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ट्रांसजेंडर के लिए खुशखबरी! दिल्ली की बसों में अब मिलेगा मुफ्त सफर

नई दिल्ली समावेशी और संवेदनशील शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग द्वारा संचालित सभी बस मार्गों में ट्रांसजेंडर यात्रियों को मुफ्त यात्रा योजना में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के तहत दिल्ली में निवास करने वाले पात्र ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ उठा सकेंगे, ठीक उसी प्रकार जैसे वर्तमान में दिल्ली की बसों में महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाती है। यह पहल रेखा गुप्ता सरकार की सामाजिक समावेशन, गरिमा और सभी वर्गों के लिए सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस निर्णय का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को बिना किसी आर्थिक बाधा के शहर में सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा दिल्ली की बसों में महिलाओं के लिए लागू मुफ्त यात्रा योजना के समान ही व्यवस्था और तंत्र के तहत लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और संवेदनशील दिल्ली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां हर नागरिक को सम्मान के साथ अवसरों और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच मिल सके। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने और समावेशी शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में दिल्ली सरकार का एक और महत्वपूर्ण कदम है।

राजधानी में नस्लवाद पर सख्त एक्शन, CM रेखा गुप्ता ने दोषियों को दी कड़ी सजा की चेतावनी

नई दिल्ली दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ हुई नस्लीय टिप्पणी और उत्पीड़न की घटना ने तूल पकड़ लिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।   क्या है पूरा मामला? यह घटना 20 फरवरी की है, जब मालवीय नगर में किराए पर रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं का उनके पड़ोसियों, हर्ष सिंह और रूबी जैन के साथ घर की मरम्मत को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि विवाद के दौरान पड़ोसियों ने महिलाओं पर नस्लीय फब्तियां कसीं और उन्हें "धंधेवाली" (सेक्स वर्कर) कहकर अपमानित किया। घटना के पांच दिन बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम यानी SC/ST एक्ट की धाराएं भी लगाई हैं। नॉर्थ ईस्ट की हमारी बहनों के साथ हुई इस घटना की मैं कड़ी निंदा करती हूं और उनके साथ मजबूती से खड़ी हूं। सीएम ने कड़े शब्दों में कहा- दिल्ली सबकी है सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि "मालवीय नगर में हमारी नॉर्थ-ईस्ट की बहनों के साथ जो बदसलूकी हुई, वह मेरे संज्ञान में आई है। दिल्ली देश की राजधानी है और यहाँ देश के हर कोने से आए लोगों का समान अधिकार है। नॉर्थ-ईस्ट के भाई-बहन अपनी मेहनत से दिल्ली की तरक्की में योगदान देते हैं, उनके साथ ऐसा व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है।" मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वह जल्द ही पीड़ित महिलाओं से मिलेंगी और दिल्ली में रह रहे उत्तर-पूर्व के अन्य लोगों की समस्याओं को सुनकर नीतिगत समाधान निकालेंगी।   पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी धाराएं दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने और नस्ल या धर्म के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। मामले की जांच अब एक एसीपी (ACP) रैंक के अधिकारी द्वारा की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरी प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।  

दिल्ली बनेगी EV-फ्रेंडली सिटी: 2026 तक चार्जिंग की टेंशन खत्म करने की सरकार की पूरी योजना तैयार

