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डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: 9 जिलों के 10 शहरों में नक्शा प्रोजेक्ट का शुभारंभ

उज्जैन  प्रदेश में शहर की जमीनों का रिकॉर्ड अब डिजिटल किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग द्वारा 'नक्शा' (National Geospatial Knowledge based Land Survey of Urban Habitation) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।  प्रोजेक्ट की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रायसेन जिले से की थी। इसमें प्रदेश के 9 जिलों के 10 शहरों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इनमें उज्जैन जिले से उन्हेल शामिल हैं। वहीं शाहगंज, छनेरा, आलीराजपुर, देपालपुर, धारकोठी, मेघनगर, माखननगर (बाबई), विदिशा और सांची कस्बा है। उन्हेल कस्बे के लिए आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई है। इसमें वर्णित क्षेत्र भू-सर्वेक्षण के अधीन अधिसूचित किए गए हैं। इस आधार पर कलेक्टर द्वारा प्रारूप (नियम 14) में सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की घोषणा की गई है। इसके बाद कस्बा उन्हेल में नक्शा प्रोजेक्ट के तहत कार्य प्रचलित है। भू-सर्वेक्षण के दौरान नवीन अधिकार अभिलेख तैयार किया जाएगा। इसमें सभी खातेदारों के नाम, उनके अंश, दायित्व तथा सुखाचार अधिकार अभिलिखित किए जाएंगे। ग्रामों के लिए निस्तार पत्रक तथा वाजिब-उल-अर्ज भी तैयार किया जाएगा। 413 शहरों में नक्शे और संपत्तियों की झंझटें खत्म जमीनों, मकानों के नक्शे, संपत्तियों में आनेवाली झंझटें खत्म कर दी गई हैं। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी रिकॉर्ड, संपत्तियों का प्रबंधन और विकास योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली यानि GIS सर्वे और मानचित्रण का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रदेश के 413 शहरों में यह काम पूरा कर लिया गया है। जीआइएस सर्वे के तहत ड्रोन सहित विभिन्न तकनीकों के इस्तेमाल से जमीनी सर्वेक्षण किया गया और डिजिटल मानचित्र बनाए गए हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि नगरीय निकायों की कार्य दक्षता में भी वृद्धि होगी। GIS सर्वे से संपत्ति के मालिक, कर प्रणाली और भूमि उपयोग की जानकारी एक क्लिक से मिल सकेगी। इससे जहां पारदर्शिता में वृद्धि होगी वहीं जमीन से संबंधित लेनदेन भी सरल हो गया है। GIS डेटा के इस्तेमाल से शहरी नियोजन और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।  

शिक्षा में डिजिटल क्रांति- 1100 विद्यालयों को मिलेगी स्मार्ट टीवी की सौगात

  बिल्हा के 25 स्कूलों में स्मार्ट टीवी वितरण, डिजिटल एवं ई-क्लास को मिलेगा बढ़ावा    रायपुर, शासकीय विद्यालयों में विशेष कर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा को बढ़ावा देने एवं उसे रुचि कर बनानें के उद्देश्य से जन सहयोग के माध्यम से जिले के लगभग 1100 विद्यालयों में स्मार्ट टी०व्ही उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा में डिजिटल क्रांति के तहत बिलासपुर जिले के विकासखण्ड बिल्हा के 25 स्कूलों में स्मार्ट टीवी वितरण किया गया, जिससे बच्चे मनोरंजक ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकेगें।            बिल्हा विकासखण्ड में 50 स्मार्ट टी०व्ही श्री नरेश अग्रवाल प्रबंधक मंगल पावर एवं इस्पात बिल्हा के द्वारा प्रदान किया गया है, जिसके प्रथम चरण में आज 25 स्मार्ट टी०व्ही विद्यालयों को प्रदान किया गया है। इस प्रकार शेष विद्यालयों को शीघ्र ही स्मार्ट टी०व्ही० उपलब्ध कराया जायेगा। शिक्षा को बढ़ावा देने एवं उसे बच्चों में रुचि कर बनानें के उद्देश्य से जन सहयोग के माध्यम से जिले  मार्ट टी०व्ही सेट उपलब्ध्ण कराया जा रहा है। बच्चों को डिजिटल एवं ई-क्लास के माध्यम से रुचिकर कर शिक्षा प्रदान की जायेगी, जिससे बच्चों का विद्यालय ओर अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ेगी।           सम्पर्क फॉउडेशन नई दिल्ली द्वारा लगभग 1100 विद्यालयों को निःशुल्क सम्पर्क टी०व्ही डिवाईस भी उपलब्ध कराया जा रहा हैं, जिसके माध्यम से बच्चे मनोरंजक ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकेगें। इस कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत बिलासपुर,  कमिश्नर नगर निगम बिलासपुर प्रबंधक मंगल पावर एवं इस्पात बिल्हा, डी०एम०सी० समग्र शिक्षा बिलासपुर सहित अधिकारी उपस्थित रहे ।            ज्ञातव्य है कि इसके पूर्व 7 अक्टूबर को प्रथम चरण में नगर पालिक निगम बिलासपुर द्वारा शहरी क्षेत्र के 31 शासकीय प्राथमिक शालाओं को स्मार्ट टी०व्ही० का वितरण किया गया।  कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल की पहल से जन सहयोग द्वारा विद्यालयों को लगातार स्मार्ट टी० व्ही० उपलब्ध लगातार कराया जा रहा है। बच्चों को डिजिटल एवं ई-क्लास के माध्यम से रुचिकर कर शिक्षा प्रदान की जायेगी जिससे बच्चों का विद्यालय के प्रति रुचि बढ़ेगी।

