samacharsecretary.com

देव दीपावली विशेष: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने से खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार!

आज कार्तिक मास की पूर्णिमा है. आज देव दीपावली का पर्व भी मनाया जा रहा है. इसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है. इस अवसर पर भगवान शिव की नगरी काशी में लाखों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं. घर-घर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है. देव दीपावली का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित किया गया है. कार्तिक महीने और पूर्णिमा तिथि का संबंध माता लक्ष्मी लक्ष्मी से भी बताया जाता है. ऐसे में इस अवसर पर दीपदान के बाद, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करना बहुत शुभ होता है. ऐसा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है, तो आइए आरती पढ़ते हैं. भगवान विष्णु की आरती ॐ जय जगदीश हरे आरती ॐ जय जगदीश हरे… ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे… मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे… दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे… विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे… श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे… आरती श्री लक्ष्मी जी ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

प्रकाश, श्रद्धा और आस्था का संगम — काशी की देव दीपावली

वाराणसी वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा की रात गंगा के अर्ध चंद्राकार घाटों की छटा देवलोक का अहसास कराती है। देखने वाले को महसूस होता है कि गंगा तट पर देवलोक की छवि उतर आई है। काशी की देव दीपावली का यह नजारा अद्भुत होता है। बजते घंटे-घड़ियाल, शंखों की गूंज व हिलोरे लेती आस्था, जिसे देखने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु काशी आते हैं। काशी में लक्खा मेले की प्राचीन परम्परा है। इसमें एक लाख से अधिक लोग एकत्र होते हैं। नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसी घाट की नाग नथैया, चेतगंज की नक्कटैया और रथयात्रा मेले की शृंखला में यह काशी का पांचवां लक्खा मेला है। इस अवसर पर गंगा के 84 घाटों पर सात किलोमीटर तक शृंखलाबद्ध दीप जलाए जाते हैं। शाम होते ही ये सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा उठते हैं और गंगा की धारा में इन दीपों की अलौकिक छटा निखरती है। शंकराचार्य की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाला यह दीपोत्सव पहले केवल पंचगंगा घाट की शोभा हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे काशी के सभी घाटों पर दीपों की शृंखला बढ़ती चली गई और दो दशकों से देव दीपावली ने महापर्व का स्वरूप ले लिया है। इस तरह देव दीपावली सांस्कृतिक राजधानी काशी की खास पहचान बन गई है। अहिल्याबाई होल्कर ने स्थापित किया था हजारा दीपस्तंभ काशी की देव दीपावली प्राचीनता और परम्परा का अद्भुत संगम है। इतिहास में इसका जिक्र मिलता है। महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने पंचगंगा घाट पर पत्थरों से बना खूबसूरत हजारा दीपस्तंभ स्थापित किया था। यह दीपस्तंभ देव दीपावली की परम्परा का साक्षी है। काशी में देव दीपावली की शुरूआत भी यहीं से हुई थी। यह दीपस्तंभ देव दीपावली के दिन 1001 से अधिक दीपों की लौ से जगमगाता है। इस दृश्य को यादों में सहेजने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से पर्यटक काशी पहुंचते हैं। मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा का होता है दर्शन-पूजन देव दीपावली के अवसर पर मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा को गंगा घाट पर विराजमान किया जाता है। मां गंगा की यह प्रतिमा साल में दो बार गंगा दशहरा और देव दीपावली पर ही लोगों के दर्शन-पूजन के लिए स्थापित की जाती है। इस तरह काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान की यह परम्परा देव आराधना का महापर्व बन जाती है। काशी की गंगा आरती तो देशभर में प्रसिद्ध है ही, देव दीपावली पर आरती का नजारा और भी अद्भुत होता है। देव दीपावली की पृष्ठभूमि में एक पौराणिक कथा भी है। त्रिपुरासुर राक्षस ने ब्रह्माजी की तपस्या कर वरदान पा लिया था और तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने की प्रार्थना की। उन्होंने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था। इस खुशी में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली इसलिए देव दीपावली को ‘त्रिपुरी’ के नाम से भी जाना जाता है।

