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सीमा पर बढ़ी सियासी गर्मी, ड्रोन अटैक के बाद अजरबैजान का सख्त कदम

बाकू अजरबैजान ने एयरपोर्ट और एक स्कूल के पास ड्रोन हमले में दो लोगों के घायल होने के बाद ईरानी दूत को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “एक ड्रोन ने नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग पर हमला किया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल बिल्डिंग के पास गिरा।” इसके साथ ही ईरान से अपील करते हुए कहा, “हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के इलाके से किए गए इन ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हैं, जिससे एयरपोर्ट की बिल्डिंग को नुकसान हुआ और दो आम लोग घायल हो गए।” मंत्रालय के अनुसार इस हमले से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। अजरबैजान ने ईरान से जल्द इस मामले को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। बाकू ने यह भी कहा कि अजरबैजान इस मामले में जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही ईरान के राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। ईरानी ड्रोन ने दोनों देशों की साझी सीमा के पास एक अजरबैजानी एयरपोर्ट पर हमला किया। यह पहली बार है जब तेहरान के खिलाफ यूएस-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने काकेशस के किसी राज्य को निशाना बनाया है। अजरबैजान, ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में न्यूट्रल रुख अपनाया है। इसने हाल ही में इजरायल और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए, जबकि धीरे-धीरे काकेशस में पारंपरिक सहयोगी रहे मास्को से दूरी बनाई। देश में कोई अमेरिकी मिलिट्री बेस नहीं है, जिससे पता चलता है कि ईरान सीधे अमेरिकी सेना से जुड़े टारगेट से आगे अपने हमलों को बढ़ा सकता है। इजरायल के साथ बाकू के बढ़ते सैन्य सहयोग ने तेहरान के साथ टकराव पैदा किया है, हालांकि दोनों पड़ोसियों ने काफी हद तक प्रैक्टिकल संबंध बनाए रखे हैं। दोनों देशों में बहुसंख्यक शिया मुस्लिम हैं, और ईरान लाखों अजेरी लोगों का घर है – अनुमान है कि यह संख्या लगभग डेढ़ से 2 करोड़ से भी अधिक है – जिनमें से कई अजरबैजान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं।

मिडिल-ईस्ट तनाव के बीच ओमान में बड़ा हमला, तेल टैंकर पर ड्रोन अटैक में भारतीय की जान गई

नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध में एक भारतीय व्यक्ति की मौत हो गई है। ओमान में सोमवार को मार्शल द्वीपों के झंडे वाले तेल टैंकर MKD VYOM पर बम से लैस ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह हमला मस्कट के तट से दूर हुआ। हमले के चलते जहाज में आग लग गई और इंजन रूम में विस्फोट हुआ। जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें 16 भारतीय शामिल थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के निकट हुआ, जो फारस की खाड़ी का पतला रास्ता है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए यह काफी अहम है। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ने बताया कि टैंकर पर लगभग 59,463 मीट्रिक टन कार्गो था और हमला मस्कट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर हुआ। यह घटना मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है। इजरायल और अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक आने वाले जहाजों को धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने कई हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल है। इस हमले को ईरान समर्थित ताकतों से जोड़ा जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी ने स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है। यह क्षेत्र पहले भी समुद्री हमलों का गवाह रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में भारत के व्यक्ति की मौत को अमेरिका-ईरान संघर्ष में पहली भारतीय हानि के रूप में देखा जा रहा है। ओमान ने हमले के बाद जहाज के चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं और तेल की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। यह हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करने वाला है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। ओमान जैसे तटवर्ती देशों को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर गंभीर असर पड़ सकता है।