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अमृतसर एयरपोर्ट पर ड्रोन से अलर्ट, सुरक्षा कारणों से कई उड़ानों का बदला गया रूट

अमृतसर. श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार देर रात एयरपोर्ट और उसके आसपास आसमान में अत्यधिक ऊंचाई पर दो से तीन संदिग्ध ड्रोन उड़ते दिखाई दिए। सुरक्षा के मद्देनजर रनवे ऑपरेशंस रोक दिए गए और अमृतसर आ रही तीन फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा। स्थिति की समीक्षा के बाद रात करीब सवा दस बजे हवाई सेवाएं बहाल कर दी गईं। जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 9:30 बजे एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने एयरपोर्ट परिसर और बाहर के आसमान में दो से तीन अज्ञात वस्तुओं को संदिग्ध हालात में उड़ते देखा। जवानों ने तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी। सुरक्षा समीक्षा के बाद रात 10:15 बजे के आसपास एयरपोर्ट का संचालन सामान्य कर दिया गया। गौरतलब कि इससे पहले अगस्त महीने में भी इसी तरह ड्रोन एक्टिविटी हुई थी। उस वक्त भी कुछ उड़ानें प्रभावित हुई थी। ये उड़ानें हुईं डायवर्ट – एहतियातन रात 9:32 बजे अमृतसर आ रही तीन उड़ानों का रूट बदल दिया गया मलेशिया एयरलाइंस (MH-118) : कुआलालंपुर से अमृतसर-दिल्ली डायवर्ट इंडिगो (6E-5028) : मुंबई से अमृतसर-चंडीगढ़ डायवर्ट एयर इंडिया (AI-855) : दिल्ली से अमृतसर-वापस दिल्ली डायवर्ट

500 ड्रोन से सजेगा मोहाली का आसमान, गुरु रविदास की जीवन गाथा होगी प्रदर्शित

मोहाली. मोहाली में 29 सितंबर की शाम आसमान रोशनी से जगमगाएगा। गुरु रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित विशेष कार्यक्रम के तहत सेक्टर-79 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के सामने दशहरा ग्राउंड में करीब 500 ड्रोन एक साथ आसमान में उड़ान भरेंगे। शाम 6:30 बजे शुरू होने वाले इस ड्रोन शो में रोशनी और तकनीक के माध्यम से गुरु रविदास के जीवन, बाणी और उनकी शिक्षाओं को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। शो को खास बनाने के लिए ड्रोन के माध्यम से आसमान में अलग-अलग आकृतियां और दृश्य तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गुरु रविदास के समानता, भाईचारे और सांझीवालता के संदेश को लोगों तक आकर्षक तरीके से पहुंचाना है। जिला प्रशासन के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों और संगत के पहुंचने की संभावना को देख आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और पार्किंग समेत अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारियां डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल ने आयोजन की तैयारियों को लेकर संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने, यातायात संचालन और पार्किंग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम मोहाली दमनदीप कौर को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पीने के पानी, लंगर, बैठने की व्यवस्था, मेडिकल टीम, सफाई और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है। विधायक कुलवंत सिंह ने मोहालीवासियों से परिवार और बच्चों सहित ड्रोन शो देखने पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति गुरु रविदास के जीवन और मानवता को दिए गए संदेशों को याद करने का विशेष अवसर होगी।

