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योगी सरकार की नई पहल: 34 सवालों के जवाब देकर बनाएं अपनी Census ID

लखनऊ उत्तर प्रदेश के निवासी गुरुवार से अपनी जनगणना खुद कर सकेंगे। जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले गुरुवार से स्वगणना शुरू होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम आवास पर अपनी जानकारी पोर्टल पर भरने के साथ स्वगणना का शुभारंभ करेंगे। स्वगणना की यह प्रक्रिया 21 मई तक चलेगी, जिसके बाद 22 मई से प्रगणक खुद जाकर आंकड़ों की तस्दीक करेंगे। इसके अलावा जिन्होंने स्वगणना की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया होगा, उनका ब्योरा दर्ज करेंगे। 22 मई से शुरू होने वाला यह चरण 20 जून तक चलेगा, जिसमें मकानों की गणना प्रगणक घर-घर जाकर करेंगे। जनगणना का दूसरा चरण अगले साल होगा। इस बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल मोड में की जा रही है। निदेशक व मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार से शुरू होने वाली स्वगणना में लोग विशेष तौर पर तैयार किए गए पोर्टल, se.census.gov.in पर जाकर जानकारी दर्ज करवा सकेंगे। उन्हें 34 सवालों के जवाब देने होंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष स्वगणना आईडी (एसई आईडी) मिलेगी। जब प्रगणक उनके पास तक पहुंचेंगे तो वे उसकी तस्दीक करके आईडी जनगणना पोर्टल पर दर्ज करेंगे। एक रसोई – एक परिवार जनगणना के नियमों के मुताबिक एक साथ रहने वाले और एक रसोई में भोजन करने वालों को एक ही परिवार के तौर पर दर्ज किया जाएगा। परिवार की गिनती के लिए साझा रसोई को ही निर्णायक कारक माना जाएगा। वहीं, जनगणना की प्रक्रिया में मकान उसे माना जाएगा जिसमें आंगन, सड़क, सीढ़ी के इतर अलग से मुख्य प्रवेश द्वार होगा। स्वगणना के लिए अपनानी होगी ये प्रक्रिया -स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in खोलें -परिवार पंजीकरण करें (नाम व मोबाइल नंबर) -भाषा चुनें और ओटीपी सत्यापन करें -पता दर्ज करें और मानचित्र पर घर चिह्नित करें -जनगणना प्रश्नावली भरें और अंतिम सबमिट कर एसई आईडी प्राप्त करें -प्रगणक द्वारा एसई आईडी की प्रविष्टि व क्षेत्रीय सत्यापन इन 34 सवालों का देना होगा जवाब 1-मकान नंबर (स्थानीय या जनगणना नंबर)। 2-मकान की छत, दीवार और फर्श में इस्तेमाल की गई मुख्य सामग्री। 3-मकान का उपयोग (आवासीय, आवासीय-सह-अन्य, या गैर-आवासीय)। 4-मकान की स्थिति (अच्छी, रहने योग्य या जर्जर)। 5-परिवार नंबर। 6-परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या। 7-परिवार के मुखिया का नाम। 8-मुखिया का लिंग (पुरुष/महिला/थर्ड जेंडर)। 9-क्या मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) से है? 10-मकान के स्वामित्व की स्थिति (अपना, किराये का या अन्य)। बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल 11-परिवार के पास रहने के लिए कमरों की संख्या। 12-परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या। 13-पीने के पानी का मुख्य स्रोत। 14-पानी के स्रोत की उपलब्धता (परिसर के भीतर, पास में या दूर)। 15-प्रकाश (बिजली) का मुख्य स्रोत। 16-शौचालय की उपलब्धता (प्रकार और उपयोग)। 17-गंदे पानी की निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था। 18-स्नान सुविधा की उपलब्धता। 19-रसोई घर की उपलब्धता और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन। 20-खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मुख्य ईंधन। संपत्ति और संसाधनों से जुड़े सवाल 21-रेडियो/ट्रांजिस्टर की उपलब्धता। 22-टेलीविजन (TV) की उपलब्धता। 23-इंटरनेट सुविधा (हाँ/नहीं)। 24-लैपटॉप/कंप्यूटर की उपलब्धता। 25-टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन की उपलब्धता। 26-साइकिल की उपलब्धता। 27-स्कूटर/मोटर साइकिल/मोपेड की उपलब्धता। 28-कार/जीप/वैन की उपलब्धता। 29-क्या परिवार के पास मुख्य रूप से खेती की जमीन है? 30-परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी 31-मोबाइल नंबर (संपर्क के लिए)। 32-क्या परिवार का कोई सदस्य शारीरिक/मानसिक रूप से अक्षम है? 33-परिवार के पास बैंक खाता/डाकघर खाता है या नहीं? 34-क्या परिवार किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले रहा है? ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को तबादला नीति से राहत नहीं राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है, जिसमें जनगणना में लगे कर्मचारियों को इससे अलग नहीं रखा गया है। तबादला सत्र की आखिरी तारीख 31 मई रखी गई है, जबकि तमाम राज्य कर्मचारी भी 22 मई से जनगणना कार्य में लगाए गए हैं। ऐसे में अगर इनका तबादला होता है तौर तत्काल प्रभाव से इन्हें नई तैनाती स्थल में पदभार ग्रहण करने के लिए कहा जाता है तो जनगणना कार्य प्रभावित हो सकता है। जनगणना का पहला चरण 22 मई से 20 जून तक चलना है। प्रशिक्षण कार्य में तेजी जनगणना के काम में प्रदेश भर से तकरीबन पांच लाख कर्मचारियों का इस्तेमाल होगा। इस संख्या में अतिरिक्त या रिजर्व में रखे गए कर्मचारी भी शामिल हैं। बड़े स्तर पर प्रशिक्षण हो चुका है। हालांकि अब भी प्रशिक्षण का काम पूरा नहीं हुआ है। स्वगणना प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अब बचे हुए कर्मचारियों के प्रशिक्षण में तेजी लाई जा रही है। कर्मचारियों को संदेश भेजा जा रहा है और उन्हें प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

