samacharsecretary.com

आबकारी राजस्व में 20 प्रतिशत तक होगी वृद्धि : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

आबकारी व्यवस्था की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंत्रालय में आबकारी व्यवस्था वर्ष 26-27 की समीक्षा की। वर्ष 26-27 के म.प्र. समस्त मदिरा दुकानों का ई-टेडर एवं ई टेंडर कम ऑक्सन के माध्यम से निष्पादन करने का नीतिगत निर्णय लिया गया है। वर्ष 2026-2027 के लिए मदिरा दुकानों के वर्ष 2025-26 के वार्षिक मूल्य में आबकारी नीति अनुसार 20 प्रतिशत वृद्धि की जाकर वर्ष 2026-27 के लिए आरक्षित मूल्य का निर्धारण किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिये मदिरा दुकानों से सरकार को 19 हजार 952 करोड़ की प्राप्ति होगी। अब तक कुल 6 चरणों में हुए मदिरा दुकानों के निष्पादन से 11 हजार 827 का आबकारी राजस्व सुनिश्चित हुआ है, जो कि वर्ष 2025-26 वार्षिक मूल्य से 30 प्रतिशत अधिक है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा को बताया गया कि अब तक उमरिया, सीधी, शहडोल, मडला, डिण्डोरी, खरगौन, आदि जिले सौ प्रतिशत राजस्व निष्पादित हो चुके हैं। कम राजस्व वसूली वाले जिले क्रमश: इन्दौर 78 प्रतिशत, ग्वालियर 79 प्रतिशत, धार 76 प्रतिशत, शिवपुरी 80 प्रतिशत, रीवा 85 प्रतिशत, खण्डवा 82 प्रतिशत, अशोकनगर 82 प्रतिशत सिंगरौली 83 प्रतिशत और नर्मदापुरम 93 प्रतिशत राजस्व प्राप्त किया जा चुका है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने निर्देशित किया है कि जिन जिलों में राजस्व का लक्ष्य प्राप्त करना शेष है उनमें भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, नीमच और झाबुआ जिला शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने इन जिलों पदस्थ जिला आबकारी अधिकारियों को विशेष प्रयास करने के लिये निर्देशित किया। समिति की बैठक में परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके उपस्थित थीं। साथ ही प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर, आबकारी आयुक्त एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें।  

