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कृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा ज्ञान-संस्कार और भक्ति का अद्भुत संगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भगवान कृष्ण की स्मृतियों को संजोने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा ज्ञान-संस्कार और भक्ति का अद्भुत संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव यात्रा के समापन कार्यक्रम में हुए वर्चुअली शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा में शामिल सभी संतों, तीर्थ पुरोहित महासंघ, धर्म यात्रा महासंघ और विश्व हिंदू परिषद का अभिनंदन करते हुए कहा कि आज उज्जैन एक अद्भुत क्षण का साक्षी बन रहा है। यात्रा में सम्मिलित सभी सहभागी उस मार्ग पर चलकर आए हैं, जिस पर हमारे आराध्य कृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए मथुरा से उज्जैन स्थित आचार्य सांदीपनी के आश्रम पधारे थे। संतगण को उस पावन मार्ग से गुजरने का अवसर मिला, जहां कृष्ण की चरणरज पड़ी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मथुरा से आरंभ कृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा के उज्जैन में आयोजित समापन समारोह को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मथुरा से 5 अक्टूबर को आरंभ हुई यात्रा जयपुर, कोटा, झालावाड़ और आगरा होते हुए उज्जैन पहुंची थी। उज्जैन के समापन कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद  उमेशनाथ महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री  गजेन्द्र सिंह, तीर्थ पुरोहित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष  प्रयागनाथ चतुर्वेदी उपस्थित रहे। हमारी संस्कृति हमें समाज और सृष्टि के कल्याण के लिए जीना सिखाती है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनी आश्रम गुरू-शिष्य परम्परा की अनादि महिमा का साक्षात प्रतीक है। जहां हर कण में कृष्ण की विनम्रता, बलराम की शक्ति और सुदामा की भक्ति समाई हुई है। हमारे गुरूकुल आदि काल से भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग हैं। सांदीपनी आश्रम में भगवान कृष्ण ने शिक्षा पाई और संसार को गीता का उपदेश देकर योगीराज बने। हमारी सनातन संस्कृति का परम ज्ञान परमार्थ है। हमारी संस्कृति हमें समाज और सृष्टि के कल्याण के लिए जीना सिखाती है। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्रामवासियों की रक्षा की और कुरूक्षेत्र में अर्जुन को गीता के माध्यम से धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उनका सारा जीवन समाज और धर्म की रक्षा के लिए था। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में बनेंगे वृंदावन गांव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा ज्ञान, संस्कार और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह यात्रा नई पीढ़ी में नैतिकता, आत्मविकास और भारतीय संस्कृति का दीप प्रज्जवलित करने का प्रयास है। राज्य सरकार भगवान कृष्ण की स्मृतियों को संजोने का कार्य कर रही है। कृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन, कृष्ण और सुदामा का मैत्री स्थल ग्राम नारायणा, रूक्मिणी वरण के स्थल धार जिले के अमझेरा और विनम्रता का संदेश देने वाले स्थल जानापाव (इंदौर) को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। कृष्ण पाथेय के मार्ग पर आने वाले वन, जल संरचनाओं और उद्यानों का भी संरक्षण किया जाएगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वृंदावन गांव बनाने का निर्णय लिया गया है। राज्य में गीता जयंती भी मनाई जाएगी। सिंहस्थ-2028 का आयोजन अद्वितीय वैभव के साथ होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में वेद-वेदान्त विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। अमझेरा में चित्रकला, मूर्तिकला और पारम्परिक नृत्य-संगीत कला की शिक्षा दी जाएगी तथा इसे कृष्ण-रूक्मणी लोक के नाम से जाना जाएगा। जानापाव में सुदर्शन लोक की स्थापना की जाएगी, जहां आयुध कौशल के साथ-साथ पारम्परिक और आधुनिक युद्ध शैली का ज्ञान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन अद्वितीय वैभव के साथ किया जाएगा। राज्य सरकार प्रदेश में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं रहने देगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से भगवान कृष्ण की शिक्षा परम्परा को जीवन में आत्मसात करने का आव्हान भी किया। उज्जैन में आयोजित समापन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतगण की उपस्थित रही। इनमें महामण्डलेश्वर  शांतिस्वरूपानंद जी सरस्वती, महामण्डलेश्वर  आचार्य शेखर जी, महामण्डलेश्वर  शैलेषानंद जी गिरी, जूना अखाड़ा, महामण्डलेश्वर  ज्ञानदास जी महाराज निर्मोही अखाड़ा, महामण्डलेश्वर  भागवतानंद गिरी जी, अंवतिका पीठाधीश्वर,  रंगानाथाचार्य जी महाराज, महामण्डलेश्वर  मनीष महाराज ददुवा आश्रम तथा तिरूपतिधाम युवराज राघवेन्द्र जी प्रमुख है। इस अवसर पर धर्मयात्रा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष  प्रमोद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष  अशोक कोटवाणी, तीर्थ पुरोहित महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री  सुरेन्द्र चतुर्वेदी तथा प्रदेश अध्यक्ष  मनीष उपाध्याय और कांवड़ यात्रा संयोजक  रतनलाल अग्रवाल भी उपस्थित रहे।  