नई दिल्ली अगर आप दिल्ली में रहते हैं और इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदने से सिर्फ इसलिए हिचक रहे हैं कि चार्जिंग कहां करेंगे, तो अब आपकी यह चिंता जल्द दूर होने वाली है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2026 तक का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। सरकारी योजना के मुताबिक, शहर के हर प्रमुख रिहायशी, व्यावसायिक और सार्वजनिक इलाके में चार्जिंग की सुविधा बढ़ाई जाएगी। इसके तहत मॉल, मार्केट, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, पार्किंग एरिया, मेट्रो स्टेशन और हाउसिंग सोसाइटीज़ में चार्जिंग पॉइंट्स लगाने पर जोर रहेगा। एक साल में लगेंगे 7,000 नए चार्जिंग प्वाइंट कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 2026 के अंत तक करीब 7,000 नए पब्लिक EV चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल राजधानी में 8,998 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद हैं, लेकिन सरकार की योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 16,070 तक पहुंचाई जाएगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आ रही चार्जिंग से जुड़ी बाधा को दूर किया जा सके। अभी भी है 75% की भारी कमी भले ही दिल्ली सरकार EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी में जुटी हो, लेकिन मौजूदा हालात में मांग और सप्लाई के बीच बड़ा गैप बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुल 36,177 चार्जिंग प्वाइंट्स की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा व्यवस्था इस लक्ष्य से काफी पीछे है। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में अभी करीब 75.2 फीसदी यानी लगभग 27,179 चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार और एजेंसियां इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही हैं। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर 66 नए चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने का प्रस्ताव है, जबकि आनंद विहार और न्यू अशोक नगर जैसे RRTS स्टेशनों पर 6-6 चार्जिंग प्वाइंट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि इन कदमों से सार्वजनिक स्थानों पर EV चार्जिंग की सुविधा बेहतर होगी और लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भरोसा बढ़ेगा। पड़ोसी फेल, दिल्ली पास NCR में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात तो हो रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दिल्ली ने बाकी शहरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा, गुड़गांव और फरीदाबाद की हालत बेहद खराब है, जबकि दिल्ली EV चार्जिंग के मामले में ‘किंग’ बनकर उभरी है। रिपोर्ट बताती है कि गुड़गांव और फरीदाबाद में सरकारी जमीन पर एक भी पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद नहीं है। वहीं नोएडा में सिर्फ 69 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट्स हैं, जबकि यहां कम से कम 150 प्वाइंट्स की जरूरत बताई गई है। स्थिति गाजियाबाद में भी कुछ खास बेहतर नहीं है, जहां 126 चार्जिंग प्वाइंट्स मौजूद हैं, लेकिन वास्तविक जरूरत करीब 450 प्वाइंट्स की है। ‘बैटरी स्वैपिंग‘ पर भी बड़ा जोर अगर आपके पास बैटरी स्वैपेबल इलेक्ट्रिक गाड़ी है, तो यह खबर आपके लिए भी राहत लेकर आई है। दिल्ली में फिलहाल 948 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन काम कर रहे हैं, जिन्हें 2026 के अंत तक बढ़ाकर 1,268 करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे खासतौर पर ई-रिक्शा, डिलीवरी व्हीकल और टू-व्हीलर यूज़र्स को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बैटरी चार्ज करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और कुछ ही मिनटों में बैटरी बदली जा सकेगी। एक्सपर्ट की चेतावनी इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के अमित भट्ट का कहना है कि EV चार्जिंग को लेकर एक अहम सच्चाई अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। उनके मुताबिक 80 से 90 फीसदी चार्जिंग घर या ऑफिस में ही होती है, न कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर। असली समस्या यह है कि कई हाउसिंग सोसाइटियां और RWA लोगों को निजी चार्जर लगाने की अनुमति नहीं देतीं, जिससे EV अपनाने में बड़ी रुकावट पैदा होती है। अमित भट्ट का सुझाव है कि भारत को नॉर्वे की तर्ज पर ‘चार्ज करने का कानूनी अधिकार’ (Right to Charge) लाना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी तय पार्किंग में बिना प्रशासनिक अड़चनों के चार्जर लगा सके। उनका मानना है कि इससे EV अपनाने की रफ्तार पब्लिक चार्जिंग बढ़ाने से भी ज्यादा तेज हो सकती है।

जहां था कचरे का अंबार, वहीं बनेगा मॉडर्न बस टर्मिनल — दिल्ली सरकार का बड़ा क्लीन-अप प्लान

नई दिल्ली सरकार की योजना के मुताबिक भलस्वा में बनने वाले नए अंतरराज्यीय बस अड्डे से हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। वर्तमान में इन सभी राज्यों की बसें कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे से चलती हैं, जहां पहले से ही यात्रियों और बसों का भारी दबाव है। भलस्वा में नया बस अड्डा शुरू होने के बाद कश्मीरी गेट ISBT पर भीड़ और ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। नए बस अड्डे के बनने से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलने की संभावना है। अभी कश्मीरी गेट से रोजाना सैकड़ों बसें इन राज्यों के लिए रवाना होती हैं, जिससे वहां अक्सर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। भलस्वा में बस अड्डा तैयार होने के बाद बसों को बाहरी दिल्ली के भारी ट्रैफिक से गुजरकर कश्मीरी गेट तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बस संचालन अधिक सुचारू होगा और यात्रियों का समय भी बचेगा। भलस्वा बस अड्डे से होंगे कई तरह के फायदे भलस्वा बस अड्डे की एक बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति होगी। यह इलाका दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में यहां से चलने वाली बसें कम समय में ही दिल्ली की सीमा पार कर सकेंगी। इसके विपरीत कश्मीरी गेट से निकलने वाली बसों को दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचने में कई बार घंटों लग जाते हैं। नए बस अड्डे के बनने से इन राज्यों की ओर जाने वाली बसों का सफर न सिर्फ छोटा होगा, बल्कि ज्यादा आसान और आरामदायक भी हो जाएगा। बायो-माइनिंग के जरिए साफ की जा रही है लैंडफिल साइट दिल्ली नगर निगम ने भलस्वा लैंडफिल साइट को पूरी तरह साफ करने के लिए इस साल के अंत तक का लक्ष्य तय किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस परियोजना को लेकर हाल ही में दिल्ली सरकार और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अहम बैठक भी हुई है। बाहरी दिल्ली में स्थित यह लैंडफिल साइट करीब 70 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी ऊंचाई 60 मीटर से ज्यादा हो चुकी है। नगर निगम इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए बायो-माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इस प्रक्रिया के जरिए पुराने कचरे को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि लैंडफिल साइट के खत्म होने से न केवल आसपास के इलाकों का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि भलस्वा में बनने वाला नया अंतरराज्यीय बस अड्डा दिल्ली के यातायात ढांचे को भी बड़ी राहत प्रदान करेगा।

