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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर

विकसित उत्तर प्रदेश 2047: उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीक का अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से उस दिशा में अग्रसर है जहां नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक, विकास के आधार स्तंभ बनेंगे। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे है। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विज़न है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के आधार पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,  ब्लॉकचेन, मेडटेक, टेलीकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्व स्तरीय स्टार्टअप खड़े कर सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा केंद्र बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को संसाधनों के अभाव में पीछे हटना पड़े।  सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पूंजीगत और इनके संचालन पर व्यय के लिए  अनुदान उपलब्ध कराया है। सरकार का मॉडल यह है कि पहले पांच वर्षों तक इन्हें सहायता देकर इनकी नींव को सुदृढ़ किया जाए, बाद में यह स्वयं के नवाचार और साझेदारियों के द्वारा भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। आईटी एवं स्टार्टअप सेक्टर के कंसलटेंट सुनील गुप्ता का कहना है कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है,  बल्कि स्वास्थ्य कृषि, शिक्षा और स्वच्छता जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी तकनीक आधारित समाधान इनके द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। क्या है सेंटर आफ एक्सीलेंस… सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है । यह ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब  सुविधाएं,  प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।  उत्तर प्रदेश के सात सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस…    – गौतमबुद्ध नगर में सीओई ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी – लखनऊ में मेडटेक सीओई – कानपुर नगर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)   – गौतमबुद्ध नगर में सीओई-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप (एआईआईडीई) – सहारनपुर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)  – कानपुर नगरमें सीओई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी)/ ड्रोन टेक्नोलॉजी – गाज़ियाबाद में सीओई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग

प्रदेश में निवेश बढ़ाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा अवस्थापना विस्तार पर बनी व्यापक सहमति

