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ट्रंप का 500% टैरिफ अगर लागू हुआ, तो अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, भारत पर क्या असर पड़ेगा?

नई दिल्ली  डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो रूस से तेल खरीदते हैं. पहली नजर में यह फैसला दूसरे देशों को दबाव में लाने जैसा लगता है, लेकिन व्यापार आंकड़े बताते हैं कि इसका बोझ अमेरिकी ग्राहकों पर ज्यादा पड़ सकता है. अमेरिका कई रोजमर्रा के सामान के लिए भारत जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में अगर अचानक भारी शुल्क लगा दिया गया, तो वहां के बाजार में सस्ते विकल्प मिलना आसान नहीं होगा. सितंबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने अमेरिका को ऐसे उत्पादों की आपूर्ति की, जिनकी कीमत 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी. यह उस महीने अमेरिका को किए गए भारत के कुल निर्यात का लगभग 6 प्रतिशत था. कई श्रेणियों में भारत की पकड़ इतनी मजबूत है कि हाई टैरिफ लगने पर कंपनियां तुरंत किसी दूसरे देश से समान गुणवत्ता और मात्रा में सामान नहीं मंगा पाएंगी. इसका सीधा असर अमेरिकी दुकानों में कीमत बढ़ने के रूप में दिख सकता है. घरेलू वस्त्र इसका बड़ा उदाहरण हैं. बिना छपी सूती बेडशीट के मामले में सितंबर में अमेरिका के कुल आयात का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भारत से आया, जिसकी कीमत करीब 66.9 मिलियन डॉलर थी. टेबल लिनन में तो भारत की हिस्सेदारी और भी ज्यादा, लगभग 81.5 प्रतिशत रही. पैकेजिंग सामग्री में इस्तेमाल होने वाले फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर में भी भारत ने करीब 69 प्रतिशत सप्लाई की. इतनी मजबूत हिस्सेदारी के कारण अमेरिका के लिए अचानक सप्लायर बदलना आसान नहीं होगा. तो रूस से यूरेनियम पर बात कौन करेगा? इस पूरे मसले में राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम है. पिछले हफ्ते अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप ने एक ऐसे बिल को हरी झंडी दी है, जिसमें रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर सख्त दंडात्मक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है. इस बिल के तहत ऐसे देशों से आने वाले सभी सामान और सेवाओं पर शुल्क काफी बढ़ाया जाएगा, ताकि उन्हें रूस से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया जा सके. विडंबना यह है कि खुद अमेरिका, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे बड़े देश भी 2024 में रूस से यूरेनियम के बड़े आयातक रहे हैं. इससे यह साफ होता है कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार नेटवर्क कितने जटिल और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. सिर्फ नियम बनाकर इन रिश्तों को तुरंत बदल देना आसान नहीं है. कपड़े और पैकेजिंग में भारत का लगभग एकाधिकार कपड़ा और पैकेजिंग के अलावा कुछ खास उत्पादों में तो भारत की स्थिति लगभग एकाधिकार जैसी है. सितंबर में अरंडी के तेल के आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 99 प्रतिशत थी. कुछ विशेष रसायनों और औद्योगिक इनपुट में भी भारत की पकड़ मजबूत बनी हुई है, जबकि अगस्त में अमेरिका ने इनमें से कुछ वस्तुओं पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था. खाद्य उत्पादों में भी भारत की भूमिका अहम है. तैयार या संरक्षित खीरे और घेरकिन्स के मामले में सितंबर में अमेरिका के आधे से ज्यादा आयात भारत से आए. एयरटाइट पैकिंग में आने वाले झींगे जैसे समुद्री उत्पादों में भी भारत की हिस्सेदारी लगभग 56 प्रतिशत रही. ऐसे उत्पादों की सप्लाई चेन पहले से सीमित देशों पर निर्भर होती है, इसलिए जल्दी बदलाव करना मुश्किल होता है. भारत के लिए कितना डर? हालांकि आंकड़े भारत के लिए चेतावनी भी देते हैं. हर क्षेत्र में भारत की पकड़ समान नहीं रही है और कुछ जगहों पर हिस्सेदारी घटती दिख रही है. विग बनाने में इस्तेमाल होने वाले बालों के उत्पादों में सितंबर में भारत की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत रही, जबकि साल के पहले सात महीनों में यह लगभग 76 प्रतिशत थी. इसी तरह सिंथेटिक या पुनर्निर्मित हीरों में भी सितंबर की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत रही, जो पहले लगभग 93 प्रतिशत तक थी. कुछ बड़े क्षेत्रों में गिरावट और तेज रही. हीरों के आयात में भारत की हिस्सेदारी सितंबर में घटकर करीब 22 प्रतिशत रह गई, जबकि पहले सात महीनों में यह लगभग 51 प्रतिशत थी. ग्रेनाइट में यह हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत से गिरकर 9 प्रतिशत तक आ गया. कुछ पत्थर से जुड़े उत्पादों में भी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से घटकर करीब 31 प्रतिशत रह गई. इससे संकेत मिलता है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत को अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए सतर्क रहना होगा.

