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रुबियो और हेगसेथ के साथ अमेरिकी आर्मी बेस पर ड्रोन का खतरा, हड़कंप मचा

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है। दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे। सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की "सहनशक्ति" खत्म हो रही है। रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रिंस फैसल ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है। ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में 'तेल युद्ध', क़तर और UAE का काउंटर अटैक ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है. ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

ईरान में जंग के बीच पाकिस्तान ने भारत में भेजे ड्रोन

नई दिल्ली. ईरान में जारी इजरायली हमले के बीच जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि देखी गई। रविवार सुबह तड़के पुंछ के दिगवार सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश करते देखा गया। भारतीय सेना के मुस्तैद जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए ड्रोन को मार गिराने के लिए भारी गोलीबारी की, जिसके बाद वह वापस पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की ओर भाग गया। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा, रविवार सुबह करीब 6:10 बजे सीमा पर तैनात एक अग्रिम चौकी के जवानों ने आसमान में एक संदिग्ध उड़ती हुई वस्तु देखी। जैसे ही पुष्टि हुई कि यह सीमा पार से आया एक दुश्मन ड्रोन है, भारतीय जवानों ने उसे निशाना बनाते हुए एक दर्जन से अधिक राउंड फायरिंग की। जवानों की इस जवाबी कार्रवाई के बाद ड्रोन दिगवार इलाके में कुछ देर मंडराने के बाद वापस PoK की दिशा में लौट गया। 3 दिन में दूसरी घटना चिंता की बात यह है कि पिछले तीन दिनों के भीतर पुंछ सेक्टर में ड्रोन घुसपैठ की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 27 फरवरी को भी इसी तरह एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय क्षेत्र में देखा गया था, जिस पर सुरक्षाबलों ने गोलियां चलाई थीं। पाकिस्तान के द्वारा सीमा पार से ड्रोन का इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। ड्रोन के वापस लौटने के तुरंत बाद भारतीय सेना ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पूरे दिगवार और आसपास के जंगली इलाकों में एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। अधिकारियों को अंदेशा है कि ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद, नकदी या नशीले पदार्थों की खेप गिराई गई हो सकती है। सुरक्षाबल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इलाके में कोई भी संदिग्ध पैकेट न छूटा हो। आपको बता दें कि पुंछ और राजौरी जिलों में हाल के महीनों में ड्रोन की हलचल बढ़ी है, जिसे देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी एंटी-ड्रोन प्रणालियों और निगरानी तंत्र को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। वर्तमान में एलओसी पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।

मॉडर्न जेल के ऊपर तंबाकू और सिगरेट लेकर उड़ते ड्रोन को पत्थर मारकर गिराया

कपूरथला. पंजाब के कपूरथला में देर रात मॉडर्न जेल परिसर के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। हालांकि, जेल अधिकारियों ने ड्रोन को गिरा दिया। अगली सुबह सर्च करने पर एक सिक्योरिटी टावर के पास भूरे रंग का ड्रोन मिला, और उससे तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और एक लाइटर बरामद हुआ। पंजाब की जेल में ड्रोन से सामान पहुंचाने का यह पहला मामला है, जिससे जेल प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है। बेशक जेल प्रशासन की मुस्तैदी ने ड्रोन से सामान अंदर पहुंचाने के मंसूबे को नाकाम कर दिया है, लेकिन यह जेल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। एसपी जेल के अनुसार, ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अज्ञात के खिलाफ प्रीजन एक्ट, बीएनएस और एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। सुभानपुर रोड पर थेह कांजला स्थित मॉडर्न जेल कपूरथला के सहायक सुपरिटेंडेंट धीरज कुमार ने थाना कोतवाली की पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17/18 की दरमियानी रात को वह ड्यूटी पर तैनात थे। रात करीब 11:30 बजे गश्त के दौरान जेल की सीमा के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा। उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए ड्रोन को गिरा दिया। फिर जेल गार्ड के साथ मिलकर पूरे जेल परिसर की तलाशी शुरू कर दी, लेकिन अंधेरा होने के कारण ड्रोन नहीं मिला। अगली सुबह होने पर उन्होंने जेल गार्ड के साथ फिर से पूरे जेल परिसर की तलाशी ली शुरू कर दी। सुबह करीब आठ बजे सुरक्षा टावर नं.9 के पीछे बैरक नं.3 के पास मिनी 255 कंपनी का एक भूरे रंग का ड्रोन पड़ा मिला। उसके साथ टेप से कुछ सामान लिपटा हुआ था, जिसे खोलने पर उसमें से तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और पांच लाइटर बरामद हुए। एसपी जेल श्यामल ज्योति ने बताया कि ड्रोन के आपरेटिंग कंट्रोल का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि ड्रोन कहां से आया है। इसके अलावा उन्होंने जेल के अंदर चौकसी बढ़ा दी है। इस तरह की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

आधुनिक ड्रोन सिस्टम के साथ बीएसएफ का नया स्कूल, पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच शुरू