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ का बजट पेश

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में राज्य सरकार निर्धन एवं कमजोर वर्गों को अंतिम पंक्ति से प्रथम पंक्ति में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ मिलकर सरकार ''संकट को समाधान'' में, ''मुश्किल को मुमकिन” में और ''असंभव को संभव” में बदल देगी। उन्होने कहा कि गरीब, युवा, अन्नदाता तथा नारी को केन्‍द्र में रखकर प्रारंभ की गई यात्रा को और अधिक सार्थक व परिणामजनक बनाने के लिए क्रमश: “आई” फॉर इंडस्ट्रियलाइजेशन एवं “आई” फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल किया है, जिससे ज्ञान (GYAN) से प्रारंभ यात्रा का अगला पड़ाव ‘ज्ञानी’ (GYANII) के स्वरूप में लक्षित है। इसी इसी विचार को बजट का आधार बनाया गया है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में मध्यप्रदेश के वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत कर यह बात कही। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में कुल विनियोग की राशि 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ है। वर्ष के अंत में राजस्‍व आधिक्‍य रहना अनुमा‍नित है। पूंजीगत परिव्‍यय राज्‍य के सकल घरेलू उत्‍पाद का 4.80 प्रतिशत अनुमानित है। बजट 2026-27 बजट का आकार 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ कुल राजस्‍व प्राप्तियां 3 लाख 8 हजार 703 करोड़ राज्‍य कर एवं करेत्तर राजस्‍व 1 लाख 42 हजार 61 करोड़ केंद्रीय करों में हिस्‍सा 1 लाख 12 हजार 137 करोड़ केन्‍द्र से सहायता अनुदान 54 हजार 504 करोड़ पूंजीगत प्राप्तियां 80 हजार 694 करोड़ कुल राजस्‍व व्‍यय 3 लाख 8 हजार 658 करोड़ पूंजीगत परिव्‍यय 80 हजार 266 करोड़ राजस्‍व आधिक्‍य 44 करोड़ राजकोषीय घाटा 71 हजार 460 करोड़ जी.एस.डी.पी. 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ राजकोषीय घाटा का प्रतिशत जी.एस.डी.पी. से 3.87 प्रतिशत बजट में प्रतिशत वृद्धि :- ग्रामीण विकास विभाग 37 प्रतिशत नगरीय विकास एवं आवास विभाग 16 प्रतिशत महिला एवं बाल विकास विभाग 26 प्रतिशत राजस्‍व विभाग 43 प्रतिशत स्‍कूल शिक्षा विभाग 11 प्रतिशत बजट प्रावधान:- स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में 23 हजार 747 करोड़ कृषि एवं सम्‍बद्ध क्षेत्र 88 हजार 910 करोड़ कृषि एवं सम्‍बद्ध क्षेत्र में गैर बजटीय स्‍त्रोतों को सम्मिलित करते हुए 1 लाख 15 हजार करोड़ प्रमुख योजनाओं में बजट प्रावधान:- लाडली बहना योजना लगभग 23 हजार 800 करोड़ वी.बी.जी. राम जी योजना लगभग 10 हजार 400 करोड़ मुख्‍यमंत्री किसान कल्‍याण योजना लगभग 5 हजार 500 करोड़ राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन लगभग 4 हजार 600 करोड़ सिंहस्‍थ आयोजन लगभग 3 हजार करोड़ प्रमुख नवीन योजनाओं में बजट प्रावधान:- द्वारका योजना अगले 3 वर्षों में 5 हजार करोड़ का निवेश स्‍वामित्‍व योजना लगभग 3 हजार 800 करोड़ यशोदा दुग्‍ध प्रदाय योजना 700 करोड़ सामाजिक एवं आर्थिक उत्‍थान की योजनाओं में बजट प्रावधान :- कुल प्रावधान 1 लाख 83 हजार 708 करोड़ अनुसूचित जनजाति वर्ग 47 हजार 428 करोड़ (कुल प्रावधान का 26 प्रतिशत) अनुसूचित जाति वर्ग 31 हजार 192 करोड़ (कुल प्रावधान का 17प्रतिशत) जी.एस.डी.पी. वर्ष 2025-26 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ वर्ष 2026-27 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ प्रतिबद्ध देयता ऋण भुगतान 34 हजार 437 करोड़ ब्‍याज भुगतान 33 हजार 735 करोड़ पेंशन भुगतान 29 हजार 449 करोड़ वेतन भत्ते लगभग 67 हजार करोड़ कर्ज की स्थिति (अनुमानित) 31 मार्च 2025 की स्थिति 4 लाख 14 हजार 611 करोड़ 31 मार्च 2026 की स्थिति 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ 31 मार्च 2027 की स्थिति 5 लाख 59 हजार 336 करोड़ 31 मार्च 2026 की स्थिति में प्रदेश का कुल कर्ज जी.एस.डी.पी का लगभग 29 प्रतिशत है। जो कि निर्धारित सीमा में है।

लक्ष्य बड़े रखें, उत्साह से कार्य करने पर निश्चित रूप से मिलेगी सफलता : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