Census 2027: रांची नगर निगम की पहल, 16 भाषाओं में ऑनलाइन जनगणना सुविधा

रांची  जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (स्वयं विवरण भरने) विषय पर बुधवार को रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता रौशनी खलखो ने की, जबकि उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव एवं अपर नगर आयुक्त संजय कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर बताया गया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जनभागीदारी आधारित होगी। नागरिक अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। स्व-गणना (स्वयं विवरण भरना) के तहत लोगों को स्व-गणना जनगणना की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवासी अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं आनलाइन भरकर जमा करते हैं। वही नागरिक 1 मई से 15 मई तक अपने मोबाइल के https://se.census.gov.in/⁠ के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण इसके बाद यह सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस चरण में सबसे पहले मकान सूचीकरण (घर-घर का विवरण) किया जाएगा, जिसके बाद जनसंख्या गणना शुरू होगी। इसके अतिरिक्त 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। महापौर रौशनी खलखो ने नागरिकों से निर्धारित अवधि में स्व-गणना पूरा करने की अपील करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। लोगों को डेटा रहेगा सुरक्षित को लेकर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि यह डिजिटल जनगणना रांची नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मकान गणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे और नागरिकों को 16 भाषाओं में फार्म भरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ओटीपी (एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड) या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जाएगी तथा सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं स्थिर रहेंगी। इस दौरान कोई नया वार्ड या नगर निकाय नहीं बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई भी अधिकारी आपसे ओटीपी या दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। केवल फार्म में पूछी गई जानकारी ही भरनी होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता, नगर निगम के अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।

जनगणना का नया डिजिटल रूप: घर बैठे दें 33 प्रश्नों के उत्तर, 1 मई से शुरू प्रक्रिया