MQ-20 Avenger: बिना पायलट दुश्मन इलाके में घुसेगा अमेरिकी ड्रोन फाइटर

न्यूयॉर्क MQ-20 एवेंजर जनरल एटॉमिक्स द्वारा विकसित जेट इंजन वाला बिना पायलट वाला फाइटर जेट है. यह विमान 741 km/hr की गति से उड़ सकता है. 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है. करीब 20 घंटे हवा में रह सकता है. अमेरिकी नौसेना ने इसे अपने भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के रूप में नहीं चुना है।    बल्कि यह ऑटोनॉमस, मिशन प्लानिंग और कमांड-कंट्रोल सिस्टम के विकास के लिए टेस्ट एयरक्राफ्ट यानी सरोगेट के रूप में काम कर रहा है. जनरल एटॉमिक्स के अनुसार यह भूमिका पिछले पांच साल से ज्यादा समय से निभा रहा है, भले ही नए खास बनाए गए डेमोंस्ट्रेटर विमान आ चुके हों।  10 सितंबर को हुए ग्रे फ्लैग 2026 प्रदर्शन में अमेरिकी नौसेना की स्ट्राइक प्लानिंग एंड एग्जिक्यूशन सिस्टम्स टीम ने एक पूरा मिशन तैयार किया, उसे MQ-20 को भेजा और बाद में परिणामों की समीक्षा की. यह सिर्फ बिना पायलट के उड़ान भरने का परीक्षण नहीं था. असल चुनौती यह है कि कमांडर ऑटोनॉमस विमानों को बड़े युद्ध योजना का हिस्सा कैसे बनाएं।  सीएएमपी तकनीक क्यों खास है? इस परीक्षण का मुख्य आधार कोलैबोरेटिव ऑटोनॉमी मिशन प्लानिंग यानी CAMP है. सीएएमपी योजना को अलग-अलग विमान के लिए लागू करने की भूमिका, कार्य, समय, अधिकार और सीमाओं में बदल देता है. ऑटोनॉमस सिस्टम को पता चल जाता है कि उसे क्या हासिल करना है और किन सीमाओं के अंदर रहना है।  अगर हर ऑटोनॉमस विमान के लिए लगातार एक ऑपरेटर उड़ान पथ नियंत्रित करे तो ज्यादा विमान तैनात करने पर कंट्रोलर, ग्राउंड स्टेशन और संचार क्षमता भी उतनी ही बढ़ानी पड़ेगी. इससे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की उपयोगिता सीमित हो जाती है. सीएएमपी एक अलग मॉडल पेश करता है।  ऑपरेटर मिशन के उद्देश्य, समय, अधिकार और पाबंदियां तय करते हैं. बाकी ऑटोनॉमस विमान खुद संभालता है. इससे ऑपरेटर का बोझ कम होता है और भविष्य में कई कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को आसानी से शामिल किया जा सकता है।  बिगड़े संचार माहौल में भी काम करने की क्षमता यह क्षमता विरोधी के जैमिंग या सैटेलाइट संचार बाधित होने पर भी महत्वपूर्ण है. अगर विमान को पहले से अपना मिशन, समय, इलाका और सीमाएं पता हों तो वह सीधा कंट्रोल टूटने पर अपना काम जारी रख सकता है।  पहले नवंबर 2024 में अमेरिकी नौसेना ने पैटक्सेंट रिवर से कैलिफोर्निया में उड़ रहे MQ-20 को लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिए नियंत्रित किया था. वह लंबी दूरी के कमांड-कंट्रोल का परीक्षण था. ग्रे फ्लैग 2026 मिशन स्तर की ऑटोनॉमस की ओर बढ़ता है।  MQ-20 परिपक्व जेट पावर्ड प्लेटफॉर्म है. इस पर नए सॉफ्टवेयर, ऑटोनॉमस फंक्शन और संचार आर्किटेक्चर का परीक्षण आसानी से हो सकता है. इसकी गति, उड़ान अवधि और मिशन सिस्टम असल युद्ध विमान के करीब हैं. जनवरी 2026 में जनरल एटॉमिक्स ने बताया कि एवेंजर ने सरकारी रेफरेंस ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर के साथ क्रूड एग्रेसर विमान के खिलाफ लाइव ऑटोनॉमस इंटरसेप्ट भी किया।  ऑनबोर्ड सेंसर से खुद से फैसले लिए. इससे भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर विकसित करने में मदद मिल रही है. सीएएमपी की असली ताकत इंटरऑपरेबिलिटी में है. भविष्य में ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य सिस्टम एक नेटवर्क में जुड़ेंगे. यह ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य नेटवर्क्ड सिस्टम को एक ही मिशन उद्देश्य के इर्द-गिर्द कॉर्डिनेट करने में मदद कर सकता है। 