उप मुख्यमंत्री ने जेंडर कैंपेन नई चेतना 4.0 का किया शुभारंभ पंचायतों में बिना मांग स्वीकृत किए नए भवन, अब तीन मंजिल तक कर सकेंगे निर्माण: मंत्री श्री पटेल पंचायत प्रतिनिधियों एवं राज्य स्तरीय पदाधिकारियों की तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन भोपाल  पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 24 नवंबर से चल रही पंचायत प्रतिनिधियों एवं राज्य स्तरीय पदाधिकारियों की तीन दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को समापन हो गया। कार्यशाला के अंतिम दिन उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने जिला पंचायत सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने मध्यप्रदेश दीनदयाल अंत्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित जेंडर कैंपेन नई चेतना 4.0 का शुभारंभ किया। उत्कृष्ट लोक अधिकार केंद्रों के माध्यम से महिलाओं के हक एवं अधिकारों पर कार्य करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता, लक्ष्य बड़ा होना चाहिए। मन में काम करने का उत्साह रहेगा तो सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद जन-प्रतिनिधियों से सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाने की अपील की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि इस बार कार्यशाला में सरपंच संगठन, सचिव संगठन और जीआरएस संगठन के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा की जनप्रतिनिधियों को अधिकारों और कर्तव्यों पर गंभीरता से विचार कर सार्वजनिक जीवन में बनी नकारात्मक धारणा को समाप्‍त करते हुए पारदर्शिता और ईमानदारी से कार्य करना चाहिए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जहां पंचायत भवन नहीं थे, वहां बिना मांग के नए भवन स्वीकृत किए गए। अब पंचायत भवन तीन मंजिला बनाए जाएंगे, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार उनका उपयोग हो सकेगा। इसी तरह ग्राम पंचायत, जनपद पंचायतों में सामुदायिक भवन भी बनवाए जा रहे हैं। पंचायतों को ग्राम सुरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक उत्तरदायित्व के विषयों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि को स्वयं से तीन प्रश्न जरूर पूछने चाहिए। पहला- मेरे कर्तव्य क्या हैं? दूसरा- मेरा वित्तीय प्रबंधन कितना पारदर्शी है? और तीसरा- समाज के लिए मेरा योगदान क्या है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य और ईमानदारी पर अडिग रहना ही जनसेवा का मूल सिद्धांत है। कार्यशाला के आखिरी दिन दो सत्र हुए। इसमें प्रदेश के जिला पंचायत सदस्य शामिल हुए। जिला पंचायत की स्थायी समितियों की नियमित बैठकें एवं जिला पंचायत डेवलपमेंट प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने बेहतर विकास को लेकर सुझाव दिए। बैठक में क्षेत्र के विकास को लेकर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह, संचालक श्री छोटे सिंह, एसआरएलएम की सीईओ श्रीमती हर्षिका सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

समृद्ध मप्र के लिये पंचायत प्रतिनिधि गांवों को बनायें समृद्ध : उपमुख्यमंत्री देवड़ा

स्वदेशी अर्थव्यवस्था में गांव में ही मिलेंगे रोजगार के अवसर भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि गांव की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की समृद्धि है। मध्यप्रदेश में विकास की गति को तेज बढ़ाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को मिलकर अपने गांव को समृद्ध बनाना होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में पंचायत प्रतिनिधियों को सक्षम बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। श्री देवड़ा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभाग्रह में "आत्मनिर्भर पंचायत – समृद्ध मध्यप्रदेश" पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब ऐसे अवसर बन रहे हैं, जिससे गांव आत्म-निर्भर की ओर बढ़ रहे हैं। स्वदेशी अर्थव्यवस्था के अंतर्गत अब गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। महिलाओं और युवाओं की विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता की आवश्यकता है। इससे परस्पर विश्वास बढ़ता है और इसका लाभ विकास को आगे बढ़ाने में होता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें विकास की धुरी हैं। इसलिये उन्हें अपनी विकास योजनाएं बनाने की स्वतंत्रता दी गई है। श्री देवड़ा ने पंचायत प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे विकास के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध प्रयास करें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास की ऐसी योजनाएं बनाई गई हैं जो निचले स्तर तक विकास ला सकती है। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास वर्तमान में जितने अधिकार हैं उसका उपयोग कर पंचायतें विकास की गति में तेजी ला सकती हैं। श्री देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2047 तक देश को आर्थिक रूप से विश्व का समृद्ध देश बनाने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश इस संकल्प को साकार करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय प्रबंधन व्यवस्थाओं में और ज्यादा सुधार करने की आवश्यकता है। साथ ही महिला पंचायत प्रतिनिधियों और महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को भी आगे आने की आवश्यकता है। कार्यशाला में त्रि-स्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थ‍ित थे।  

