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होमगार्ड सुनील कुमार पर कार्रवाई, वीडियो सामने आने के बाद जांच तेज

 गोरखपुर यूपी के गोरखपुर के एक थाने में बैठकर खुलेआम घूस लेते होमगार्ड का वीडियो वायरल होने पर पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया है। पता चला है कि पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर यह पैसा लिया जा रहा था। वीडियो पीपीगंज थाने के अंदर की थी। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो सामने आने के बाद एसपी नार्थ ने जांच शुरू करा दी है। सीओ कैम्पियरगंज की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी को सस्पेंड कर दिया। दरअसल, घूसखोरी के मामले में पब्लिक जागरूक हो गई है। घूसखोरों को पैसा देने के साथ उनका वीडियो भी बना रही है। पुलिसवालों को भी यह पता है इस वजह से पैसे की वसूली के लिए होमगार्ड या अन्य को वह जिम्मेदारी सौंप रखी है। रविवार को पीपीगंज थाने में तैनात होमगार्ड सुनील कुमार का वीडियो सामने आया। कुर्सी पर बैठा होमगार्ड पैसा लेकर जेब में रख रहा है। पता चला कि पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती ने उसे यह जिम्मेदारी दी थी। वीडियो सामने आने बाद सीओ कैम्पियरगंज अनुराग सिंह ने थाने पर पहुंच कर जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को दे दी है। जिसके बाद एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने होमगार्ड को थाने से हटाने के साथ ही उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए कमांडेंट को पत्र लिखा है, वहीं पासपोर्ट का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही थाने में हो रही इस वसूली में और किन-किन लोगों की भूमिका है इसकी भी जांच भी शुरू करा दी है। वीडियो पर हो चुकी है कार्रवाई नौसढ़ इलाके में एक ट्रैफिक सिपाही का भी वीडियो सामने आया था जिसमें डीसीएम चालक उसके सामने गिड़गिड़ा रहा था। एसएसपी ने ट्रैफिक सिपाही को निलम्बित कर दिया था। पहले भी हुई है कार्रवाई पूर्व एसएसपी गौरव ग्रोवर के थाने में निरीक्षण के दौरान भी पासपोर्ट के मामले में पैसा लेने की शिकायत मिली थी। तत्कालीन एसएसपी ने पासपोर्ट रजिस्ट्रर पर दर्ज एक नम्बर पर फोन कर पूछा आप का पासपोर्ट मिल गया है कोई खर्च तो नहीं लगा है। पीड़ित ने बताया था कि पांच सौ रुपये मुंशी जी को दिया था। गौरव ग्रोवर ने उस समय भी पासपोर्ट मुंशी को निलंबित किया था।

निगरानी विभाग का शिकंजा: सिकंदरा में कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार

जमुई जमुई जिले में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उनके साथ स्वच्छता प्रहरी सोनू चौधरी को भी टीम ने दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। शिकायतों के बाद बिछाया गया जाल जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग को लंबे समय से दोनों के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए विभाग ने गुप्त रूप से जाल बिछाया। छापेमारी में रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी योजना के तहत मंगलवार करीब 3 बजे टीम ने छापेमारी की। इसी दौरान दोनों आरोपी कथित रूप से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए। लेन-देन की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और मौके से नकद राशि भी बरामद की। पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई सिकंदरा थानाध्यक्ष विकास कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं, निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।  

किशनगंज में पुलिस अफसरों की जोड़ी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप

किशनगंज बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल इतना मजबूत था कि अवैध वसूली से लेकर उसके बंटवारे तक एक संगठित तंत्र के तहत काम किया जाता था। ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां बेनामी हो सकती हैं और इन्हें छिपाने के लिए तीसरे पक्ष के नाम का इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न गैर कानूनी धंधों को संरक्षण भी दिया जाता था। ईओयू के अनुसार दोनों घूसखोर पुलिस अधिकारी के बीच बीते तीन महीने में 2000 बार मोबाइल कॉल पर बातचीत हुई है।आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। बेनामी संपत्तियों का सत्यापन कर रही ईओयू ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीम के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गयी जमीन के भुगतान स्त्रोत आदि को लेकर जांच चल रही है। थानेदार से ईओयू कार्यालय में बुला कर पूछताछ होगी आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपित किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर लगे आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) उनसे पूछताछ करेगी। उनको नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पटना स्थित ईओयू कार्यालय बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के मुताबिक आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने की नोटिस दी जा सकती है। पूछताछ के दौरान उनको अपने पक्ष में बयान व दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। थानाध्यक्ष पर अपने सेवाकाल में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। अभिषेक निलंबित एसडीपीओ का राजदार किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की छानबीन के दौरान ही अभिषेक रंजन ईओयू के निशाने पर आये। छानबीन में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के राजदार हैं। उनका स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध हैं। उनके व्यापार को प्रश्रय देने के एवज में उनको नियमित रूप से कमीशन की राशि मिलती थी। यह राशि जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में निवेश की जाती थी।

भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: लाखों रुपये के घोटाले में तत्कालीन जनपद CEO गिरफ्त में

बलरामपुर जनपद पंचायत वाड्रफनगर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण मरकाम को पुलिस ने लाखों रुपये की शासकीय राशि हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बता दें कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। पूरा मामला वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013-14 में श्रवण मरकाम वाड्रफनगर जनपद पंचायत में CEO के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान कुटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि गबन का मामला सामने आया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। इस मामले में पूर्व में चार अन्य आरोपियों को भी जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश अभी जारी है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस प्रकरण को लेकर वाड्रफनगर पुलिस की जांच आगे भी जारी है। शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

