samacharsecretary.com

डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, रकम क्रिप्टो में बदली

ग्वालियर भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त चिकित्सक 89 वर्षीय नारायण महादेव टिकेकर को 24 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने के नाम पर 2.52 करोड़ रुपये ठगने के मामले में ग्वालियर पुलिस ने दिल्ली से चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। साइबर ठगों ने इनके बैंक खातों में ठगी के 30 लाख रुपये ट्रांसफर कराए थे। आरोपितों ने एटीएम कार्ड के जरिए राशि निकालकर बिचौलिये को सौंपी और इसके बदले 1.70 लाख रुपये कमीशन लिया। एक आरोपित का भाई दिल्ली पुलिस में दारोगा है। वह ग्वालियर पहुंचा, जहां उसे पता चला कि उसका भाई ही साइबर ठगी गिरोह को बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराता था। पुलिस की जांच में क्या पता चला पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, असम और बंगाल सहित अन्य राज्यों के करीब 500 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। क्राइम ब्रांच ने मोहित मिश्रा (बी-40, चाणक्य पैलेस-1, स्ट्रीट नंबर 48, जनकपुरी, नई दिल्ली), राहुल प्रजापति (राजद-150, धरमपुर प्रथम, नजफगढ़, नई दिल्ली), हरीश यादव (हाउस नंबर 49, ब्लॉक धरमपुरा एक्सटेंशन, नजफगढ़, नई दिल्ली) और साहिल फिरोज खान (ए-5/175, एक्सटेंशन पार्ट वन, मोहन गार्डन, उत्तम नगर, नई दिल्ली) को दिल्ली से गिरफ्तार किया। ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार, इस मामले में क्रिप्टो ट्रेडिंग भी की गई। यूएसडीटी के जरिए ठग रकम को क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेज देते थे। आरोपित टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े थे, जहां से म्यूल खाते उपलब्ध कराने का नेटवर्क संचालित होता था।  

राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का बढता हाल, 24 घंटे में दर्ज हुए 29 केस, करोड़ों का नुकसान

