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सरकार का बड़ा फैसला, न्यायिक आदेश के बिना रजिस्ट्री पर प्रतिबंध को नहीं माना जाएगा वैध

भोपाल  प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है।  बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता।  कलेक्टरों को निर्देश  आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है।  संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी  इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है। वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है। कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है। रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है। प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा। विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।     खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।     रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।     रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।     रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है। कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है। इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, … Read more

अफसरशाही छोड़ जमीन पर उतरे रीवा कलेक्टर, नॉन एसी बस से गांव पहुंचकर सुनी लोगों की समस्याएं

रीवा  मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप ग्रामीणों की समस्याओं का गांव में ही निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने गंगेव जनपद पंचायत के टिकुरी गांव में ग्राम चौपाल आयोजित की। इस दौरान उन्होंने 42 विभागीय अधिकारियों के साथ पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर सूर्यवंशी नॉन एसी बस से कलेक्ट्रेट से टिकुरी पहुंचे। ग्राम पंचायत प्रांगण में आयोजित चौपाल में राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए सीमांकन में देरी पर नाराजगी जताई और नायब तहसीलदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र नियमित न खुलने की शिकायत पर संबंधित सुपरवाइजर को निलंबित करने तथा सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चौपाल में ग्रामीणों द्वारा उठाए गए रास्ता विवाद को तत्काल सुलझाने और सड़क चौड़ीकरण के निर्देश भी कलेक्टर ने दिए, ताकि आवागमन सुगम हो सके। उन्होंने निर्देशित किया कि टिकुरी गांव में शिविर लगाकर विभिन्न विभागों के अधिकारी समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करें। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन हितग्राहियों ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया, उनके आवास निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए।   कलेक्टर ने कहा कि उनका उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को भी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की हिदायत दी। नल-जल योजना के सुचारू संचालन में लापरवाही मिलने पर पीएचई उपयंत्री और रोजगार सहायक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरपंच और जनपद सीईओ को योजना जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने एक स्वर में पानी का शुल्क देने की सहमति भी जताई। विद्युत विभाग को घर-घर मीटर लगाने की कार्रवाई शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए। वहीं टंट्या मामा योजना के तहत पात्र हितग्राही को ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। कलेक्टर ने अंत में कहा कि यदि अब इस गांव से शिकायतें जनसुनवाई में आती हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर, जनपद सीईओ प्राची चतुर्वेदी सहित जिला एवं खंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

समय-सीमा बैठक में कलेक्टर सख्त, डीएमएफ कार्यों पर कड़ी निगरानी

समय-सीमा बैठक में कलेक्टर सख्त, डीएमएफ कार्यों पर कड़ी निगरानी 5 वर्षीय समग्र विकास योजना बनाने के निर्देश, प्रतिबंधित कार्यों पर स्पष्ट रोक मनेन्द्रगढ़/एमसीबी कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY-2024) के संशोधित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के तहत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि केवल वही परियोजनाएं स्वीकृत होंगी, जो सीधे तौर पर खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां के निवासियों को लाभ पहुंचाएं। व्यक्तिगत लाभ या योजना की मूल भावना के विपरीत किसी भी कार्य को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। बैठक में कई कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगाया गया। इनमें व्यायामशाला नवीनीकरण, मुर्गों की लड़ाई के लिए चबूतरा निर्माण, पंचायत उपयोग हेतु मोबाइल/वाहन क्रय, मूर्तियां, स्मारक, हेलीपैड, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, निजी औद्योगिक पार्क, राजनीतिक कार्यक्रम तथा अधिकारियों के लिए वाहन एवं मोबाइल खरीदी जैसे कार्य शामिल हैं। कलेक्टर ने सभी विभागों को 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना (Perspective Plan) तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि इसे 15 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए अलग विस्तृत योजना तैयार करने तथा 25-30 करोड़ रुपये के कार्यों को प्राथमिकता में शामिल करने को कहा गया। महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कर उनकी स्थिति सुधारने और हर वर्ष कम से कम 30 केंद्रों के निर्माण या उन्नयन का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने को कहा गया। पंचायत विभाग को जल संरक्षण के लिए चेक डैम निर्माण की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि प्रत्येक अधोसंरचना परियोजना में बिजली सुविधा अनिवार्य रूप से शामिल हो, ताकि परिसंपत्तियां पूर्णतः उपयोगी बन सकें। साथ ही सभी विभागों को अपने कार्यों की जानकारी नियमित रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण कार्यों में तेजी लाने को कहा गया। कलेक्टर ने प्रशासनिक व्यय को न्यूनतम रखते हुए अधिकतम राशि जनहितकारी कार्यों पर खर्च करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि लापरवाही या नियमों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आदेश या मज़ाक? कलेक्टर के फरमान की खुली धज्जियां, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