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की एक मांग को जनगणना निदेशालय मान लेता है तो मजरे-टोलों में रहने वालों लोगों की अलग से जानकारी सामने आ जाएगी। इसका लाभ जल जीवन मिशन जैसी कई योजनाओं को लेकर नीति बनाने में होगा। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 को लेकर आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के समक्ष यह बात कही। अनुराग जैन ने कहा कि जनगणना में मजरे-टोलों का कालम अलग से जोड़ दिया जाए तो मध्य प्रदेश ही नहीं आदिवासी बहुल जनसंख्या वाले दूसरे राज्यों को भी उतना ही लाभ होगा। बता दें, प्रदेश में एक लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं। ये अधिकतर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही होते हैं। प्रशिक्षण कार्यशाला को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मृत्युंजय कुमार ने संबोधित किया।   अनुराग जैन ने कहा कि जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तभी जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। आमजन भी सही जानकारी दें। कई बार लोगों को लगता है कि संपत्ति संबंधी जानकारी नहीं बताने पर वह लाभ में रहेंगे। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल सकती है, पर ऐसा नहीं है। इनबिल्ड एप गलतियां भी बताएंगे मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी, इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार किया गया है। जनगणना में स्व-गणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध कराया जा रहा है। नागरिक मोबाइल, लैपटाप और डेस्कटाप से जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस बार जातिगत जनगणना भी होगी। जानकारी बहुत सावधानी से अंकित की जाए जिससे किसी तरह की गलती की आशंका नहीं रहे। उन्होंने बताया जनगणना के सॉफ्टवेयर में कुछ इनबिल्ड एप्लीकेशन भी हैं, जो कुछ हद तक फीडिंग की गलतियों से सतर्क करेंगे। दो चरणों में जानकारियां एकत्र की जाएंगी निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करने का कार्य एक से 30 मई के बीच होगा। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों का विवरण प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर एकत्रित किया जाएगा।द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी, 2027 में कराया जाना तय किया गया है। जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी। साथ ही, व्यक्तियों के संबंध में अन्य बिंदु जैसे आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास और संतानों की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह 33 सवाल पूछे जाएंगे भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या), घर संख्या, फर्श की प्रमुख सामग्री, भवन की दीवार की प्रमुख सामग्री, भवन की छत, घर का उपयोग, घर की स्थिति, परिवार संख्या, घर में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, क्या परिवार का मुखिया एससी/एसटी/अन्य से संबंधित है, स्वामित्व की स्थिति, परिवार के स्वामित्व वाले आवासीय कमरों की संख्या, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, पीने के पानी का मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय है या नही, शौचालय का प्रकार, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, रसोई और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, खाना बनाने में मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट तक पहुंच किस तरह है।

जनगणना 2026: डिजिटल तरीके से खुद भरें डेटा, एक मई के बाद 33 प्रश्नों का जवाब तैयार रखें

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की एक मांग को जनगणना निदेशालय मान लेता है तो मजरे-टोलों में रहने वालों लोगों की अलग से जानकारी सामने आ जाएगी। इसका लाभ जल जीवन मिशन जैसी कई योजनाओं को लेकर नीति बनाने में होगा। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 को लेकर आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के समक्ष यह बात कही। अनुराग जैन ने कहा कि जनगणना में मजरे-टोलों का कालम अलग से जोड़ दिया जाए तो मध्य प्रदेश ही नहीं आदिवासी बहुल जनसंख्या वाले दूसरे राज्यों को भी उतना ही लाभ होगा। बता दें, प्रदेश में एक लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं। ये अधिकतर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही होते हैं। प्रशिक्षण कार्यशाला को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मृत्युंजय कुमार ने संबोधित किया। अनुराग जैन ने कहा कि जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तभी जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। आमजन भी सही जानकारी दें। कई बार लोगों को लगता है कि संपत्ति संबंधी जानकारी नहीं बताने पर वह लाभ में रहेंगे। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल सकती है, पर ऐसा नहीं है। इनबिल्ड एप गलतियां भी बताएंगे मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी, इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार किया गया है। जनगणना में स्व-गणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध कराया जा रहा है। नागरिक मोबाइल, लैपटाप और डेस्कटाप से जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस बार जातिगत जनगणना भी होगी। जानकारी बहुत सावधानी से अंकित की जाए जिससे किसी तरह की गलती की आशंका नहीं रहे। उन्होंने बताया जनगणना के सॉफ्टवेयर में कुछ इनबिल्ड एप्लीकेशन भी हैं, जो कुछ हद तक फीडिंग की गलतियों से सतर्क करेंगे। दो चरणों में जानकारियां एकत्र की जाएंगी निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करने का कार्य एक से 30 मई के बीच होगा। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों का विवरण प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर एकत्रित किया जाएगा। द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी, 2027 में कराया जाना तय किया गया है। जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी। साथ ही, व्यक्तियों के संबंध में अन्य बिंदु जैसे आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास और संतानों की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह 33 सवाल पूछे जाएंगे भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या), घर संख्या, फर्श की प्रमुख सामग्री, भवन की दीवार की प्रमुख सामग्री, भवन की छत, घर का उपयोग, घर की स्थिति, परिवार संख्या, घर में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, क्या परिवार का मुखिया एससी/एसटी/अन्य से संबंधित है, स्वामित्व की स्थिति, परिवार के स्वामित्व वाले आवासीय कमरों की संख्या, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, पीने के पानी का मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय है या नही, शौचालय का प्रकार, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, रसोई और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, खाना बनाने में मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट तक पहुंच किस तरह है। लैपटाप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन, साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड, कार/जीप/वैन, घर में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज और मोबाइल नंबर।