भोपाल  पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद सायबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। राजधानी के 11 थानों में चौबीस घंटों के भीतर ठगी के कुल 29 अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें सायबर जालसाजों ने लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई है। ज्यादातर ठगी शेयर मार्केट में निवेश, नौकरी और मुनाफा कमाने का लालच, बिजली बिल कनेक्शन काटने के नाम पर की गई है। राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर पर की गई शिकायतों के बाद अब थानों में प्रकरण दर्ज होना शुरू हो गया है।  दरअसल सायबर ठगी की शिकायतों के लिए राष्ट्रीय हेल्प लाइन नंबर 1930 जारी किया गया था। इस नंबर पर प्रदेशभर से सैकड़ों शिकायतें की गई थीं, जो काफी समय से संबित थीं। पिछले दिनों यह जानकारी केंद्रीय गृहमंत्रालय तक पहुंची तो मंत्रालय ने संबंधित थानों में केस रजिस्टर्ड कराकर जांच कराने के निर्देश दिए। राज्य सायबर सेल के पास इस प्रकार की शिकायतें भेजी गई थी, जिसमें अकेले भोपाल में ही सवा सौ से ज्यादा शिकायतें सामने आई। इन्हीं शिकायतों को थानों में भेजा गया, जहां असल कायमी जांच शुरू की गई है। बीते चौबीस घंटे के दौरान बागसेवनिया और अशोका गार्डन थाने में 5-5 और मिसरोद तथा अवधपुरी में 4-4 शिकायतें पहुंची। इसके अलावा ऐशबाग, हबीबगंज, निशातपुरा और गांधी नगर में एक-एक शिकायत दर्ज हुई। इसी प्रकार कमला नगर, पिपलानी में दो-दो और कोलार में तीन अपराध दर्ज किए गए हैं। टॉस्क देकर लगाई 50.98 लाख की चपत बागसेवनिया थानांतर्गत साकेत नगर में रहने वाले राजेश जैन को अज्ञात व्यक्ति ने वांट्सएफ ग्रुप पर जोड़ा, जहां लोग पैसों का निवेश कर होने वाले मुनाफे का स्क्रीन शॉट डालते थे। कई दिनों तक नज़र अंदाज़ करने के बाद उन्हें लगा कि यह फायदे का सौदा है, इसलिए वह भी निवेश करने लगे। पहले तो उन्हें मुनाफा दिखाई दिया, लेकिन जब पैसे निकालने का प्रयास किया तो 35 लाख रुपए का टैक्स मांगा जाने लगा। इस प्रकार राजेश ने जालसाजों के बताए एकाउंट में 50 लाख 98 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कर दी, लेकिन यह रुपये वापस नहीं मिले। ऐप डाउनलोड कराकर निकाले 2.12 लाख बागसेवनिया थानांतर्गत नारायण नगर में रहने वाले प्रेमचंद जैन के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया और बताया कि आपका कंज्यूमर नंबर चेंज हो रहा है। इसके लिए जालसाज ने उन्हें एमपीईबी इलेक्ट्रीसिटी हेड आफिस भोपाल का एप डाउनलोड करके उसमें 12 रुपए का भुगतान करने का बोला। प्रेमचंद ने जैसे ही ऐप डाउनलोज किया, वैसे ही उनके एकाउंट से 1 लाख 13 हजार रुपये कट गए। उन्होंने फोन करने वाले से इसकी शिकायत की तो बताया कि साफ्टवेयर अपडेट हो रहा, कुछ देर बाद पैसे वापस लौट आएंगे। उसके बाद उनके दूसरे एकाउंट से भी पैसे कट गए। इस पर जालसाजों ने कुल 2 लाख 12 हजार रुपये चपत लगा दी। दूसरे व्यक्ति को लगाई 3.66 लाख की चपत मूलत: औबेदुल्लागंज निवासी नंद किशोर यादव यहां रजत विहार कालोनी के पास मोहिनी मुस्कान गार्डन में रहते हैं। दिसंबर महीने में एक व्यक्ति ने उन्हें वीडियो काल किया और बताया कि वह गोविंदपुरा बिजली कार्यालय से बोल रहा है। उसने मकान नंबर बताते के साथ ही कहा कि उनका कंज्यूमर नंबर अपडेट होने का आज आखिरी दिन है। उसने यह भी बताया कि शाम तक आईडी अपडेट नहीं हुई तो बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा। नंद किसोर ने बताया कि वह शहर से बाहर हैं, इसलिए उसने 12 रुपये आनलाइन ट्रांसफर करने का बोला। नंद किशोर ने जैसे ही उसे रुपये ट्रांसफर किए, वैसे ही अलग-अलग समय में कुल 3.66 लाख रुपए कट गए। क्रेडिट कार्ड से निकाले एक लाख रुपये बागसेवनिया पुलिस ने अगली रिपोर्ट राकेश कुशवाहा की शिकायत पर दर्ज की है। पिपलिया पेंदे खां में रहने वाले राकेश कुशवाहा के पास एक व्यक्ति ने क्रेडिट कार्ड कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली। उसके जालसाज ने एक ऐप डाउनलोड करवाया और क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 3 हजार रुपये निकाल लिए। इसी प्रकार भाजपा कार्यालय के पास एनसीसी कंपनी में काम करने वाले राजा गोपाल रेड्डी के क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर जालसाज ने दो बार में 1 लाख 21 हजार रुपये निकाल लिए। पुलिस ने सभी मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी प्रकार के शहर के दस अन्य थानों में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में जालसाजों ने लाखों रुपये की चपत लोगों को लगाई है। 