गांवों में नई तकनीक की बयार: पंजाब सरकार बनाएगी आधुनिक पंचायत घर और सेवा केंद्र

पंजाब  रंगला पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है. 125 करोड़ की लागत से 500 नए आधुनिक पंचायत घर और कॉमन सर्विस सेंटर (आम सेवा केंद्र) बनाने की घोषणा की गई है. यह सिर्फ ईंटों और सीमेंट की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये गांवों की तकदीर बदलने की नींव हैं. ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने जानकारी देते हुए कहा कि 2,800 से अधिक आबादी वाले प्रत्येक गांव में एक पंचायत घर और एक सामान्य सेवा केंद्र होगा, जो बैठकों और डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी के लिए बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करेगा. सीएम भगवंत मान ने इससे पहले फतेहगढ़ साहिब से इस परियोजना का शुभारंभ किया था. उन्होंने आशा व्यक्त की कि पंचायत घर पंचायतों को एक साथ आने और अपने गांवों की बेहतरी के लिए सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान करेंगे.   रंगला पंजाब के वादे को पूरा करने की दिशा में मील पत्थर डिजिटल बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने कहा कि सामान्य सेवा केंद्र ग्रामीण नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट और कई अन्य सेवाओं को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. एक पंचायत घर के निर्माण की लागत 20 लाख रुपये होगी, जबकि एक सामान्य सेवा केंद्र 5 लाख रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह परियोजना सिर्फ सुविधाओं की बात नहीं करती, बल्कि यह गांवों के आत्म-सम्मान को भी बढ़ाती है. यह गांवों को ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. मान सरकार का यह फैसला ‘रंगला पंजाब’ के वादे को पूरा करने की दिशा में एक और मील पत्थर है. गांव में पंचायतों के पास एक सम्मानजनक और आधुनिक जगह हो, जहां वे बैठकर गांव के विकास के लिए योजनाएं बना सकें. यह गांवों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा. यह पंजाब के गांवों के लिए एक नई उम्मीद और गौरव का प्रतीक है.   गांवों में आएगी डिजिटल क्रांति इन नए पंचायत घरों के साथ-साथ ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (आम सेवा केंद्र) भी बनाए जा रहे हैं. ये केंद्र गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और अन्य ऑनलाइन सुविधाओं को सुलभ बनाएंगे. ये केंद्र ग्रामीणों को शहरों के बराबर सुविधाएं देंगे. यह कदम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच के डिजिटल अंतर को कम करेगा. ये केंद्र गांवों में ही सारी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे. इससे गाँव के लोग आसानी से सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे और उनका जीवन सरल हो जाएगा. यह परियोजना सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह पंजाब को फिर से उसका गौरव लौटाने का सपना है. यह सपना है कि पंजाब का हर गाँव आत्म-निर्भर बने, हर गांव में आधुनिक सुविधाएं हों, और हर गाँव का व्यक्ति खुद को सशक्त महसूस करे.