क्या ईरान पर हमला करने वाला है अमेरिका?

वाशिंगटन. ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जो दिसंबर 2025 के अंत में आर्थिक कठिनाइयों से शुरू हुए थे। अब यह पूरे देश में फैल चुका है और इस्लामी गणराज्य के अंत की मांग करने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल ही में ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर ब्रिफिंग दी गई है। इन विकल्पों में तेहरान के चुनिंदा स्थानों, विशेष रूप से शासन की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े गैर-सैन्य ढांचों पर हमले शामिल हैं। हालांकि, अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रंप प्रशासन ईरानी अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य उपायों पर विचार कर रहा है। ईरानी शासन ने विरोध को दबाने के लिए देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लगाया है। सुरक्षा बलों की ओर से लाइव गोलीबारी और गिरफ्तारियों की खबरें आ रही हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान पहले कभी इतनी आजादी की ओर नहीं देख रहा था। अमेरिका मदद के लिए तैयार है!' मेक ईरान ग्रेट अगेन का दिया नारा रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए लिखा कि ईरानी लोगों का लंबा दुःस्वप्न जल्द खत्म होने वाला है। उन्होंने मेक ईरान ग्रेट अगेन का नारा देकर आयतुल्लाह शासन के खिलाफ मजबूत संकेत दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जीतेंगे और मदद रास्ते में हम हैं। मानवाधिकार संगठनों और इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 10 जनवरी को 15 प्रांतों में 60 विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें से कई मध्यम और बड़े स्तर के थे। प्रदर्शन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है, जिसमें युवा, छात्र और विभिन्न वर्ग शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को उन्मादी और अमेरिका-इजरायल के एजेंट करार दिया है।

“ट्रंप को जाना होगा…” मिनेसोटा में महिला की हत्या के बाद अमेरिका में उबाल, प्रदर्शन तेज