ई-चालान के नाम पर साइबर जाल: ऑपरेशन साइबर शील्ड में राजस्थान से दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी लिंक के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने वाले दो साइबर आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी Winmate और Wingo जैसे संदिग्ध ऐप के जरिए एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बनाते थे और उनके मोबाइल से फर्जी एसएमएस भेजकर बैंक खातों से रकम पार कर देते थे। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पृथ्वी कुमार बिश्नोई उर्फ राहुल (20) निवासी ग्राम डोलीकला, थाना कल्याणपुर, बाड़मेर (राजस्थान) और नरसिंह सिंह (24) निवासी भोपालगढ़, जोधपुर (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। ऐसे हुआ पर्दाफाश प्रार्थी धर्मेंद्र सिंह ने थाना विधानसभा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर RTOechallan नाम से एक एसएमएस आया। उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से 4.52 लाख रुपये कट गए। इस पर अपराध क्रमांक 8/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता और 66(D) आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर रेंज साइबर थाना ने जांच शुरू की। जांच के दौरान गूगल, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल सेवा प्रदाता, यूट्यूब और टेलीग्राम से मिले तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे आरोपियों की पहचान कर राजस्थान में दबिश देकर गिरफ्तारी की गई। सोशल मीडिया पर लालच देकर फंसाते थे पुलिस के अनुसार आरोपी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “Task Complete”, “Instant Bonus”, “Referral Bonus” और गेम खेलकर कमाई जैसे प्रलोभन देकर Winmate और Wingo जैसे ऐप डाउनलोड करवाते थे। ये ऐप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते थे। ऐप इंस्टॉल करते ही यूजर को बोनस राशि दिखती थी और “SMS Task” के नाम पर उसके मोबाइल से बड़ी संख्या में फर्जी ई-चालान और संदिग्ध लिंक भेजे जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता था और बैंक खाते या ई-वॉलेट से रकम निकाल ली जाती थी। Swiggy-Instamart से खपाते थे ठगी की रकम जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम को छिपाने के लिए Swiggy और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे सामान की ऑनलाइन खरीदारी कर उसे अलग-अलग राज्यों में डिलीवर कराते थे, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इससे पहले भी इसी तरह के मामले में WinGo ऐप के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—     केवल Play Store या App Store से ही ऐप डाउनलोड करें।     “गारंटीड मुनाफा” या “आसान कमाई” के झांसे में न आएं।     अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट या बैंक संबंधी अनुमति मांगने वाले ऐप इंस्टॉल न करें।     किसी भी अज्ञात लिंक या APK फाइल पर क्लिक न करें।     साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।  

1.20 करोड़ का साइबर फ्रॉड खुलासा: बंधन बैंक के 27 फर्जी खातों का इस्तेमाल, आठ गिरफ्तार

दुर्ग सायबर फ्रॉड के मामले में दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ठगी के पैसों को रखने के लिए अपने बैंक खाते को किराए पर देने वाले 08 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें भिलाई के ख़ुर्शीपार, सुपेला, सेक्टर 4 और दुर्ग के आरोपी शामिल हैं। दरअसल ये सभी आरोपी सुपेला के बंधन बैंक के ब्रांच में खाता खोलकर अपने अकाउंट को म्युल अकाउंट बनाकर किराए पर दे दिया था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल से म्युल अकाउंट होने का अलर्ट आया, जिसमें सायबर धोखाधड़ी से प्राप्त की गई राशि को इन खातों में जमा कराया गया था। लगभग 27 खातों में धोखाधड़ी से प्राप्त एक करोड़ 20 लाख 57 हजार रुपए जमा कराए गए हैं। इतना ही नहीं इन पैसों का लेनदेन भी किया गया है। अलर्ट आने पर दुर्ग पुलिस ने साइबर फ्रॉड से संबंधित सभी खातों को होल्ड पर रखवाकर खाता धारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर सभी को गिरफ्तार किया है। फिलहाल आगे की कार्रवाई की जा रही है। 27 म्युल अकाउंट धारकों में सुपेला के रावणभाटा निवासी रनजीत महानंद, ख़ुर्शीपार निवासी प्रमिला जंघेल, सेक्टर 32 निवासी के आकाश राव, रिसाली सेक्टर निवासी विपिन कुमार सिरसाम, सेक्टर 5 निवासी मानवी बेरी, जुनवानी निवासी आशीष गुप्ता, पिंकी कुर्रे कोहका, सुपेला निवासी रमाकान्त बंसोड़ को गिरफ्तार किया गया है।

बिहार पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह पकड़ा, बक्सर में 18 आरोपी हिरासत में

