी पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी अशांति के बीच भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट है। इसी कड़ी में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र में सीमा सुरक्षा को मजबूत करते हुए लगभग 75 प्रतिशत इलाके में नई डिजाइन की सीमा बाड़ (NDF) स्थापित कर दी है। ट्रिब्यून ने बीएसएफ अधिकारियों के हवाले से लिखा कि 12 फीट ऊंची नई डिजाइन फेंसिंग को विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में लगाया गया है। इस बाड़ की खासियत यह है कि इसे काटने में कई मिनट लगते हैं और इसकी ऊंचाई व संरचना के कारण इसे पार करना भी बेहद मुश्किल है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था घुसपैठ की कोशिशों और मवेशी तस्करी जैसी घटनाओं में प्रभावी कमी लाने में मदद करेगी। एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि चिकन नेक क्षेत्र भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की लाइफलाइन है, क्योंकि यही गलियारा शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। इसी कारण यहां तकनीक और मानव संसाधन- दोनों के जरिए सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। नई फेंसिंग के साथ-साथ सीमा पर पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाए गए हैं, जो रियल-टाइम लाइव फीड प्रदान करते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं। बीएसएफ इसे ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एरिया डोमिनेशन प्लान में भी अहम बदलाव किए गए हैं। नए प्लान के तहत बीएसएफ उन इलाकों को निशाना बना रही है, जहां से मवेशियों को इकट्ठा कर सीमा के पास तस्करी के लिए लाया जाता है। इसके लिए बीएसएफ की टीमें आवश्यकता पड़ने पर भारतीय क्षेत्र के भीतर कई किलोमीटर तक जाकर छापेमारी करती हैं, ताकि तस्करी की कड़ी को जड़ से तोड़ा जा सके। सीमा पर अपराध रोकने के लिए बीएसएफ ने एक समुदाय-केंद्रित पहल भी शुरू की है। इसके तहत संदिग्ध तस्करों और ‘टाउट्स’ के घर जाकर उनके परिवारों को अवैध गतिविधियों के गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे विश्वास-निर्माण उपायों से पिछले एक वर्ष में मवेशी तस्करी और मानव तस्करी की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है। हाल के महीनों में बीएसएफ ने अनजाने में भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले कई बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा और पूरा बैकग्राउंड जांचने के बाद उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को सौंपा। इस प्रक्रिया में उनके फिंगरप्रिंट और व्यक्तिगत विवरण साझा किए गए, ताकि किसी भी आपराधिक या राष्ट्र-विरोधी रिकॉर्ड की पुष्टि की जा सके। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक बीएसएफ ने करीब 8.5 करोड़ रुपये मूल्य के मवेशी, सोना, चांदी, वन्यजीव उत्पाद, हथियार, गोला-बारूद और अन्य तस्करी के सामान जब्त किए हैं। इसी अवधि में 440 बांग्लादेशी (जिनमें तस्कर और टाउट्स शामिल हैं), 152 भारतीय, तथा 11 अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 187 बांग्लादेशी नागरिकों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद BGB को सौंप दिया गया। बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी फेंसिंग कवरेज बढ़ाने, तकनीकी निगरानी को और सशक्त करने तथा स्थानीय समुदाय के सहयोग से सीमा पर अपराधों के खिलाफ अभियान जारी रखा जाएगा, ताकि चिकन नेक क्षेत्र की सुरक्षा किसी भी सूरत में कमजोर न पड़े।

रंगपुर डिविजन के अलग होने से चिकन नेक की समस्या हल, 23 लाख हिंदुओं के लिए राहत

नई दिल्ली /ढाका   बांग्लादेश से शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद से वहां की सत्ता कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में है. खुद मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इन कट्टरपंथी ताकतों के हाथों खिलौना बन गए हैं. ऐसे में इस वक्त वहां भारत विरोधी भावनाएं काफी मुखर हैं. कट्टरपंथी हर बात पर भारत को धमकी दे रहे हैं. हालांकि भारत के सामने बांग्लादेश और वहां की कट्टरपंथी ताकतों की औकात बहुत मामूली है. भौगोलिक रूप से पूरी तरह से भारत की गोद में बैठा इस मुल्क के मौजूदा हुक्मरान इस बात को भूल गए हैं कि उनको भारत ने ही पैदा किया है. वे अब उलटे भारत को ही धमकी दे रहे हैं. वे पूर्वोत्तर इलाके को भारत से अलग करने बात करते हैं. वे भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा जाता है, को काटने की धमकी देते हैं. लेकिन, उनको नहीं पता है कि भारत के शह मात्र से उनका एक बड़ा इलाका आजाद हो सकता है. वह इलाका है रंगपुर डिविजन. इसी डिविजन के बराबर चिकन नेक है और बांग्लादेश के इस डिविजन का करीब-करीब 90 फीसदी बॉर्डर भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से जुड़ता है. अब सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब चर्चा चल रही है. तमाम लोग कह रहे हैं कि अब बहुत हो गया. भारत को राष्ट्र हित को महत्व देते हुए बांग्लादेश से इस डिविजन को आजाद कराने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए. इस डिविजन के आजाद होने भर से भारत का सिलिगुड़ी कॉरिडोर करीब 120 से 150 किमी चौड़ा हो जाएगा. इससे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी. क्या ऐसा करना संभव है? देखिए, सैद्धांतिक तौर पर ऐसा करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है. भारत एक जिम्मेदार मुल्क है. वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है. लेकिन, कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खुद को बचाने के लिए पड़ोसी मुल्क में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना मजबूरी हो जाती है. ऐसी स्थिति में कोई भी मुल्क हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा रह सकता है. क्योंकि अंततः बांग्लादेश हमारी गोद में बैठा मुल्क है और उसकी किसी भी हरकत से सीधे तौर पर भारत पर असर पड़ना तय है.     रूस-यूक्रेन जंग है उदाहरण     इस बात को समझने के लिए हम मौजूदा रूस-यूक्रेन जंग को उदाहरण बना सकते हैं. ऐतिहासिक रूप से यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था. विभाजन के बाद वह अलग मुल्क बना. फिर वह तेजी से पश्चिम के प्रभाव में आने लगा. दूसरी और रूस को यह बात पसंद नहीं थी. फिर भी वह शांत रहा. लेकिन, यूक्रेन ने एक संप्रभु मुल्क होने के नाते रूस विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाते रहा. वह रूस विरोधी सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो का हिस्सा बनने के लिए झटपटाने लगा. इस कारण रूस का धैर्य जवाब दे दिया. रूस किसी भी कीमत पर अपनी सीमा पर नाटो की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं कर सकता था. इसी कारण उसने यूक्रेन पर हमला किया. रूस के पास सैन्य ताकत है और वह ऐसा करने का दम रखता है. आज स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका और तमाम पश्चिमी देश रूस को संघर्ष विराम कराने के लिए जो प्रस्ताव दे रहे हैं उसमें यूक्रेन को नाटो से अलग रखने और रूस द्वारा यूक्रेन के कब्जाए गए हिस्से को मान्यता देने की बात कह रहे हैं. यानी रूस की जो चिंता थी उसे अब पश्चिमी देश भी मानने लगे हैं. इस तरह यह बात तो स्पष्ट है कि अगर किसी देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है तो वह मजबूरन इस तर्क को आधार बनाकर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. बांग्लादेश के मौजूदा हुक्मरान ऐसी परिस्थिति बनाने में लगे हैं. वे भारत विरोधी ताकतों को लगातार शह दे रहे हैं. ऐसे में भारत सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन, यह सैन्य हस्तक्षेप भी रूस-यूक्रेन जंग की तरह काफी व्यापक और बड़ा आर्थिक नुकसान वाला हो सकता है. अब आते हैं रंगपुर डिविजन पर वैसे तो 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के वक्त भारत के पास सुनहरा मौका था कि वह अपने सिलिगुड़ी कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए बांग्लादेश के इस डिविजन को भारत में मिला ले या फिर उसको एक आजाद मुल्क बनवा दे. उस वक्त भारत के लिए ऐसा करना बहुत आसान था क्योंकि भारत ने इस मुल्क की आजादी के लिए जंग लड़ी थी. पूरी दुनिया से टकराव मोल लिया था. खुद दुनिया का अंकल सैम अमेरिका भारत के खिलाफ था लेकिन दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शानदार नेतृत्व का परिचय दिया और बांग्लादेश का निर्माण करवाया. करीब 23 लाख हिंदू रंगपुर डिविजन पूरी तरह पश्चिम बंगाल की गोद बैठा इलाका है. यह एक बड़ा डिविजन है और इसका क्षेत्रफल 16,185 वर्ग किमी है. यहां की कुल आबादी करीब 1.9 करोड़ है. यह एक बहुत ही गहन आबादी वाला इलाका है. यहां प्रति किमी 1200 लोग रहते हैं. इस इलाके में करीब 23 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी में करीब 13 फीसदी हैं. मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 86 फीसदी