वाशिंगटन अमेरिका में एक महिला की हत्या ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों को भड़का दिया है. ट्रंप को जाना होगा…ICE हमारे राज्य से बाहर जाओ… जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और आव्रजन और सीमा शुल्क विभाग (ICE) को राज्य से बाहर करने की मांग कर रहे हैं. एक आईसीई अधिकारी ने मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में एक महिला की गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी जिसके बाद से ही पूरे राज्य के लोगों में भारी गुस्सा है. अमेरिकी महिला की हत्या राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच हुई है. 37 साल की रेनी निकोल गुड को सुबह करीब 10:30 बजे सेंट्रल टाइम पर 34वीं स्ट्रीट और पोर्टलैंड एवेन्यू के चौराहे के पास गोली मारी गई. तब वो अपने SUV में थीं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने महिला की मौत पर उसे ही दोष दिया. उन्होंने कहा कि महिला मौके पर मौजूद आईसीई एजेंट्स के काम में दखल दे रही थी जो कि उकसाने वाला था. नोएम ने मृत महिला को ही जिम्मेदार ठहराया ट्रंप के सख्त प्रवासन मुहिम की प्रमुख चेहरा मानी जाने वाली नोएम ने कहा कि जब अधिकारियों ने गुड से गाड़ी से बाहर निकलने को कहा तो उन्होंने उनकी बात नहीं मानी और जानबूझकर एसयूवी को 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करते हुए अधिकारी को टक्कर मारने की कोशिश की. उनके अनुसार, एजेंट ने आत्मरक्षा में उन पर तीन गोलियां चलाईं. नोएम ने बुधवार शाम पत्रकारों से कहा, 'यह बिल्कुल साफ है कि वो महिला अधिकारियों की कार्रवाई में बाधा डाल रही थी और अधिकारियों को परेशान कर रही थी. हमारे अधिकारी ने अपनी ट्रेनिंग के अनुसार काम किया, ठीक वही किया जो ऐसी स्थिति में उन्होंने करने के लिए सिखाया जाता है. अधिकारी ने खुद की और अपने साथी अधिकारियों की सुरक्षा में गोली चलाई.' आईसीई एजेंटों को यह ट्रेनिंग दी जाती है कि वे कभी भी किसी गाड़ी के सामने से पास न जाएं, चलती गाड़ी पर गोली न चलाएं और बल का प्रयोग केवल तभी करें जब गंभीर चोट या मौत का तत्काल खतरा हो. लेकिन मिनियापोलिस शहर के मेयर जैकब फ्रे ने आईसीई के उस बयान को 'बकवास' बताया है जिसमें कहा गया कि गोली आत्मरक्षा में चलाई गई. उन्होंने कहा कि आईसीई को शहर से फौरन बाहर निकाला जाना चाहिए.  हालांकि, क्रिस्टी नोएम ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, 'उन्हें नहीं पता कि वो किस बारे में बात कर रहे हैं.' महिला की हत्या को लेकर राज्य में उबाल मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने गुड की मौत को व्हाइट हाउस की 'लापरवाही' का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक शासित शहरों में संघीय अधिकारियों और सैनिकों की तैनाती के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई. वॉल्ज ने गुड की मौत के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की और कहा कि राज्य इस गोलीबारी में जवाबदेही तय करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा. शाम होते-होते घटनास्थल के पास सड़कों पर हजारों लोग जमा हो गए. 'ICE Not Welcome', 'Trump Must Go Now', 'Stop ICE Terror' जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर लोग ट्रंप और आईसीई के खिलाफ नारे लगाने लगे. कौन हैं रेनी गुड जो ICE अधिकारियों के गोली का शिकार हो गईं रेनी गुड सोशल मीडिया पर थीं जहां उन्होंने इंट्रो में खुद को एक 'कवयित्री, लेखिका, पत्नी और मां' बताया है. उन्होंने लिखा था कि वो मूल रूप से कोलोराडो की रहने वाली हैं, लेकिन इस समय मिनेसोटा में रह रही हैं. रेनी गुड की पहले एक व्यक्ति से शादी हुई थी, जिनसे उनका एक बच्चा है. उस बच्चे के दादा टिम्मी रे मैकलिन सीनियर ने मिनेसोटा स्टार ट्रिब्यून को बताया कि उनके बेटे और गुड का एक बच्चा है, जो अब छह साल का है. रेनी गुड के पिता टिम गैंगर ने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को बुधवार को पहले ही अपनी बेटी की मौत की सूचना दे दी गई थी और वो अभी भी इस जानकारी को समझने की कोशिश कर रहे हैं. 'द वॉशिंगटन पोस्ट' से बातचीत में गैंगर ने कहा कि रेनी गुड ने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय कोलोराडो में बिताया था जब उनके सैनिक पति जिंदा थे. करीब तीन साल पहले उनके पति की मौत हो गई जिसके बाद वो कुछ समय के लिए अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए कंसास के वैली फॉल्स चली गई थीं. गैंगर बताते हैं, 'उसकी जिंदगी अच्छी थी, लेकिन आसान नहीं थी. वो एक बेहतरीन इंसान थी.'  