बक्सर  बिहार के बक्सर के नगर थाना क्षेत्र में  पुलिस ने एक साइबर फ्रॉड के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में 18 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। बताया गया कि इस गिरोह के लोगों के कई जिलों में तार जुड़े हुए हैं। पुलिस अब अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी कर रही है। बक्सर के पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने बताया कि नगर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि पीपी रोड के आईसीआईसीआई बैंक के पीछे एक घर में कई युवक किराए के घर से ऑनलाइन ठगी का काम कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने वहां छापेमारी की और 18 युवकों को गिरफ्तार किया है।  उन्होंने बताया कि यहां से पुलिस ने मौके पर से 64 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, विभिन्न बैंकों के नौ पासबुक और 82 एटीएम कार्ड, विभिन्न कंपनियों के 25 सिम कार्ड सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला कि इन गैजेट्स का इस्तेमाल साइबर ठगी, कॉलिंग फ्रॉड और ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए किया जाता था। गिरफ्तार किए गए युवक बिहार और झारखंड के अलावा कई अन्य राज्यों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि छापेमारी के बाद पुलिस की एक टीम सभी गिरफ्तार लोगों से पूछताछ कर रही है। दावा किया जा रहा है कि यह गिरोह बड़ा है और इनके तार बिहार के अन्य जिलों के अलावा अन्य राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं। आरोप है कि इस गिरोह का संचालन मुख्य रूप से कैमूर जिले के रहने वाले अजित कुमार जायसवाल और अमन जायसवाल कर रहे थे, जो विभिन्न राज्यों से लोगों को बुलाकर उनसे साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन गेम, सट्टा तथा ऑनलाइन पैसों की हेराफेरी करते थे। कई खाते भी फेक तौर पर बनाए गए थे। यह गिरोह पिछले काफी दिनों से चल रहा था। इन पर और तकनीकी अनुसंधान किए जा रहे हैं। -आईएएनएस

मध्य प्रदेश में जनधन खातों का दुरुपयोग, बैतूल पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य पकड़े

 बैतूल बैतूल पुलिस ने  साइबर ठगों के शातिर गिरोह का खुलासा किया है। आरोपित अलग अलग तरीकों से ठगी करते थे और यह रकम निकालने के लिए ग्रामीणों के जनधन खाते इस्तेमाल करते थे। इस काम में बैंक का अस्थायी कर्मचारी भी उनकी मदद करता था। पुलिस ने बैंककर्मी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे दो लैपटाप, 11 बैंक पासबुक, 21 एटीएम कार्ड, 15 मोबाइल, 25 सिम, दो पीओएस मशीनें और 28 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। चार माह में 1.5 करोड़ का लेनदेन पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के मुताबिक 14 अक्टूबर 2025 को कनारा के मजदूर बिसराम इवने ने शिकायत की थी। खेड़ी सांवलीगढ़ स्थित बैंक आफ महाराष्ट्र में खुले उसके जन धन खाते से चार माह (जून से अक्टूबर तक) में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। पुलिस ने बैंक प्रबंधन के सहयोग से जांच शुरू की तो सात खातों से नौ करोड़ 84 लाख 95 हजार 212 रुपये का लेनदेन सामने आया। ये खाते बिसराम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नितेश उइके, राजेश बर्डे, अमोल और चंदन के थे। राजेश बर्डे का बैंकखाता उसकी मृत्यु के बाद भी संचालित किया जा रहा था। आरोपित पांच तरीकों से करते थे ठगी पुलिस ने अस्थायी बैंककर्मी राजा उर्फ आयुष चौहान को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने कई राज खोले। बताया कि इंदौर निवासी अंकित राजपूत के कहने पर वह ऐसे खाता धारकों की जानकारी दे देता था जो लंबे समय से लेनदेन करने नहीं आते थे। पुलिस ने गिरोह के सरगना इंदौर के नंदानगर निवासी अंकित राजपूत (32) और उसके साथी नरेन्द्र राजपूत (24) को भी गिरफ्तार किया है। तीनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधीक्षक जैन ने बताया कि आनलाइन ठगी के पांच माध्यम सामने आए हैं। इनमें गेमिंग एप, बैटिंग एप, क्रिप्टो करंसी फ्राड, फिशिंग फ्राड समेत अन्य आनलाइन ठगी माध्यम शामिल हैं।

