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400 से अधिक विद्यार्थी ले रहे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश को फ्युचर रेडी, प्रतिभा-संपन्न और प्रौद्योगिकी-संचालित राज्य बनाने के विजन को साकार करने की दिशा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सतत प्रयासरत है इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा 3 दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआरजीएसपी), भोपाल में गुरुवार को किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2025 की परिकल्पना से प्रेरित यह पहल राज्य सरकार की उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में दक्ष बनाकर उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम अग्रणी वैश्विक औद्योगिक साझेदार के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें एलएनसीटी, बंसल, ओरिएंटल, आईईएस और एआईएसईसीटी सहित प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागियों को उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्योगों की कार्यप्रणालियों और व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराया जा रहा है। एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश शर्मा ने कहा कि संस्थान उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ एक अग्रणी कौशल विकास संस्थान के रूप में स्थापित हुआ है। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप निरंतर सीखने, नवाचार अपनाने और अपने कौशल को लगातार उन्नत करने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन साइबर सिक्योरिटी विषय पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। सत्रों में डेटा की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता, डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा, संवेदनशील सूचनाओं के संरक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जोखिमों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पहचान एवं अभिगम प्रबंधन (आईडेंटिटी एंड एक्सेस मैनेजमेंट), प्रमाणीकरण प्रणाली, पासवर्ड सुरक्षा और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और रैनसमवेयर जैसे साइबर खतरों के बारे में भी अवगत कराया गया। वास्तविक उदाहरणों और केस-स्टडी आधारित चर्चाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा चुनौतियों और उनके समाधान की व्यावहारिक समझ प्रदान की गई। इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार और साइबर सुरक्षा जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के आगामी सत्रों में साइबर सिक्योरिटी और एआई/एमएल से जुड़े उन्नत विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाते हुए मध्यप्रदेश में उद्योग-संलग्न कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।  

यूपी बनेगा एडवांस ट्रेनिंग हब, 17 राज्यों के छात्र सीखेंगे फॉरेंसिक साइंस और साइबर सिक्योरिटी

17 राज्यों के छात्र-छात्राएं यूपी में लेंगे फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी समेत अन्य विषयों में प्रशिक्षण यूपीएसआईएफएस में 6 हफ्ते की समर इंटर्नशिप शुरू, 108 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा हमारा मुख्य उद्देश्य सर्टिफिकेट देना ही नहीं, कौशल विकास करना है: डॉ. जीके गोस्वामी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी का हब बनकर उभर रहा है। अब यूपी अपने ही नहीं, दूसरे राज्यों के छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न माध्यम से प्रशिक्षण दे रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ (यूपीएसआईएफएस) में ग्रीष्मकालीन (समर) इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरूआत सोमवार से हुई। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से कुल 108 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। यह सभी छात्र-छात्राएं छह हफ्ते तक विषय विशेषज्ञों द्वारा लॉ, फोरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक विषयों की गहनता से जानकारी व दक्षता प्राप्त करेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ मिले निर्देश पर इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने किया। उन्होंने डेटा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जिसके पास जितना डाटा रहेगा वह उतना ही सबल होगा। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के लिए बेहतर अवसर है, जिसके लिए आप में लगनशीलता होनी चाहिए। अगर लगन है तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  उन्होंने यह भी कहा कि यूपीएसआइएफएस में बिताये गए आपके छह हफ्ते आपके भविष्य के द्वार को खोलेगा, आपको अपनी योग्यता से ऐसे अवसर का लाभ लेना चाहिए। सीएम योगी का निर्देश- देशभर के बच्चों का भविष्य संवारें डॉ. जीके गोस्वामी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेज से आए हुए छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि यह संस्थान न केवल उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं, युवाओं के भविष्य को विकसित करने में अग्रणी रहे बल्कि देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य मात्र एक सर्टिफिकेट देना नहीं है बल्कि आपके भीतर कौशल विकास करना है ताकि आप बाहर की दुनिया में स्वयं को प्रतिष्ठापित कर सकें। वहीं अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने कहा कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता है। आप यूपीएसआईएफएस में एक संकल्प लेकर आये हैं और आप लगनशील हैं तो तो वह निश्चित पूरा होगा।   इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. प्रेरणा, डॉ.अजीत कुमार डॉ. प्रीती, डॉ. नेहा, डॉ. निताशा सहित अन्य उपस्थित रहे।

Apple का बड़ा दावा: ऐप स्टोर पर 18 हजार करोड़ रुपये की फ्रॉड डील्स ब्लॉक

ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है. ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है. हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं. 2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं. रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है. कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया.   लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है. बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं.

साइबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि, MP-CERT बनी राष्ट्रीय स्तर पर आदर्श मॉडल

सायबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास : एमपी-सीईआरटी बनी राष्ट्रीय नेतृत्व की मिसाल एमपी-सीईआरटी ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया प्रशिक्षण भोपाल विश्व में अक्टूबर माह को 'सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ' के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जन-सामान्य को इस दिशा में जागरुक बनाने का है कि डिजिटल सुरक्षा केवल विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि हर नागरिक और हर संस्था की सामुहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (एमपी-सीईआरटी) ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते हुए न केवल राज्य, बल्कि देशभर में नई मिसालें कायम की हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने 'सायबर भारत सेतु, राष्ट्रीय साइबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। एमपी-सीईआरटी ने स्थापना के बाद से अब तक 24 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। इनमें राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।इन सत्रों का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को सायबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़कर उन्हें दैनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल सुरक्षा के उपायों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा है। एमपी-सीईआरटी ने रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और सीहोर जिलों में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए। यहां कर्मचारियों को संबंधित जिला कलेक्टर्स के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं एमपी-सीईआरटी के निदेशक संजय दुबे ने किया। एमपी-सीईआरटी ने सितंबर 2025 में 'सायबर भारत सेतु' नामक राष्ट्रीय सायबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। सीईआरटी-इंडिया और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौ‌द्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से हुये इस आयोजन से मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने इस स्तर का प्रशिक्षण आयोजन किया। इस अभ्यास से सिद्ध हुआ कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष आवासीय प्रशिक्षण एमपी-सीईआरटी अब इस आधार पर आगे बढ़ते हुए समूह-अ और समूह-ब अधिकारियों तथा नीति- निर्माताओं के लिए तीन दिवसीय रेजिडेंशियल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह प्रशिक्षण अभ्यास 27 से 29 अक्टूबर 2025 तक नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, (एनएफएसयू), गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जा रहा है।इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को सायबर सुरक्षा की समग्र समझ, वैश्विक प्रवृत्तियों, साइबर रक्षा की सर्वोतम रणनीतियों और नीति निर्माण की संरचनाओं की गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे शासन के हर स्तर पर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त किया जा सके। राज्य में सायबर सुरक्षा नेटवर्क के लिये 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति एमपी-सीआईआरटी की रणनीति का मूल आधार 'विकेन्द्रित सतर्कता' (डीसेंट्रलाइज्ड विजिलेंस) है। राज्य सरकार ने अब तक 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की नियुक्ति विभागीय और जिलास्तर पर की है। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि सायबर सुरक्षा केवल आईटी इकाइयों तक सीमित न रहे, बल्कि यह हर नीति, प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रवाह का हिस्सा बने। इस नेटवर्क को और मज़बूत करने के लिए एक एकीकृत सीआईएसओ पोर्टल लॉन्च किया गया है। इससे जोख़िम, घटनाओं, और संबंधित परामर्शों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में सहायता मिलेगी। जल्द ही जिलों में भी ई-गवर्नेस प्रबंधकों (डी ई-जीएम) का भी नोमिनेशन किया जायेगा। उन्हें भी अपने जिलों के सीआईएसओ के रूप में नामित किया जाएगा। इससे राज्य स्तर पर प्रशिक्षित सायबर सुरक्षा नेतृत्व का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार होगा। सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल (एसबीओएम): कोड सुरक्षा में अभिनव कदम एमपी-सीईआरटी की सबसे प्रभावशाली तकनीकी में से एक सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स पद्धति का उपयोग है। यह प्रणाली सॉफ्टवेयर के घटकों की सूची तैयार करती है। इससे कमजोर या पुराने मॉड्युल्स की पहचान कर उन्हें समय रहते अपडेट किया जा सकता है। इससे नेशनल वल्नरेबिलिटी डेटाबेस (एनवीडी) के साथ समन्वय कर सुरक्षा खामियों की पहचान और समाधान की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।अक्टूबर 2025 तक 12 हज़ार से अधिक वल्नरेबिलिटी सफलतापूर्वक ठीक की जा चुकी हैं। साथ ही, नेशनल क्रिटिकल इंफोर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) के साथ मिलकर 120 से अधिक उच्च-प्राथमिकता वाले मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। अनाधिकृत विज्ञापनों और सरकारी पोर्टल सुरक्षा पर कार्रवाई इंडियन सायबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आईसीसीसी), गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पर एमपी- सीईआरटी ने सरकारी वेबसाइटों पर पाए गए अनाधिकृत ऑनलाइन सट्टेबाज़ी (बेटिंग) विज्ञापनों के मामलों में भी तत्परता दिखाई है। सरकारी पोर्टलों में मिले इन विज्ञापनों में से 40 से अधिक मामलों का निवारण एमपी-सीईआरटी की टीम ने त्वरित रूप से किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता एमपी-सीईआरटी न केवल तकनीकी मोर्चे पर, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ा रहा है। संस्था नियमित रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल लेनदेन सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर सरल और रोचक सामग्री साझा कर रही है। इससे नागरिकों में साइबर सतर्कता की संस्कृति विकसित हो रही है। सतत निगरानी और राष्ट्रीय सहयोग की दिशा में अग्रसर एमपी-सीईआरटी का तकनीकी दल नियमित रूप से राज्य सरकार के 50 से अधिक पोर्टलों की सुरक्षा स्कैनिंग करता है। इसके माध्यम से कमजोरियों की पहचान कर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाता है। यह पहल राज्य शासन के सभी विभागों में साइबर सुरक्षा को शासन-प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना रही है। सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ के अवसर पर एमपी-सीईआरटी की ये उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिये तैयार है। प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार, और विकेन्द्रित सतर्कता के माध्यम से राज्य ने दिखाया है कि जब शासन, तकनीक और जागरूकता साथ मिलेंगे, तभी सुरक्षित डिजिटल भविष्य संभव है।  

साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम

विश्व में हो रहे डिजिटल खतरे को कम कर सकता है साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट  साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम  सेमिनार में सीएम योगी द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना हुई  योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ अपनाया गया कड़ा रुख, साइबर अपराध में आई कमी लखनऊ  साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि पूरे विश्व में डिजिटल खतरे का लगातार सामना कर रहा है। ऐसे में हमे साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इसके लिए विश्व के विभिन्न देशों से टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बहुत महत्व रखता है। यह मंथन यूपीएसआईएफएस द्वारा आयोजित डिजिटल ऑडिट, साइबर इंश्योरेंस, सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे विभिन्न पहलुओं को सराहा गया।  साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में मजबूत कैरियर की संभावनाएं यूपीएसआईएफएस के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने बताया कि योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए भारत के डीपीडीपी अधिनियम और जीडीपीआर जैसी नीतियों की जानकारी दी। साथ ही टीमवर्क और निरंतर शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सेमिनार में साइबर सुरक्षा के लिए लगातार शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक स्पष्टता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ कैरियर की संभावना है, बशर्ते सही कौशल, कानूनी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन प्रयासों को और भी सशक्त बनाया गया है, जो भारतीय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना जरूरी सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यूएसए के पवन शर्मा ने कहा कि डिजिटल ऑडिट किसी संगठन के जोखिम को समझने के लिए एक नींव का काम करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऑडिट के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उसे लागू करने की क्षमता आज के समय में साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। साइबर इंश्योरेंस के लिए ऑडिट रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और उसे सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। सिस्को के प्रतिनिधि ने यह बताया कि अब पारंपरिक वार्षिक ऑडिट की बजाय संगठन लगातार, जोखिम-आधारित मूल्यांकन कर रहे हैं, जो वास्तविक समय के मापदंडों और अनुपालन ढांचे से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमेशन और साइबर जोखिम मॉडलिंग जैसे कौशल अब करियर की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जेड-स्केलर के प्रतिनिधि ने कंपनियों में आंतरिक अपस्किलिंग के महत्व को बताया और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता को प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र जैसे कि CompTIA Security+ और CISSP की सिफारिश की। इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से युवाओं को अपने करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यूपीएसआईएफएस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार राय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना आवश्यक है। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे महत्वपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया कि लगातार मूल्यांकन से ही सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के मद्देनज़र वैश्विक दृष्टिकोण की अहमियत को उजागर किया।