 डबरा  देश की सीमाओं की सुरक्षा अब आधुनिक ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित महिला जवानों के हाथों में होगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इस विशेष टीम को 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' नाम दिया है। इसके लिए देश का पहला 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में शुरू किया है, जहां महिला जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर का उद्घाटन 2 सितंबर 2025 को बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। यह भारत में बीएसएफ का अपनी तरह का पहला व्यवस्थित स्कूल है, जहां ड्रोन वॉरियर्स और ड्रोन कमांडो तैयार किए जाएंगे। पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच वर्तमान में, पंजाब फ्रंटियर की 30 महिला जवानों का पहला बैच 6 सप्ताह की ट्रेनिंग ले रहा है। इन्हें ड्रोन हमलों से निपटने, ड्रोन के माध्यम से हमला करने के टिप्स, ड्रोन उड़ाने, नियंत्रित करने और निगरानी मिशनों के लिए डेटा एकत्रित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्वालियर के डबरा स्थित बीएसएफ अकादमी ने ड्रोन ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें इन प्रशिक्षित महिला जवानों ने ड्रोन वॉर को लेकर डैमो दिया। इसमें लोकेशन का पता लगाना, हमला कर लौटना और कंट्रोल रूम से प्लान तैयार करना जैसे इवेंट शामिल थे। महिलाएं कमांड भूमिका का पालन अच्छी तरह करती हैं- डॉ. शमशेर सिंह बीएसएफ अकादमी के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह ने बताया कि महिला प्रहरियों को प्रशिक्षित करने के पीछे उनका यह मानना है कि महिलाओं में धैर्य, आत्मविश्वास, सटीक निशाना लगाने के साथ ही वे कमांड भूमिका का अच्छी तरह से पालन करती हैं। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि वर्तमान में युद्ध और बॉर्डर सुरक्षा में ड्रोन टेक्नोलॉजी के बिना काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, आने वाले दिनों में ड्रोन से निगरानी रखना, दुश्मन के ड्रोन को गिराना और ऑपरेशन लॉन्च करना आदि काम होंगे। प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक निदेशक ने बताया कि ड्रोन केवल हमला करने या निगरानी के लिए ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक होंगे, खासकर उन दुर्गम स्थानों पर जहां घायल जवान तक तुरंत पहुंचना संभव नहीं होता। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' की ये महिला जवान हर परिस्थिति में सीमाओं पर देश विरोधी दुश्मनों से निपटने के लिए तैयार रहेंगी।

जुमे की नमाज से पहले बरेली में सख्ती, शहर बना छावनी, इंटरनेट सेवा ठप

बरेली  उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं. जिले भर में इंटरनेट सेवाओं को 48 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है, जबकि पुलिस, पीएसी, आरएएफ और प्रशासनिक अधिकारियों की भारी तैनाती के साथ ड्रोन से निगरानी की जा रही है. यह कदम हाल की साम्प्रदायिक तनाव की घटनाओं और दशहरा उत्सव के मद्देनजर अफवाहों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है. गृह विभाग के एक आदेश के अनुसार, मोबाइल इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और एसएमएस सेवाएं 2 अक्टूबर दोपहर 3 बजे से 4 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक पूरी तरह निलंबित रहेंगी. यह फैसला बरेली के जिलाधिकारी अवनीश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सिफारिश पर लिया गया, ताकि सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहें शांति भंग न करें. बरेली के अलावा शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं जिलों में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है, जहां दशहरा की तैयारियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है. ड्रोन से भी निगरानी जिले को 250 जोन और सेक्टरों में विभाजित कर दिया गया है, जहां पुलिस, पीएसी और आरएएफ की टीमें तैनात हैं. सभी प्रमुख चौराहों, बाजारों और संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में जवान सतर्कता बरत रहे हैं. हवा में ड्रोन उड़ाकर निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से माहौल को बिगड़ने से पहले रोका जा सके.  मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी की शांति की अपील देर रात अपर पुलिस महानिदेशक रमेश शर्मा ने बरेली मंडल के कमिश्नर भूपेंद्र यश चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सड़कों पर फ्लैग मार्च का नेतृत्व किया. इस दौरान उन्होंने आम नागरिकों से बातचीत की और शांति बनाए रखने का आह्वान किया. अधिकारियों ने जिले के विभिन्न धार्मिक नेताओं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं से भी मुलाकात की. आला हजरत संघ ने भी अपील जारी कर कहा है कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से अदा की जाए और उसके बाद तुरंत घर लौटा जाए. सलमान हसन खान, जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने इमामों से फ्राइडे की खुतबे में सद्भाव की दुआओं का आग्रह किया है. अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील हाल ही में ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद से उपजी हिंसा के बाद बरेली में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते 27 सितंबर को भी 48 घंटे के लिए इंटरनेट बंदी लागू की गई थी. प्रशासन का मानना है कि ये उपाय किसी भी प्रकार की उकसावे वाली घटना को रोकने में सहायक सिद्ध होंगे. जिलाधिकारी अवनीश सिंह ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है.