है. बांग्लादेश में डिविजन की बात करें तो प्रतिशत में यह रंगपुर डिविजन दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है. इस देश के सिलहट डिविजन में सबसे अधिक 13.51 फीसदी हिंदू हैं. संख्या के आधार पर देखें तो राजधानी ढाका डिविजन में सबसे अधिक करीब 28 लाख हिंदू रहते हैं. हालांकि ढाका डिविजन की कुल आबादी 4.42 करोड़ है और प्रतिशत में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 6.26 फीसदी है. कैसे अलग हो सकता है रंगपुर देखिए, सीधे तर सैन्य कार्रवाई कर इस डिविजन को बांग्लादेश से अलग करना बहुत मुश्किल कार्य है. इसके लिए वहां के लोगों को आगे आना पड़ेगा. सबसे पहले तो बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को इस इलाके में बसना पड़ेगा. उनको यहां की डेमोग्राफी में बदलाव करना पड़ेगा. जब वह एकजुट और किसी खास इलाके में मजबूत होंगे तो आंतरिक रूप से भी उनके लिए खतरा कम हो जाएगा. फिर अगर उनको कोई बाहरी जरूरत पड़ेगी तो भारत के लिए परोक्ष तौर पर सहायता देना आसान होगा. इसके अलावा उनके खिलाफ अत्याचार या जुर्म होता है, या उनका उत्पीड़न किया जाता है या उनके साथ दोयम दर्जे का … Read more

चिकन नेक क्षेत्र में भारत का नया गढ़, पड़ोसी देशों की रणनीति पर टिकी निगाह

नईदिल्ली  भारत ने बांग्लादेश के साथ अपनी संवेदनशील और लंबी सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारत ने शुक्रवार को तीन नई सैन्य छावनियों (गैरीसन) का उद्घाटन किया है। ये छावनियां असम के धुबरी के पास बामुनी, बिहार के किशनगंज, और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में स्थित हैं। ये तीनों गढ़ अब पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं। इन्हें भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए फोर्स मल्टीप्लायर यानी शक्ति में बढ़ोत्तरी माना जा रहा है। इन नई छावनियों का उद्देश्य 4096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा में मौजूद रणनीतिक कमजोरियों को दूर करना और किसी भी संभावित घुसपैठ या आपात स्थिति में तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ाना है। चिकन नेक पर नजर इस कदम का एक अहम भू-राजनीतिक पहलू भी है। उत्तर बंगाल का सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की पूर्वोत्तर दिशा में एकमात्र जमीनी कड़ी है। इसे सामरिक हलकों में चिकन नेक कहा जाता है। मात्र 22 किलोमीटर चौड़ी यह पट्टी देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि भारत से जोड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कभी यह कॉरिडोर दुश्मन के निशाने पर आया, तो भारत के 4.5 करोड़ से अधिक नागरिकों वाले पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर संकट मंडरा सकता है। इसीलिए नई छावनियों का निर्माण भारतीय सैन्य लॉजिस्टिक और आर्थिक संपर्क को सुरक्षित रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली की रणनीतिक तैयारी रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन छावनियों के साथ भारत ने सीमा पर आधुनिक उपकरणों, सड़क नेटवर्क और निगरानी प्रणालियों की तैनाती भी बढ़ा दी है। यह सब भारत की बॉर्डर मॉडर्नाइजेशन ड्राइव के तहत किया जा रहा है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि नई छावनियां न केवल हमारी तैनाती को मजबूत करेंगी बल्कि घुसपैठ या बाहरी गतिविधियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में भी मददगार होंगी। ढाका-रावलपिंडी समीकरण पर नजर इस सामरिक सुदृढ़ीकरण की टाइमिंग भी बेहद अहम मानी जा रही है। कुछ ही हफ्ते पहले, बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की थी। पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शामशाद मिर्जा ने ढाका पहुंचकर यूनुस से उनके जमुना निवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई। हालांकि, भारतीय सुरक्षा हलकों में इस मुलाकात को सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं अधिक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ढाका और रावलपिंडी के बीच ऐसे और संवाद आने वाले हफ्तों में जारी रह सकते हैं, जिससे दिल्ली की सतर्कता और बढ़ गई है। भविष्य की तैयारी भारत की ओर से सीमा पर नए गढ़ों का निर्माण न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत अपने पूर्वी मोर्चे पर किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता या पड़ोसी देशों के बदलते समीकरणों को लेकर चुपचाप लेकिन सख्त तैयारी में जुटा हुआ है।