अब और मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज, दिल्ली सरकार ने लागू किया नया कदम

नई दिल्ली रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मुफ्त इलाज की सुविधा का फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने EWS (आर्थिक रूप से कमजोर) वर्ग की सालाना आय सीमा तो बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक कर दिया गया है। राज्य सरकार ने बताया कि निम्न आय वर्ग के लोगों को यह सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर दी गई जमीन पर बने शहर के अस्पतालों में मिलेगी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया।   9 साल पहले लिया था स्वतः संज्ञान इस दौरान उच्च न्यायालय ने बताया कि सक्षम अथॉरिटी ने EWS सीमा की सालाना आय 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने को सहमति दे दी है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने यह बात 8 जनवरी को रेखा गुप्ता सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कही। कोर्ट सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुए एक मामले की सुनवाई कर रहा था। सालाना 5 लाख रुपए तक की आय वाले उठा सकेंगे फायदा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक सभी व्यक्ति अब जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद 5 लाख रुपए की निम्न आय वर्ग सीमा के तहत लाभ पाने के हकदार होंगे। सालाना आय की सीमा में यह बढ़ोतरी दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर आवंटित ज़मीन पर बने सभी पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों पर लागू होगी, जहां EWS नियम लागू हैं।' इससे पहले तक वार्षिक इतनी इनकम वालों को ही मिलता था फायदा अपने फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार व संबंधित विभागों को इस बढ़ोतरी का पर्याप्त प्रचार करने का निर्देश भी दिया ताकि नागरिकों को इसके बारे में पता चले और वे इसका लाभ उठा सकें। बेंच को बताया गया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज़ ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए 2 जनवरी को EWS की सालाना आय सीमा को 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने यह बात साल 2017 में स्वतः संज्ञान लेते हुए किए एक मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज में कमी की वजह से साल 2017 में शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने पहले AIIMS के डायरेक्टर को डॉ. एसके सरीन समिति की सिफारिशों को लागू करने की जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिया था, जिसने स्वास्थ्य प्रणाली में कई कमियों की ओर इशारा किया था, जिसमें खाली पद, महत्वपूर्ण फैकल्टी सदस्यों की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इस मामले में वकील अशोक अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया था।  

दिल्ली सरकार सख्त: प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और फैक्ट्रियों पर होगी ताबड़तोड़ कार्रवाई

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने ठोस और निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई जारी है। कूड़ा जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रोक के लिए विशेष निगरानी टीमें तैनात हैं और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माने के साथ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में वॉटर स्प्रिंकलिंग, धूल नियंत्रण और सड़क सफाई के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सभी विभाग एकजुट होकर समन्वित प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त एक्शन प्लान बनाए हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों एवं इंडस्ट्रीज पर सख्त कार्रवाई होगी। कूड़ा जलाने पर कड़ी निगरानी एवं जुर्माना लगेगा। हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर लगातार वॉटर स्प्रिंकलिंग और प्रदूषण नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ साझा प्रयास जरूरी है। बता दें कि एक दिन पहले राजधानी में प्रदूषण की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए लगातार चल रहे उपायों पर बातचीत की और कहा कि अब अन्य उपाय भी किए जाने जरूरी हैं ताकि प्रदूषण नियंत्रण में तो आए ही, साथ ही उसमें बढ़ोतरी भी न हो सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए और कहा कि इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को सख्त चेतावनी दी है कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कहीं भी लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाना हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए लगातार गंभीर व प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए कई टीमों का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदूषण के ‘हॉट स्पॉट’ को सामान्य बनाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है।

