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उरई औद्योगिक कॉरिडोर से बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर, जालौन के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

उरई औद्योगिक कॉरिडोर: जालौन और बुंदेलखंड के विकास का नया अध्याय उरई  क्या आने वाले वर्षों में उरई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक बन सकता है? उरई के पास प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संभावना लेकर आई है।  कहाँ विकसित होगा औद्योगिक कॉरिडोर? प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) उरई तहसील के डकोर, कुसमिलिया और टिमरो गांवों के आसपास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निकट विकसित करने की योजना है। उपलब्ध परियोजना दस्तावेजों के अनुसार, इसके लिए लगभग 1,677 एकड़ यानी करीब 679 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है। इस परियोजना से जुड़ी भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाएँ भी महत्वपूर्ण चरण हैं।  बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनेगा विकास की ताकत औद्योगिक कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी एक्सप्रेसवे के निकट स्थिति है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से भविष्य में कच्चे माल की ढुलाई, तैयार उत्पादों की आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को सुविधा मिल सकती है। इससे जालौन की औद्योगिक पहचान मजबूत करने की संभावनाएँ बनती हैं। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद यदि परियोजना आगे बढ़ती है और उद्योग स्थापित होते हैं, तो मशीन ऑपरेटर, तकनीशियन, ड्राइवर, अकाउंटेंट, सुरक्षा कर्मचारी, वेयरहाउस कर्मचारी और अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी पदों पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।  किन क्षेत्रों में खुल सकते हैं अवसर? इस तरह के औद्योगिक क्लस्टर में विनिर्माण इकाइयों, कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और परिवहन सेवाओं की संभावनाएँ हो सकती हैं। हालांकि, कौन-कौन सी कंपनियाँ यहाँ आएँगी, इसकी अंतिम सूची और निवेश की पुष्टि होने के बाद ही स्पष्ट होगी।  उरई के व्यापार और प्रॉपर्टी को क्या लाभ हो सकता है? औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ने पर आसपास के क्षेत्रों में किराये के मकानों, भोजनालयों, वाहनों की मरम्मत, निर्माण सामग्री और अन्य स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को नए अवसर मिल सकते हैं। लेकिन जमीन की कीमतों में वृद्धि निश्चित नहीं है और निवेश से पहले कानूनी जाँच जरूरी है। महत्वपूर्ण तथ्य: औद्योगिक कॉरिडोर की योजना और भूमि संबंधी प्रक्रिया को वास्तविक निर्माण या उद्योगों के संचालन के बराबर नहीं समझना चाहिए। फिलहाल इसे भविष्य की विकास संभावना के रूप में देखना उचित है।  उरई और जालौन के लिए संदेश यदि यह परियोजना समय पर विकसित होती है, जरूरी बुनियादी सुविधाएँ तैयार होती हैं और उद्योग निवेश करते हैं, तो उरई की अर्थव्यवस्था, रोजगार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई दिशा मिल सकती है। आपकी राय में, क्या उरई को बुंदेलखंड का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए ऐसे कॉरिडोर सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक हैं?  

मोहाली IT सिटी-कुराली कॉरिडोर से आसान होगा सफर, 45 मिनट की होगी बचत

मोहाली. मोहाली और खरड़ के बीच रोजाना सफर करने वाले वाहन चालकों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। नेशनल हाईवे-205ए के आईटी सिटी-कुराली कॉरिडोर से यात्रा का समय 45 मिनट तक कम हो सकता है। 32.23 किलोमीटर लंबा यह मार्ग मोहाली और खरड़ के भीड़भाड़ वाले हिस्सों को बाईपास करता है। इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के बीच अंतरराज्यीय यातायात को भी वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) के अनुसार, इस कॉरिडोर का उद्देश्य व्यस्त शहरी हिस्सों से गुजरने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे आईटी सिटी, चंडीगढ़, खरड़, न्यू चंडीगढ़ और कुराली के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। खासकर उन वाहन चालकों को राहत मिल सकती है, जिन्हें रोजाना मोहाली और खरड़ के व्यस्त मार्गों से गुजरना पड़ता है। एनएचएआइ ने 15 अक्टूबर को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस कॉरिडोर के फायदे साझा किए थे। एयरपोर्ट रोड पर भी कम होगा यातायात का दबाव आईटी सिटी-कुराली कॉरिडोर का एक प्रमुख लाभ एयरपोर्ट रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होना है। चंडीगढ़-मोहाली क्षेत्र में एयरपोर्ट रोड महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस पर वाहनों की अधिक संख्या के कारण कई बार यात्रियों को जाम और देरी का सामना करना पड़ता है।