घटना हो या दुर्घटना, तत्काल मौके पर पहुंचे पुलिस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पहली जिम्मेदारी कलेक्टर्स की : मुख्यमंत्री डॉ. यादव घटना हो या दुर्घटना, तत्काल मौके पर पहुंचे जन सुरक्षा, सुशासन और सेवा भाव हो प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय कर ड्रग कारोबार को करें नेस्तनाबूत कलेक्टर्स एवं एसपी विकसित करें खुद का सूचना तंत्र मध्यप्रदेश को अगले 6 महीने में बनाए नक्सल मुक्त प्रदेश कानून एवं व्यवस्था पर हुआ कांन्फ्रेंस का आंठवा और अंतिम सत्र भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कलेक्टर्स जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के साथ-साथ जिला दण्डाधिकारी भी हैं, इसीलिए जिले में कानून व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करने की पहली जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में खुद का प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करें, ताकि किसी भी घटना या दुर्घटना की सूचना तत्काल प्राप्त हो और समय पर नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी घटना या दुर्घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचे। इससे घटना या दुर्घटना और अधिक बड़ा रूप नहीं लेंगी। जिला अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से स्थिति नियंत्रण में बहुत मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर एवं एसपी दोनों में उच्च कोटि का तालमेल होना चाहिए। दोनों संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाकर जिले की कानून व्यवस्था की निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत ऐसी संवेदनशील बस्तियां जहां सड़कें सकरी हैं, तथा फोर्स मूवमेंट में समस्या आती है, सभी कलेक्टर्स ऐसे स्पॉट्स/जगहों को चिन्हित कर वहां का जोनल प्लान स्थानीय नगरीय निकायों के सहयोग से अगले तीन माह में तैयार कर लें, ताकि आवागमन सुगम हो और आवश्यकता पड़ने पर फोर्स मूवमेंट में समस्या न आए। उन्होंने मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए ठोस रणनीति बनाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस-2025 के आठवें एवं अंतिम सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सेंसिटिव पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि जनता में पुलिस के प्रति विश्वास भाव होना चाहिए। पुलिस अपनी साख बनाएं और अपराधों को रोकने में तत्परतापूर्वक कार्यवाही करें। प्रदेश के सभी कलेक्टर्स-एसपी की संयुक्त कॉन्फ्रेंस का विषय “कानून एवं व्यवस्था की सुनिश्चितता” था। मुख्य सचिव  अनुराग जैन की मौजूदगी में हुए इस अंतिम सत्र का संचालन अपर मुख्य सचिव गृह विभाग  शिवशेखर शुक्ला ने किया। सत्र में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मध्यप्रदेश को मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने के दृष्टिगत 6 माहों में बालाघाट, मण्डला और डिण्डोरी जिलों के कलेक्टर्स और एसपी लक्ष्य केंद्रित कर यह काम पूरा करें। उन्होंने कहा कि नक्सली घटनाओं को समाप्त करने के लिए हर संभव कार्यवाही करें। नक्सली या तो सरेंडर करें अन्यथा उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बालाघाट जिले में नक्सली गतिविधियों में बेहद कमी आने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बालाघाट को अति नक्सलवाद प्रभावित जिले की श्रेणी से डाउनग्रेड कर सामान्य श्रेणी में कर दिया है। उन्होंने इस उपलब्धि पर कलेक्टर-एसपी बालाघाट दोनों को बधाई दी। बताया गया कि कलेक्टर बालाघाट द्वारा नक्सल प्रभावित ग्रामों में विशेष प्रयास करके 200 से अधिक युवाओं को एलएनटी जैसी कंपनी में रोजगार दिलाया है। इससे वह दिशाभ्रमित होने से बच गए और समाज की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस साल ही हमने आठ मुठभेड़ में दस नक्सली मार गिराए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए पुलिस एवं अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्य करें, इस काम में और सख्ती लाएं। उन्होंने बताया कि अब तक 19 बांग्लादेशियों को चिन्हित कर वापस भेजा गया है। अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ऐसी कार्यवाही आगे भी जारी रखें। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्कूल एवं कॉलेज के आसपास आपराधिक तत्वों पर लगाम कसने के लिए सूचना तंत्र विकसित करें, निगरानी तंत्र को और तेज करें और ऐसे चिन्हित स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण के लिए पुलिस के साथ अन्य विभागों को भी जोड़ा जाए। पुलिस एवं प्रशासन खुद के सूचना तंत्र से जानकारी लेकर अपराधों पर अंकुश लगाएं। नगरीय निकाय और पंचायतें पुलिस के सुझाव के अनुसार सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध कराएं। महिला अपराधों के संबंध में काउंसलिंग करें। अन्य सामाजिक संगठनों को भी इस काम से जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन जिलों में शासकीय अमले पर हमले होने की अधिक घटनाएं होती हैं, वहां कलेक्टर-एसपी अन्य विभागों के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय कर कार्यवाही करें, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटें। घटना की वजह पता कर उसका समुचित समाधान भी करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में खाद-बीज के वितरण की व्यवस्था में भी पुलिस एवं जिला प्रशासन सामंजस्य से काम करें। किसानों को किसी तरह की समस्या नहीं आनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ड्रग्स के अवैध कारोबार एवं नशे पर अंकुश लगाने के लिए पड़ौसी राज्यों के साथ समन्वय करते हुए हर स्तर पर नशे को प्रतिबंधित किया जाए। इसी कड़ी में कोरेक्स कफ सिरप के अतिशय उपयोग को भी नियंत्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि ड्रग एवं अन्य नशे के पदार्थ के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने के लिए इंडस्ट्रियल बेल्ट में कलेक्टर-एसपी तालमेल करके बारीक निगाहे रखें। इनका लगातार निरीक्षण होता रहे। कोरेक्स को कैसे कंट्रोल किया जाए, इसके लिए उच्च स्तर पर विचार कर समाधान निकालें। शेड्यूल एच ड्रग्स ओवर द काउंटर ना बिकें और सभी दवाइयों का हिसाब भी फार्मासिस्ट अनिवार्य रूप से रखें। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था मजबूत करते हुए अपराधों में संलिप्त आदतन अपराधियों की जमानत निरस्त की जाएं। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय मॉनिटरिंग सेल के माध्यम से जिले में आदतन अपराधियों की जमानत निरस्तगी की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों के खिलाफ भी कार्रवाई में तेजी लाएं। ऐसे अपराध न होने पाएं, इसके लिए जनजागृति अभियान चलाएं। रोड सेफ्टी प्रोटोकॉल्स का पालन कराकर रोड एक्सीडेंट्स रोकने के लिए भी भरसक प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कानून … Read more

जन कल्याण को लेकर कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुई गहन चर्चा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

जिलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा धार्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा से रोजगार सृजन की दिशा में करें प्रयास जिलों की बंद औद्योगिक इकाइयों के प्रकरणों का हो शीघ्र निराकरण स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना बनायें। ऐसे प्रयास हों कि जिले में उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर सृजित हों, जिससे जिले आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करें और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी रोजगार से जोड़ने की बात कही जिससे युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हों। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में "रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन" सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की जेसी मिल, रतलाम की सज्जन मिल और उज्जैन की विनोद मिल से संबंधित समस्याओं का समाधान जिस तत्परता से किया गया है उसी तरह अन्य जिलों में बंद औद्योगिक इकाइयों का भी शीघ्र निराकरण किया जाए। मुरैना जिले की कैलारस स्थित शुगर मिल से जुड़े मामले का समाधान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में कलेक्टर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलों की सक्रियता और विभागों के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का उपयोग कर लैंड बैंक विकसित किए जाएं। जिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए जिससे स्थानीय उत्पादन और विपणन गतिविधियों में वृद्धि हो। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र कुमार सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा एमएसएमई विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन दिया गया। राज्य सरकार के वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित, औद्योगिक और रोजगार-समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि जिला निवेश सुविधा केंद्र (IFC) को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाया जाए। औद्योगिक भूमि की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा विभिन्न विभागों द्वारा समयबद्ध अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कौशल समिति को सक्रिय कर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वैकल्पिक रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए। उद्योगों को पीएम विश्वकर्मा और अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाए। कलेक्टर्स से