साइबर फ्रॉड का बढ़ता कहर: हरियाणा में हर महीने 40 करोड़ से अधिक की चोरी

गुरुग्राम  हरियाणा में साइबर फ्रॉड का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में राज्य ने डिजिटल धोखाधड़ी के कारण ₹850 करोड़ का नुकसान झेला, जिसमें केवल गुरुग्राम ने कुल मामलों का 20 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। यह जानकारी पीएस साइबर मानेसर के सब-इंस्पेक्टर विकास बेनीवाल ने “नॉक आउट डिजिटल फ्रॉड” नामक राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम में दी, जिसे हरियाणा पुलिस और बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल) द्वारा संयुक्त रूप से गवर्नमेंट कॉलेज, सिधरावली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के लगभग 250 छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी पर विस्तार से बताते हुए बेनीवाल ने कहा, “लोगों के शिकार होने की सबसे बड़ी वजह है—अज्ञानता, लालच और भय। फ्रॉडस्टर डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट स्कैम और टास्क-बेस्ड फ्रॉड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को अलग-थलग कर देते हैं, उनकी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उनकी जीवन भर की कमाई साफ कर देते हैं। जब भी कोई व्यक्ति आपसे पैसे या बैंक डिटेल मांगता है, तो बिना किसी संदेह के समझ लें कि वह फ्रॉडस्टर है। जागरूकता ही असली सुरक्षा है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम में ही 2024 में 25,000 से अधिक साइबरक्राइम मामले दर्ज हुए हैं। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ित को तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि इससे खोए हुए पैसे की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। पहले तीन घंटे इस तरह के मामलों में ‘गोल्डन पीरियड’ माने जाते हैं।” उन्होंने बताया कि अब तक रिपोर्ट हुए मामलों में 5,000 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। 2024-25 में हरियाणा पुलिस ने साइबर फ्रॉड मामलों से ₹100 करोड़ की रिकवरी की है। पूरे भारत में इसी अवधि में साइबर धोखाधड़ी के कारण नुकसान ₹22,800 करोड़ से अधिक पहुंच गया है—जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% अधिक है। जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेशपाल ने कहा, “हमारा देश तरक्की कर रहा है, और जैसे-जैसे हम मजबूत बन रहे हैं, साइबर फ्रॉड हमारे खिलाफ एक आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। इसलिए राष्ट्रव्यापी धोखाधड़ी जागरूकता बेहद जरूरी है। आपको सतर्क रहना चाहिए और आकर्षक ऑफर्स, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जाल से खुद को बचाना चाहिए। फ्रॉडस्टर विदेशों से काम करते हैं और हमारी लापरवाही का फायदा उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अपनी बैंक डिटेल साझा न करके, हर कदम से पहले सत्यापन करके और सतर्क रहकर कोई भी आसानी से साइबर फ्रॉड से खुद को बचा सकता है।” पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार ने कहा, “आज साइबर फ्रॉड एक व्यवसाय बन चुका है, जो देशभर में विभिन्न क्लस्टर्स के माध्यम से संचालित होता है। संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ हमारी कमजोरियां भी बढ़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है—जागरूकता। यदि आपको कभी साइबर फ्रॉड का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से ट्रांज़ैक्शन रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एक्सेस साझा न करें, संदिग्ध एपीके फाइलों से बचें, और हर प्लेटफॉर्म पर एक ही नंबर लिंक न करें।” इस अवसर पर गवर्नमेंट कॉलेज सिधरावली के प्रोफेसर पी.के. मलिक ने कहा, “भारत का युवा विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सतर्क और जानकारी पूर्ण रहकर वे अपने परिवारों और समुदायों की रक्षा कर सकते हैं।” बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल), जो भारत का सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है और बजाज फिनसर्व का हिस्सा है, एक राष्ट्रव्यापी वित्तीय साक्षरता और साइबर फ्रॉड जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल उपयोगकर्ताओं को विभिन्न तरह के खतरों के बारे में जानकारी देना और वित्तीय सुरक्षा के सर्वोत्तम उपाय सिखाना है। यह राष्ट्रव्यापी अभियान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2024 के फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें प्रारंभिक पहचान, स्टाफ जवाबदेही और जनसहभागिता को डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान करता है। इसमें ओटीपी, पिन साझा न करना, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड से बचना और अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने की सलाह शामिल है। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव वर्कशॉप, डिजिटल अवेयरनेस ड्राइव और प्रमुख शहरों एवं कस्बों में सामुदायिक पहुंच गतिविधियाँ शामिल हैं। यह पहल उन सामान्य वित्तीय धोखाधड़ियों पर ध्यान आकर्षित करती है, जो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऐसी वेबसाइटों के माध्यम से की जाती हैं, जो वित्तीय कंपनियों जैसी लगती हैं और उनके कर्मचारियों का झूठा प्रतिरूपण करती हैं।