टैरिफ पर ट्रंप का बड़ा बयान: ‘ये मेरा पांचवां पसंदीदा शब्द है’, फायदे गिनाकर किया अहम ऐलान

नॉर्थ कैरोलिना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कैरोलिना में अपने भाषण में एलान किया कि नए साल से अमेरिकी नागरिकों को इतिहास की सबसे बड़ी कर कटौती का लाभ मिलेगा। ट्रंप ने कहा कि इसमें टिप्स पर कर नहीं लगेगा, ओवरटाइम पर कर नहीं लगेगा और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सोशल सिक्योरिटी पर कर नहीं लगेगा। अमेरिका फिर से शक्तिशाली और समृद्ध बनेगा ट्रंप ने अपने भाषण में कहा चार साल के संकट और गिरावट के दौरान पूरी दुनिया हमारी हंसी उड़ाती रही। लेकिन अब हम अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरुआत कर रहे हैं। इसे 'अमेरिका का गोल्डन एज' कहा जाता है। पिछले 10 महीनों में हमारी सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, महंगाई रुक गई है, मजदूरी बढ़ी है और कीमतें कम हुई हैं। हमारा राष्ट्र मजबूत है, अमेरिका वापस आ गया है। राष्ट्रपति ने आगे कहा हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे और आपकी मदद से अमेरिका फिर से शक्तिशाली और समृद्ध बनेगा। हम अमेरिका को महान बनाएंगे। ट्रंप ने करों पर अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पहले उनका पसंदीदा शब्द 'टैरिफ' था, लेकिन अब यह उनका पांचवां पसंदीदा शब्द बन गया है। टैरिफ से मजदूरों और उद्योगों को सुरक्षा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिकी ऊर्जा के खिलाफ कट्टर वामपंथियों की मुहिम को खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘ग्रीन न्यू स्कैम’ को रद्द किया और 'ड्रिल, बेबी, ड्रिल' का आदेश जारी किया। ट्रंप के मुताबिक, इसके बाद पेट्रोल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा के लिए सरकार ने विदेशी कारों पर 25 प्रतिशत, विदेशी स्टील पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसके अलावा नॉर्थ कैरोलिना के फर्नीचर उद्योग को बचाने के लिए 25, 30 और 50 प्रतिशत तक टैरिफ लागू किए गए हैं।

ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ीं: पूर्व राष्ट्रपति को एक और कानूनी परेशानी

वॉशिंगटन  अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के लिए जारी फंड को तुरंत रोकना चाहता था। यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप सरकार कई विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है कि वे नस्लीय भेदभाव और यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को की जिला अदालत की जज रीटा लिन ने साफ कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय को न तो फंड में कटौती कर सकता है और न ही उस पर कोई त्वरित जुर्माना लागू कर सकता है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उन यूनियनों और संगठनों की याचिका पर भी सहमति जताई है, जो छात्रों, कर्मचारियों और फैकल्टी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन विरोधी आवाज़ों को दबाने के इरादे से कार्रवाई कर रहा है, जो अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है। क्या था ट्रंप प्रशासन का दावा? ट्रंप ने कई प्रतिष्ठित कॉलेजों को “उदारवादी और यहूदी-विरोधी विचारधारा से प्रभावित” बताते हुए दर्जनों विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करवाई थी। उनका कहना है कि विविधता और समावेशन के नाम पर श्वेत और एशियाई छात्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो नागरिक अधिकार कानून के खिलाफ है। 1.2 अरब डॉलर का जुर्माना और फंड पर रोक ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय पर 1.2 अरब डॉलर का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था और रिसर्च फंड पर रोक लगा दी थी। यही नहीं, कोलंबिया सहित कुछ निजी विश्वविद्यालयों के फेडरल फंड भी इसी तरह की कार्रवाई के तहत रोक दिए गए। यूसी अध्यक्ष जेम्स बी. मिलिकेन ने इस जुर्माने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इतना बड़ा दंड संस्था की बुनियाद को हिला देगा और उसके संचालन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कोर्ट का यह फैसला फिलहाल विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत देता है और ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसके तहत वह विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक और वैचारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