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा- डिजिटल वित्तीय प्रणाली को देंगे नई गति

पेंशनरों को त्वरित सेवाएँ सीबीडीसी के सफल पायलट प्रोजेक्ट पर मध्यप्रदेश अग्रणी भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय प्रणाली को पूर्ण रूप से डिजिटल और पारदर्शी स्वरूप देने के लिये राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में डिजिटल करेंसी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाएँ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने यह भी कहा कि पेंशन प्रकरणों को संपूर्ण रूप से डिजिटाइज किया जाएगा। इससे लाखों पेंशनरों को त्वरित और सरल सेवाएँ उपलब्ध हो सकेंगी। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा मंगलवार को मंत्रालय में वित्त विभाग की गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत 2 वर्षों के दौरान प्रदेश का वित्तीय ढांचा अधिक सक्षम, तकनीक-सम्मत और सेवा उन्मुख हुआ है। पेंशन व्यवस्था में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप अब पेंशन भुगतान एसबीआई द्वारा एग्रीगेटर मॉडल में किया जा रहा है। इससे पेंशनरों को किसी भी बैंक खाते में राशि प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है। उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बताया कि सिंगल नोडल एजेंसी प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। इस उपलब्धि से राज्य को 500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है और 66 में से 47 केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की स्वीकृतियाँ जारी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली आज प्रदेश में अधिक त्वरित, सुरक्षित और विश्वसनीय बन चुकी है। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन प्रक्रियाओं को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप देने के लिये आईएफएमएस नेक्स्ट जेन को निर्धारित समय सीमा में लागू करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने विभागों, कोषालयों तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) का सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है। यह भविष्य में बगैर नकद रकम के लेनदेन, कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में पारदर्शिता और वित्तीय प्रक्रियाओं की गति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसे आगामी समय में आईएफएमएस नेक्स्ट जेन से जोड़कर प्रमुख योजनाओं में लागू किया जाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिये ई-जीपीएफ प्रणाली बड़ी राहत के रूप में उभर रही है। महालेखाकार कार्यालय द्वारा प्राधिकृत पत्र जारी होते ही भुगतान सीधे ऑनलाइन हो जाता है तथा अब तक 5,000 से अधिक मामलों में इसका सफल उपयोग किया जा चुका है। इस प्रणाली को अब 57,000 कर्मचारियों तक विस्तारित किया जा रहा है। इससे सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ समय पर प्राप्त हो सकेंगे। वित्तीय निरीक्षण एवं सेवा-प्रदान को और मजबूत करने के लिये पांदुर्णा, मऊगंज और मैहर में 3 नए कोषालय स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही चम्बल, नर्मदापुरम और शहडोल में स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय के क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे विभागीय निगरानी और सेवा-सुगमता बढ़ेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, सचिव श्री लोकेश कुमार जाटव, आयुक्त कोष एवं लेखा श्री भास्कर लाक्षाकार, संचालक वित्त श्री राजीव रंजन मीणा, अपर सचिव वित्त श्री रोहित सिंह, संचालक पेंशन श्री जे.के. शर्मा तथा संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा श्री अदिति कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते व पेंशन पर हुई बैठक

भोपाल उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते, पेंशन आदि के संबंध में गठित समिति की द्वितीय बैठक गुरूवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में विधायक सर्व अजय विश्नोई एवं  सचिन सुभाषचंद्र यादव उपस्थित रहे। समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ के राज्यों में विधायक एवं पूर्व विधायक को मिलने वाली वेतन भत्ते एवं पेंशन राशि पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने यह निर्णय लिया कि अगामी बैठक में मध्यप्रदेश के विधायकों/पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधा पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा। समिति के सदस्य सचिव अपर मुख्य सचिव,  अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव वित्त, मनीष रस्तोगी, विधान सभा के प्रमुख सचिव  अरविन्द शर्मा एवं अपर सचिव  वीरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री देवड़ा बोले – अभिलेखागार से रिकॉर्ड रहेंगे व्यवस्थित, कार्य की गति में आएगी तेजी