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक दिशा तय करने में जुटी योगी सरकार, विशेषज्ञों ने रखी भविष्य की रूपरेखा प्रदेश में निवेश बढ़ाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा अवस्थापना विस्तार पर बनी व्यापक सहमति 'विकसित उत्तर प्रदेश-2047' की सफलता के लिए नीतिगत सुधार, औद्योगिक पार्कों तथा नवाचार-आधारित इकोसिस्टम पर जोर रेल, सड़क, विमानन व लॉजिस्टिक्स जैसी अवसंरचनाओं को विकास का केन्द्र मानते हुए बहुस्तरीय लक्ष्य का हुआ निर्धारण लखनऊ 'विकसित उत्तर प्रदेश-2047' के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार विशेषज्ञों की राय के आधार पर भविष्यगामी नीति निर्धारण का मार्ग प्रशस्त कर रही है। बुधवार को योगी सरकार द्वारा आयोजित “शेपिंग उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल फ्यूचर: स्ट्रेटेजीज फॉर विकसित भारत-2047” वर्कशॉप व कॉन्फ्रेंस में उद्योग, निवेश, एमएसएमई, खादी, अवस्थापना तथा नीति नियोजन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने राज्य की औद्योगिक प्रगति, संभावनाओं तथा भविष्य की जरूरतों पर विस्तृत विचार साझा किए। सम्मेलन में यह साझा दृष्टि उभरकर सामने आई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से निवेशकों का भरोसेमंद गंतव्य बना है तथा अगले 25 वर्षों का औद्योगिक रोडमैप राज्य को देश की अग्रणी आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का आधार तैयार कर रहा है। निवेश आकर्षण, औद्योगिक भूमि और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर प्रदेश के राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभर रहा है। उन्होंने औद्योगिक भूमि आवंटन की बेहतर प्रक्रिया, निवेश परियोजनाओं की सतत निगरानी तथा कौशल विकास को 'विकसित यूपी-2047' का प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि नीति सुधारों, औद्योगिक पार्कों तथा नवाचार आधारित इकोसिस्टम ने विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि को बढ़ावा दिया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधारों के कारण उद्यमिता और निवेश से संबंधित प्रक्रियाएं और सरल हुई हैं, जिससे प्रदेश की औद्योगिक क्षमता लगातार बढ़ रही है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति मजबूत, सुरक्षित निवेश का बना वातावरण उत्तर प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी वित्तीय स्थिरता, बढ़ता पूंजीगत व्यय तथा युवा कार्यबल इसे निवेश के लिए अत्यधिक उपयुक्त राज्य बनाते हैं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नीतियों, अनुशासित प्रशासन और उद्योग-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के कारण उत्तर प्रदेश वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पूरी तरह समावेशी है विजन डॉक्यूमेंट एमएसएमई, निर्यात प्रोत्साहन तथा औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश-2047 का विजन डॉक्यूमेंट पूरी तरह समावेशी है। इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स की आकांक्षाओं को स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं सेवा क्षेत्र को अभी भी अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स से विजन डॉक्यूमेंट को धरातल पर उतारने के लिए सक्रिय सहयोग करने की अपील की और कहा कि वैश्विक ट्रेंड्स को देखते हुए सामूहिक प्रयास ही इसे वास्तविक उपलब्धियों में बदल सकते हैं। 12 प्रमुख सेक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ रहा है कार्य प्रमुख सचिव (नियोजन) आलोक कुमार ने विकसित भारत-2047 तथा विकसित उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रभावी और दूरदर्शी विजन साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है, नागरिक उड्डयन अवसंरचना मजबूत हो रही है और एमएसएमई, ऊर्जा, शिक्षा व स्वास्थ्य सहित 12 प्रमुख क्षेत्रों में राज्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में विनिर्माण तथा अन्य संबंधी क्षेत्रों की केंद्रीय भूमिका रहेगी। इसके लिए राज्य में सुधारों, औद्योगिक पार्कों और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम को विकसित किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश को भारत की विकास यात्रा का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने में सहायक होंगे। रेलवे व विमानन में विशाल संभावनाएं, बहुस्तरीय अवसंरचना लक्ष्य जरूरी नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव राजीव ठाकुर ने रेलवे क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रणनीतिक निवेश और सुनियोजित ढांचे के साथ यह क्षेत्र औद्योगिक विकास और व्यापार को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने विमानन क्षेत्र को भी भविष्य के लिए अत्यधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि बढ़ते हवाईअड्डों का नेटवर्क निवेश, गतिशीलता तथा औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क, रेल, विमानन, लॉजिस्टिक्स तथा सार्वजनिक परिवहन में अल्पकालिक, मध्यमकालिक तथा दीर्घकालिक लक्ष्यों का निर्धारण प्रदेश के औद्योगिक भविष्य को सुदृढ़ करेगा। खादी, हैंडलूम तथा टेक्सटाइल में उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत खादी एवं ग्रामोद्योग, वस्त्र और हथकरघा विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 536 खादी समितियां कार्यरत हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती आर्थिक प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिला बुनकरों की सक्रियता इसे सामाजिक और आर्थिक रूप से समावेशी बनाती है। उत्तर प्रदेश दरी एवं कालीन उत्पादन में देश में अग्रणी है और कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता के साथ खादी उत्पादन को और विस्तार दिया जा सकता है। एफडीआई, विनिर्माण क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को मिली रफ्तार नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक (उद्योग एवं विदेशी निवेश) इश्तियाक अहमद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, पर विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के लिए विनिर्माण क्षेत्र में बड़ा विस्तार आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत में 55 प्रतिशत मोबाइल फोन उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि एफडीआई संबंधी चुनौतियां राष्ट्रीय स्तर पर सामने आने वाले मुद्दों से मेल खाती हैं, जिनके समाधान के लिए राज्य और केंद्र का समन्वित प्रयास जरूरी है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ाने में निवेश मित्र 3.0 है मददगार इन्वेस्ट यूपी के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शशांक चौधरी ने निवेश मित्र 3.0 को निवेशकों के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म बताया। उन्होंने कहा कि एआई आधारित गाइडेंस, अपडेटेड बिल्डिंग और विकास उपविधियां तथा निवेश सेवाओं का एकीकृत ढांचा प्रदेश को भविष्य के औद्योगिक इकोसिस्टम की ओर ले जा रहा है। श्रम, भूमि उपयोग तथा आवश्यक अनुमतियों में सरलीकरण और पूरी तरह ऑनलाइन सेवाओं के लागू होने … Read more