डोनाल्ड ट्रंप बोले, भारत-पाक संघर्ष में 8 विमान हुए ध्वस्त, 7 नहीं

मियामी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के अपने दावे को दोहराया है और युद्ध के दौरान गिराए गए लड़ाकू विमानों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ कर दी है. उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों ने मई में "शांति स्थापित" तभी की जब ट्रंप ने अपने व्यापार समझौते रद्द करने की धमकी दी थी. उन्होंने  मियामी में अमेरिका व्यापार मंच पर अपने बेतुके दावे को फिर दोहराया. अमेरिका बिजनेस फोरम पर उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मई वाली तनाव की कहानी दोहराई. लेकिन इस बार ट्विस्ट ये कि उन्होंने लड़ाई में गिराए गए फाइटर जेट्स की संख्या 7 से बढ़ाकर 8 करके लोगों को खूब जोश में अपनी बातें कहीं.  ट्रंप ने अपनी स्पीच में बड़े ही जोश के साथ बताया कि वो भारत-पाक के साथ ट्रेड डील पर बात कर रहे थे. अचानक अखबार में पढ़ा कि दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया. "मैंने सुना, 7 प्लेन शूट डाउन हो गए, और आठवां बुरी तरह घायल था. मतलब 8 प्लेन गिरे," ट्रंप ने कहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये दो न्यूक्लियर नेशन थे, इसलिए मैंने साफ कह दिया- "ट्रेड डील भूल जाओ जब तक शांति न हो." ट्रेड की धमकी ने कैसे बदला खेल? ट्रंप ने आगे बताया कि दोनों देशों ने कहा, "ये ट्रेड से जुड़ा नहीं." लेकिन मैंने साफ ललकारा, "ये सब कुछ से जुड़ा है. तुम न्यूक्लियर पावर हो, युद्ध में रहोगे तो कोई डील नहीं." अगले ही दिन फोन आया- "हम शांति कर चुके." ट्रंप ने तालियां बजवाते हुए कहा, "थैंक यू, अब ट्रेड करते हैं. बिना टैरिफ के ये कभी न होता." उन्होंने इसे अपनी 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' पॉलिसी का हिस्सा बताया. ट्रंप ने ये भी जोड़ा कि उनके दूसरे टर्म में 8 महीनों में 8 युद्ध रोके जिसमें कोसोवो-सेरबिया, कांगो-रवान्डा समेत. भारत-पाक को भी इसमें गिना. लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने कभी अमेरिकी दखल माना ही नहीं. भारत ने नकारा, ट्रंप फिर भी अलाप रहे राग भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का खंडन किया है और हमेशा कहा कि 10 मई को पाकिस्तानी कमांडरों द्वारा अपने भारतीय समकक्षों से आक्रमण रोकने की विनती करने के बाद युद्धविराम हुआ था. हालांकि, इसके बाद भी ट्रंप अपने अपने दावे को दोहराने से नहीं रुक रहे. वह मई से ही अपना दावा दोहरा रहे हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता में लंबी रात की बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हुए हैं. रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के अपने दावे को कम से कम 60 बार दोहराया है, जबकि भारत ने लगातार वाशिंगटन के किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया है. 

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ा संतुलन: चीन-अमेरिका सौदे से टैरिफ घटा, सोयाबीन और रेयर अर्थ मेटल का आदान-प्रदान तय

