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छत्तीसगढ़ का शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय अद्वितीय

रायपुर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नवा रायपुर में बने देश का पहला डिजिटल संग्रहालय का किया अवलोकन देश के प्रत्येक व्यक्ति को जनजातीय इतिहास को जानना चाहिए: चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत ने आज राजधानी नवा रायपुर के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए।  चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी।  आदिमजाति विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी बोरा ने जनजातीय संग्रहालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  सूर्यकांत, जस्टिस  पी.एस.नरसिम्हा, जस्टिस  प्रशांत कुमार और हाईकोर्ट बिलासपुर के चीफ जस्टिस  रमेश सिन्हा, राजस्थान के चीफ जस्टिस  कल्पथी राजेंद्रन राम सहित अन्य न्यायाधीश गण का बीरनमाला से आत्मीय स्वागत करने के साथ ही उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया।  प्रमुख सचिव  बोरा ने जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के दौरान चीफ जस्टिस  सूर्यकांत सहित अन्य न्यायधीश गणों को जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठिभूमि और जनजातीय नायकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  बोरा ने संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में प्रदर्शित विद्रोहों को साल, साजा और महुआ के प्रतिकात्मक वृक्ष के पत्तों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय में बने यह वृक्ष उसी तरह से है जिस तरह से मोशन फिल्मों में एक वृद्ध व्यक्ति फिल्म की कहानी बताते है।  चीफ जस्टिस  सूर्यकांत ने जनजातीय संग्रहालय में प्रदर्शित भूमकाल विद्रोह के बारे में जानकर काफी प्रभावित हुए। यह विद्रोह बस्तर क्षेत्र के चित्रकोट के आस-पास वर्ष 1910 में हुआ था। यह विद्रोह 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में, औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण और बाहरी हस्तक्षेप के विरूद्ध था, जिसमें आदिवासियों ने पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजों के खिलाफ किया था। चीफ जस्टिस ने संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार सहित अन्य जनजातीय नायकों द्वारा विद्रोह के दौरान उपयोग में लाए गए अस्त्र-शस्त्र का भी अवलोकन किया।  चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी का प्रतिकात्मक डिजिटल मंदिर से काफी प्रभावित हुए उन्होंने दो बार घंटी बजाकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किया। उन्होंने आगामी समय बस्तर (दंतेवाड़ा) जाकर मां दंतेश्वरी की साक्षात दर्शन करने की इच्छा जाहिर की।  उल्लेखीनय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 01 नवबंर 2025 को इस भव्य डिजिटल संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया था। तब से आगुन्तकों के लिए यह संग्रहालय आर्कषण एवं उत्साह का केंद्र बना हुआ है। जनसमुदाय में इस संग्रहालय के प्रति आकर्षण और लोकप्रियता को  देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा सहित वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है। मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर निर्माण से उद्घाटन तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी  बोरा के नेतृत्व में बारीकी से एक-एक पहलुओं को परखा तब जाकर संग्रहालय का बुनियाद बनकर तैयार हुआ है। संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस का याद दिलाता रहेगा। यह न केवल जनजातीय वर्गो के बल्कि सभी लोगों के प्रेरणापद है। 

न्यायपालिका में पारदर्शिता की जरूरत: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम सुधार की वकालत की

नई दिल्ली  भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर से अपना 15 महीने का कार्यकाल शुरू किया है। उन्होंने कॉलेजियम प्रक्रिया को और खोलने तथा लंबित मामलों से निपटने के लिए अपने रोडमैप पर चर्चा की है। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपने 14 वर्षों के कार्यकाल के दौरान ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए दिए गए कई आदेशों के बारे में बात की। इसके साथ ही उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की वकालत की। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब 2015 के आसपास यह मामला उन्हें सौंपा गया था, तब पंजाब में ड्रग्स का खतरा अत्यधिक अनियंत्रित स्तर पर था। उन्होंने इसे धैर्य की वास्तविक परीक्षा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आदेश से हल होने वाला मामला नहीं था। CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर क्यों होना चाहिए? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर कहा जाना सही है, लेकिन इस भूमिका को अक्सर गलत समझा जाता है। CJI सर्वोच्च न्यायालय का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होता है और यह वरिष्ठता न्यायिक भूमिका के साथ-साथ अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी लाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले एकतरफा तरीके से सौंपे जाते हैं। व्यवहार में ये निर्णय अन्य न्यायाधीशों के साथ उनकी उपलब्धता, अनुभव के क्षेत्रों और न्यायालय के समग्र कामकाज को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। न्यायिक स्वतंत्रता पर जस्टिस कांत ने पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे देश में प्रभावी न्याय वितरण प्रणाली की आधारशिला है, और यह संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के साथ चलती है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी पूरी तरह से संविधान और उन लोगों के प्रति है जिनकी यह रक्षा करता है। सोशल मीडिया पर जजों की हो री आलोचना पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह स्वतंत्रता को बाधित करने वाला एक कठोर उपाय होगा। उन्होंने माना कि जब अदालत की कार्यवाही के संक्षिप्त अंश या 'स्निपेट्स' संदर्भ के बिना ऑनलाइन साझा किए जाते हैं, तो गलतफहमी लगभग अपरिहार्य होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आलोचना अक्सर अज्ञानता से उत्पन्न होती है और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि कर्तव्यों से ध्यान हटाकर सोशल मीडिया पर ध्यान केंद्रित करने से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कॉलेजियम प्रणाली में सुधार चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम प्रणाली का बचाव किया लेकिन स्वीकार किया कि किसी भी प्रणाली में सुधार की गुंजाइश हमेशा होती है। उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत बातचीत एक स्वागत योग्य कदम है, जो कॉलेजियम के सदस्यों को उम्मीदवार का सीधे आकलन करने में मदद करता है। उन्होंने योग्यता, सत्यनिष्ठा और अनुभव पर और भी अधिक जोर देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब नियुक्तियों में अनुमोदन और अस्वीकृति के लिए कारण बताने का प्रयास किया जाता है, जो अधिक खुलेपन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रक्रिया अंतर्निहित रूप से जटिल है और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक डोमेन में पूरी तरह से नहीं रखा जा सकता है।