पंजाब में पहली बार होगी डिजिटल जनगणना

अमृतसर. 14 वर्ष बाद इस साल के मध्य में होने जा रही जनगणना डिजिटल तरीके से करवाई जाएगी। जिसमें अगले हफ्ते चंडीगढ़ से टीम आकर साफ्टवेयर के बारे प्रशिक्षण देगी। शहर और गांव में होने वाली जनगणना का सारा काम मोबाइल ऐप पर होगा। पंजाब सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन किए जाने के बाद मई से जनगणना शुरू होने की संभावना है। इस जनगणना में करीब 3 हजार कर्मचारी फील्ड में उतारने को लेकर तैयारियां चल रही हैं। इससे पहले वर्ष 2011 की मतगणना में शहर की आबादी 11.32 लाख थी। निगम की हद में जनगणना के लिए निगम कमिश्नर प्रिंसिपल सेंसस अफसर और देहाती इलाके में जनगणना के लिए डिप्टी कमिश्नर प्रिंसिपल सेंसस अफसर नियुक्त किए गए हैं। जनगणना के दौरान कर्मचारी डोर टू डोर जाएंगे। वहीं, कर्मचारी डिजिटल तरीके से अपनी-अपनी लोकेशन में जाकर जनगणना का काम करेंगे। नगर निगम कमिश्नर के आदेशों पर सुपरिटेंडेंट जनरल ने 50 विभागों को चिट्ठियां निकाली हैं। जिसमें उनसे जनगणना में ड्यूटियां लगाने के लिए उनके अंतर्गत काम कर रहे स्टाफ की लिस्ट मांगी हैं। निगम के हद में चार लाख घर व 10 बाहरी इलाके में कवर होंगे निगम हद की बात करें तो इसमें 4 लाख के करीब घर होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। इसमें डिजिटल सर्वे के लिए 180 घरों या 800 की आबादी के पीछे एक ब्लाक बनाया जाएगा। ऐसे में निगम के हद में करीब 2,222 ब्लाक बनाए जाने हैं। शहर की 85 वार्डों में एक्सईएन, एसडीओ और असिस्टेंट टाउन प्लानर (एटीपी) स्तर के 21 चार्ज आफिसर लगाए जाने हैं। वहीं हर ब्लाक में गिनतीकार लगेगा। गिनतीकार मोबाइल ऐप पर जनगणनना का काम करेगा। वहीं, हर 6 गिनतीकार पर एक सुपरवाइजर लगाया जाएगा। वह आगे अपनी रिपोर्ट चार्ज ऑफिसर को देगा। इसमें 370 के करीब सुपरवाइजर तैनात होंगे। इसमें 85 वार्डों की हद के साथ लगते 10 के करीब बाहरी इलाकों को भी कवर किया जाना है। इनकी निशानदेही वगैरह हो चुकी है। नगर निगम की तरफ से 85 वार्डों की डिजिटल मैपिंग करके केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। इसमें 139 स्कवेयर किलोमीटर एरिया में जनगणना की जाएगी। स्टाफ को डिजीटल ट्रेनिंग दी जाएगी। कर्मियों के 33 सवाल के जवाब देने होंगे लोगों को जनगणना के दौरान कर्मचारी हर घर में जाकर 33 सवाल पूछेगा। जिसमें घर का नंबर, मकान के फर्श, छत, दीवार में इस्तेमाल की गई सामग्री, मकान की हालत, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, परिवार में रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, मकान के स्वामित्व की स्थिति, परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरे, दंपतियों की संख्या, परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति या अन्य से संबंधित है। पेयजल का मुख्य स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, रसोई और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईधन, रेडियो-टीवी, इंटरनेट सुविधा, लैपटाप-कंप्यूटर, कार-जीप-वैन, साइकिल-मोटरसाइकिल, परिवार द्वारा उपयोग किया जाने वाला मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर वगैरह से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। इससे देश के लोगों की आर्थिक स्थिति तय की जाती है।