डोंगरगढ़ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, सुरक्षा के लिए बाइपास तक बनाया गया सेफ कॉरिडोर

भिलाई नगर. नवरात्रि पर्व के दौरान दुर्ग पुलिस ने डोंगरगढ़ दर्शन के लिए जाने वाले पैदल श्रद्धालुओं तथा वाहन चालकों के सुगम व सुरक्षित आवागमन हेतु कुम्हारी से अंजोरा बाईपास तक विशेष रूट निर्धारित कर कॉरिडोर बनाया गया है। इस दौरान 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक 03 पेट्रोलिंग वाहन लगातार 24 घंटे मार्ग पर तैनात रहेंगे। जो पेट्रोलिंग वाहन लाउडस्पीकर के माध्यम से पदयात्रियों को बाएं चलने और यातायात सुचारू रखने के निर्देश देंगे। पदयात्रियों की सुविधा व सुरक्षा हेतु मार्ग में अस्थायी पुलिस सहायता केंद्र भी बनाये जा रहे है। कुम्हारी टोल प्लाजा सिरसा गेट चौक डबरापारा तिराहा – खुर्सीपार तिराहा- पावर हाउस अंडरब्रिज मुर्गा चौक सेंट्रल एवेन्यू सेक्टर- 09 चौक -ठगड़ा बांध ओवरब्रिज जेल तिराहा गौरव पथ – गांधी पुतला – पटेल चौक गंजपारा पुलगांव चौक – शिवनाथ नदी ब्रिज -अंजोरा बाइपास – राजनांदगांव होते हुए डोंगरगढ़ जाएंगे। वहीं दुर्ग शहर एवं सेक्टर एरिया की यातायात व डायवर्शन व्यवस्था की है। पावर हाउस अंडरब्रिज से मुर्गा चौक / सेंट्रल एवेन्यू की ओर जाने वाले सभी चार पहिया वाहनों को फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा और दुर्ग से सेंट्रल एवेन्यू की ओर आने वाले चार पहिया वाहनों को भी सेक्टर 09 चौक से फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड में डायवर्ट किया जाएगे। वहीं दुर्ग शहर (रात्रि नो एंट्री एवं बस, डायवर्शन भी किया है। भारी / मध्यम वाहन प्रतिबंधितः रात्रि के समय शहर के भीतर मध्यम एवं भारी वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र पुलगांव चौक, पोटिया चौक, महाराजा चौक, जेल तिराहा, गुरुद्वारा तिराहा, धमधा रोड, नयापारा से दुर्ग शहर की ओर ) गंजपारा दुर्गा पंडाल व्यवस्था में गंजपारा दुर्गा पंडाल के पास रात्रि में पुलिस लाइन एवं गंजपारा से आने वाले सभी दो पहिया व चार पहिया वाहनों को गंज मंडी के पीछे से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं बस डायवर्जन में रात्रि के समय पुलगांव चौक से आने वाली सभी बसों को महाराजा चौक- जेल तिराहा होते हुए बस स्टैंड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। इसी प्रकार दुर्ग बस स्टैंड से पुलगांव की ओर जाने वाले बस इसी मार्ग का उपयोग करेंगे।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में 5 साल में 20 हजार करोड़ का निवेश, विकास की नई दिशा

इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है। इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।   इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।   कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।