अभिलेखागार बनने से रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेंगे एवं कार्य की गति बढ़ेगी : उप मुख्यमंत्री  देवड़ा मंदसौर में एक करोड़ 66 लाख से निर्मित राजस्व एवं सामान्य अभिलेखागार भवन का किया भूमि-पूजन भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा है कि अभिलेखागार भवन के निर्माण से मंदसौर जिले के समस्त राजस्व एवं सामान्य अभिलेख व्यवस्थित रूप से संधारित किए जा सकेंगे। सभी रिकॉर्ड एक ही स्थान पर सुरक्षित रहेंगे। इससे कार्य प्रणाली में पारदर्शिता एवं गति आएगी। रिकॉर्ड के व्यवस्थित नहीं रहने से कई बार कार्यों में विलंब या कठिनाई आती है, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव से यह समस्या नहीं होगी। यह बात उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने शुक्रवार को सुशासन भवन परिसर मंदसौर में राजस्व अभिलेखागार एवं सामान्य अभिलेखागार भवन का भूमि-पूजन कार्यक्रम में कही। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभिलेखागार प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम और प्रभावी बनाएगा। भवन लगभग 1 करोड़ 66 लाख रुपए की लागत से निर्माण एजेंसी पीआईयू विभाग द्वारा निर्मित किया जाएगा। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद  सुधीर गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष मती दुर्गा विजय पाटीदार, मंदसौर विधायक  विपिन जैन, पूर्व विधायक  यशपाल सिंह सिसोदिया, योजना समिति सदस्य  राजेश दीक्षित, नगर पालिका अध्यक्ष मती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मती मनुप्रिया विनीत यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर मती अदिती गर्ग, पुलिस अधीक्षक  विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर मती एकता जायसवाल, सीईओ जिला पंचायत  अनुकूल जैन, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

उपमुख्यमंत्री देवड़ा: जीएसटी सुधारों से म.प्र. में आजीविका के नए मौके और राजस्व वृद्धि

