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पहलगांव-पुलवामा हमले में नाम जोड़ने की धमकी, दंपती से करोड़ों की वसूली

इंदौर शहर में डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला केस सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने वृद्ध दंपती से 1 करोड़ 15 लाख की ठगी कर ली है। दंपती से कहा कि पहलगांव-पुलवामा हमले में उनका हाथ है। करीब 15 दिनों तक वीडियो कॉल पर पूछताछ की और अलग-अलग खातों में रुपये जमा करवा लिए। घटना हीरानगर थाना अंतर्गत बजरंग नगर में रहने वाले विजय शंकर सक्सेना और उनकी पत्नी सुमन लता सक्सेना के साथ हुई है। साइबर हेल्प लाइन-1930 पर हुई शिकायत के बाद हीरानगर पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में कायमी की है। टीआई सुशील पटेल के अनुसार विजय शंकर सक्सेना भारतीय दूरसंचार निगम (बीएसएल)से रिटायर हुए हैं। सुमन लता ने पुलिस को बताया पिछले साल 15 नवंबर को पहली बार वीडियो कॉल आया था। साइबर अपराधी खाकी वर्दी में बैठा हुआ था। उसने रौबदार आवाज में सुमन लता से नाम पूछा और कहा, ''मैं आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) के पुणे हेडक्वार्टर से इंस्पेक्टर चंद्रभानसिंह बोल रहा हूं। हमने आतंकवादी अफजल खान को पकड़ा जो पहलगांव, पुलवामा आतंकी हमला, बच्चों से दुष्कर्म और हत्या में शामिल रहा है। उसने आपका नाम कबूल कर लिया है। जम्मू कश्मीर की एचडीएफसी बैंक में आपका खाता है और उसमें आतंकवादियों की मदद करने पर 70 लाख रुपये का कमीशन जमा हुआ है। आपके विरुद्ध मनी लान्ड्रिंग का केस बना है। एटीएस आतंकियों की मदद करने के आरोप में अरेस्ट करने वाली है।' सुमन लता ने कहा कि हमारा जम्मू की किसी भी बैंक में खाता नहीं है। न कभी वो जम्मू गए है। 16 नवंबर को पुन: उसी नंबर से कॉल आया और केस में फंसाने की धमकी देकर पूछताछ की। 18 नवंबर को उसी अपराधी ने तीसरी बार कॉल लगाया और कहा इसकी जांच एटीएस अफसर प्रदीप लाल को सौंप दी गई है। अब आगे की पूछताछ प्रदीप ही करेंगे। 19 नवंबर को प्रदीप ने वीडियो कॉल लगाया और पूछताछ के लिए सुमन लता और विजय शंकर को एक जगह बैठाया। उसने पुलिसिया अंदाज में बच्चों, रिश्तेदारों, बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी मांगी। उसने कहा कि केस गंभीर है। तुम्हारे बच्चों की हत्या भी हो सकती है। पुलिस, एटीएस, सीबीआई, ईडी गिरफ्तार कर सकती है। सुमन लता घबरा गई और उसने बैंक पासबुक,आधार कार्ड, पेनकार्ड की प्रति आरोपितों को वॉट्सएप पर भेज दी। खातों का वेरिफिकेशन करने का बोलकर की धोखाधड़ी आरोपितों ने सुमन लता और विजय शंकर को डरा दिया। उन्हें मदद का भरोसा दिया गया। केस में सहयोग करने के लिए कहा गया। सुमन लता से कहा कि खातों का वेरिफिकेशन भी करना होगा। इसके लिए बैंक में जमा राशि उनके द्वारा बताए खातों में जमा करवाना पड़ेगी। खाते सत्यापित होने पर राशि पुन: ट्रांसफर कर देंगे। सुमन लता से एफडी तोड़ने के लिए कहा। यह भी कहा कि बैंक अफसर पूछताछ करे तो बताना बेटियों को रुपयों की आवश्यकता है। सुमन लता और विजयशंकर विजयनगर स्थित राज्य सहकारी बैंक मर्यादित में गए और एफडी तुड़वा कर एक बार 49 लाख 70 हजार और दूसरी बार में 65 लाख 30 हजार रुपये आरोपितों द्वारा बताए खातों में एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद विजय शंकर की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। सुमन लता को चिंतित देख कर दामाद मनीष गौड़ ने पूछा तो पूरी घटना सामने आई। सुमन लता और विजय शंकर ने अपराध शाखा में शिकायत की।  

डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम, स्कैमर्स के खिलाफ एक बटन से शुरू होगा ‘अरेस्ट’ प्रोसेस