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, भोपाल में ड्रोन कैमरों से हो रही लाइव मॉनिटरिंग

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप पर नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए ड्रोन-माउंटेड कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस हाई-टेक मुहिम की शुरुआत सोमवार से औपचारिक रूप से कर दी गई है। सबसे ज्यादा फोकस एमपी नगर और वीआईपी रोड जैसे भारी ट्रैफिक वाले और संकरे रास्तों पर किया जा रहा है। इन इलाकों में भी बढ़ाई गई चौकसी ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, शहर की करीब एक-तिहाई सड़कें केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण जाम रहती हैं। इसी को देखते हुए ड्रोन सर्विलांस का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब एमपी नगर और वीआईपी रोड के अलावा बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ हिस्सों पर भी ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पहले इन ड्रोन का इस्तेमाल केवल दुर्घटना स्थलों के दस्तावेज़ीकरण के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका उपयोग सीधे नियम तोड़ने वालों की पहचान करने और उनके वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए ई-चालान जेनरेट करने के लिए हो रहा है। कंट्रोल रूम से हो रही है लाइव मॉनिटरिंग अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक महीने तक इसका कड़ा ट्रायल किया गया था। फिलहाल विभाग के पास दो हाई-टेक ड्रोन हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा रहा है। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है। इससे न सिर्फ नो-पार्किंग वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। साथ ही, ये ड्रोन क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को पहचानने में भी मदद करेंगे।

दसूहा रोड पर मिला ड्रोननुमा ऑब्जेक्ट, इलाके में दहशत; जांच में जुटी एजेंसियां

 होशियारपुर होशियारपुर-दसूहा रोड स्थित गांव सतौर के बाहरी क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब खेतों में छोटे हवाई जहाज के आकार की एक संदिग्ध वस्तु पड़ी हुई दिखाई दी। दूर से यह वस्तु ड्रोन जैसी प्रतीत हो रही थी, जिसके चलते इलाके के लोगों में चिंता का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार खेतों की ओर गए कुछ ग्रामीणों ने इस वस्तु को देखा और तुरंत इसकी सूचना गांव की सरपंच कुलदीप कौर तथा समिति सदस्य परमजीत सिंह को दी। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया, जिसके उपरांत पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आया कि यह हवाई जहाज के आकार का एक गर्म हवा वाला गुब्बारा था, जिस पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का संक्षिप्त नाम “पीआईए” लिखा हुआ था। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह गुब्बारा कहां से आया और क्या इसके जरिए कोई अन्य सामग्री भी इलाके में गिराई गई है। इस संबंध में पुलिस द्वारा आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है।

खेत में संदिग्ध ड्रोन मिलने से सनसनी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

दीनानगर/फिरोजपुर. दीनानगर विधानसभा क्षेत्र के तहत थाना दौरांगला के गांव वजीरपुर अफगाना में एक किसान के खेतों में एक छोटा ड्रोन मिला है। इस बारे में जानकारी देते हुए DSP दीनानगर राजिंदर मिन्हास ने बताया कि बॉर्डर के बिल्कुल पास बसे इस गांव के किसान हरजीत सिंह पुत्र राम सिंह जब अपने खेतों की तरफ घूमने गया तो उसने अपने खेत में एक छोटा ड्रोन पड़ा देखा तो इस दौरान हड़कंप मच गया। उसने तुरंत थाना दोरांगला पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर ड्रोन को जब्त कर लिया और जब पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो अभी तक किसी भी तरह की कोई संदिग्ध चीज बरामद नहीं हुई है, बाकी पूरे मामले की जांच जारी है। इसके पहले फिरोजपुर के नजदीकी गांव कोहाला में गेहूं की कटाई कर रहे किसान को अपने खेतों में एक ड्रोन और करीब सात किलो हेरोइन का पैकेट मिला। प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी के मुताबिक, जिस किसान के खेतों से यह बरामदगी हुई है, उसकी पहचान गुरजंट सिंह पुत्र थाना सिंह के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ड्रोन सहित हेरोइन के पैकेट को अपने कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह मामला सरहदी क्षेत्र से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जिसमें ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस द्वारा मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