आजीविका के नये मौके और राजस्व संग्रहण बढ़ा : उप मुख्यमंत्री देवड़ा जीएसटी सुधारों का म.प्र. में हुआ व्यापक प्रभाव उत्पादों की कीमतें 6 से 10 प्रतिशत तक कम हुई भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू किए गए नए जीएसटी सुधारों का मध्यप्रदेश के व्यापार, उद्योग और एमएसएमई सेक्टर पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगा है। इन सुधारों से राज्य के विभिन्न उत्पादों में 6 से 10 प्रतिशत तक कीमतों की कमी दर्ज की गई है। इससे न केवल उद्योगों की लागत घटी है, बल्कि रोजगार, विकास और आजीविका के नए अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितम्बर माह तक निर्धारित लक्ष्य ₹8,212 करोड़ के विरुद्ध ₹8,293.01 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया, जो लक्ष्य से 0.99 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान वर्ष में सितम्बर 2025 तक प्राप्त राजस्व, गत वर्ष की तुलना में 16.88 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत है कि जीएसटी सुधारों ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि- “प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में किए गए जीएसटी सुधारों ने व्यापार जगत, उद्योगों और कारीगरों के लिए नई ऊर्जा दी है। कर दरों में की गई कमी से उत्पाद सस्ते हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत और व्यापारियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है। इन सुधारों से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश अग्रसर हो रहा है।” उद्योग, हस्तशिल्प और कारीगरी पर जीएसटी सुधारों का प्रभाव इंदौर नमकीन उद्योग इंदौर सेंव, लौंग सेंव, मिक्सचर और चिवड़ा जैसे उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त केंद्र इंदौर, लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2.5 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। इसका निर्यात मध्य पूर्व, ब्रिटेन और अमेरिका तक होता है। नमकीन पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से उत्पादों में 6-7% तक सस्ती होने की प्रवृत्ति देखी गई है। इससे घरेलू बिक्री में वृद्धि और निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है। कृषि मशीनरी मध्यप्रदेश, भारत का दूसरा सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य होने के साथ कृषि-मशीनीकरण का प्रमुख केंद्र भी है। इंदौर, भोपाल, देवास, ग्वालियर, उज्जैन और विदिशा में एमएसएमई क्लस्टर द्वारा सीड ड्रिल, थ्रेशर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप बनाए जाते हैं। यहां लगभग 25,000 श्रमिक प्रत्यक्ष और 60,000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। ट्रैक्टर, पंप और उपकरणों पर जीएसटी 12/18% से घटाकर 5% करने से उपकरणों की लागत में 7-13% तक की गिरावट आने की उम्मीद है। माहेश्वरी साड़ियां खरगोन जिले का महेश्वरी हथकरघा क्षेत्र 2,600 करघों पर लगभग 8,000 बुनकरों को रोजगार देता है, जिनमें महिलाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं। विशिष्ट उलटी किनारी (बुगड़ी) वाली माहेश्वरी साड़ियां 2010 से जीआई टैग प्राप्त हैं और यूरोप व अमेरिका तक निर्यात होती हैं। वस्त्र उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से ये साड़ियां लगभग 6% सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मांग बढ़ेगी। गोंड चित्रकलाएं मंडला, डिंडोरी, उमरिया और सिवनी में बनने वाली गोंड चित्रकलाएं 2015 से जीआई टैग प्राप्त हैं। ये लोककथाओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से इन कलाकृतियों में लगभग 6% कीमत कमी आई है, जिससे कलाकारों को ई-कॉमर्स और निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है। लकड़ी के लाख के खिलौने मुख्य रूप से बुधनी (सीहोर), उज्जैन और ग्वालियर में तैयार यह पारंपरिक शिल्प 2,000-2,500 कारीगरों को रोजगार देता है। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में 6% तक कमी आई है, जिससे ये पर्यावरण-अनुकूल खिलौने प्लास्टिक के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। जापान और यूरोप जैसे निर्यात बाजारों में इनकी मांग बढ़ी है। टेराकोटा और मिट्टी के शिल्प मंडला, बैतूल, उज्जैन और टीकमगढ़ में 5,000-6,000 ग्रामीण कारीगर, ज्यादातर महिलाएं, टेराकोटा खिलौनों और सजावटी वस्तुओं का निर्माण करती हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से ये उत्पाद लगभग 6% सस्ते हुए हैं, जिससे त्योहारी सीजन में बिक्री में वृद्धि हुई है। बेल मेटल और डोकरा शिल्प बैतूल और बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में 5,000 कारीगर डोकरा कला में कार्यरत हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से उत्पादों की कीमत में 6% की कमी आई है, जिससे मशीन निर्मित मूर्तियों के मुकाबले यह शिल्प फिर से लोकप्रिय हुआ है। लाख के बर्तन और बेल धातु शिल्प टीकमगढ़, झाबुआ और अलीराजपुर में 5,000-6,000 कारीगर लाख के बर्तन और बेल धातु की वस्तुएं बनाते हैं। बेल धातु पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% और लाख के बर्तनों पर 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में 6-10% की कमी आई है, जिससे घरेलू मेलों में बिक्री और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है। बांस और बेंत के हस्तशिल्प बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में हजारों जनजातीय परिवार बांस-बेंत के शिल्प में लगे हैं। लगभग 12,000 प्रत्यक्ष और 25,000 अप्रत्यक्ष महिला कारीगरों को काम मिला है। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से इन उत्पादों में 6% की कीमत कमी आई है, जिससे इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिला है। पीतल के बर्तन टीकमगढ़, छतरपुर और बैतूल के पीतल उद्योगों में वंशानुगत कारीगर पारंपरिक बर्तन और दीपक बनाते हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में लगभग 6% की कमी आई है, जिससे कारीगरों को स्टील और एल्यूमिनियम से प्रतिस्पर्धा में राहत मिली है। सीमेंट उद्योग सतना, कटनी, दमोह और रीवा जैसे केंद्रों के कारण मध्यप्रदेश भारत का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक है। यहां लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से प्रति 50 किलो बैग में ₹25-30 की कीमत कमी हुई है। इससे निर्माण और आवास क्षेत्र को बढ़ावा मिला है। बलुआ पत्थर उद्योग ग्वालियर, शिवपुरी और टीकमगढ़ के केंद्रों में 25,000-30,000 श्रमिक कार्यरत हैं। जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से स्लैब और टाइल्स 8% सस्ती हुई हैं, जिससे निर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिला है। चमड़े के जूते उद्योग देवास, इंदौर और ग्वालियर के क्लस्टर में 40,000 प्रत्यक्ष और 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। ₹2,500 तक के जूतों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने से 11% कीमत कमी हुई है, जिससे कारीगरों की आमदनी बढ़ी है और जूता उद्योग को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है। जीएसटी सुव्यवस्थीकरण से मध्यप्रदेश को घरेलू स्नैक्स, साड़ियां, आदिवासी शिल्प, सीमेंट, बलुआ पत्थर और … Read more