यह भी कहा गया कि एक जिला-एक उत्पाद के तहत उत्पादों की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन पर प्रभावी कार्य किया जाए। टैग किए गए उत्पादों को योजनाओं जैसे PMFME और DEH-OSOP से जोड़ा जाए और एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा ई-कॉमर्स माध्यमों से जोड़ा जाए। बंद रेशम केंद्रों का पुनर्जीवन कर खादी, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपकरण स्वीकृति और वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सहयोग के क्षेत्र में DLCC एवं DLRC बैठकों का समय पर आयोजन करने, जन धन, मुद्रा और अटल पेंशन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा वार्षिक लक्ष्य पूर्ति हेतु बैंकों की सक्रिय भूमिका तय करने के निर्देश भी दिए गए।

नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बनाएं कार्ययोजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कमजोर वर्ग की आवास योजनाओं पर दें विशेष ध्यान मेट्रोपालिटन सिटी के विकास पर संबंधित कलेक्टर्स दें अपने सुझाव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में नगरीय क्षेत्र के मुद्दों पर हुई चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विजन-2047 में आबादी के हिसाब से नगरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। उनकी मंशा के अनुरूप प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का विकास भी सुनियोजित तरीके से हो सके इसके लिये जिलों में भी वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर की पीएम स्वनिधि योजना और स्वच्छ वायु इन्डेक्स में उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी डेवलपमेंट के समय तैयार किये गये ईडब्ल्यूएस आवास आवंटन में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिये कि कलेक्टर्स इस पर शीघ्र निर्णय लेकर इनका शत-प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित कराएं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बने गीता भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन तैयार करने का निर्णय लिया है। यह भवन धार्मिक रूप से तैयार नहीं किये जा रहे हैं बल्कि इनका निर्माण आधुनिक टाउन हॉल के तौर पर किया जा रहा है। यह टाउन हॉल शहर की सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करें, साथ ही इनमें डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी हो। भवनों का निर्माण एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाये। धार्मिक स्थलों का तैयार हो मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सतना जिले में चित्रकूट के समग्र विकास के लिये कार्ययोजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर साडा (स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के साथ मिलकर चित्रकूट का विकास करें। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर समेत अनेक धार्मिक स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ नर्मदा परिक्रमा मार्ग का भी विकास किया जा रहा है। इन धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसलिये आवश्यक है कि इनका समग्र विकास निर्धारित समय में पूरा हो। टीडीआर में मुआवजा राशि का भुगतान जल्द हो शहरी क्षेत्रों में टीडीआर के तहत अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा दिया जा रहा है। इनमें शहरी क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि टीडीआर में अधिग्रहित भूमि के बदले संबंधित को मुआवजा राशि का भुगतान समय पर किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किये जाने पर जोर दिया। मेट्रोपालिटन सिटी का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में भोपाल इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र तैयार करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर्स प्लान तैयार करें कि कैसे रोजगार, औद्योगिकीकरण, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में मेट्रोपालिटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार बिजली,पानी और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिये हैं। मध्यप्रदेश विजन@2047 नगरीय विकास एवं आवास के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने बताया‍कि वर्ष 2047 तक प्रत्येक नागरिक को सर्वसुविधा युक्त पक्का आवास और शहरों को मलिन बस्ती मुक्त किया जाना है। स्वच्छता के मामले में अपशिष्ट प्रबंधन, नवकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी का समावेश किया जाना है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन द्वारा सुरक्षित एवं सतत जल आपूर्ति और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 में 8 लाख 69 हजार 531 आवास तैयार किये जा चुके हैं। योजना में 76 हजार 300 से अधिक आवास पूर्ण किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स अधूरे पड़े आवासों को जल्द पूरा करें। प्रदेश में पीएमएवाय 2.0 में 10 लाख आवास तैयार किये जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेश के 100 प्रतिशत आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। निकायों को 7115 कचरा संग्रहण वाहन दिये गये हैं। क्लीन एयर प्रोग्राम में अच्छे काम के लिये इंदौर, जबलपुर और देवास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना में वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। कॉन्फ्रेंस में एयर क्वालिटी सुधार कार्यक्रम पर इंदौर कलेक्टर, पीएमएवाय पर ग्वालियर कलेक्टर और जल संवर्धन में श्रेष्ठ कार्य पर कलेक्टर खंडवा ने अपने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतियां दी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन

  प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल : कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव श्री संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।  

डॉ. मोहन यादव बोले – जनता का भरोसा ही हमारी ताकत, इसे बनाए रखना सबसे जरूरी

जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी, हमें यह विश्वास बनाए रखना है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में हमने स्थापित की है जवाबदेह शासन व्यवस्था सुशासन और समावेशी विकास पर दिया बल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस का शुभांरभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी लोक सेवकों से प्रदेश के समग्र और समावेशी विकास के लिए प्राण-प्रण से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जनता के कल्याण के लिए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर मिशन मोड में कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में जवाबदेह शासन व्यवस्था स्थापित की है। लोक सेवकों का यह दायित्व है कि वे अपनी प्रतिभा, लगन, क्षमता और समर्पण के साथ जनता तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाएँ। हम सब देश और समाज के विकास का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कलेक्टर्स-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ के बाद अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मुख्य सचिव  अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन  संजय कुमार शुक्ल ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे विकास और कल्याण की किरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन का अंतिम उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण की किरण पहुंचाना है। राज्य सरकार सबके साथ, सबके लिए खड़ी है। जनता में यह विश्वास पैदा करना ही सुशासन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। प्रदेश में जनता का विश्वास हमें मिल रहा है। यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और हमें यह जनविश्वास हर हाल में बनाए रखना है। योजनाओं का लाभ और अधिक शीघ्रता से मिले जनता को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में इसी बात पर मंथन किया जाएगा कि शासन व्यवस्था को और अधिक सहज, सरल, बेहतर, पारदर्शी और विकेंद्रीकृत कैसे बनाया जाए, जिससे योजनाओं का लाभ और अधिक शीघ्रता से जनता तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में तैनात अधिकारी अपने काम और नवाचार से अपनी पहचान कायम करें। किसी भी ज्वलंत विषय पर पूरी दक्षता और तथ्यों के साथ अपनी बात रखें। स्थानीय जनता, मीडिया और जनप्रतिनिधियों से निरंतर आत्मीय संवाद बनाए रखें। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि परमात्मा ने यदि हमें समाज के लिए काम करने का दायित्व दिया है तो हमें एक विनम्र विद्यार्थी की तरह इस दायित्व का निर्वहन करना ही चाहिए। हर दिन, हर तरीके से नई चीजें सीखें और अपनी दक्षता और अनुभव से उनका बेहतर क्रियान्वयन करें, लक्ष्य यह रखें कि नवाचार का समाज को अधिकतम लाभ मिले। गुड गवर्नेंस से ग्रेट रिजल्ट की ओर हों अग्रसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि लोकतंत्र एवं जनकल्याण में हम सबकी महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट भूमिका है। फील्ड में तैनात अधिकारियों की बड़ी जिम्मेदारी है कि जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस से हम ग्रेट रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं और हम सभी को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने परफॉर्म, रिफार्म एंड ट्रांसफॉर्म के रूप में जन सेवा का मंत्र दिया है। आप सभी इस मंत्र को आत्मसात करते "विकसित और आत्मनिर्भर भारत" के निर्माण के लिए "विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स ऐसे जनहितैषी कार्य करें, जो आने वाले समय में जिले की जनता को याद रहें। अपने कार्यकाल का एक-एक क्षण जन-कल्याण में लगाएं और प्रदेश को नई ऊंचाईयों में ले जाएं। उन्होंने कहा कि नवाचार ऐसे हों, जो दीर्घकालिक हों। जिस विभाग से संबंधित नवाचार हो, उसकी पूरी कार्ययोजना विभाग से अनुमोदित हो, जिससे वह नवाचार स्थाई हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में हमारे प्रदेश ने उत्कृष्ट कार्य किया है। दाल, मसाले एवं टमाटर उत्पादन में हम देश में प्रथम स्थान पर हैं। गेहूं, मक्का और मिर्च में दूसरे स्थान पर हैं। दुग्ध उत्पादन में हमारा चौथा स्थान है। अब हम विभिन्न प्रयासों से प्रदेश को दुग्ध कैपिटल बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। दुग्ध उत्पादन में हमारा देश में योगदान 9 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक ले जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हम किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहे हैं, इस लक्ष्य का मार्ग सिंचाई ही है। सभी अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही सिंचाई परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर ध्यान देने के साथ सिंचित रकबा बढ़ाने की दिशा में प्रयास और नवाचार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य की पूर्ति करते हुए प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को उच्च गुणवत्ता रोजगारोन्मुख एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। हमारा लक्ष्य न केवल शत प्रतिशत साक्षरता है बल्कि शालाओं में नामांकन दर को बढ़ाना भी अति आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को गुड गवर्नेस लाभ दिलाने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है, तो वह भी जरूर करें। जिलों में तैनात सभी अधिकारी लगातार दौरे करें, किसी गांव में रात्रि विश्राम भी करें। फील्ड दौरों में छात्रावास, स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन दुकान, निर्माण कार्यों, हॉस्पिटल आदि का औचक निरीक्षण भी करें। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सभी फील्ड अधिकारी जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता से सतत संवाद अनिवार्य रूप से बनाए रखें। आमजन से मिलने की व्यवस्था और जनसुनवाई को और भी बेहतर बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में कई बार स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया में नकारात्मक खबरें छपती हैं, इनको वेरीफाई कर इनका तत्काल खंडन किया जाना चाहिए। आज सोशल मीडिया की पहुंच जन-जन तक है। शासन के द्वारा किए जा रहे लोक-कल्याणकारी कार्यों को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स-कमिश्नर से आह्वान करते हुए कहा सिंहस्थ-2028 मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सम्पन्नता को दुनिया के सामने लाने का बहुत बड़ा अवसर है। सिंहस्थ में आने वाला हर श्रद्धालु मध्यप्रदेश के वैभव को देखे, इसके … Read more

उद्योगों की साझेदारी से मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उद्योगों की साझेदारी से मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प – उद्योगों के सहयोग से मध्यप्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे "कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री" कार्यक्रम में प्रदेश के 52 उद्यमी हुए सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को विकास की दृष्टि से सबसे अव्वल राज्य बनाने में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार और प्रदेश के नागरिकों के साथ उद्योग जगत के प्रयास आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण में सहयोगी होंगे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए वर्ष 2014 के बाद दृश्य बदल दिया है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने के लिए ऐसी नीतियों का निर्माण किया गया है जो विकास के द्वार खोलती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम होटल कोर्टयार्ड मैरियट में "कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री" कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के 52 उद्यमियों को सम्मानित कर रहे थे। कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार, रियल स्टेट और सेवा क्षेत्र में कार्य करने वाले उत्कृष्ट लीडर सम्मानित किए गए। यह कार्यक्रम नवदुनिया-नईदुनिया (दैनिक जागरण समूह) ने आयोजित किया, जो संस्थान के आयोजन का 13वां संस्करण था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित उद्यमियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूरे विश्व के समक्ष यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री  मोदी की कार्य दक्षता, सजगता, नवाचार और कदम से कदम मिलाकर चलने की विशेषताओं से भारत की नई पहचान बन रही है। प्रधानमंत्री जी के चिंतन का दायरा व्यापक है। उन्होंने जीएसटी में कमी करने के साथ ही कर व्यवस्थाओं को सरल बनाने का ठोस कार्य किया है। यही कारण है कि आयकर का विवरण देने में उद्यामियों से लेकर आम नागरिकों तक सभी को बेहतर नीतियों का लाभ मिल रहा है। तकनीक का आवश्यक उपयोग भी हो रहा है। उद्यमशील लोगों को प्रोत्साहन मिल रहा है। उद्योगों को कर्म आधारित कार्य पद्धति अपनाने