रुबियो और हेगसेथ के साथ अमेरिकी आर्मी बेस पर ड्रोन का खतरा, हड़कंप मचा

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है। दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे। सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की "सहनशक्ति" खत्म हो रही है। रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रिंस फैसल ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है। ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में 'तेल युद्ध', क़तर और UAE का काउंटर अटैक ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है. ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

ईरान में जंग के बीच पाकिस्तान ने भारत में भेजे ड्रोन

नई दिल्ली. ईरान में जारी इजरायली हमले के बीच जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि देखी गई। रविवार सुबह तड़के पुंछ के दिगवार सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश करते देखा गया। भारतीय सेना के मुस्तैद जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए ड्रोन को मार गिराने के लिए भारी गोलीबारी की, जिसके बाद वह वापस पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की ओर भाग गया। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा, रविवार सुबह करीब 6:10 बजे सीमा पर तैनात एक अग्रिम चौकी के जवानों ने आसमान में एक संदिग्ध उड़ती हुई वस्तु देखी। जैसे ही पुष्टि हुई कि यह सीमा पार से आया एक दुश्मन ड्रोन है, भारतीय जवानों ने उसे निशाना बनाते हुए एक दर्जन से अधिक राउंड फायरिंग की। जवानों की इस जवाबी कार्रवाई के बाद ड्रोन दिगवार इलाके में कुछ देर मंडराने के बाद वापस PoK की दिशा में लौट गया। 3 दिन में दूसरी घटना चिंता की बात यह है कि पिछले तीन दिनों के भीतर पुंछ सेक्टर में ड्रोन घुसपैठ की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 27 फरवरी को भी इसी तरह एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय क्षेत्र में देखा गया था, जिस पर सुरक्षाबलों ने गोलियां चलाई थीं। पाकिस्तान के द्वारा सीमा पार से ड्रोन का इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। ड्रोन के वापस लौटने के तुरंत बाद भारतीय सेना ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पूरे दिगवार और आसपास के जंगली इलाकों में एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। अधिकारियों को अंदेशा है कि ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद, नकदी या नशीले पदार्थों की खेप गिराई गई हो सकती है। सुरक्षाबल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इलाके में कोई भी संदिग्ध पैकेट न छूटा हो। आपको बता दें कि पुंछ और राजौरी जिलों में हाल के महीनों में ड्रोन की हलचल बढ़ी है, जिसे देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी एंटी-ड्रोन प्रणालियों और निगरानी तंत्र को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। वर्तमान में एलओसी पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।