बीजिंग /वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की साउथ कोरिया में हुई बैठक में बड़े फैसले लिए गए हैं. इसमें टैरिफ के मुद्दे पर बात बनी, तो वहीं ट्रंप के लिए सिरदर्द बनी सोयाबीन की खरीद भी फिर से शुरू होने पर सहमति बनी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके बारे में बताते हुए कहा कि China Tariff को 10 फीसदी कम करते हुए 57% से 47% किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक शानदार रही है और इसमें कई बड़े फैसले लिए गए हैं. Soyabean पर भी इस दौरान चर्चा हुई और ट्रंप के मुताबिक चीन द्वारा सोयाबीन की खरीद तुरंत शुरू की जाएगी.  US-China संबंधों की नई शुरुआत Donald Trump ने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आर्थिक और व्यापारिक समझौतों को लेकर बड़ा ऐलान किया. इसमें उन्होंने चीन पर लागू टैरिफ में 10% की कटौती करते हुए इसे 57% से 47% किए जाने की जानकारी दी. तो वहीं दूसरी ओर कई अन्य विवादित मुद्दों पर चीन के साथ सहमति की बात कहते हुए इस बैठक अद्भुत करार दिया. उन्होंने कहा कि ये अमेरिका-चीन संबंधों में एक शानदार नई शुरुआत है.  साउथ कोरिया के बुसान शहर में Donald Trump-Xi Jinping के बीच करीब दो घंटे से अधिक समय तक बंद कमरे बातचीत हुई. इसके बाद ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि बैठक में बहुत सारे निर्णय लिए गए और बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों पर निष्कर्ष जल्द ही जारी किए जाएंगे. 'US में चीनी निर्यात में कोई बाधा नहीं…' रेयर अर्थ मिनरल्स, चिप समेत अन्य ऐसे मुद्दे, जो बीते कुछ समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बने थे, उन्हें भी सुलझाने का दावा ट्रंप की ओर से किया गया है.चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक में बनी सहमतियों के बारे में बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अब कोई भी रुकावट अमेरिका में चीनी निर्यात के प्रवाह में नहीं आएगी.  चिप से रेयर अर्थ मिनरल्स तक बनी बात डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बात पर सहमति बनी है कि चीन फेंटेनाइल को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेगा. उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर चर्चा हुई, चिप्स के मुद्दे पर जिनपिंग NVIDIA और अन्य कंपनियों से चर्चा करेंगे. इसके अलावा ट्रंप के साथ मौजूद अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर मुद्दा तय हो गया है और चीन दुर्लभ खनिजों के निर्यात को जारी रखेगा. US-China Deal को लेकर आए इस अपडेट के बाद सप्लाई चेन से संबंधित चिंताएं कम हो सकती हैं. 'सोयाबीन खरीदारी हमारे किसानों की जीत' डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा अमेरिकी सोयाबीन की खरीद को तुरंत फिर से शुरू करने को लेकर कहा कि, 'यह हमारे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी जीत है. अब अमेरिका औऱ चीन के व्यापारिक संबंध बहुत अलग नजर आने वाले हैं.' बता दें कि US Soyabean के लिए चीन सबसे बड़ा खरीदार रहा है. बीते साल अमेरिका ने करीब 24.5 अरब डॉलर मूल्य का सोयाबीन निर्यात किया था और इसमें से 12.5 अरब डॉलर मूल्य की सोयाबीन को अकेले चीन ने ही खरीदा था. हालांकि, टैरिफ टेंशन के चलते ड्रैगन ने इसकी खरीद रोककर अमेरिका को तगड़ा झटका दिया था.  दूसरी ओर चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स पर प्रतिबंध बढ़ाने के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी और भी बढ़ गई थी. China के इस कदम पर पलटवार करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान तक कर दिया था. हालांकि, अब दोनों के बीच इस तमाम मुद्दों को लेकर सहमति बन गई है.   

‘शांतिदूत’ ट्रंप को साउथ कोरिया ने पहनाया ताज, दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान

ग्योंगजू  दक्षिण कोरिया ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत सोने के मुकुट की एक रेप्लिका के साथ किया और उन्हें देश का सबसे बड़ा सम्मान, 'ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुंगवा' से सम्मानित किया। राष्ट्रपति कार्यालय ने यह जानकारी दी। अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई लड़ाकू विमानों ने एयर फोर्स वन को एस्कॉर्ट किया, और रनवे पर साउथ कोरियाई मिलिट्री बैंड ने ट्रंप का स्वागत 'वाईएमसीए' गाना बजाकर किया और बंदूकों से सलामी दी गई। ली के कार्यालय ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप पर 'शांतिदूत' के रूप में ट्रंप की भूमिका को देखते हुए, उन्हें 'ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुंगवा' से सम्मानित किया गया, जिसका नाम साउथ कोरिया के राष्ट्रीय फूल, एक गुलाबी हिबिस्कस के नाम पर रखा गया है, जिसे अंग्रेजी में रोज ऑफ शेरोन भी कहा जाता है। ट्रंप ने चमचमाता हुआ अवॉर्ड मिलने पर कहा, "मैं इसे अभी पहनना चाहता हूं।" एक साउथ कोरियाई अधिकारी ने कहा कि वह यह सम्मान पाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। ताज की बात करें तो, यह प्राचीन सिल्ला राजवंश के चोनमाचोंग सोने के मुकुट की प्रतिकृति है, जो ग्योंगजू नेशनल म्यूजियम में प्रदर्शित है। इस वंश के कुल छह मुकुट हैं। एपीईसी शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण कोरिया ने पहली बार इन छह सोने के मुकुटों को एक साथ एक प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया है। ये शाही शानो शौकत को दर्शाते हैं। सोने का उपयोग राजा और कुलीन वर्ग की उच्च सामाजिक स्थिति को दर्शाता था। कथित तौर पर ये मुकुट सिल्ला साम्राज्य में लगभग 5वीं से 7वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। इस बीच, बुधवार को राष्ट्रपति ली जे म्युंग और ट्रंप के बीच हुई बैठक में अटकी टैरिफ बातचीत एक समझौते पर पहुंच गई। यह उच्च स्तरीय बैठक ग्योंगजू, नॉर्थ ग्योंगसांग प्रांत में एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। प्रेसिडेंशियल चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी किम योंग-बीओम ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देशों ने 30 जुलाई को हुए व्यापार समझौते की विस्तृत शर्तों पर सहमति जताई थी, जिससे अब द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में नई स्थिरता का रास्ता साफ हो गया है।