नई दिल्‍ली.  देश में डिजिटल अरेस्‍ट की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कारगर पैंतरा अपनाया है. गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्‍ट की समस्‍या के समाधान के लिए उच्‍च स्‍तरीय समिति बनाई थी. इस समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍प सुझाए हैं, जहां एक बटन दबाते ही स्‍कैमर्स के मंसूबों पर ताला लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, अगर डिजिटल अरेस्‍ट के दौरान कोई वित्‍तीय नुकसान हुआ है तो उसकी भी भरपाई करने का तरीका समिति ने सुझाया है. गृह मंत्रालय की उच्‍च स्‍तरीय समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍पों का सुझाव दिया है. इसका मतलब है कि अगर किसी को अपने साथ डिजिटल फर्जीवाड़े की आशंका है तो वह इस किल स्विच बटन के जरिये अपने सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्‍शन तत्‍काल रोक सकता है. इससे स्‍कैमर्स को खाते से पैसे निकालने या धोखाधड़ी करने का मौका ही नहीं मिलेगा और बैंक की तरफ से यूजर के सभी खाते कुछ समय के लिए फ्रीज कर दिए जाएंगे. नुकसान की भरपाई के लिए भी व्‍यवस्‍था बैंकिंग सिस्टम में धोखाधड़ी से जुड़े नुकसान को कवर करने के लिए एक बीमा व्यवस्था भी जल्द आ सकती है, क्योंकि बढ़ते डिजिटल युग के घोटाले वाणिज्यिक बैंकों को अपने जोखिम प्रबंधन ढांचे पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इसका मकसद ग्राहकों और पूरे वित्तीय सिस्टम की बेहतर सुरक्षा करना है. समिति ने किल स्विच के साथ ऐसे बीमा उत्‍पाद लाने का भी सुझाव दिया है. कैसे काम करेगी इमरजेंसी बटन पिछले साल दिसंबर में किल स्विच के लिए एक अंतर विभागीय समिति बनाई गई थी. इसमें अन्य विकल्पों के साथ-साथ एक इमरजेंसी बटन की व्यवस्था की जा सकती है, जिसे लेंडर्स के पेमेंट ऐप्स में जोड़ा जाएगा. जब भी कोई यूजर महसूस करे कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है, तो वह इस बटन को दबाकर अपने सभी बैंकिंग ऑपरेशन्स तुरंत फ्रीज कर सकता है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि विचार यह है कि क्या यूजर के पेमेंट ऐप, जैसे UPI ऐप या बैंक ऐप में किल स्विच हो सकता है और जैसे ही यूजर वह बटन दबाए, कोई भी बैंक ट्रांजेक्शन संभव न हो सके. धोखाधड़ी के बाद पैसा वापस दिलाने की कोशिश समिति यह भी देख रही है कि क्या ऐसे लेन-देन की पहचान करना संभव है जो धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं. साथ ही क्‍या ऐसा कोई तरीका है जिससे धोखाधड़ी के बाद उसे तुरंत कई म्यूल खातों में बांटा न जा सके, ताकि पैसों को वापस दिलाने की कोशिश की जा सके. डिजिटल अरेस्ट घोटालों में ठग पुलिस या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और दावा करते हैं कि वे गंभीर अपराधों की जांच के दायरे में हैं. वे अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लीक हुए निजी डेटा का इस्तेमाल करते हैं. अक्‍सर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं और फर्जी आईडी व गिरफ्तारी वारंट दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं.  

डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल: लाल किला बम विस्फोट की झूठी धमकी, बेटी की समझदारी बनी जीवनरक्षक

मुरैना दिल्ली के लाल किला बम विस्फोट में आतंकियों का साथी बताकर साइबर ठगों ने मध्य प्रदेश के मुरैना में एक जूता व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की कोशिश की। हालांकि व्यापारी की बेटी की समझदारी और सतर्कता से यह साजिश नाकाम हो गई। बेटी ने समय रहते हालात को भांप लिया और अपने पिता को मानसिक उत्पीड़न व आर्थिक नुकसान से बचा लिया। मुरैना शहर के ओवरब्रिज के नीचे स्थित मार्केट में जूता-चप्पल की दुकान चलाने वाले इस्लामपुर निवासी 55 वर्षीय रामसेवक शिवहरे के वाट्सएप पर सुबह करीब 11:30 बजे मोबाइल नंबर 9620122894 से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाला खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वर्दी में नजर आया। वह बड़ी मेज और कुर्सी पर बैठा था और पीछे तिरंगा झंडा लगा हुआ था।   वीडियो कॉल करने वाले ने अपना नाम अभिषेक वर्मा बताते हुए कहा कि वह दिल्ली के लाल किला थाने की क्राइम ब्रांच से बोल रहा है। उसने रामसेवक को बताया कि बीते महीने दिल्ली में लाल किले के पास हुए बम धमाके में उनका नाम सामने आया है। ठग ने दावा किया कि पकड़े गए आतंकी डॉक्टरों ने रामसेवक को अपना साथी बताया है। यह सुनते ही रामसेवक घबरा गए। डर का फायदा उठाते हुए ठग ने उन्हें दुकान छोड़कर तुरंत घर जाने और अकेले कमरे में बात करने को कहा। रामसेवक स्कूटी से घर पहुंचे और दूसरी मंजिल के एक कमरे में खुद को बंद कर लिया। इसके बाद करीब 15 से 20 मिनट तक ठग उनसे लगातार बातचीत करता रहा। इस दौरान उसने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर रामसेवक से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, सालभर की कमाई और परिवार से जुड़ी तमाम जानकारियां हासिल कर लीं। उधर, रामसेवक की बेटी प्रमिला को शक तब हुआ जब पापा सुबह 11 बजे दुकान से घर आ गए, जो आमतौर पर नहीं होता था। घर के बाहर स्कूटी खड़ी दिखी, लेकिन वे काफी देर तक बाहर नहीं आए। ऊपर जाकर देखा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। भीतर से मोबाइल पर घबराई हुई आवाज में बात करने की आवाज आ रही थी। वह कह रहे थे “साहब, मेरा किसी से कोई लेना-देना नहीं है।” बेटी ने तुरंत मां को बताया और दोनों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खुलवाया। अंदर रामसेवक बेहद डरे हुए थे और वीडियो कॉल अभी भी चालू थी। जैसे ही ठग ने परिवार की आवाज सुनी, उसने तुरंत कॉल काट दी। इसके बाद उसने कई बार वीडियो कॉल करने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने फोन नहीं उठाया। बेटी प्रमिला ने बताया कि जिस तरह से ठग ने उनके पिता को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, अगर समय रहते वे कमरे में नहीं पहुंचते तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी। परिवार ने पूरे मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई है।