साइबर फ्रॉड की बड़ी कुंडली उजागर! पंजाब पुलिस ने पकड़े 150+ म्यूल अकाउंट, लुधियाना में केस दर्ज

लुधियाना  पंजाब पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य में 150 से ज़्यादा एक्टिव "म्यूल अकाउंट" का पता लगाया है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन धोखाधड़ी से लूटे गए पैसे को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने के लिए करते थे। ये खाते ज्यादातर लुधियाना में पाए गए है। जिसके बाद राज्य साइबर सेल ने लुधियाना कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। लुधियाना पुलिस खाते के विवरण की जांच में जुटी मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस अब जानिए… क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?  इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन धोखाधड़ी से लूटे गए पैसे को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने के लिए करते थे। ये खाते ज्यादातर लुधियाना में पाए गए है। जिसके बाद राज्य साइबर सेल ने लुधियाना कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। लुधियाना पुलिस खाते के विवरण की जांच में जुटी     वरिष्ठ अधिकारियों को आशंका है कि ये खाते न केवल साइबर धोखेबाजों की मदद कर सकते हैं, बल्कि संगठित अपराध समूहों द्वारा भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे कानून और व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है।     राज्य साइबर क्राइम सेल से मिली जानकारी के आधार पर लुधियाना पुलिस ने खाते के विवरण की जांच और इसमें शामिल व्यक्तियों का पता लगाना शुरू कर दिया है। पुलिस के एस सीनियर अधिकारी ने पुष्टि की कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) (धोखाधड़ी) और 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज की गई है। मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस     उन्होंने कहा कि हमें 150 से ज़्यादा म्यूल अकाउंट के बारे में जानकारी मिली है। हमारी टीमें अब यह पता लगाने के लिए हर विवरण की जांच कर रही हैं कि उन्हें किसने बनाया और कौन उन्हें चला रहा है। अब धोखाधड़ी वाले खातों के नेटवर्क के पीछे के मास्टरमाइंड की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।     पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों या अवैध नकद लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था। जबकि म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल आमतौर पर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त आय को रूट करने के लिए किया जाता है।     इससे पहले अगस्त महीने में साइबर विंग ने चार लोगों -गौतम (23),एहसास (24),आकाश (20) सभी अमृतसर निवासी और अनमोल (21) निवासी अबोहर को फाजिल्का से गिरफ्तार किया था। जो कथित तौर पर लगभग दो वर्षों से इसी तरह का रैकेट चला रहे थे।     पुलिस ने उनसे 10.96 लाख रुपए, 9 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 32 डेबिट कार्ड, 10 सिम कार्ड, 15 बैंक पासबुक और एक चेक बुक बरामद की थी। जांच से पता चला कि गिरोह ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों से मामूली भुगतान पर बैंक खाते हासिल किए थे। फिर उनका इस्तेमाल साइबर अपराधों के माध्यम से चुराए गए पैसे को लेयर करने के लिए किया।     अवैध धन को बाद में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के माध्यम से विदेश भेजा गया। आरोपी दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित विदेशी हैंडलर्स द्वारा चलाए जा रहे कई टेलीग्राम ग्रुपों पर भी सक्रिय पाए गए। अब जानिए… क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?     म्यूल अकाउंट बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध धन को लॉन्ड्रिंग या स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। इन्हें उन व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा सकता है जिन्हें नौकरी के घोटालों, ऑनलाइन ऑफ़र या सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से "मनी म्यूल" बनने के लिए बहलाया-फुसलाया जाता है।     इसमें पैसा प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए कमीशन का वादा किया जाता है। इस तरह के खाते धोखेबाजों को चोरी किए गए धन के स्रोतों को छिपाने में मदद करते हैं और अक्सर फ़िशिंग घोटालों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अपराधों से जुड़े होते हैं।