भ्रष्टाचार पर ACB-EOW का शिकंजा, मुख्यमंत्री साय ने कहा— दोषियों को किसी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में रविवार सुबह एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर, बिलासपुर सहित कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। आबकारी और डीएमएफ घोटाले से जुड़े लगभग 18 ठिकानों पर दबिश दी गई है, जहां अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ACB-EOW की इस कार्रवाई पर बयान देते हुए कहा कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एजेंसियां जांच कर रही हैं और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी। जांच एजेंसी अपना काम कर रही है – अरुण साव उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दोनों मामलों में लंबे समय से इन्वेस्टिगेशन चल रही है। दोनों ही मामलों की जांच पहले से ही की जा रही है। जांच के आधार पर यह कार्रवाई हो रही है, जांच एजेंसी अपना काम कर रही है। बता दें कि ACB–EOW की टीम ने सुबह से ही कई जिलों में छापा मारा। आबकारी और डीएमएफ घोटाले से जुड़े ठिकानों में रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, कोंडागांव समेत विभिन्न जिले शामिल हैं। कहां-कहां हुई ACB-EOW की छापेमार कार्रवाई रायपुर – रामा ग्रीन कॉलोनी में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास और अमलीडीह स्थित ला विस्टा कॉलोनी में कारोबारी हरपाल अरोरा के ठिकानों पर। दुर्ग –  रिटायर्ड आबाकरी अधिकारी निरंजन दास के बेटे डॉ. अभिषेक दास के घर। बिलासपुर – शराब घोटाले से जुड़े अनिल टुटेजा के रिश्तेदार अशोक टुटेजा के घर। कोंडागांव – वर्ष 2019-20 में डीएमफ सप्लाई में शामिल रहे हैं कोणार्क जैन के घर। जगदलपुर – निरंजन दास के भाई चितरंजन दास के मैत्री संघ स्थित आवास। अंबिकापुर – पर्राडांड निवासी डॉक्टर तनवीर अहमद और सत्ती पारा निवासी अमित अग्रवाल के घर। बलरामपुर – कारोबारी मनोज अग्रवाल के घर।

सरकारी अफसर का फर्जीवाड़ा बेनकाब, एसीबी ने किया केस दर्ज

जयपुर भ्रटाचार के मामले में पहले ही ED और ACB के निशाने पर मौजूद राज्य सरकार की कंपनी RAJCOMP के सीनियर अफसर प्रद्युम्न दीक्षित पर एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अमर उजाला ने सबसे पहले इस महाघूस कांड में प्रद्युम्न दीक्षित के कारनामों का खुलासा किया था। इसमें दीक्षित ने एक प्राईवेट कंपनी को डीओआईटी के डाटा सेंटर में मैनपॉवर नियुक्त करने का काम दिया। इसके बाद इसी कंपनी में अपनी पत्नी पूनम दीक्षित को बतौर कंसलटेंट लगावा कर उसे लाखों रुपए का भुगतान कर दिया। अमर उजाला ने इस पूरी मनी ट्रेल का खुलासा दस्तावेजों के साथ किया था।  हालांकि अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद  मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले में डीओआईटी को जांच के निर्देश दिए। लेकिन महकमें के बड़े अफसरों ने  दीक्षित को मात्र 17 सीसी नोटिस देकर मामला रफा-दफा कर दिया। मामले में पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के सदस्य एडवोकेट टीएन शर्मा ने सरकार को रिप्रेंटेशन भी दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे दो बार मुख्य सचिव व दो बार डीओआईटी सचिव को रिप्रेजेंटेशन देकर मामले में कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मामला PC Act का बनता था। इस मामले में परिवादी अधिवक्ता डॉ टी एन शर्मा के अनुसार समान प्रकार के प्रकरण बहुत सारे अधिकारियों के है जिन्हें एसीबी और विभाग बचा रहा है। उन्होने कहा- रणवीर सिंह, आर सी शर्मा, लिंकवेल एनालॉजिक्स आदि प्रमुख घोटाले है जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एसीबी जांच की कर रही जांच एसीबी ने जांच के दौरान प्रद्युमन दीक्षित के तीन बैंक खातों का रिकॉर्ड जब्त किया। जांच में प्रद्युमन और पूनम का संयुक्त बैंक खाता एसबीआई तिलकनगर में मिला है। जिसमें जिसमें नियमित रूप से बड़ी रकम ट्रांसफर हो रही थी। जानकार सूत्रों के मुताबिक इनकी पत्नी कभी कार्यालय नहीं गईं। वहीं, फर्म AURIONPRO अप्रैल 2019 से एक निश्चित राशि पूनम के अकाउन्ट में लगातार ट्रांसफर कर रही है। वर्तमान में लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये प्रतिमाह AURIONPRO के जरिए पूनम के बैंक अकाउन्ट में ट्रान्सफर होते रहे। अमर उजाला के पास इस मनी ट्रेल के दस्तावेज भी मौजूद हैं। प्रद्युम्न ने अपनी पत्नी के जरिए कंपनी से अब तक करीब 50 लाख रुपये का बड़ा खेल किया है। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के सदस्य डॉ. टी.एन शर्मा(एडवोकेट) का कहना है कि यह काम पी.सी. एक्ट 1988 की धारा 13(1)(ए) के अंतर्गत criminal misconduct और धारा 409, 403 आईपीसी का अपराध कारित है।