एमपी में डिजिटल जनगणना की तैयारी, 3 जिलों में प्री टेस्ट और ऐप लॉन्च जल्द

 भोपाल  पिछल कई सालों से देश में जनगणना को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन अब इसकी पूरी तरह से तैयारियां शुरू हो गई है. इस बार साल 2026-27 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी. इसके लिए जनगणना निदेशालय की तरफ से एक ऐप को लॉन्च किया जाएगा, जो कि एंड्राइड-आईफोन दोनों में उपयोग किया जा सकता है. इस ऐप के माध्यम से हर घर का मुखिया ही अपने घर-परिवार की जानकारी खुद भरेगा. इसके बाद जनगणना अधिकारी, घर-घर जाकर पूरी जानकारी को क्रॉस चेक करेगा, फिर उसे डिजिटल फॉर्म पर डाटा को अपलोड किया जाएगा.  भारत 2027 में अपनी अब तक की सबसे आधुनिक और डिजिटल जनगणना आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा जब जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें लगभग 34 लाख गणनाकर्ता अपने स्वयं के स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप का उपयोग कर आंकड़े एकत्र करेंगे। यह पहल न केवल समयबद्ध और सटीक डेटा एकत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि तकनीक-संचालित प्रशासन की नई मिसाल भी होगी। मोबाइल ऐप्स और स्व-गणना की सुविधा गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) द्वारा तैयार की जा रही मोबाइल एप्लिकेशन, एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और इसे अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपयोग किया जा सकेगा। यदि किसी कारणवश डेटा कागज़ पर एकत्र किया जाता है, तो उसे बाद में एक वेब पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा जिससे अलग से स्कैनिंग या डेटा एंट्री की आवश्यकता नहीं होगी। इस बार नागरिकों को स्वयं भी वेब पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प मिलेगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। जनगणना से पहले प्री टेस्ट मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना शुरू होने से पहले देशभर में प्री टेस्ट कराया जाएगा. इनमें मध्य प्रदेश के तीन जिलों को चुना गया है. जहां पर जनगणना से पहले प्री टेस्ट होगा, इनमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिले शामिल हैं. यहां पर अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच में 15 दिन का अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के माध्यम से जनगणना और घरों की गणना कि जाएगी. इसका सीधा मकसद यह है कि गड़बड़ी रोकने के लिए किया जाएगा.  दो चरणों में होगा आयोजन जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:     हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन (अप्रैल से सितंबर 2026): इसमें आवास की स्थिति, सुविधाएं और घरों के पास उपलब्ध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।     जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): भारत के अधिकांश हिस्सों में फरवरी 2027 में यह चरण आरंभ होगा, जबकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह सितंबर 2026 में होगा। पहली बार होगा जाति-आधारित डेटा संग्रहण इस जनगणना में एक और उल्लेखनीय पहल की जा रही है — घर के सदस्यों की जातियों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। यह कदम सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगा, जो दशकों से लंबित मांग रही है। खबर से जुड़े जीके तथ्य     2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।     34 लाख गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन से मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे।     पहली बार सभी भवनों का जियो-टैगिंग किया जाएगा, जिसमें जीआईएस मैप पर भवनों को उनके हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) के साथ जोड़ दिया जाएगा।     RGI ने ₹14,618.95 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। पारदर्शिता और निगरानी के लिए वेबसाइट पूरे अभियान की रीयल-टाइम निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। इससे प्रत्येक स्तर पर कार्य की प्रगति का निरीक्षण संभव होगा और पारदर्शिता बनी रहेगी। जनगणना 2027 भारत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलाव का प्रतीक बनने जा रही है। न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि नीति निर्माण और योजना निर्धारण के लिए समयबद्ध और व्यापक जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। यह डिजिटल युग में भारत के प्रशासनिक दृष्टिकोण का एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। ऐसे की जाएगी जनगणना मध्य प्रदेश जनगणना निदेशालय की निदेशक भावना वालिम्बे ने जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना के लिए एप के माध्यम से हर परिवार के सदस्यों की जानकारी अपलोड करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए प्रश्नावली भी तैयारी की जा रही है, जिसमें सी सदस्यों का नाम, पारिवारिक स्थिति, घर संपत्ति का ब्योरा और रोजगार जैसी जानकारी शामिल की जाएगी. इसके अलवा, इसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए क्रॉस चेक करने के लिए अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी की जांच करेंगे. इसके साथ-साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट प्रदेश का जनगणना निदेशालय तैयार करेगा. इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी. मंत्रालय इस आधार पर फाइनल जनगणना शीट तैयार की जाएगी.