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने इंदौर राजवाड़ा बाजार से खरीदे मिट्टी के दीपक

स्वदेशी को अपनाने की कही बात भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने स्वेदशी उत्पादों की खरीदी को बढ़ावा देने, स्वदेशी को उपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वेदशी ही उत्तम रास्ता है। उन्होंने प्रतीक रूप में इंदौर राजवाड़ा बाजार से मिट्टी के दीपक खरीदे। उन्होंने फुटपाथ पर दीपकों की दुकान सजाए महिला दुकानदार से दीपक खरीदे। देश भर में दीपावली की धूम है, दुकानें सज गयी है घरों में साफ़-सफ़ाई शुरू हो चुकी है और घरों को सजाने का सामान भी हर दुकान पर सजने लगा है। ऑनलाइन शॉपिंग करने के साथ फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले लोगों को भी प्रोत्साहित करें। इसी असमानता को दूर करने और अपनों से जुड़ने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा "आत्मनिर्भर भारत" के स्वदेशी अपनाओ का नारा दिया गया है। इस अवसर पर उनके साथ क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला और शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि स्वदेशी संकल्प को पूरा करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प हर नागरिक को पूरा करना होगा।  

उप मुख्यमंत्री देवड़ा लखेरापुरा में व्यवसायियों के बीच पहुंचे

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि स्वदेशी अपनाओ अभियान विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस समय नवरात्रि चल रही है, दशहरा और दीपावली आने वाली है, हम सब का दायित्व है कि स्वदेशी अपनाएं  और भारत को समृद्ध बनाएं। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने यह बात रविवार को भोपाल के लखेरापुरा मार्केट के दुकानदारों के बीच जाकर कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संलल्प है कि 2047 में हमारा देश विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आए और हमारा भारत देश विश्व गुरू के रूप में स्थापित हो। दुकानदारों को दिलाया स्वदेशी का संकल्प उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी संकल्प पत्र स्वयं भरा और दुकानदारों एवं ग्राहकों से भी अपील की कि वे भी स्वदेशी सामग्री क्रय-विक्रय का संकल्प लें। श्री देवड़ा ने उपस्थित दुकानदारों एवं उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से स्वदेशी अपनाने की शपथ भी दिलाई। घटी जीएसटी मिला उपहार, धन्यवाद मोदी सरकार उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने लखेरापुरा मार्केट में स्वदेशी अपनाओ अभियान के तहत स्थानीय व्यापारी बंधुओ से भेंट कर उन्हें अभियान के संबंध में जानकारी दी और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने ग्राहकों को भी जागरूक कर स्वदेशी वस्तुएं खरीदने वालों को प्रोत्साहित किया। स्वदेशी अपनाओ अभियान के तहत श्री देवड़ा ने कहा कि  "घटी जीएसटी मिला उपहार धन्यवाद मोदी सरकार" हम सभी स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों पर गर्व करें। श्री देवड़ा ने लखेरापुरा मार्केट में दौरा कर दुकानों में स्वदेशी अपनाओं के स्लोगन लिखे पोस्टर चिपकाए और अपने विचार साझा किए।