और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दिलवाने के लिए समर्थ बनाया जा रहा है। पूर्व के वर्षों में जो अव्यवस्थाएं थीं, वे सुव्यवस्था में बदल चुकी हैं। उद्योग जगत के बिना विकास की कल्पना नहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग जगत के बिना राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उद्यमी अलग-अलग सेक्टर्स में नया और बेहतर कार्य कर रहे हैं। उनके नई दुनिया बनाने के प्रयत्नों में नई दुनिया जैसे समाचार पत्रों से मिलने वाला प्रोत्साहन भी मायने रखता है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग स्थानों के उद्यमियों को कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री कार्यक्रम के अंतर्गत सम्मानित किए जाने का कार्य महत्वपूर्ण और सराहनीय है। ऐसे विजनरी लीडर जो समर्पण, नवाचार और नेतृत्व से समाज के साथ ही अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। जीवन में अच्छा और सच्चा कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ाना हम सभी का दायित्व है। प्रारंभ में जागरण समूह के कार्यकारी अध्यक्ष  देवेश गुप्त और सीईओ  संजय शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ.यादव का स्वागत किया। राज्य संपादक  सद्गुरु शरण अवस्थी ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर नाद युग गुरूकुल इंदौर के कलाकारों ने नृत्य गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में  आशीष अग्रवाल, जनसम्पर्क आयुक्त  दीपक सक्सेना भी उपस्थित थे।  

महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के दिव्य ऋषि हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के दिव्य ऋषि हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि वाल्मीकि को बताया भारतीय संस्कृति का आलोक स्तंभ प्रदेशवासियों को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर श्रद्धालु नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति और मानवता की क्रूरता पर विजय का प्रतीक है। वे अद्वितीय विद्वान ऋषि एवं सहृदय कवि थे, जिन्होंने भारतीय समाज में पूजनीय स्थान अर्जित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभ्यता, धर्म एवं आध्यात्म का अद्वितीय समन्वय भारत के अतिरिक्त और कहीं नहीं मिलता। यही कारण है कि 'विश्व गुरु' की उपाधि से सम्मानित भारत, सनातन धर्म की महानता का दिव्य प्रतीक है। महर्षि वाल्मीकि महिमामयी भारतीय सनातन परंपरा के प्रणेता, प्रहरी, प्रचारक ऋषि भारतीय संस्कृति के गौरव हैं। महर्षि वाल्मीकि के जीवन में परिवर्तन की शुरुआत तब हुई, जब उनकी भेंट महान ऋषि नारद से हुई। नारद जी ने उन्हें 'राम' नाम का जप करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि के महान कार्यों में से एक है। इसमें उन्होंने भगवान राम के जीवन से जुड़े आदर्शों को विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया है। उनके रचित 23 हजार से अधिक श्लोकों से युक्त रामायण, भारतीय संस्कृति और आत्म संयम की शिक्षा प्रदान करता है। महर्षि वाल्मीकि ने न केवल रामायण की रचना की, बल्कि माता सीता को अपने आश्रम में शरण दी और उनके पुत्रों लव-कुश को ज्ञान प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने बोध कराया कि जीवन को समझने की सबसे सुंदर यात्रा है रामायण का श्रवण करना। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से यह दिखाया कि सच्चा धर्म सबको साथ लेकर चलता है क्योंकि इसमें करुणा, न्याय और समर्पण शामिल होता है। उन्होंने भगवान राम के जीवन के माध्यम से मानव समाज को मर्यादा, परिवार, समाज और कर्तव्य के महत्व का बोध कराया। महर्षि वाल्मीकि ने यह संदेश दिया कि यदि मनुष्य सच्चे मन से प्रयत्न करे, तो अंधकार से भी प्रकाश की राह बनाई जा सकती है। यही कारण है कि उन्हें आदिकवि कहा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का दर्शन बहुत सरल है — किसी के साथ अन्याय मत करो, और यदि किसी के जीवन में प्रकाश लाने का अवसर मिले तो पीछे मत हटो। यही भाव एक बेहतर समाज की नींव है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को यह सिखाया कि सम्मान किसी जाति या स्थिति से नहीं, बल्कि कर्म और आचरण से मिलता है। यह शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने यह सिखाया कि हर व्यक्ति के भीतर अच्छाई का दीप जल सकता है। यही कारण है कि उनका जीवन हर युग में मार्गदर्शक बना रहेगा। वाल्मीकि जी के आदर्शों से प्रेरित होकर हमें भी यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में किसी के साथ भेदभाव न होने दें। हर घर में शिक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का दीप जले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि हमारे लिए केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व ही नहीं, वे उस चेतना के प्रतीक हैं जो हर मनुष्य के भीतर मौजूद है। जब तक हम उनके आदर्शों को जीवन में उतारते रहेंगे, समाज आगे बढ़ता रहेगा और मानवता की यह ज्योति जलती रहेगी।