विकसित उत्तर प्रदेश-2047: पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही योगी सरकार

सोमवार को सृजन शक्ति के अंतर्गत 'बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप' थीम पर हुआ सेक्टोरल वर्कशॉप भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सतत पर्यावरण प्रबंधन का रोडमैप हो रहा क्रियान्वित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को भविष्योन्मुख विकास के नए प्रतिमानों के अनुरूप परिवर्तित कर रही योगी सरकार पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी क्रम में, विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के अंतर्गत सोमवार को योजना भवन सभागार में सृजन शक्तिः बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप थीम पर सेक्टोरल वर्कशॉप का आयोजन हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के तत्वावधान में एक दिवसीय वर्कशॉप का शुभारंभ वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना द्वारा किया गया। यह वर्कशॉप हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भविष्योन्मुख कार्यप्रणाली का चित्रण प्रस्तुत करने का माध्यम बना। वर्कशॉप में जोर दिया गया कि विकास एवं पर्यावरणीय संरक्षण को सम्मिलित करते हुए संतुलित एवं समग्र विकास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। साथ ही, हरित विकास को नीति-निर्माण एवं कार्यान्वयन के प्रत्येक स्तर पर पर्याप्त महत्व प्रदान किया जाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स ने सतत एवं जलवायु समग्र विकास हेतु दीर्घकालिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया और रोडमैप को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए। यूपी में तेजी से हो रहा स्किल डेवलपमेंट वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि यूपी हर लिहाज से अग्रणी राज्य है, चाहे बात जनसंख्या की हो या फिर विकास की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वर्ष 2047 तक विकास के नए प्रतिमान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कौशल विकास केंद्र तथा प्राइवेट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुल रहे हैं। यह रोजगार और विकास को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि आम नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम कराया जाए। उन्होंने समुदाय की भागीदारी तथा विभागों के मध्य सुदृढ़ समन्वय को सुनिश्चित करने पर बल दिया, ताकि सभी विकास परियोजनाएं पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी एवं सामाजिक रूप से समावेशी बन सकें। सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता अनिल कुमार, प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नीति सुधारों में तीव्रता लाने एवं सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उत्तर प्रदेश जलवायु समावेशी अग्रणी राज्य के रूप में उभर सके। आलोक कुमार, प्रमुख सचिव योजना ने दीर्घकालिक विकास योजनाओं में जलवायु सम्बंधित विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे विकास सुनिश्चित किया जा सके। बी. प्रभाकर, पीसीसीएफ (मानिटरिंग) ने वनों के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र पुनःस्थापन तथा जिलास्तरीय जलवायु अनुकूलन उपायों के महत्व को रेखांकित किया। इंदरजीत सिंह, निदेशक, यूपीनेडा ने राज्य में नवाचार आधारित मॉडलों एवं सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को व्यापक रूप से बढ़ाने की क्षमता पर प्रकाश डाला। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर जोर बी. चन्द्रकला, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने एवं कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं संसाधन-कुशलता को बढ़ावा, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण सुदृढ़ करने, अवसंरचना को जलवायु समग्र बनाने एवं आपदा-जोखिम न्यूनीकरण मजबूत करने, हरित बांड, मिश्रित वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय जलवायु निधियों के माध्यम से जलवायु वित्त जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मनीष मित्तल, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विकास के प्रत्येक क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता के एकीकरण की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में नीति आयोग की परामर्शदाता डॉ. स्वाति सैनी, नाबार्ड के उप महाप्रबंधक सिद्धार्थ शंकर, आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनिबिलिटी के डीन सच्चिदानंद त्रिपाठी, जीआईजेड के निदेशक हैंस जर्गेन समेत विभिन्न पैनलिस्ट्स ने जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा नियोजन तथा जलवायु समावेशी अवसंरचना विकास के लिए साक्ष्य-आधारित, स्थानीय रूप से उपलब्ध प्रौद्योगिकियों और कार्य करने को लेकर विचार प्रस्तुत किए।