दिल्ली में त्योहार से पहले बड़ा तोहफा, कारोबारियों को मिले 694 करोड़ रुपये

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने दीपावली से पहले कारोबारियों को बड़ा उपहार दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि उनकी सरकार ने व्यापारी व उद्यमी को दी जाने वाली रिफंड प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। इस संबंध में सरकार ने अभी तक कारोबारियों की 694 करोड़ रुपए की राशि उन तक पहुंचाई है, जो एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री का कहना है कि छोटे-बड़े हर व्यापारी का जीएसटी रिफंड उसे तय समय सीमा में देने के लिए दिल्ली सरकार प्रतिबद्ध है। इस मौके पर उन्होंने जीएसटी टीम की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की और कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारी जीएसटी रिफंड वापस करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग भी कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों के बैंक खातों में तेजी से उनकी बकाया राशि पहुंच रही है।  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रेरित होकर व्यापार में सुगमता (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) वाली नीति पर गंभीरता से कार्य कर रही है। इसके लिए बड़े बाजारों के पुनर्विकास की योजनाएं तैयार की जा रही है तो कारोबारी वर्ग की समस्याओं को सुलझाने और उनके कारोबार को बाधा-रहित चलाने के लिए दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड का भी गठन किया जा चुका है। उनकी सरकार मानती है कि राजधानी के कारोबारियों को व्यापार चलाने में जितनी सरलता मिलेगी, राजधानी को विकसित दिल्ली बनाने का सपना उतनी ही तेजी से पूरा होगा। इसलिए व्यापारी वर्ग का रिफंड वापस करने के लिए तेज प्रयास जारी हैं।" मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली की पिछली सरकार ने जीएसटी रिफंड करने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे रिफंड राशि में लगातार बढ़ोतरी होती चली गई, लेकिन हमारी सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि रिफंड निपटान प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए जीएसटी विभाग ने आईआईटी-हैदराबाद के सहयोग से एक उन्नत आईटी मॉड्यूल विकसित किया। यह मॉड्यूल डेटा एनालिटिक्स, डेटा ऑटोमेशन और त्वरित जांच प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे रिफंड आवेदन शीघ्रता से निपटाए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि दीपावली तक व्यापारी वर्ग तक इतना रिफंड पहुंचा दिया जाए कि उसका सरकार पर विश्वास और बढ़े, साथ ही उसकी दीपावली का पर्व भी अधिक खुशियां और आनंद लेकर आए। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष से व्यापारी वर्ग का जीएसटी रिफंड वापस करने की प्रक्रिया पर गंभीरता से कार्य करना शुरू कर दिया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, व्यापार व कर विभाग ने इस वित्त वर्ष 2025-26 में (अप्रैल से अब तक) कुल 7375 रिफंड आवेदनों का निपटारा कर दिया और कुल 694 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड राशि व्यापारियों के खातों में जारी कर दी गई है, जो उनका हक था। इस मौके पर, उन्होंने कहा, "सरकार ने एक रिकॉर्ड और भी बनाया है कि उसने सितंबर माह में 227 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया, जो दिल्ली के रिफंड इतिहास में पहले कभी नहीं किया गया।" मुख्यमंत्री ने व्यापार और कर विभाग के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समय पर रिफंड जारी किया जाना व्यावसायिक संस्थाओं में विश्वास पैदा करता है। साथ ही व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को तेजी व सुगमता से कार्य करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि छोटे-बड़े हर वर्ग के कारोबारी को जीएसटी रिफंड देने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी बकाया, निर्विवादित और वास्तविक रिफंड आवेदनों का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली सरकार का यह भी मानना है कि प्राथमिकता और समयबद्ध रिफंड से कारोबारियों को पूंजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी, उनमें मुकदमेबाजी से उपजा तनाव कम होगा, जिससे दिल्ली की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी। इसका एक दूरगामी प्रभाव यह भी होगा कि राजधानी को विकसित दिल्ली बनाने का हमारी सरकार का लक्ष्य और तेजी से पूरा होगा। हमारी सरकार का लक्ष्य व्यापारियों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को मजबूत बनाना है। इसीलिए हमारी सरकार व्यापारिक नियमों को सरल बनाने और व्यापार में आने वाली बेवजह ही अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार प्रभावी प्रयास कर रही है।

दिल्ली सरकार निकालेगी शिक्षकों के 5000+ पद, जानें कब से भर सकते हैं फॉर्म

नई दिल्ली दिल्ली सरकार के स्कूलों में अरसे से चल रही शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयास तेज हो गए हैं। दिल्ली सरकार ने 5346 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। इससे पहले सितंबर में 1180 शिक्षकों की भर्ती निकली जा चुकी है। ये भर्ती प्रक्रिया उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत सरकारी स्कूल में 18,000 शिक्षकों की नियुक्ति जानी है। इस तारीख से शुरू होगी आवेदन की प्रक्रिया दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने रिक्तियों का विज्ञापन दिया है और 9 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। दिल्ली सरकार का शिक्षा निदेशालय 1075 स्कूल चलाता है, जिसमें 8,24,225 छात्र नामांकित हैं। इसके अलावा निदेशालय से सहायता प्राप्त 199 स्कूलों में 74,563 छात्र नामांकित हैं। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों के 18,000 से अधिक पदों में से शिक्षकों की बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में अतिथि शिक्षकों से भरा गया है।