मॉडर्न जेल के ऊपर तंबाकू और सिगरेट लेकर उड़ते ड्रोन को पत्थर मारकर गिराया

कपूरथला. पंजाब के कपूरथला में देर रात मॉडर्न जेल परिसर के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। हालांकि, जेल अधिकारियों ने ड्रोन को गिरा दिया। अगली सुबह सर्च करने पर एक सिक्योरिटी टावर के पास भूरे रंग का ड्रोन मिला, और उससे तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और एक लाइटर बरामद हुआ। पंजाब की जेल में ड्रोन से सामान पहुंचाने का यह पहला मामला है, जिससे जेल प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है। बेशक जेल प्रशासन की मुस्तैदी ने ड्रोन से सामान अंदर पहुंचाने के मंसूबे को नाकाम कर दिया है, लेकिन यह जेल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। एसपी जेल के अनुसार, ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अज्ञात के खिलाफ प्रीजन एक्ट, बीएनएस और एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। सुभानपुर रोड पर थेह कांजला स्थित मॉडर्न जेल कपूरथला के सहायक सुपरिटेंडेंट धीरज कुमार ने थाना कोतवाली की पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17/18 की दरमियानी रात को वह ड्यूटी पर तैनात थे। रात करीब 11:30 बजे गश्त के दौरान जेल की सीमा के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा। उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए ड्रोन को गिरा दिया। फिर जेल गार्ड के साथ मिलकर पूरे जेल परिसर की तलाशी शुरू कर दी, लेकिन अंधेरा होने के कारण ड्रोन नहीं मिला। अगली सुबह होने पर उन्होंने जेल गार्ड के साथ फिर से पूरे जेल परिसर की तलाशी ली शुरू कर दी। सुबह करीब आठ बजे सुरक्षा टावर नं.9 के पीछे बैरक नं.3 के पास मिनी 255 कंपनी का एक भूरे रंग का ड्रोन पड़ा मिला। उसके साथ टेप से कुछ सामान लिपटा हुआ था, जिसे खोलने पर उसमें से तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और पांच लाइटर बरामद हुए। एसपी जेल श्यामल ज्योति ने बताया कि ड्रोन के आपरेटिंग कंट्रोल का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि ड्रोन कहां से आया है। इसके अलावा उन्होंने जेल के अंदर चौकसी बढ़ा दी है। इस तरह की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

आधुनिक ड्रोन सिस्टम के साथ बीएसएफ का नया स्कूल, पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच शुरू

 डबरा  देश की सीमाओं की सुरक्षा अब आधुनिक ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित महिला जवानों के हाथों में होगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इस विशेष टीम को 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' नाम दिया है। इसके लिए देश का पहला 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में शुरू किया है, जहां महिला जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर का उद्घाटन 2 सितंबर 2025 को बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। यह भारत में बीएसएफ का अपनी तरह का पहला व्यवस्थित स्कूल है, जहां ड्रोन वॉरियर्स और ड्रोन कमांडो तैयार किए जाएंगे। पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच वर्तमान में, पंजाब फ्रंटियर की 30 महिला जवानों का पहला बैच 6 सप्ताह की ट्रेनिंग ले रहा है। इन्हें ड्रोन हमलों से निपटने, ड्रोन के माध्यम से हमला करने के टिप्स, ड्रोन उड़ाने, नियंत्रित करने और निगरानी मिशनों के लिए डेटा एकत्रित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्वालियर के डबरा स्थित बीएसएफ अकादमी ने ड्रोन ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें इन प्रशिक्षित महिला जवानों ने ड्रोन वॉर को लेकर डैमो दिया। इसमें लोकेशन का पता लगाना, हमला कर लौटना और कंट्रोल रूम से प्लान तैयार करना जैसे इवेंट शामिल थे। महिलाएं कमांड भूमिका का पालन अच्छी तरह करती हैं- डॉ. शमशेर सिंह बीएसएफ अकादमी के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह ने बताया कि महिला प्रहरियों को प्रशिक्षित करने के पीछे उनका यह मानना है कि महिलाओं में धैर्य, आत्मविश्वास, सटीक निशाना लगाने के साथ ही वे कमांड भूमिका का अच्छी तरह से पालन करती हैं। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि वर्तमान में युद्ध और बॉर्डर सुरक्षा में ड्रोन टेक्नोलॉजी के बिना काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, आने वाले दिनों में ड्रोन से निगरानी रखना, दुश्मन के ड्रोन को गिराना और ऑपरेशन लॉन्च करना आदि काम होंगे। प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक निदेशक ने बताया कि ड्रोन केवल हमला करने या निगरानी के लिए ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक होंगे, खासकर उन दुर्गम स्थानों पर जहां घायल जवान तक तुरंत पहुंचना संभव नहीं होता। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' की ये महिला जवान हर परिस्थिति में सीमाओं पर देश विरोधी दुश्मनों से निपटने के लिए तैयार रहेंगी।