विकसित उत्तर प्रदेश: 57 लाख से ज्यादा नागरिकों ने साझा किया अपना फीडबैक

विकसित यूपी के लिए अब तक 57 लाख से अधिक लोगों ने दिया फीडबैक फीडबैक में शीर्ष पर रहे जौनपुर, संभल और गाजीपुर 75 जिलों में नोडल अधिकारियों ने किया जनसंवाद  ग्रामीण इलाकों से आए 45 लाख से अधिक सुझाव  28 लाख युवाओं ने दिया भविष्य के विकास पर मत  करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में हुई बैठकें और गोष्ठियां  शिक्षा, कृषि और आईटी पर जनता ने दिए सर्वाधिक सुझाव मुख्यमंत्री योगी का विजन 2047 बना जनआंदोलन  जनता के सुझावों से बनेगा यूपी का विजन डॉक्यूमेंट  सामूहिक भागीदारी से साकार होगा 'विकसित उत्तर प्रदेश' का सपना लखनऊ उत्तर प्रदेश को 2047 तक समर्थ और विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान' जनसहभागिता का एक ऐतिहासिक अभियान बन गया है। इस महाभियान के तहत सोमवार तक प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर जनता से संवाद स्थापित किया और प्रदेश के विकास यात्रा से संबंधित जानकारी साझा की। इस दौरान छात्रों, शिक्षकों, व्यापारियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संघों, मीडिया और आम नागरिकों के साथ विकास के रोडमैप पर चर्चा कर सुझाव लिए गए। प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब 57 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 45 लाख ग्रामीण क्षेत्रों से और 12 लाख नगरीय क्षेत्रों से सुझाव आए हैं। फीडबैक देने वालों में करीब 28 लाख युवा (31 वर्ष से कम आयु), 26 लाख मध्यम आयु वर्ग (31-60 वर्ष) और करीब 3 लाख वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक) शामिल हैं। इन सेक्टर के लिए मिले अमूल्य सुझाव विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों में कृषि क्षेत्र में लगभग 14.4 लाख, पशुधन एवं डेरी में 2.3 लाख, उद्योग क्षेत्र में 2 लाख, आईटी एवं टेक सेक्टर में 1.6 लाख, पर्यटन क्षेत्र में 1.4 लाख, ग्रामीण विकास में 11.4 लाख, इन्फ्रास्ट्रक्चर में 50 हजार, संतुलित विकास में 83 हजार, समाज कल्याण में 4.4 लाख, नगरीय एवं स्वास्थ्य में 3.9 लाख, शिक्षा क्षेत्र में 13.4 लाख और सुरक्षा सम्बंधित 1 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सुझाव देने में ये हैं टॉप और बॉटम जिले जनपदवार सर्वाधिक फीडबैक देने वाले जिलों में जौनपुर (4.5 लाख), संभल (3.8 लाख), गाजीपुर (2.5 लाख), प्रतापगढ़ (1.8 लाख) और बिजनौर (1.7 लाख) रहे। वहीं सबसे कम फीडबैक इटावा (20 हजार), महोबा (26 हजार), हापुड़ (29 हजार), गौतमबुद्ध नगर (29 हजार) और ललितपुर (30 हजार) से मिले। व्यापक जनसंवाद और गोष्ठियों का हुआ आयोजन महाभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों तक संवाद बैठकों और गोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें 214 नगर पालिकाओं में बैठकें, 227 नगर पालिकाओं में सम्मेलन/गोष्ठियां, 18 नगर निगमों में बैठकें एवं सम्मेलन, 63 जिला पंचायतों में गोष्ठियां, 556 नगर पंचायतों में बैठकें और 577 में सम्मेलन, 751 क्षेत्र पंचायतों में बैठकें और गोष्ठियां तथा करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में भी सफल आयोजन किए गए। इन बैठकों से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद और समन्वय को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047' के अनुरूप प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य सरकार विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है। यह महाभियान जनसहभागिता और सामूहिक विकास की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।