ट्रंप का वार: हम जो बाइडेन नहीं हैं, इजरायल की हरकतें बर्दाश्त नहीं करेंगे

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को वेस्ट बैंक को लेकर स्पष्ट चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि इजरायल वेस्ट बैंक पर "कुछ नहीं करेगा"। यह बयान इजरायली संसद द्वारा वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों को हड़पने वाले दो विधेयकों पर प्रारंभिक मतदान के एक दिन बाद आया। इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इजरायल में ही थे। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि मौजूदा सरकार को पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरह न समझा जाए। इससे पहले ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, "वेस्ट बैंक को लेकर चिंता न करें। इजरायल बहुत अच्छे काम कर रहा है। वे वेस्ट बैंक को लेकर कुछ नहीं करेंगे।" ट्रंप ने पिछले महीने ही कहा था कि वे इजरायल को यह विवादास्पद कदम उठाने की अनुमति नहीं देंगे। मीडिया को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "यह नहीं होगा क्योंकि मैंने अरब देशों को अपना वादा दिया है। अगर ऐसा होता है, तो इजरायल को अमेरिका का पूरा समर्थन खोना पड़ेगा।" ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने धमकाया ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया, "इजरायली हमसे जो बाइडेन की तरह व्यवहार नहीं कर सकते।" अधिकारी ने गुमनाम रहने की शर्त पर कहा कि नेतन्याहू ने बाइडेन प्रशासन के दौरान अक्सर झगड़े किए थे, जो घरेलू राजनीतिक लाभ के लिए थे। यह टिप्पणी 2010 के ओबामा प्रशासन के दौरान उपराष्ट्रपति बाइडेन की इजरायल यात्रा के समय पूर्वी जेरूसलम में 1,600 आवास इकाइयों के निर्माण की घोषणा को भी याद दिलाती है, जिसने अमेरिका-इजरायल संबंधों में दरार पैदा की थी। रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर नेतन्याहू गाजा युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के समझौते को खतरे में डालते हैं, तो ट्रंप "उन्हें सबक सिखाएंगे"। अधिकारी ने कहा, "नेतन्याहू राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बहुत बारीक रेखा पर चल रहे हैं। अगर वे आगे बढ़े, तो गाजा समझौता बर्बाद हो जाएगा। और अगर समझौता बर्बाद होता है, तो डोनाल्ड ट्रंप उन्हें बर्बाद कर देंगे।" वेंस भी भड़के अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वेस्ट बैंक के विलय पर इजरायल की संसद में हुए मतदान की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम एक 'अपमान' है। वेंस ने इस सप्ताह अपनी इजरायल यात्रा के समापन पर प्रस्थान करने से पहले तेल अवीव के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कहा, ‘‘यदि यह मतदान एक 'राजनीतिक स्टंट' था, तो यह एक बहुत ही मूर्खतापूर्ण राजनीतिक स्टंट है।’’ वेंस ने इजरायल की संसद नेसेट में हुए मतदान को लेकर कहा, ‘‘ मैं व्यक्तिगत रूप से इसे अपमानजनक मानता हूं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीति यह है कि वेस्ट बैंक को इजरायल द्वारा नहीं हड़पा जाएगा।’’ इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो गुरुवार शाम को इजरायल पहुंचे और नेतन्याहू से जेरूसलम में मिले। दोनों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दो मिनट से कम समय के बयान दिए, वो भी बिना सवालों के। अरब और मुस्लिम देशों ने हड़पने की निंदा की दूसरी ओर, सऊदी अरब के नेतृत्व में दर्जन भर से अधिक अरब और मुस्लिम देशों ने संयुक्त बयान जारी कर वेस्ट बैंक हड़पने के मतों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे "अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन" बताया। बयान में कहा गया, "हम इजरायली संसद द्वारा वेस्ट बैंक पर कथित 'इजरायली संप्रभुता' थोपने वाले दो ड्राफ्ट कानूनों की मंजूरी की सबसे कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।" बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में जॉर्डन, मिस्र, कतर, कुवैत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, ओमान, फिलिस्तीनी अथॉरिटी, लीबिया, मलेशिया, नाइजीरिया आदि शामिल हैं। मिडिल ईस्ट मॉनिटर के अनुसार, फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि "हड़पने की कोशिशें अवैध और अमान्य हैं। वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी भूमि है, जो इतिहास, अंतरराष्ट्रीय कानून और 2024 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के सलाहकारी फैसले पर आधारित है।" नेतन्याहू के लिए वेस्ट बैंक हड़पना मुश्किल मुद्दा है। उनकी सरकार के कई गठबंधन सदस्य पश्चिमी शक्तियों द्वारा पिछले महीने फिलिस्तीन राष्ट्र की मान्यता के जवाब में हड़पने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, ऐसा करना ट्रंप की सऊदी-इजरायल सामान्यीकरण की आशाओं को झटका दे सकता है, जो अब्राहम समझौतों का अगला कदम माना जाता है।