आदेश या मज़ाक? कलेक्टर के फरमान की खुली धज्जियां, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद बीपीएम सुलेमान खान को अब तक पद से नहीं हटाया जाना न सिर्फ आदेशों की अवहेलना है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गहरा दाग लगाता नजर आ रहा है। आखिर ऐसा क्या है कि कलेक्टर का सीधा निर्देश भी जमीन पर लागू नहीं हो पा रहा? क्या आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं, या फिर कहीं न कहीं कोई अदृश्य ताकत इस पूरे मामले को दबाने में लगी है? सवाल जो चुभ रहे हैं: किसके संरक्षण में हैं बीपीएम सुलेमान खान? क्या अब कलेक्टर के आदेश भी असरहीन हो चुके हैं? जिला स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी क्या किसी बड़े दबाव की ओर इशारा कर रही है? सूत्रों की मानें तो जिला स्वास्थ्य अधिकारी की रहस्यमयी चुप्पी इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रही है। आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित अधिकारी का पद पर बने रहना प्रशासनिक अनुशासन पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। जनता का गुस्सा, व्यवस्था पर अविश्वास: अब आम जनता भी सवाल उठाने लगी है, क्या जिले में “सेटिंग और संरक्षण” का खेल इतना मजबूत हो चुका है कि आदेश भी बेबस नजर आ रहे हैं? या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई से बच रहे हैं? अब नजर कलेक्टर पर: यह मामला अब सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासन की साख दांव पर है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कलेक्टर इस चुनौती को कैसे लेते हैं, क्या सख्त कार्रवाई होगी या फिर आदेश फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल, सवाल ज्यादा हैं और जवाब नदारद… और यही इस पूरे मामले को और भी विस्फोटक बना रहा है।

बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 14 जिलों के कलेक्टर बदले, भोपाल की जिम्मेदारी प्रियंक को

भोपाल मध्यप्रदेश में गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मोहन सरकार ने 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इस बदलाव में प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि वर्तमान कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव पद के साथ आयुक्त सह-संचालक, नगर एवं ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग आयोग में सचिव बनाया गया है। 

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

बलौदाबाजार : लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों का समय सीमा में करें निराकरण-कलेक्टर

बलौदाबाजार : लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों का समय सीमा में करें निराकरण-कलेक्टर जल संचयन हेतु समुदाय की सहभागिता पर जोर राजस्व शिविर में पटवारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के दिए निर्देश बलौदाबाजार कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने मंगलवार को साप्ताहिक समय -सीमा की बैठक में  राज्य और केंद्र शासन की.विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने भूमिगत जल के रिचार्ज हेतु सभी शासकीय भवनों  में सोखता गढ्ढा और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की संरचनाएँ निर्मित करने और जन भागीदारी से जल संचयन के कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया कलेक्टर ने  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि नहरों के आसपास भी ऐसी संरचनाएं निर्मित करें जो पानी रोककर भूमिगत जल रिचार्ज में सहायक हों।उन्होंने खेतों के सबसे निचले क्षेत्र में भी जल संरक्षण की संरचना बनाने के निर्देश दिए हैं। श्री शर्मा ने आंगनवाड़ी,शासकीय और निजी स्कूलों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता पिट निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में जन जागरूकता हेतु अधिक से अधिक प्रचार प्रस्ताव के साथ  आम नागरिकों से इस कार्य में सहयोग की अपील भी की है । जल संचयन की संरचनाओं के गुणवत्ता पूर्ण निर्माण में बाद उसकी फोटो और अनिवार्य जियो टैगिंग के भी निर्देश उन्होंने दिए।  बैठक में उन्होंने लोक सेवा गारंटी के तहत विभिन्न प्रकरणों के समय सीमा में निराकरण और पोर्टल में तत्काल एंट्री के निर्देश भी दिए हैं,ऐसा  न करने पर संबंधित अधिकारी -कर्मचारी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी । उन्होंने राजस्व पखवाड़े में पटवारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश देते हुए मामलों का ऑन द स्पॉट निराकरण करने को कहा है। श्री शर्मा ने जनगणना के कार्यों को संवेदनशीलता और कर्मठता से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा जनगणना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासकीय ज़मीन पर अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने भूराजस्व संहिता के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिए हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूमिहीन नागरिकों को भी लाभान्वित किया जाना है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को पंचायत स्तर पर आबादी भूमि का चिन्हांकन कर भूमिहीनों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने जनसुनवाई में 38 आवेदकों की सुनी समस्याएं

कलेक्टर ने जनसुनवाई में 38 आवेदकों की सुनी समस्याएं  अनूपपुर  जिला स्तरीय जनसुनवाई मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में संपन्न हुई। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 38 आवेदनों पर जनसुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी।  जनसुनवाई के दौरान तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम श्यामदुवारी निवासी श्रीमती वंशी कुमारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग हेतु भूमि का अधिग्रहण करने पर मुआवजा राशि दिलाए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम पोंड़ी खुर्द निवासी केशव प्रसाद पटेल ने पीएम कृषक मित्र सूर्य योजना का लाभ दिलाए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम छोहरी निवासी श्यामलाल ने फौती नामांतरण कराए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम कांसा निवासी सूर्यबली विश्वकर्मा ने सीमांकन कराए जाने, तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम लखौरा निवासी बुजुर्ग श्रीमती कुंवारिया पनिका ने भरण पोषण अधिनियम के तहत आर्थिक सहायता प्रदाय किए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम धिरौल (डोंगराटोला) निवासी श्रीमती दुर्गा सिंह ने स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता प्रदाय किए जाने के संबंध में आवेदन दिए।