फर्जी पीएनबी अफसर बन साइबर ठगों ने उड़ाए 10 लाख, पुलिस कर रही जांच

मुज्जफरपुर साइबर अपराधियों ने एक बार फिर बैंक अधिकारी बनकर ठगी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। इस बार शिकार बने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक रिटायर्ड कर्मचारी, जिनसे ठगों ने सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के नाम पर 10 लाख रुपये उड़ा लिए। मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई गई है और पुलिस जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर निवासी मो. खलीफ खान, जो पीएनबी की जवाहरलाल रोड शाखा में पेंशन डेस्क पर सहायक के पद पर कार्यरत थे, करीब आठ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे हर साल अपना लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराते हैं। इसी क्रम में 6 नवंबर को उन्होंने फॉर्म के माध्यम से सर्टिफिकेट अपडेट के लिए आवेदन किया था। पीड़ित के अनुसार, शनिवार को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिस पर पीएनबी बैंक का लोगो दिखाई दे रहा था। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका लाइफ सर्टिफिकेट वेरिफाई करना है और इसके लिए उन्हें एक ओटीपी भेजा जा रहा है। विश्वास में आकर मो. खलीफ खान ने ओटीपी साझा कर दिया। कुछ ही मिनटों में उनके दो बैंक खातों से कुल 10 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। खलीफ खान ने बताया कि यह रकम उनके पेंशन खाते से ही निकाली गई है। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में साइबर थाने के टीसी हिमांशु कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। ठगी ओटीपी के माध्यम से की गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

साइबर अपराध का पर्दाफाश: मध्यप्रदेश पुलिस ने देवघर से दो बदमाशों को किया गिरफ्तार

देवघर मध्यप्रदेश के पन्ना से पहुंची एक पुलिस टीम ने झारखंड के देवघर जिले में 2 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान हसन राजा और इरफान अंसारी के रूप में हुई है जिन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों पर आरोप है कि ये खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे। मधुपुर के उप संभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सत्येंद्र प्रसाद ने कहा, ‘‘दोनों आरोपी मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के पवई थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले एक सरकारी स्कूल के शिक्षक से 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने में शामिल थे। पीड़ित ने मध्यप्रदेश में पन्ना जिले के पवई थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा के आधार पर पुलिस ने पाथरोल थाना क्षेत्र के तीन युवकों की संलिप्तता की पहचान की।'' उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश से आई तीन सदस्यीय टीम ने पथरोल पुलिस की मदद से कसैया और बिलरिया गांवों में छापेमारी की तथा अमन राजा, हसन राजा और इरफान अंसारी को हिरासत में लिया गया। प्रसाद के मुताबिक, पूछताछ के बाद पुलिस ने अमन राजा को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया जबकि हसन राजा और इरफान अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया। एसडीपीओ ने बताया कि पुलिस ने इरफान अंसारी के घर से 3.5 लाख रुपये नकद, एक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, एक मोबाइल फोन, एक पासबुक और एक मोटरसाइकिल बरामद की, जबकि हसन राजा के घर से पांच लाख रुपये नकद, एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, सोने और चांदी के आभूषण तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद मध्यप्रदेश पुलिस उन्हें स्थानीय अदालत से अनुमति लेकर ट्रांजिट रिमांड पर पन्ना ले जाने की तैयारी कर रही है।