देव दीपावली 2025: इस दिन करें विशेष पूजा, जानें सही समय और मंत्र

नई दिल्ली   कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह कार्तिक मास का अंतिम दिन होता है और इसे देव दीपावली तथा गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवी-देवता धरती पर गंगा स्नान करने के लिए अवतरित होते हैं। कार्तिक मास का यह पवित्र महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने में भक्त पूजा, व्रत और दानधर्म का पालन करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा होती है। देव दीपावली का महत्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा नदी के किनारे हजारों दीप जलाए जाते हैं और इसे देव दीपावली कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही सत्यनारायण कथा का पाठ करने से मनोकामना पूरी होती है। देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा 2025 का मुहूर्त तिथि का आरंभ: 04 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे तिथि का समापन: 05 नवंबर 2025, शाम 6:48 बजे गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 से 05:44 बजे तक पूजा मुहूर्त: सुबह 07:58 से 09:20 बजे तक इस समय में पूजा, स्नान और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।   कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि स्नान और शुद्धिकरण: सुबह गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें। पूजा सामग्री: फूल, दीपक, धूप, फल, तिल, चावल, घी और ब्राह्मण को दान। सत्यनारायण कथा: इस दिन कथा का पाठ विशेष फलदायी होता है। दीपदान: गंगा या तालाब में दीपक जलाना अत्यंत शुभ है। व्रत का पारण: पूरे दिन व्रत रखने के बाद संध्याकाल में पारण करें। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन किए गए दान और पूजा का फल अत्यधिक मंगलकारी होता है। क्यों विशेष है कार्तिक पूर्णिमा यह दिन धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि लाता है। गंगा स्नान और दीपदान से पाप नष्ट होते हैं। भगवान विष्णु और शिव की पूजा से आध्यात्मिक उन्नति होती है। व्रत और कथा का पालन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। 5 नवंबर 2025 को मनाई जाने वाली कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और धर्म का प्रतीक है। गंगा स्नान, दीपदान और सत्यनारायण पूजा से न केवल पाप नष्ट होते हैं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति आती है।

काशी दर्शन का नया अंदाज़: नमो घाट से उड़ान भरेंगे हेलिकॉप्टर, दिखेगा दिव्य देव दीपावली दृश्य

वाराणसी काशी के घाटों, मंदिरों और गंगा आरती का नजारा अब आसमान से भी देखने को मिलेगा। देव दीपावली से पहले वाराणसी में पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी। सर्वे, सुरक्षा सहित परीक्षण के दूसरे काम पूरे हो गए हैं। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने वाली कंपनी के अफसरों ने मंजूरी के लिए बाबतपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क कर सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है। इस सेवा के तहत श्रद्धालु और पर्यटक 7-8 मिनट की हवाई यात्रा में काशी के प्रमुख स्थलों के अद्भुत दर्शन कर सकेंगे। कंपनी के एक अफसर के अनुसार नमो घाट पर बने हेलिपैड से उड़ान शुरू की जाएगी। यहां से तीन सीटर और छह-सीटर हेलिकॉप्टर उड़ान भरेंगे। करीब 7-8 मिनट की इस यात्रा में पर्यटक काशी के हवाई दर्शन कराएंगे। नमो घाट से श्री काशी विश्वनाथ धाम, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र सहित सभी घाट, गोदौलिया क्षेत्र, चौक, काल भैरव मंदिर और रामनगर पुल दिखाए जाएंगे। हेलिपैड के बाद एचटी लाइन सहित कुछ अन्य दिक्कतें थीं जिसे दूर कर लिया गया है। हेलिकॉप्टर संचालन का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को दिया गया था। हरी झंडी मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर सेवा का किराया अभी नहीं तय किया गया है लेकिन बुकिंग ऑनलाइन ही होगी। इसी सप्ताह विभागीय अफसरों के साथ बैठक होगी। इसमें किराया तय कर उसकी घोषणा की जाएगी। स्काई टूरिज्म का मिलेगा लाभ पर्यटन विभाग से जुड़े एक अफसर ने कहा कि यह पहल वाराणसी को ‘स्काई टूरिज्म’ के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन कारोबार को बड़ा लाभ मिलेगा। क्या बोले अधिकारी हेलिकॉप्टर सेवा का प्रस्ताव मिला है। परीक्षण कराया जा रहा है। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होती है तो जरूर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों को काशी का एक नया और अद्भुत अनुभव मिलेगा। -सत्येंद्र कुमार, डीएम