शाजापुर कलेक्टर को HC की तीसरी फटकार, नाजिर की वेतनवृद्धि रोकने पर स्टे, 15 दिन में हलफनामा जमा करने का आदेश

शाजापुर शाजापुर। कलेक्टर के आदेश पर एक बार फिर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है. हाईकोर्ट जज ने कलेक्टर रिजु बाफना के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा- शाजापुर कलेक्टर को कुछ पता नहीं, नियमों को जानती नहीं और कुछ भी पास कर देती है. कुछ ही दिनों में कलेक्टर को यह तीसरी फटकार हाईकोर्ट से लगी है. इसके पहले भी हाईकोर्ट कलेक्टर के आदेशों पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है. इस बार कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि से जुड़ा मामला है. कलेक्टर कार्यालय में वाहन स्टैंड को लेकर कलेक्टर शाजापुर ने वाहन स्टैंड ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए थे. ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसने कर्मचारी जयंत बघेरवाल पर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए।  व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दरअसल कलेक्टर ने बिना जांच के ही 27-28 फरवरी 2025 को दो आदेश जारी किए, पहले आदेश में बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि रोकने और दूसरे आदेश में उन्हें एसडीएम कार्यालय गुलाना अटैच किया गया. वेतन वृद्धि रोकने के आदेश पर पहले बघेरवाल ने कमिश्नर उज्जैन के यहां अपील की. कमिश्नर ने भी कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा, उसके बाद बघेरवाल ने हाईकोर्ट की शरण ली. इन्दौर हाईकोर्ट ने 25 मार्च को स्टे आदेश जारी करते हुए कलेक्टर शाजापुर से 15 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है।  कलेक्टर को कानून पता नहीं है हलफनामे में कलेक्टर शाजापुर को स्पष्ट करना है किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं. स्टे आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट लिखा है कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लघंन किया है. बिना किसी विभागीय जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी कर दिए. हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा शाजापुर कलेक्टर कुछ भी आर्डर पास कर देती है, आबकारी अधिकारी के मामले में भी ऐसा ही किया था। कलेक्टर को कानून पता नहीं है।  तीन मामले पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी विगत दिनों सबसे पहले हाईकोर्ट ने हाट मैदान स्थित भूमि को लेकर याचिकाकर्ता महेश गुप्ता की याचिका पर कलेक्टर शाजापुर के खिलाफ टिप्पणी की थी. दूसरा मामला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के निलंबन का था, जिसमें भी हाईकोर्ट ने निलंबन को गलत ठहराते हुए उन्हें फिर से बहाल किया. तीसरा मामला कर्मचारी जयंत बघेरवाल का है।  

कलेक्टर ने लिया सख्त एक्शन: RI और पटवारी निलंबित, तहसीलदार को दी जबरदस्त फटकार, रेवेन्यू डिपार्टमेंट शून्य

सतना  मध्यप्रदेश के सतना में एक बड़ा एक्शन हुआ है। जिले मे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरआई और पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि तहसीलदार को जमकर फटकार लगाई है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने सिंघम अवतार लेते हुए ये एक्शन किया है । कलेक्टर के इस एक्शन से विभाग में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर की कड़ी फटकार, बोले- रेवेन्यू डिपार्टमेंट शून्य हो गया, कोई काम नहीं कर रहा दरअसल कलेक्टर ने जिले के राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर नाराजगी जाहिर करते हुए कडे और कठोर शब्द बोल दिए। कलेक्टर की नाराजगी का आलम क्या था इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि कलेक्टर ने  यहां तक कह दिया कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट शून्य हो गया है। कोई काम नहीं कर रहा है , भू-माफियाओं से मिलीभगत अलग देखने को मिल रही है। फिर कलेक्टर ने कोई रहम न करते हुए गुस्से के अनुसार बड़ा एक्शन लेते हुए (RI) आरआई और  पटवारी पर गाज गिराते हुए सस्पेंड कर दिया और साथ ही तहसीलदार को भी जमकर फटकार की घुट्टी पिलाई है। इस रुप को देखकर कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। बेहद गुस्से में दिखे भड़के कलेक्टर सतीश कुमार कलेक्टर सतीश कुमार अधिकारियों के काम किस कदर आहत थे इसका पता इससे चलता है कि उन्होंने लापरवाही पर कड़े शब्द बोले। कलेक्टर ने कहा कि यहां के तहसीलदार कले•क्टर के कहने के बाद भी पटवारी से काम नहीं करवा पा रहे हैं, लोग कहीं भी मकान बना रहे हैं और अधिकारियों ने जैसे मौन साध रखा हो। कलेक्टर सरकारी जमीन के गलत सीमांकन पर कोठी तहसीलदार पर  इस कदर गुस्सा हुए कि पटवारी और आरआई को निलंबित करने के आदेश दे दिए।