वीडियो कॉल पर 5 दिन का ‘डिजिटल अरेस्ट’, जबलपुर में रिटायर्ड अधिकारी से उड़े 31 लाख रुपये

जबलपुर बिजली विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठग ने एटीएस अधिकारी बनकर फोन किया। उन्हें पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। उनका आतंकियों के साथ संबंध एवं टेरर फंडिंग में लिप्त होने का बोलकर डराया। संपत्ति सीज करने की धमकी देकर 31 लाख रुपये ऐंठ लिए। नेपियर टाउन निवासी अविनाश चंद्र दीवान बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हैं। वह कुछ दिन से परेशान थे। इस पर जब बेटे ने पूछा तो उन्होंने अपने पास आए फोन और संपत्ति सीज किए जाने की कार्यवाही की जानकारी दी। जब यह बात बाहर रहने वाले पुत्र को पता चली तो वह समझ गया कि पिता के साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है। उसके बाद पिता को शुक्रवार को मदन महल थाने भेजकर शिकायत कराया। पुलिस ने आरोपितों के धोखाधड़ी के लिए उपयोग किए गए फोन एवं बैंक खाता नंबर के आधार पर उनकी तलाश की जा रही है।   सेवानिवृत्त अधिकारी के पास एक दिसंबर को सोशल मीडिया से फोन आया। फोन करने वाले ने स्वयं को महाराष्ट्र के पुणे एटीएस का अधिकारी बताया। देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ संदिग्धों को पकड़ने और उनसे पूछताछ में दीवान का आतंकी संपर्क मिलने की बात कही। आरबीआई के कुछ जाली अभिलेख भेजकर बताया कि उनके बैंक खाते में टेरर फंडिंग के सात करोड़ रुपये आए थे। उसमें 70 लाख रुपये का कमीशन उन्हें मिला। मामले में उन्हें और पुत्र की गिरफ्तारी फिर उनकी संपत्ति सीज करने का भय दिखाया। फिर धमकाया कि जो पूछा जाए उसकी सही-सही जानकारी दे। गलत जानकारी देने पर पांच लाख रुपये जुर्माना और 18 वर्ष की सजा हो जाएगी। देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताकर उन्हें इसके बारे में किसी से कुछ नहीं बताने बोला। उन्हें घर पर ही रहने और किसी ने मिलने-जुलने से मना किया। उनके बैंक बैलेंस एवं अन्य जानकारी पूछ ली। अगले दिन शुरू किया रुपये ट्रांसफर कराना आरोपितों ने दो दिसंबर को फिर वीडियो कॉल किया। इस पर आरोपित पुलिस की तरह गणवेश पहनकर फोन में सामने आया। जांच के नाम पर उन्हें बैंक खाते के रुपये उनके बताए अकाउंट में जमा करने कहा। रुपयों के स्रोत एवं अन्य जांच पूरी होने के बाद यह राशि उनके खाते में जमा कर दी जाएगी। इसके बाद फिर एक इंटरनेट मीडिया काल आया। इस बार बात करने वाले ने स्वयं को एनआईए के अधिकारी बताया और एक बैंक खाता का विवरण देते हुए उसे आरबीआई का होना बताया। उस खाते में जांच के नाम पर रुपये ट्रांसफर करने बोला। दो से पांच दिसंबर के बीच लगातार डिजिटल अरेस्ट रखते हुए उनसे अलग-अलग किस्त में कुल 31 लाख रुपये अपने बताए खाते में ट्रांसफर करा लिए। रुपये कम पड़ने पर अपनी एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे। तब भी आरोपित उन पर नजर बनाए रखे। जब दीवान पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे थे तब भी आरोपित ने फोन किया।