रूसी तेल पर ट्रंप के आरोपों को भारत का जवाब – पहले देशहित, बाकी बाद में

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के रूसी तेल वाले दावे पर भारत का जवाब आ गया है. भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता भारत के लोग हैं और कुछ नहीं. ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का तेल आयात भारत के हितों की रक्षा के आधार पर तय होता है. भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भारत की प्राथमिकता है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इसी दावे पर विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है. ट्रंप के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘भारत तेल और गैस का एक प्रमुख आयातक देश है. अस्थिर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है. हमारी आयात नीतियां पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं. ऊर्जा की स्थिर कीमतें सुनिश्चित करना और आपूर्ति को सुरक्षित रखना हमारी ऊर्जा नीति के दो प्रमुख लक्ष्य रहे हैं. इसके तहत हमने अपने ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विविधीकरण किया है.’ अमेरिका संग संबंधों पर क्या कहा? विदेश मंत्रायल ने आगे भारत संग संबंधों पर कहा, ‘जहां तक अमेरिका का संबंध है, हम कई वर्षों से अपनी ऊर्जा खरीद को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. पिछले एक दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है. वर्तमान प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने में रुचि दिखाई है. इस विषय पर बातचीत जारी है.’ डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था?  डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया. एएनआई ने एक सवाल किया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को एक विश्वसनीय साझेदार मानते हैं? इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, बिल्कुल. वह (पीएम मोदी) मेरे मित्र हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. भारत रूस से तेल खरीद रहा है, इससे मैं खुश नहीं था. हालांकि, उन्होंने अब मुझे आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा.’ क्यों निराश हैं ट्रंप? ट्रंप यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने में अपनी असमर्थता के कारण निराश हैं. इस युद्ध की शुरुआत लगभग चार साल पहले रूस के आक्रमण से हुई थी. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति असंतोष व्यक्त किया है, जिन्हें वह सुलह की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते रहे हैं. ट्रंप का शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने का कार्यक्रम है. चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और ट्रंप ने इसके दंड के तौर पर अगस्त में भारत पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था.