देव दीपावली विशेष: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने से खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार!
आज कार्तिक मास की पूर्णिमा है. आज देव दीपावली का पर्व भी मनाया जा रहा है. इसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है. इस अवसर पर भगवान शिव की नगरी काशी में लाखों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं. घर-घर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है. देव दीपावली का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित किया गया है. कार्तिक महीने और पूर्णिमा तिथि का संबंध माता लक्ष्मी लक्ष्मी से भी बताया जाता है. ऐसे में इस अवसर पर दीपदान के बाद, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करना बहुत शुभ होता है. ऐसा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है, तो आइए आरती पढ़ते हैं. भगवान विष्णु की आरती ॐ जय जगदीश हरे आरती ॐ जय जगदीश हरे… ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे… मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे… दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे… विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे… श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे… आरती श्री लक्ष्मी जी ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